शिक्षा मंत्रालय
azadi ka amrit mahotsav

डिग्री से आगे, जीवन की समझ जरुरी: प्रो. सत प्रकाश बंसल


प्रो. राज नेहरू की पुरस्तक मन से परे: चेतना के गहन आयामों की खोज का
विमोचन

प्रविष्टि तिथि: 06 OCT 2026 4:55PM by PIB Shimla
Press Release photo


धर्मशाला: हिमाचल प्रदेश केंद्रीय विश्वविद्यालय द्वारा भारतीय ज्ञान परम्परा को आत्मसार करने एवं बढाने की दिशा में धौलाधार परिसर–I स्थित सम्मेलन कक्ष में प्रो. राज नेहरू, ओएसडी टू चीफ मिनिस्टर, हरियाणा तथा पूर्व कुलपति, श्री विश्वकर्मा स्किल यूनिवर्सिटी, हरियाणा द्वारा लिखित पुस्तक “मन से परे: चेतना के गहन आयामों की खोज — (मैं शिव हूँ: आत्मबोध, जागरण एवं आत्म-परिवर्तन)” का विमोचन एवं इसी विषय पर एक दिवसीय संगोष्ठी का आयोजन किया गया।

विश्वविद्यालय के वाणिज्य विभाग द्वारा आयोजित इस संगोष्ठी की अध्यक्षता हिमाचल प्रदेश केंद्रीय विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. सत प्रकाश बंसल ने की। अपने अध्यक्षीय उद्बोधन में उन्होंने शिक्षा के व्यापक
उद्देश्य पर प्रकाश डालते हुए कहा कि विश्वविद्यालयों का कार्य केवल विद्यार्थियों को मैनेजर अथवा उद्यमी बनाना नहीं है, बल्कि एक अच्छा और जिम्मेदार इंसान बनाना भी होना चाहिए ।

प्रो. बंसल ने बताया की हिमाचल’प्रदेश केन्द्रीय विश्वविद्यालय ने भारतीय ज्ञान परम्परा को आगे ले जाने का जो ध्येय लिया है, यह कार्यक्रम उसी दिशा में एक प्रयास है । उन्होंने बताया की विश्वविद्यालय ने नयी शिक्षा निति-2020 में निहित मूल्यों के अनुसार अपने पाठ्यक्रमों के माध्यम से छात्रों के समग्र विकास एवं व्यक्तित्व निर्माण के लिए भारतीय ज्ञान परम्परा के विषय सम्मिलित किये हैं । प्रो. बंसल ने अपने अध्यक्षीय उद्वोधन के दौरान वताया की विद्यार्थियों में मानवीय गुणों के विकास हेतु इस पुस्तक को भी पाठ्क्रम में जोड़ा जायेगा ।

कुलपति प्रो. बंसल ने आधुनिक तकनीकी विकास के संदर्भ में मानवता की विशिष्ट भूमिका पर भी प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में कृत्रिम बुद्धिमत्ता तेजी से विकसित हो रही है, लेकिन मानवीय बुद्धिमत्ता, संवेदना, विवेक, नैतिकता और मानवीय मूल्यों का कोई विकल्प नहीं है। उन्होंने कहा कि तकनीक मानव जीवन को सुगम बना सकती है, लेकिन मानवता, संवेदनशीलता और सही-गलत का विवेक ही समाज को सही दिशा प्रदान करता है। इसलिए विद्यार्थियों को तकनीकी दक्षता के साथ-साथ मानवीय गुणों का विकास भी करना चाहिए।

कार्यक्रम के मुख्य अतिथि प्रो. राज नेहरू, ओएसडी टू चीफ मिनिस्टर, हरियाणा तथा पूर्व कुलपति, श्री विश्वकर्मा स्किल यूनिवर्सिटी, हरियाणा ने अपनी पुस्तक के लोकार्पण के अवसर पर पुस्तक के मूल विचारों एवं उसके विभिन्न आयामों पर विस्तार से चर्चा की। उन्होंने आत्मबोध, चेतना, जागरण तथा आत्म-परिवर्तन को व्यक्ति के समग्र विकास से जोड़ते हुए कहा कि मनुष्य की वास्तविक यात्रा बाहरी उपलब्धियों से आगे बढ़कर अपने भीतर की चेतना को समझने की यात्रा है।

प्रो. राज नेहरू ने चेतना, आत्मबोध और स्वयं की पहचान से जुड़े विचारों को भारतीय चिंतन की समृद्ध परंपरा के संदर्भ में समझाया। उन्होंने कश्मीर शैव दर्शन सहित भारतीय दार्शनिक परंपराओं के विभिन्न पक्षों का उल्लेख करते हुए बताया कि भारतीय ज्ञान परंपरा में मनुष्य के बाहरी विकास के साथ-साथ उसके आंतरिक विकास और आत्म-जागरण को भी अत्यंत महत्वपूर्ण माना गया है। उन्होंने कहा कि आधुनिक शिक्षा व्यवस्था में विद्यार्थियों को केवल करियर निर्माण तक सीमित करने के बजाय उन्हें स्वयं को जानने, अपनी क्षमताओं को पहचानने, अपने जीवन के उद्देश्य को समझने तथा समाज के प्रति अपनी जिम्मेदारियों का निर्वहन करने के लिए प्रेरित किया जाना चाहिए।

कार्यक्रम में विश्वकर्मा स्किल विश्वविद्यालय, पलवल, हरियाणा के कुलपति प्रो. दिनेश कुमार अग्रवाल विशिष्ट अतिथि के रूप में उपस्थित रहे। उन्होंने कहा कि शिक्षा का वास्तविक उद्देश्य केवल डिग्री प्राप्त करना अथवा रोजगार हासिल करना नहीं है, बल्कि ऐसी चेतना एवं संवेदनशीलता विकसित करना है, जिससे समाज और राष्ट्र के विकास में सार्थक योगदान दिया जा सकें। उनके अनुसार ज्ञान तभी सार्थक है, जब व्यक्ति के व्यवहार, दृष्टिकोण और सामाजिक उत्तरदायित्व में सकारात्मक परिवर्तन उत्पन्न हो।

कार्यक्रम में वाणिज्य एवं प्रबंधन शिक्षा के संदर्भ में भी मानवीय मूल्यों की आवश्यकता पर चर्चा की गई। वक्ताओं ने कहा कि वर्तमान समय में जब व्यवसाय, प्रबंधन और उद्यमिता तेजी से तकनीकी एवं डिजिटल स्वरूप ग्रहण कर रहे हैं, ऐसे समय में नैतिक नेतृत्व, सामाजिक उत्तरदायित्व और मानवीय दृष्टिकोण का महत्व और अधिक बढ़ जाता है। कार्यक्रम के अंत में वाणिज्य विभाग के विभागाध्यक्ष प्रो. चमन कश्यप द्वारा धन्यवाद ज्ञापन प्रस्तुत किया गया।

SS/RK


(रिलीज़ आईडी: 2319671) आगंतुक पटल : 4