कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय
कम वर्षा और बदलती जलवायु में काजरी की मोठ किस्में किसानों के लिए बनीं उम्मीद
प्रविष्टि तिथि:
06 OCT 2026 5:12PM by PIB Jaipur
केंद्रीय शुष्क क्षेत्र अनुसंधान संस्थान (काजरी), जोधपुर में फील्ड हार्वेस्ट डे एवं किसान–वैज्ञानिक संवाद कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम के दौरान एक बीघा क्षेत्र में मोठ की फसल की कटाई कर प्राप्त उपज का प्रत्यक्ष प्रदर्शन किया गया तथा किसानों को कम वर्षा,लंबे शुष्क अंतराल और बदलती जलवायु परिस्थितियों में मोठ की खेती की संभावनाओं से अवगत कराया गया। कार्यक्रम में काजरी के निदेशक डॉ. एच.एस. जाट, डॉ. आर.के. काकानी, डॉ. एच.आर. महला, डॉ. विपिन चौधरी सहित वैज्ञानिक एवं किसान उपस्थित रहे।
डॉ. एच.एस. जाट ने किसानों से संवाद करते हुए कहा कि बदलती जलवायु परिस्थितियों में कम पानी में उत्पादन देने वाली तथा पारिस्थितिक संतुलन बनाए रखने वाली फसल प्रणालियों को बढ़ावा देना आवश्यक है। उन्होंने बताया कि इस वर्ष क्षेत्र में लगभग 220 मिलीमीटर वर्षा हुई, जबकि पिछले पांच वर्षों में लगभग 500 मिलीमीटर तक वर्षा दर्ज की गई है। इस वर्ष लगभग 30-35 दिनों का शुष्क अंतराल भी रहा। ऐसी परिस्थितियों में मौसम पूर्वानुमान एवं फसल आधारित कृषि सलाह के अनुसार उपलब्ध नमी को ध्यान में रखते हुए फसल का चयन करना चाहिए। उन्होंने बाजरा,मोठ और ग्वार को वर्षा की स्थिति के अनुसार फसल प्रणाली में शामिल करने तथा फसल चक्र अपनाने पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि पशुपालक किसानों के लिए मोठ का पौष्टिक चारा भी उपयोगी है।
कार्यक्रम में काजरी मोठ-4, मोठ-5, मोठ-6 और मोठ-7 की जानकारी दी गई तथा मोठ-6 एवं मोठ-7 के खेत प्रदर्शन और कटाई का जीवंत प्रदर्शन किसानों को दिखाए गए। डॉ. एच.आर. महला, ने बताया कि काजरी की उन्नत मोठ किस्मों में देसी मोठ की तुलना में अपेक्षाकृत शीघ्र पुष्पन एवं कम अवधि में पकने की क्षमता है,जिससे बदलती वर्षा परिस्थितियों में इनका उपयोग महत्वपूर्ण हो जाता है। डॉ. आर.के. काकानी ने किसानों को पारंपरिक फसल प्रणाली के साथ उपयुक्त वैकल्पिक फसलों को अपनाने की सलाह दी, जिससे मौसम के जोखिम को कम करते हुए उत्पादन को बेहतर किया जा सके।
वैज्ञानिकों ने उचित किस्म चयन,खेत की तैयारी, नमी संरक्षण,समय पर बुवाई एवं फसल प्रबंधन पर चर्चा की। काजरी फार्म पर नमी संरक्षण एवं जल हानि को कम करने के उद्देश्य से कतार से कतार लगभग 1.5 फीट की दूरी पर भी प्रदर्शन किया गया। कार्यक्रम में किसानों तक सस्ता, गुणवत्तापूर्ण बीज और अधिक उपज देने वाली किस्में उपलब्ध कराने पर जोर दिया गया। सार्वजनिक-निजी सहभागिता के माध्यम से निजी कंपनियों के साथ समझौते एवं समझौता ज्ञापन कर बीज उत्पादन एवं व्यावसायीकरण को बढ़ावा देने के प्रयासों की जानकारी भी दी गई। कार्यक्रम के माध्यम से किसानों को शुष्क एवं अर्ध-शुष्क क्षेत्रों में कम वर्षा और बदलती जलवायु के अनुरूप मोठ को एक उपयोगी फसल विकल्प के रूप में अपनाने तथा वैज्ञानिक तकनीकों के माध्यम से बेहतर उत्पादन प्राप्त करने का संदेश दिया गया।



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(रिलीज़ आईडी: 2319681)
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