कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय
शुष्क एवं अर्ध-शुष्क क्षेत्रों की उभरती चुनौतियाँ: प्राथमिक अनुसंधान, नवाचार एवं विकास के नए अवसर
प्रविष्टि तिथि:
06 OCT 2026 5:15PM by PIB Jaipur
केंद्रीय शुष्क क्षेत्र अनुसंधान संस्थान (काजरी), जोधपुर में 5 अक्टूबर को “शुष्क एवं अर्ध-शुष्क क्षेत्रों में उभरती चुनौतियाँ, अनुसंधान प्राथमिकता क्षेत्र तथा अनुसंधान एवं नवाचार को सुदृढ़ करने के अवसर” विषय पर कृषि वैज्ञानिक चयन मंडल, नई दिल्ली के सदस्य डॉ. ओ.पी. यादव का व्याख्यान आयोजित किया गया। कार्यक्रम में शुष्क एवं अर्ध-शुष्क क्षेत्रों में जलवायु परिवर्तन, प्राकृतिक संसाधनों पर बढ़ते दबाव, नई तकनीकों की संभावनाओं तथा भविष्य की अनुसंधान प्राथमिकताओं पर विस्तार से विचार-विमर्श किया गया।
डॉ. यादव ने वैज्ञानिकों को संबोधित करते हुए कहा कि शुष्क क्षेत्र की कृषि को पारंपरिक समस्या-समाधान की सोच से आगे बढ़ाकर पूर्वानुमान आधारित, तकनीक-संचालित और जलवायु-स्मार्ट अनुसंधान की ओर ले जाने की आवश्यकता है। उन्होंने स्थान-विशिष्ट एवं जलवायु-सहिष्णु तकनीकों के विकास के साथ संसाधनों के अधिकतम एवं कुशल उपयोग पर जोर दिया। उन्होंने जल संरक्षण एवं प्रभावी जल प्रबंधन, जलवायु-सहिष्णु फसलों, फसल विविधीकरण, एकीकृत फसल-पशुधन-वृक्ष आधारित प्रणालियों, पशुधन आधारित आजीविका तथा कृषि उत्पादों के मूल्य संवर्धन को भविष्य के महत्वपूर्ण अनुसंधान क्षेत्रों के रूप में रेखांकित किया।
उन्होंने कहा कि सटीक कृषि, डिजिटल तकनीक, पूर्व चेतावनी प्रणाली और निर्णय सहयोगी प्रणालियों का उपयोग किसानों को बदलती जलवायु परिस्थितियों के अनुरूप समय पर निर्णय लेने में सक्षम बना सकता है। उन्होंने वर्षाजल संचयन, जलागम विकास, सूक्ष्म सिंचाई, सूखा एवं गर्मी सहनशील फसलों, मृदा एवं भूमि पुनर्स्थापन, शुष्क बागवानी, नवीकरणीय ऊर्जा, जैव-आदान, कृषि अवशेषों के पुनर्चक्रण तथा कृषि उत्पादों के मूल्य संवर्धन को भी प्राथमिकता वाले क्षेत्रों के रूप में चिन्हित किया।
डॉ. यादव ने आईसीएआर-काजरी, जोधपुर की अनुसंधान एवं नवाचार के क्षेत्र में महत्वपूर्ण भूमिका को रेखांकित करते हुए संस्थान द्वारा विकसित तकनीकों के परीक्षण, प्रदर्शन एवं व्यापक स्तर पर प्रसार पर जोर दिया। अपने भ्रमण के दौरान उन्होंने काजरी के विभिन्न अनुसंधान एवं प्रदर्शन क्षेत्रों का क्षेत्र भ्रमण किया तथा शुष्क क्षेत्रों के लिए विकसित जल संरक्षण एवं वर्षाजल संचयन तकनीकों का अवलोकन किया। उन्होंने इन तकनीकों के व्यावहारिक उपयोग तथा सीमित जल संसाधनों के अधिकतम उपयोग से संबंधित वैज्ञानिक प्रयासों की जानकारी भी प्राप्त की।
इस अवसर पर डॉ. एच.एस. जाट, निदेशक, आईसीएआर-काजरी, जोधपुर ने कहा कि शुष्क क्षेत्रों की जटिल एवं बदलती परिस्थितियों के समाधान के लिए अनुसंधान संस्थानों, कृषि विज्ञान केंद्रों, कृषि विश्वविद्यालयों, सरकारी विभागों, कृषक उत्पादक संगठनों तथा कृषक समुदायों के बीच मजबूत समन्वय आवश्यक है। उन्होंने कहा कि वैज्ञानिक अनुसंधान को खेत स्तर की वास्तविक आवश्यकताओं से जोड़ते हुए विकसित तकनीकों का प्रभावी प्रसार किया जाना चाहिए, ताकि किसानों की उत्पादकता, आय और जलवायु-सहनशीलता में ठोस सुधार हो सके।


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(रिलीज़ आईडी: 2319684)
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