रक्षा मंत्रालय
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रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन का अधिक ऊंचाई वाले उन्नत पैराशूट का पहला लाइव जंप परीक्षण सफलतापूर्वक संचालित

प्रविष्टि तिथि: 06 OCT 2026 4:11PM by PIB Delhi

रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन – डीआरडीओ ने अधिक ऊंचाई वाले ड्रॉप ज़ोन में से एक, पूर्वी लद्दाख स्थित न्योमा (मुध) ड्रॉप ज़ोन में एडवांस्ड हाई-एल्टीट्यूड पैराशूट का पहला लाइव जंप परीक्षण सफलतापूर्वक पूरा किया है।

इस परीक्षण के दौरान पैराट्रूपर ने समुद्र तल से 16,000 फीट की ऊंचाई से छलांग लगाई, पैराशूट 15,500 फीट की ऊंचाई पर खुला और लगभग 13,700 फीट की ऊंचाई पर स्थित न्योमा मुध ड्रॉप ज़ोन पर सुरक्षित लैंडिंग हुई।

इस छलांग ने अत्यधिक ऊंचाई वाले क्षेत्रों में एडवांस्ड हाई-एल्टीट्यूड पैराशूट की प्रभावशीलता और सामरिक उपयोगिता सिद्ध की।

आगरा स्थित एरियल डिलीवरी रिसर्च एंड डेवलपमेंट एस्टैब्लिशमेंट द्वारा डिजाइन और विकसित एडवांस्ड हाई-एल्टीट्यूड पैराशूट बड़ी संख्या में पैराट्रूपर्स ड्रॉप के लिए स्टैटिक लाइन पैराशूट सिस्टम है। इस तकनीक में पैराशूट विमान से जुड़ी एक स्थिर रस्सी - स्टैटिक लाइन - के माध्यम से स्वचालित रूप से तुरंत खुल जाता है। यह प्रणाली मुख्य रूप से सैन्य अभियानों और पैराट्रूपर्स द्वारा सामूहिक युद्धक छलांगों के लिए उपयोग की जाती है।

इस प्रणाली का निर्माण कानपुर की ऑर्डनेंस पैराशूट फैक्ट्री ने किया है। रक्षा उत्पादन विभाग के गुणवत्ता आश्वासन महानिदेशालय द्वारा इसका निरीक्षण तथा सैन्य विमानन योग्यता एवं प्रमाणन केंद्र, क्षेत्रीय सैन्य उड़नयोग्यता केंद्र कानपुर द्वारा प्रमाणन किया गया है।

एडवांस्ड हाई-एल्टीट्यूड पैराशूट विभिन्न तैनाती विकल्प प्रदान करता है। इसकी परिचालन ऊंचाई सीमा 18000 फीट तक विस्तृत है और इसकी उतरने की दर सबसे सुरक्षित है, जो विशेष रूप से भारतीय रक्षा बलों की अधिक ऊंचाई वाले क्षेत्रों की सामरिक आवश्यकताओं के लिए उपयुक्त है। इतनी अधिक ऊंचाई पर स्थिर लाइन पैराशूट से कूदना जटिल और स्वाभाविक रूप से जोखिम भरा होता है, क्योंकि खुलने पर बहुत तेज झटका लगता है और उतरने की दर भी बहुत अधिक होती है।

रक्षा मंत्री श्री राजनाथ सिंह ने स्वदेशी पैराशूट प्रणाली एएचएपी के प्रथम लाइव जंप के सफल परीक्षण के लिए डीआरडीओ, रक्षा बलों, रक्षा क्षेत्र के सार्वजनिक उपक्रम और उद्योग जगत को बधाई देते हुए इसे आत्मनिर्भर भारत की दिशा में एक और बड़ा कदम बताया।

रक्षा सचिव और रक्षा अनुसंधान एवं विकास सचिव एवं डीआरडीओ के अध्यक्ष श्री राजेश कुमार सिंह ने भी इस प्रणाली के डिजाइन और विकास से जुड़े सदस्यों को बधाई दी।

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पीके/केसी/आरटी/एकेवी/एसके


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