श्रम और रोजगार मंत्रालय
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श्रम एवं रोजगार सचिव ने उत्तराखंड के रुद्रपुर में ‘श्रम संवाद’ का नेतृत्व किया

प्रविष्टि तिथि: 06 OCT 2026 8:38PM by PIB Delhi

श्रम एवं रोजगार मंत्रालय ने उत्तराखंड सरकार के श्रम विभाग के सहयोग से तथा कुमाऊं गढ़वाल चैंबर ऑफ कॉमर्स, एंटरप्रेन्योर वेलफेयर कमेटी एसईडब्ल्यूएस-एसआईडीकुल और सिडकुल इंडस्ट्रियल वेलफेयर एसोसिएशन एसएसआईडब्ल्यूए के साथ मिलकर रुद्रपुर, उत्तराखंड में श्रम संहिताओं पर ‘श्रम संवाद’ - जिला स्तरीय क्षमता निर्माण और जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन किया। इस कार्यक्रम में नियोक्ताओं और उद्योग जगत के हितधारकों को एक साथ लाया गया, ताकि 21 नवंबर 2025 को लागू हुई श्रम संहिताओं और 8 मई 2026 को अधिसूचित केंद्रीय नियमों के बारे में जागरूकता और समझ को सुदृढ़ किया जा सके। सत्रों में संहिताओं के प्रमुख प्रावधानों और नई श्रम कानून व्यवस्था के तहत प्रतिष्ठानों पर लागू अनुपालन आवश्यकताओं पर ध्यान केंद्रित किया गया।

 

कार्यक्रम की अध्यक्षता श्रम एवं रोजगार मंत्रालय के सचिव डॉ. चंद्र भूषण कुमार ने की। इसमें विभिन्न क्षेत्रों के लगभग 250 प्रतिभागियों ने भाग लिया, जिनमें नियोक्ता, उद्योग प्रतिनिधि, मानव संसाधन पेशेवर, कानूनी विशेषज्ञ, वित्त विशेषज्ञ और श्रम एवं रोजगार पारिस्थितिकी तंत्र के अन्य प्रमुख हितधारक शामिल थे। श्रम एवं रोजगार मंत्रालय, केंद्रीय श्रम आयुक्त (केंद्रीय), कर्मचारी राज्य बीमा निगम, कर्मचारी भविष्य निधि संगठन और उत्तराखंड सरकार के श्रम विभाग के अधिकारियों ने कार्यक्रम में भाग लिया और प्रतिभागियों के साथ संवाद किया।

 

कार्यक्रम में तकनीकी सत्रों की एक श्रृंखला आयोजित की गई, जिनका उद्देश्य प्रतिभागियों को श्रम संहिताओं, नियोक्ताओं के दायित्वों और भारत सरकार की प्रमुख सामाजिक सुरक्षा पहलों के बारे में व्यावहारिक जानकारी प्रदान करना था।

कार्यक्रम के प्रारंभ में उत्तराखंड सरकार के श्रम सचिव श्री श्रीधर बाबू अडांकी आईएएस ने प्रतिभागियों का स्वागत किया और श्रम कानून अनुपालन को सुदृढ़ करने में सहयोगात्मक प्रयासों के महत्व पर प्रकाश डालते हुए कार्यक्रम की पृष्ठभूमि प्रस्तुत की। मुख्य वक्तव्य में श्रम एवं रोजगार मंत्रालय के सचिव डॉ. चंद्र भूषण कुमार आईएएस ने श्रम संहिताओं के प्रमुख प्रावधानों के बारे में विस्तार से बताया और इनके सुचारु एवं प्रभावी कार्यान्वयन में जागरूकता, हितधारकों की भागीदारी और क्षमता निर्माण की भूमिका पर जोर दिया। उन्होंने संबोधन के दौरान केंद्रीय योजनाओं प्रधानमंत्री विकसित भारत रोजगार योजना पीएमवीबीआरवाई और प्रधानमंत्री श्रम योगी मानधन पीएमएसवाईएम पर भी प्रकाश डाला।

चार तकनीकी सत्र आयोजित किए गए, जिनमें क्रमशः श्रम संहिताओं का व्यापक अवलोकन, संहिताओं के तहत नियोक्ताओं के लिए प्रमुख अनुपालन आवश्यकताओं तथा पीएमवीबीआरवाई और पीएमएसवाईएम के विभिन्न पहलुओं पर ध्यान केंद्रित किया गया।

एक संवादात्मक प्रश्नोत्तर सत्र भी आयोजित किया गया, जिसमें मंत्रालय और राज्य सरकार के अधिकारियों ने सक्रिय रूप से भाग लिया।

कार्यक्रम ने व्यावहारिक कार्यान्वयन संबंधी चुनौतियों के समाधान और नई नियामक व्यवस्था की बेहतर समझ विकसित करने के लिए एक महत्वपूर्ण मंच प्रदान किया। चर्चाओं से नियोक्ताओं और उद्योग जगत के हितधारकों की प्रमुख चिंताओं को दूर करने में भी मदद मिली तथा कार्यान्वयन से जुड़े मुद्दों पर अधिक स्पष्टता को बढ़ावा मिला।

सरकारी प्राधिकरणों और उद्योग प्रतिनिधियों को एक साथ लाकर कार्यक्रम ने सार्थक संवाद को बढ़ावा दिया, हितधारकों की भागीदारी को सुदृढ़ किया और श्रम संहिताओं के बारे में जागरूकता बढ़ाई। विचारों और व्यावहारिक जानकारियों के आदान-प्रदान से नई नियामक व्यवस्था की बेहतर समझ विकसित हुई और जमीनी स्तर पर इसके प्रभावी कार्यान्वयन में सहायता मिली।

इसके बाद, श्रम एवं रोजगार सचिव ने ईएसआईसी अस्पताल रुद्रपुर का दौरा किया और डॉक्टरों तथा कर्मचारियों के साथ संवाद किया। उन्हें अस्पताल के समग्र कामकाज और बीमित व्यक्तियों के लिए उपलब्ध सुविधाओं के बारे में जानकारी दी गई। उन्होंने अस्पताल के कामकाज में समग्र सुधार के लिए कई उपाय भी सुझाए।

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पीके/केसी/आरटी/एके/डीए


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