रक्षा मंत्रालय
भारतीय तटरक्षक बल ने ओडिशा के पारादीप तट पर 12वें राष्ट्रीय समुद्री खोज एवं बचाव अभ्यास (सारेक्स-2026) का आयोजन किया
प्रविष्टि तिथि:
08 OCT 2026 4:16PM by PIB Delhi
भारतीय तटरक्षक बल ने 8 अक्टूबर 2026 को ओडिशा के पारादीप के पास राष्ट्रीय समुद्री खोज एवं बचाव बोर्ड (एनएमएसएआरबी) की देखरेख में 12वें राष्ट्रीय समुद्री खोज एवं बचाव अभ्यास (सारेक्स-2026) का आयोजन किया। “खोज एवं बचाव तैयारियों तथा समुद्री सुरक्षा को विस्तृत करने के लिए प्रौद्योगिकी का उपयोग” विषय पर आयोजित इस अभ्यास में समुद्री और हवाई एजेंसियों ने भाग लिया। इसका उद्देश्य समुद्र में बड़े पैमाने पर बचाव अभियानों के लिए परिचालन तैयारियों, आपसी समन्वय और संयुक्त कार्रवाई क्षमता का प्रदर्शन करना था।
इस अभ्यास का अवलोकन भारतीय तटरक्षक बल के महानिदेशक परमेश शिवमणि ने किया। इसमें तटरक्षक बल, नौसेना, वायु सेना, भारतीय जहाजरानी निगम, जहाजरानी महानिदेशालय, मत्स्य पालन विभाग, सीमा शुल्क विभाग, समुद्री पुलिस, पारादीप पत्तन प्राधिकरण और ओडिशा राज्य प्रशासन ने भाग लिया। अभ्यास में 30 देशों के 32 पर्यवेक्षकों ने भी हिस्सा लिया। यह समुद्री खोज एवं बचाव कार्यों में अंतरराष्ट्रीय सहयोग को विस्तार देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम रहा। उनकी भागीदारी से सर्वोत्तम कार्य प्रणालियों के आदान-प्रदान, विभिन्न एजेंसियों के बीच समन्वय और संयुक्त रूप से काम करने की क्षमता को बढ़ावा मिला। साथ ही, समुद्री खोज एवं बचाव के क्षेत्र में एक विश्वसनीय साझेदार के रूप में भारत की भूमिका भी और मजबूत हुई।

इस अभ्यास में भारतीय तटरक्षक बल के 15 जहाज, तीन डोर्नियर विमान, तीन उन्नत हल्के हेलिकॉप्टर, एक चेतक हेलिकॉप्टर, भारतीय वायु सेना के सी-130जे और एमआई-17 विमान, भारतीय नौसेना के दो जहाज, साथ ही असैन्य और राज्य सरकार के संसाधन तथा तट पर मौजूद सहायता इकाइयां शामिल हुईं।अभ्यास के दौरान हवाई और समुद्री संकट की एक संयुक्त स्थिति के बाद बड़े पैमाने पर बचाव अभियान का अभ्यास किया गया। परिदृश्य के तहत 228 यात्रियों को ले जा रहा एक यात्री विमान पारादीप बंदरगाह के पास समुद्र में उतर गया और उसका मुख्य ढांचा, जिसे फ्यूजलेज कहा जाता है, एमवी जुम्बा नामक कंटेनर जहाज से टकरा गया। इससे पोत को संरचनात्मक नुकसान पहुंचा और उसमें आग लग गई। अभ्यास में घटना नियंत्रण केंद्र को सक्रिय करना, आग बुझाने की कार्रवाई, हेलिकॉप्टर के जरिए लोगों को निकालना, जीवन-रक्षक नौकाओं और हवा से गिराए जाने वाले जीवन-रक्षक उपकरणों की तैनाती, जेसन क्रैडल और जेमिनी रिकवरी, बचाव टोकरी अभियान तथा बचाव जाल की प्रक्रियाओं का अभ्यास किया गया। इसके अलावा, दूर से संचालित वाहन (आरओवी) की क्षमता का प्रदर्शन भी किया गया।
सारेक्स-2026 ने सागर के दृष्टिकोण व महासागर की भावना के अनुरूप, तेज, प्रौद्योगिकी-सक्षम और बेहतर समन्वय वाली खोज एवं बचाव प्रणाली विकसित करने के लिए भारत तथा उसके अंतरराष्ट्रीय सहयोगियों के सामूहिक संकल्प को दोहराया। इस अभ्यास ने इस सिद्धांत को और मजबूत किया कि संकट की हर सूचना पर समन्वित व त्वरित प्रतिक्रिया सुनिश्चित की जानी चाहिए तथा समुद्र में लोगों की जान बचाने के लिए हर संभव प्रयास किया जाना चाहिए।
***
पीके/केसी/आरटी/एनके/एसएस
(रिलीज़ आईडी: 2320912)
आगंतुक पटल : 118