शिक्षा मंत्रालय
एनआईटी रायपुर की नई तकनीक: अब आदिवासी क्षेत्रों की आंगनवाड़ियों में अपने-आप दर्ज होगा बच्चों का विकास डेटा
हस्तलिखित प्रविष्टियों और इंटरनेट पर निर्भरता समाप्त; प्रत्येक बच्चे की जांच का समय 5-8 मिनट से घटकर 1 मिनट से कम हुआ
प्रविष्टि तिथि:
09 OCT 2026 5:57PM by PIB Raipur
राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान (एनआईटी) रायपुर के सूचना प्रौद्योगिकी विभाग के शोधार्थी नीरज कुमार दीवांगन ने सुदूर आदिवासी क्षेत्रों की आंगनवाड़ियों में बच्चों के विकास की निगरानी के लिए एक नवीन, कम लागत वाली लोरा-असिस्टेड आईओटी (LoRa-assisted IoT) आधारित प्रणाली विकसित की है। डॉ. राकेश त्रिपाठी और डॉ. श्रीश वर्मा के मार्गदर्शन तथा एनआईटी रायपुर के निदेशक डॉ. एन. वी. रमना राव के सहयोग से पूर्ण किए गए इस पीएच.डी. शोध का शीर्षक "डिज़ाइन एंड डेवलपमेंट ऑफ लोरा असिस्टेड आईओटी इनेबल्ड रियल टाइम डेटा कलेक्शन फ्रेमवर्क फॉर चाइल्ड ग्रोथ मॉनिटरिंग एट रिमोट ट्राइबल आंगनवाड़ीज़" है। इस शोध कार्य के व्यावहारिक क्रियान्वयन एवं परीक्षण में इलेक्ट्रॉनिक्स विभाग के शोधार्थी आदित्य बघेल का भी विशेष योगदान रहा है।
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वर्तमान में छत्तीसगढ़ और देश के अन्य हिस्सों की आंगनवाड़ियों में बच्चों की ऊंचाई और वजन को हाथ से नापकर रजिस्टरों या मोबाइल ऐप्स में दर्ज किया जाता है। इस पारंपरिक प्रक्रिया में अत्यधिक समय लगता है और मानवीय त्रुटियों की संभावना बनी रहती है। एनआईटी रायपुर द्वारा विकसित यह नई स्वचालिक (ऑटोमेटेड) प्रणाली कुछ ही सेकंड में बच्चे का वजन और ऊंचाई नापने के साथ-साथ उसकी पहचान और उपस्थिति भी स्वचालित रूप से दर्ज कर लेती है। बिना इंटरनेट कनेक्टिविटी के भी सुचारू रूप से कार्य करने में सक्षम यह तकनीक डेटा को सुरक्षित रूप से क्लाउड पर प्रेषित करती है, जिससे प्रिंट-आउट के माध्यम से बच्चे की ऊंचाई, वजन और कुपोषण की सटीक स्थिति तुरंत प्राप्त की जा सकती है।
इस आधुनिक तकनीक के प्रयोग से प्रति बच्चा लगने वाला समय 5 से 8 मिनट से घटकर 1 मिनट से भी कम हो जाता है, जिससे आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं के कार्यभार में भारी कमी आएगी। इसके अतिरिक्त, इस प्रणाली में एकीकृत आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) पिछले महीनों के संकलित आंकड़ों का विश्लेषण करके यह पूर्व-अनुमान लगाने में सक्षम है कि भविष्य में कौन-सा बच्चा कुपोषण का शिकार हो सकता है। सुदूर आदिवासी क्षेत्रों की आंगनवाड़ियों में हजारों बच्चों के आंकड़ों पर किया गया इसका परीक्षण अत्यधिक सफल और सटीक पाया गया है। यह प्रणाली आंगनवाड़ी केंद्रों, प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों, पोषण पुनर्वास केंद्रों (NRC), ग्राम स्वास्थ्य स्वच्छता एवं पोषण दिवस (VHND) तथा राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम (RBSK) को समय पर सटीक और पारदर्शी आंकड़े उपलब्ध कराकर बाल कल्याण योजनाओं को अधिक प्रभावी बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।
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आरडीजे/पीजे
(रिलीज़ आईडी: 2321456)
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