सामाजिक न्‍याय एवं अधिकारिता मंत्रालय
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11 अक्टूबर से मैसूर में 9 दिवसीय शिल्प समागम मेला 2026 का आयोजन


मेले में 12 राज्यों के कारीगरों के पारंपरिक हस्तशिल्प और हथकरघा उत्पाद प्रदर्शित


प्रविष्टि तिथि: 13 OCT 2026 11:00AM by PIB Bhopal

 कर्नाटक के मैसूर स्थित मैसूर दशहरा प्रदर्शनी मैदान में शिल्प समागम मेला 2026 का आयोजन 11 अक्टूबर से किया जा रहा है। इसका आयोजन भारत सरकार के सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्रालय द्वारा किया जा रहा है।

 

 

19 अक्टूबर तक चलने वाले नौ दिवसीय मेले का उद्देश्य अनुसूचित जातियों, अन्य पिछड़ा वर्ग और सफाई कर्मचारियों के लाभार्थियों द्वारा निर्मित उत्पादों को विपणन मंच उपलब्ध कराना है। इसमें मंत्रालय के अंतर्गत कार्यरत तीन राष्ट्रीय निगमों—राष्ट्रीय अनुसूचित जाति वित्त एवं विकास निगम (NSFDC), राष्ट्रीय पिछड़ा वर्ग वित्त एवं विकास निगम (NBCFDC) और राष्ट्रीय सफाई कर्मचारी वित्त एवं विकास निगम (NSKFDC)—के सहयोग से लाभान्वित कारीगर भी शामिल हैं।

 

मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि इस पहल का उद्देश्य कारीगरों के लिए बाजार संपर्क को मजबूत करना, पारंपरिक हस्तशिल्प को बढ़ावा देना तथा लक्षित समूहों के लिए आजीविका के टिकाऊ अवसर सृजित करना है।

 

उन्होंने कहा कि मंत्रालय वर्ष 2022 से शिल्प समागम मेलों का आयोजन कर रहा है और अब तक आयोजित 13 मेलों के माध्यम से 975 कारीगर लाभान्वित हो चुके हैं।

 

मैसूर में आयोजित यह मेला वित्तीय वर्ष 2026–27 का पहला शिल्प समागम मेला है।

 

अधिकारी ने बताया कि मेले में कुल 83 स्टॉल लगाए गए हैं, जिनमें से 80 स्टॉल कारीगरों को आवंटित किए गए हैं। इनमें 37 महिला कारीगर शामिल हैं। इसके अलावा, आगंतुकों के लिए पारंपरिक व्यंजन परोसने वाले खाद्य स्टॉल भी लगाए गए हैं।

 

उन्होंने बताया कि इस मेले में 12 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के कारीगर भाग ले रहे हैं। इनमें आंध्र प्रदेश, बिहार, कर्नाटक, केरल, राजस्थान, पुडुचेरी, गुजरात, मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, तेलंगाना, तमिलनाडु और उत्तर प्रदेश शामिल हैं।

 

अधिकारी के अनुसार, प्रदर्शनी में पारंपरिक उत्पादों की विस्तृत श्रृंखला प्रदर्शित की गई है। इनमें हस्तशिल्प की वस्तुएँ, हथकरघा साड़ियाँ, मसाले, अचार, अगरबत्तियाँ, शहद से बने उत्पाद, ब्लॉक प्रिंट वाले उत्पाद, कांजीवरम साड़ियाँ, चमड़े के सामान, लकड़ी के खिलौने, बैग एवं पर्स, टेराकोटा उत्पाद, कृत्रिम आभूषण, शीशम की लकड़ी से बने दीवार सजावट के सामान तथा बेड और कुशन कवर शामिल हैं।

 

यह मंच कारीगरों को अपने उत्पाद व्यापक दर्शकों के सामने प्रदर्शित करने और संभावित ग्राहकों से जुड़ने का अवसर प्रदान करता है। साथ ही, यह भारत की विविध सांस्कृतिक विरासत और पारंपरिक कौशल को बढ़ावा देने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।

 

अधिकारी ने आगे बताया कि शिल्प समागम मेला सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्रालय तथा उसके तीन राष्ट्रीय निगमों—NSFDC, NBCFDC और NSKFDC—की योजनाओं एवं कार्यक्रमों की जानकारी प्रसारित करने का भी एक महत्वपूर्ण माध्यम है। इस पहल का उद्देश्य पात्र लाभार्थियों को उपलब्ध सहायता और विकास के अवसरों के प्रति जागरूक करना तथा उद्यमिता एवं आर्थिक सशक्तीकरण को प्रोत्साहित करना है।

 

मंत्रालय ने लक्षित समूहों के उत्पादों की बाजार तक पहुँच बढ़ाने के लिए भारत ट्यूलिप (BHARAT TULIP—पारंपरिक कारीगरों के उत्थान एवं आजीविका कार्यक्रम) की भी शुरुआत की है। इस पहल के तहत भारत और विदेशों के विभिन्न डिजिटल प्लेटफॉर्म के माध्यम से उत्पादों की बिक्री को बढ़ावा दिया जाता है।

 

इस कार्यक्रम के अंतर्गत उत्पादों को ‘भारत ट्यूलिप’ ब्रांड के तहत प्रस्तुत किया जाता है, जिससे उनकी पहचान और दृश्यता बढ़े तथा ऑनलाइन बिक्री को सुविधाजनक बनाया जा सके। इस कार्यक्रम का उद्देश्य कारीगरों की आजीविका को मजबूत करने के साथ-साथ पारंपरिक कला रूपों का संरक्षण करना और भारतीय हस्तकला को व्यापक स्तर पर पहचान दिलाना है।

 

अधिकारी ने बताया कि मंत्रालय कारीगरों की भागीदारी को सुगम बनाने के लिए उन्हें निःशुल्क स्टॉल उपलब्ध कराता है। इसके अतिरिक्त, यात्रा व्यय, दैनिक भत्ता, सामान के परिवहन तथा भोजन, जिसमें दोपहर और रात का खाना शामिल है, के लिए भी सहायता प्रदान की जाती है।

 

इस सहायता से कारीगरों को स्टॉल का किराया और भागीदारी से संबंधित निर्धारित खर्च स्वयं वहन किए बिना मेले में भाग लेने तथा अपने उत्पादों को प्रदर्शित करने का अवसर मिलता है।

 

उल्लेखनीय है कि वित्तीय वर्ष 2026–27 के दौरान मंत्रालय गुवाहाटी, नई दिल्ली के दिल्ली हाट, जोधपुर और लखनऊ में भी अतिरिक्त शिल्प समागम मेलों का आयोजन करने का प्रस्ताव रखता है।

 

मंत्रालय और उसके तीनों राष्ट्रीय निगम प्रमुख प्रदर्शनियों में भी भाग लेंगे। इनमें नई दिल्ली स्थित भारत मंडपम में 14 से 27 नवंबर 2026 तक आयोजित होने वाला इंडिया इंटरनेशनल ट्रेड फेयर (IITF) 2026 तथा फरवरी 2027 में फरीदाबाद में आयोजित होने वाला सूरजकुंड मेला शामिल हैं।

 

 

शिल्प समागम मेला और भारत ट्यूलिप जैसी पहलों के माध्यम से सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्रालय लक्षित समूहों के कारीगरों के लिए बाजार तक पहुँच, उद्यमिता और आजीविका के अवसरों को बढ़ावा देने के लिए निरंतर प्रयासरत है। साथ ही, इन पहलों का उद्देश्य भारत की पारंपरिक कलाओं और शिल्प का संरक्षण करना तथा उन्हें व्यापक पहचान दिलाना भी है।

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