प्रधानमंत्री कार्यालय
नई दिल्ली में ब्लूमबर्ग न्यू इकोनॉमी फोरम में प्रधानमंत्री के संबोधन का मूल पाठ
प्रविष्टि तिथि:
13 OCT 2026 11:08AM by PIB Delhi
नमस्कार!
Excellencies, दुनिया भर से आए Delegates, Business और Industry के Leaders, Policy Makers और मेरे साथियों।
भारत में आप सभी का बहुत-बहुत स्वागत है। कुछ देर पहले, मिस्टर ब्लूमबर्ग ने यहां अपनी बात रखी। 30 साल की उनकी यात्रा और वो मुझे कह रहें हैं कि, मैं उनका मित्र हूँ, वो आयु में भी बड़े हैं, अपने काम के संबंध में बड़े सफल व्यक्ति हैं। और सफल भी हैं, समर्पित भी हैं। और भारत के प्रति उनका जो प्यार है, उसको मैंने बहुत गहराई से अनुभव किया है और इसलिए, मैं व्यक्तिगत रूप से हमेशा उनका सम्मान करता हूँ, उनका चाहक रहा हूँ। और आज भी भारत के प्रति उनका प्रेम, वैश्विक मंचों पर भारत के प्रति उनकी भावनाएं हमेशा बहुत ही सकारात्मक ऊर्जा देने वाली रही हैं। और इसके लिए मैं श्रीमान, आपका ह्दय से बहुत-बहुत आभार व्यक्त करता हूँ। हर साल यह Forum दुनिया के बेहतरीन Minds को एक साथ लाता है। यहां Economy पर चर्चा होती है, Technology, Energy और Global Affairs पर विमर्श होता है। और इस बार, पहली बार यह आयोजन भारत में हो रहा है। मैं मिस्टर ब्लूमबर्ग और उनकी पूरी Team को इस निर्णय के लिए बहुत-बहुत बधाई देता हूँ। आपने सही समय पर, सही जगह चुना है।
Friends,
इस साल ब्लूमबर्ग इकोनॉमी फोरम की थीम दुनिया में उभरती नई Powers पर केंद्रित है। हर युग में Power के अपने स्रोत रहे हैं, अपनी परिभाषा रही है। लेकिन 21वीं सदी में, खासकर इस तीसरे दशक में, एक बड़ा बदलाव हो रहा है। Today, Technology is Power, Data is Power, Knowledge is Power, Innovation is Power.
लेकिन साथियों,
असली सवाल यह नहीं है कि Power किसके पास है, बल्कि सवाल ये है कि इसका यूज कैसे हो रहा है? क्या Technology सिर्फ कुछ लोगों को आगे बढ़ाएगी? या करोड़ों लोगों के लिए नए अवसर बनाएगी? क्या Knowledge, केवल कुछ लोगों की ताकत बनी रहेगी? या सबकी क्षमता बढ़ाएगी? यहीं से एक नया विचार जन्म लेता है। और ये विचार है - Power to Empower, Power to Empower, Power to Control से आगे Power to Enable, Power to Compete से आगे Power to Collaborate, Power to Succeed से आगे Power to Help Others Succeed. और इसलिए, आज मैं यहां जिस विजन के साथ आया हूं वो है- Power to Empower.
साथियों,
यह विचार भारत के लिए नया नहीं है। हमारे यहां कहा गया है, ‘विद्या विवादाय धनं मदाय, शक्तिः परेषां परि-पीडनाय। खलस्य साधो: विपरीतम् एतत्, ज्ञानाय दानाय च रक्षणाय॥’ इसका भाव यही है कि ज्ञान, धन और शक्ति जिसके पास भी हो, वो इनको Use कैसे करता है, ये महत्वपूर्ण है। यानी Power का असली मूल्य उसके Purpose में है। और इसी सोच को आज के दौर में समझना बहुत जरूरी है।
साथियों,
Power to Empower करने वाला जो ये मानवीय भाव है, ये सिर्फ दूसरों को उपदेश देने के लिए नहीं है, ये हजारों वर्षों की हमारी परंपरा ने हमें सिखाया है। और भारत में हमने इसे अपनी गवर्नेंस में, अपनी कार्य-संस्कृति में लागू करके दिखाया है। इसलिए, मैं भारत के उदाहरणों से ही अपनी बात को आगे बढ़ाऊंगा।
साथियों,
आप सभी जानते हैं, भारत Mother of Democracy है। भारत में Hundred से ऊपर भाषाएं हैं, करीब eighty thousand रजिस्टर्ड न्यूजपेपर और पब्लिकेशंस हैं। एक हजार से ज्यादा सैटेलाइट टीवी चैनल्स हैं। और इतना ही नहीं, सोशल मीडिया के इस दौर में, भारत में Five Hundred मिलियन से अधिक यूट्यूब यूजर्स हैं। Five Hundred मिलियन से ज्यादा इंस्टाग्राम यूजर्स हैं। हमारे यहां अलग-अलग मुद्दों पर खुलकर बहस होती है, अलग-अलग दृष्टिकोण पर जनता चर्चा करती है। और वर्तमान समय में, इसमें जिसने एक बड़ी भूमिका निभाई है, वो है- डिजिटल पावर।
साथियों,
12-13 साल पहले तक भारत में एक समय वो भी था, जब Mobile और Internet तक पहुंच भी अपने आप में एक शक्ति हुआ करती थी। जिसके पास Access था, उसके पास Information थी, Knowledge थी, Opportunities थीं। 2014 के बाद, जब भारत में नई सरकार बनी, हमें सेवा करने का अवसर मिला, तो भारत ने Mobile डेटा को Affordable बनाने पर जोर दिया। इसी का नतीजा है कि आज एक छोटे शहर का विद्यार्थी भी Digital Learning से जुड़ सकता है। किसी गांव में एक छोटा दुकानदार भी नए Customers तक पहुंच सकता है। एक युवा भी ऑनलाइन नए कोर्सेस ज्वाइन कर सकता है। यानि भारत में Connectivity ने सिर्फ लोगों को Connect नहीं किया, उसने Opportunities को भी Connect किया है। यही, यही Power to Empower है।
साथियों,
आप में से जो अतिथि विदेश से आए हैं, उन्हें मैं कहूंगा कि आप भारत के Digital Payments Ecosystem को भी आजमा कर देखिए। हमारे यहां एक Street Vendor और एक बड़े Car Showroom का कारोबार अलग-अलग है, उनका Scale अलग है, लेकिन भारत में ये दोनों Digital Payments के एक ही Ecosystem का इस्तेमाल कर रहे हैं। यही Inclusive Technology की ताकत है।
साथियों,
भारत का जो भी सामर्थ्य है, उसे हम अपने घर में ही रखने के समर्थक नहीं हैं, उसे हम ग्लोबल साउथ के साथ, अन्य Partner Countries के साथ निरंतर साझा करते हैं। Digital Public Infrastructure के अनुभव को हम दूसरे देशों से शेयर कर रहे हैं, ताकि वे अपनी जरूरतों के अनुसार अपने Digital Systems विकसित कर सकें। हमने कोविड के समय भी कोविन प्लेटफॉर्म बनाया था, जो ओपन सोर्स था, यानि हमारा ये निरंतर प्रयास है कि भारत की Capability दूसरे देश के लिए भी Possibilities के नए दरवाज़े खोले। यानि हमारा सामर्थ्य, मानवता को Empower करे।
साथियों,
Innovation की Power भी ऐसी ही है, एक Idea को Product में बदलना, एक Problem को Solution में बदलना, यह अपने आप में एक बड़ी क्षमता है। लेकिन जब यह अवसर समाज के अधिक से अधिक लोगों को मिलता है, तो शक्ति का संतुलन बनता है और इसका प्रभाव कई गुना बढ़ जाता है। भारत की Startup Journey इसी बदलाव का उदाहरण है। वर्ष 2014 से पहले, भारत में कुछ सौ Startups ही हुआ करते थे, अब देश में इनकी संख्या ढाई लाख से अधिक हो गई है। करीब आधे Startups छोटे शहरों और कस्बों से आते हैं। Forty five percent से अधिक Startups में कम-से-कम एक महिला Director या Partner है। यानि Innovation के अवसर अधिक लोगों तक पहुंच रहे हैं, नई प्रतिभाएं सामने आ रही हैं, नए Solutions बन रहे हैं।
साथियों,
पावर के Purpose पर जो फोकस है, यही सोच Governance में भी जरूरी है। सरकार के पास Authority है, लेकिन इसका उद्देश्य ये नहीं होना चाहिए कि देश का नागरिक सिस्टम पर ही निर्भर हो जाए, बल्कि इसका मकसद ये होना चाहिए कि देश के नागरिक सक्षम हों, सशक्त हों और भारत इसी रास्ते पर चल रहा है। इसी रास्ते पर चलते हुए भारत ने बीते एक दशक में 25 करोड़ लोगों को, दुनिया के कई देशों की आबादी से भी ज्यादा, 25 करोड़ लोगों को गरीबी से बाहर निकाला है।
साथियों,
आपने JAM Trinity और Direct Benefit Transfer के बारे में भी सुना होगा। हम Technology का इस्तेमाल करते हुए, हमने बेनिफिशरीज़ के Bank Accounts तक सरकारी मदद सीधे पहुंचाने की व्यवस्था बनाई है। इससे करप्शन कम हुआ है, देश के नागरिक की सुविधा बढ़ी है, Government और Citizen के बीच सीधा रास्ता बना है।
साथियों,
Power to Empower की यही सोच भारत की Global Engagement में भी दिखाई देती है। COVID महामारी के दौरान वैक्सीन मैन्युफैक्चरिंग कैपेसिटी का बहुत बड़ा महत्व था। तब सवाल था कि, क्या इस ताकत का फायदा भी कुछ ही देशों तक सीमित रह जाएगा? या फिर जिनके पास ये सुविधा और ये सामर्थ्य नहीं है, उन देशों, उन लोगों तक भी वैक्सीन पहुंचेंगी? भारत ने मानवता को Empower करने वाला रास्ता चुना। हमने 100 से अधिक देशों को Vaccines की Supply की। हमारी Manufacturing Capability दूसरे देशों के लिए भी सहायता का माध्यम बनी। मैं आपको एक और Interesting Example दूंगा। कुछ महीने पहले, भारत में AI Impact समिट हुई, और श्रीमान ब्लूमबर्ग जी ने भी उस AI समिट की अभी बहुत तारीफ भी की। इसमें हमने ह्यूमेनिटी के लिए AI के उपयोग के साथ ही Animals को कैसे AI का फायदा हो, इसे भी चर्चा का विषय बनाया। नंदन यहां बैठे है, आपको बाद में काफी जानकारी वो दे सकते हैं, ये कैसे किया। यानि भारत जितना सक्षम होगा, मानवता के लिए, दुनिया के लिए उतना ही फायदेमंद होगा।
Friends,
Power is not just the ability to move ahead. It is also the ability to empower others, to move ahead. भारत का मानना है, कंपीटिशन जरूरी है, लेकिन कंपैशन भी होना चाहिए। Innovation जरूरी है, लेकिन उसके लाभ का विस्तार भी होना चाहिए। National Strength जरूरी है, लेकिन Global Challenges के लिए सोल्यूशन्स में भी योगदान देना होगा। Climate Change हो, Water Governance हो, Public Health हो, या Emerging Technologies का Responsible Use हो, दुनिया को ऐसा सामर्थ्य चाहिए, जो सोल्यूशन दे, नए अवसर पैदा करे।
साथियों,
मैं आप सभी को एक और उदाहरण देता हूं। Paris Agreement के तहत Climate Change से निपटने के लिए भारत ने एक बड़ा Commitment किया था। साल 2015 में हमने लक्ष्य रखा था, कि Twenty thirty तक अपनी Installed Electricity Capacity का, Forty परसेंट Non-Fossil Sources से हासिल करेंगे। और भारत ने यह उपलब्धि नवंबर 2021 में ही हासिल कर ली। यानी तय समय से नौ साल पहले। भारत ऐसा करने वाला पहला G20 देश बना। यह केवल एक कमिटमेंट पूरा करने की बात नहीं थी, यह भारत की बदलती हुई Energy Journey का भी संकेत था।
साथियों,
2014 में भारत की Renewable Energy Capacity, करीब सेवन्टी फाइव गीगावॉट थी। आज ये करीब Three Hundred गीगावॉट हो चुकी है। यानी हमने लगभग Four Time ज्यादा कैपेसिट add की है।
साथियों,
भारत में हो रहे इस एनर्जी ट्रांजिशन के नए अवसर भी बन रहे हैं। आज हमारे यहां पीएम सूर्य घर और पीएम-कुसुम जैसी स्कीम्स चल रही हैं। एक योजना घरों को Solar Power से जोड़ रही है, दूसरी योजना, किसानों को Solar Energy पैदा करने और उसके Use से इनपुट कॉस्ट कम करने का सामर्थ्य दे रही है। इन दोनों योजनाओं के माध्यम से, भारत को Thirty गीगावॉट से अधिक Solar Capacity हासिल हुई है। इनसे हर साल करीब Thirty Million Tonnes से अधिक कार्बन एमिशन कम होने का अनुमान है। यानी Solar Power प्रकृति की रक्षा करने का माध्यम भी बन रहा है। औऱ लोगों को Empower भी कर रही है।
साथियों,
दुनिया में Power की इस भागदौड़ में, भारत एक अलग मिजाज लेकर चल रहा है। औऱ उसका गवाह ये दशक भी है।
साथियों,
ट्वेंटी फर्स्ट सेंचुरी का ये डिकेड, अभूतपूर्व Global challenges लेकर आया है। हम अगर पिछले छह वर्षों को देखें, हमने ग्लोबल पेंडमिक देखी, फिर अलग-अलग रीजन्स में युद्ध छिड़ गए, जैसे इतना ही काफी नहीं था, फिर ट्रेड हो, क्रिटिकल मिनरल्स हो या एनर्जी सप्लाई हो, उसमें भी अड़चनें आ रही हैं। दुनिया एक संकट से बाहर निकलने का रास्ता तलाशती है, तब तक एक नया संकट सामने आ जाता है। जिन चीज़ों ने कभी दुनिया को जोड़ा था, वही आज Weapon बन रहे हैं। Supply Chains हों, Energy हो, Minerals हों, Payments हों, या Technology ये दबाव और दबदबे का माध्यम बन रहे हैं। बीते दशकों में ग्लोबलाइजेशन ने जो रूट्स बनाए, वो कब और कहां चोकप्वाइंट्स बन गए, ये हम सब देख रहे हैं। इन सबके बीच, Artificial Intelligence, हर Sector में काम करने के तरीके बदल रही है। अनेक देशों में, Ageing से जुड़े चैलेंज भी तेज़ी से बढ़ रहे हैं। ऐसे में, आज दुनिया के सामने एक बड़ा सवाल, Trust का है। भरोसे का है। भरोसा ये, कि जरूरत के समय Supply जारी रहेगी। भरोसा ये, कि जो प्रॉमिस किए हैं, वो निभाए भी जाएंगे। भरोसा ये, कि संकट के समय हमारा Partner Country साथ खड़ा रहेगा। और यहीं पर, भारत एक अलग मिजाज, एक अलग सोच के साथ आपके सामने है।
साथियों,
Twenty first सेंचुरी में, भारत की प्रगति, सबके साथ मिलकर, सबको साथ लेकर आगे बढ़ने की कहानी है। जब दुनिया को Affordable Medicines की जरूरत होती है, तो हर पांच में से एक Generic Medicine भारत से आती है। जब Digital Identity और Payments के Solutions चाहिए, तो भारत में विकसित Model दिखता है। जब दुनिया को Talent की जरूरत होती है, तो भारत के स्किल्ड युवाओं पर भरोसा होता है। आज भारत में 2,000 से अधिक Global Capability Centres हैं, जो दुनिया भर की Companies को अपनी Services दे रहे हैं।
साथियों,
ये स्पष्ट है, कि जब भी दुनिया को एक Steady Pillar की जरूरत होती है, तो भारत, अपना दायित्व समझते हुए हाथ आगे बढ़ाता है। We do not grow at anyone's cost. We grow with the world, and for the world.
और साथियों,
भारत जो करता है, उसका क्रेडिट भी नहीं चाहता। दुनिया गर्व से कहती है, कि भारत ने दुनिया को Zero दिया। इस Zero ने पूरी मानवता का लाभ किया। लेकिन भारत ने इसके लिए कभी भी रॉयल्टी नहीं मांगी है। और आज भी भारत इसी भावना के साथ काम करता है। और आज की चुनौतियों से निपटने के लिए, हमारे जो विचार हैं उनमें भी वो सारी बातें दिखती हैं। इतिहास में अनेक वैश्विक संगठन बने हैं, उनके अपने-अपने हित रहे हैं। लेकिन भारत ने किस तरह के ग्लोबल प्लेटफॉर्म बनाए, आप भी गौर कीजिए, हमने कैसी-कैसी संस्थाओं को जन्म दिया, और दुनिया में क्या-क्या हुआ है, उसका जरा एक बार तुलना करके देख लेना। हमने क्या दिया, International Solar Alliance, हमने क्या दिया, Coalition for Disaster Resilient Infrastructure, हमने क्या दिया, Big Cat Alliance, ग्लोबल बायोफ्यूल अलायंस, इंडिया मिडिल ईस्ट यूरोप इकॉनॉमिक कॉरिडोर - आई-मैक, मिशन लाइफ - लाइफ स्टाईल फॉर एनवायरमेंट, यानी जिनसे सबका भला हो, हर जीवन का भला हो, ऐसे इनिशिएटिव भारत ने लिए हैं।
साथियों,
भारत किन विचारों को लेकर सामने आया है, ये भी आपके सामने है। One Sun, One World, One Grid का विजन। वन अर्थ, वन फैमिली, वन फ्यूचर, ये हमारी सोच। वन अर्थ, वन हेल्थ, ये हमारी दूरदृष्टि, यानी भारत जोड़ने पर और जुड़ने पर बल देता है। और इसमें भी, Power का इस्तेमाल दूसरों को Empower करने के लिए ही है।
साथियों,
अनिश्चितताओं से भरी इस दुनिया में भारत, रिलायबिलिटी और स्टेबिलिटी का विश्वास देता है। इस साल April-June क्वार्टर में, भारत की ग्रोथ रेट, Seven point eight percent रही है। और यह ग्रोथ मजबूत नींव पर खड़ी है। 12-13 साल पहले, भारत का Current Account Deficit, GDP के Four percent से भी अधिक था। पिछले साल यह घटकर, लगभग आधा प्रतिशत, यानी Point six one परसेंट (0.61%) रह गया है । आज हमारे Foreign Exchange Reserves, Seven hundred Billion Dollar से अधिक हैं। हमारा Banking System, अनेक दशकों में सबसे मजबूत स्थिति में है।
साथियों,
इसी मजबूती का परिणाम है, कि भारत की सॉवरीन रेटिंग्स Upgrade की जा रही हैं। आज भारत का Confidence अभूतपूर्व ऊंचाई पर है। हम एक क्लियर Policy Direction के साथ Reform कर रहे हैं। GST के जरिए, हमने Taxes के एक Complex Web को, National Market में बदला है। हमने Insolvency Law बनाया है। ट्वेंटी नाइन लेबर कोड्स, अब फोर सिंपल कोड्स में सिमट चुके हैं। बिजनेस से जुड़े सैकड़ों छोटी-मोटी गलतियों को, Decriminalise किया गया है। और हम यहां रुके नहीं हैं, भारत की रिफॉर्म एक्सप्रेस तेज गति से आगे बढ़ रही है। हमारे लिए Reforms, कोई कंपल्शन नहीं हैं। Reforms हमारा Conviction है।
साथियों,
हजारों वर्ष पहले, हमारे वेदों ने हमें एक मंत्र दिया था, ‘संगच्छध्वं संवदध्वं सं वो मनांसि जानताम्।’ आइए, आज फिर उस मंत्र को दोहराएं, Let us walk together. Let us speak together. Let us strive to understand one another. क्योंकि साथ चलने से हमारी शक्ति बढ़ती है। संवाद से हमारी समझ बढ़ती है। और एक-दूसरे को समझने से, हम मिलकर बड़ी चुनौतियों का समाधान कर सकते हैं। यही है Power to Empower. अपनी Power को केवल अपनी प्रगति तक सीमित न रखना। बल्कि उससे दूसरों के लिए भी नए अवसर बनाना। मुझे विश्वास है कि ब्लूमबर्ग Economic Forum का यही मंच, इसी भावना को आगे बढ़ाने का एक बड़ा Platform बनेगा। एक बार फिर, आप सभी Participants को, इस कार्यक्रम के लिए मेरी ढेर सारी शुभकामनाएं। आप सबका बहुत-बहुत धन्यवाद। Thank you.
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MJPS/SS/ST/SS/RK/DK
(रिलीज़ आईडी: 2322624)
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