शिक्षा मंत्रालय
एचएनएलयू में 30 करोड़ रुपये से बनेगा अंतरराष्ट्रीय आर्बिट्रेशन एवं मेडिएशन संस्थान
2028 की शुरुआत में लॉन्च करने की योजना, अंतरराष्ट्रीय विवाद समाधान के क्षेत्र में संस्थागत क्षमता बढ़ाने पर जोर
अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन में विधि विशेषज्ञों का मंथन; एचएनएलयू और हैदराबाद के अंतरराष्ट्रीय आर्बिट्रेशन एवं मेडिएशन सेंटर के बीच समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर
प्रविष्टि तिथि:
13 OCT 2026 5:54PM by PIB Raipur
हिदायतुल्लाह राष्ट्रीय विधि विश्वविद्यालय (एचएनएलयू), रायपुर ने अपने परिसर में 30 करोड़ रुपये की प्रस्तावित लागत से अंतरराष्ट्रीय आर्बिट्रेशन एवं मेडिएशन संस्थान स्थापित करने की योजना की घोषणा की है। प्रस्तावित ‘एचएनएलयू इंटरनेशनल आर्बिट्रेशन एंड मेडिएशन इंस्टीट्यूट’ (एचआईएएमआई) को वर्ष 2028 की शुरुआत में विश्वविद्यालय के रजत जयंती वर्ष के दौरान शुरू करने की योजना है। विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. वी. सी. विवेकानंदन ने 10 और 11 अक्टूबर को आयोजित दो दिवसीय अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन ‘गवर्निंग डिस्प्यूट्स: इंटरनेशनल लॉ, ट्रीटी फ्रेमवर्क्स एंड कमर्शियल आर्बिट्रेशन’ के समापन अवसर पर यह घोषणा की।

प्रस्तावित संस्थान का उद्देश्य अंतरराष्ट्रीय मध्यस्थता एवं विवाद समाधान के क्षेत्र में संस्थागत क्षमता को मजबूत करना तथा भारत में इस क्षेत्र के विकास को गति देना है। सम्मेलन के उद्घाटन समारोह में एचएनएलयू और हैदराबाद स्थित इंटरनेशनल आर्बिट्रेशन एंड मेडिएशन सेंटर (आईएएमसी) के बीच समझौता ज्ञापन (एमओयू) पर हस्ताक्षर किए गए। इस समझौते को मध्यस्थता एवं विवाद समाधान के क्षेत्र में दोनों संस्थानों के बीच सहयोग बढ़ाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

अपने उद्घाटन संबोधन में प्रो. विवेकानंदन ने व्यावसायिक लेन-देन की बदलती गति और कानूनी विवादों के निपटारे में लगने वाले समय के बीच अंतर को रेखांकित किया। उन्होंने कहा कि इक्कीसवीं सदी के व्यावसायिक लेन-देन के बावजूद विवादों के प्रक्रियागत विलंब का शिकार होने का खतरा बना रहता है। उन्होंने यह भी कहा कि प्रौद्योगिकी का जीवनकाल लगातार घट रहा है, जबकि कानूनी विवाद लंबे समय तक लंबित रह सकते हैं। उनके अनुसार, अंतरराष्ट्रीय आर्बिट्रेशन को केवल विधिक पेशे की एक विशिष्ट शाखा के रूप में नहीं, बल्कि वैश्विक अर्थव्यवस्था के संस्थागत ढांचे के महत्वपूर्ण हिस्से के रूप में देखा जाना चाहिए।
इस सम्मेलन का आयोजन एचएनएलयू के स्कूल ऑफ लॉ एंड बिजनेस के अंतर्गत सेंटर फॉर कमर्शियल आर्बिट्रेशन तथा स्कूल ऑफ लॉ एंड गवर्नेंस के अंतर्गत सेंटर फॉर इंटरनेशनल लॉ एंड डिप्लोमेसी ने किया। इसमें हैदराबाद स्थित महिंद्रा यूनिवर्सिटी के स्कूल ऑफ लॉ ने सहयोग किया, जबकि यूएनसीसी इंडिया संस्थागत एवं ज्ञान भागीदार रहा।
अंतरराष्ट्रीय विवाद समाधान के समकालीन मुद्दों पर चर्चा
10 अक्टूबर को आयोजित उद्घाटन समारोह में न्यायमूर्ति गोड़ा रघुराम, एचएनएलयू के विशिष्ट विधिवेत्ता प्रोफेसर एवं भोपाल स्थित राष्ट्रीय न्यायिक अकादमी के पूर्व निदेशक, मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहे। प्रो. रणबीर सिंह, विशिष्ट विधिवेत्ता प्रोफेसर एवं प्रख्यात शिक्षाविद, तथा ए. जे. जवाद, मुख्य कार्यकारी अधिकारी एवं रजिस्ट्रार, इंटरनेशनल आर्बिट्रेशन एंड मेडिएशन सेंटर, हैदराबाद, विशिष्ट अतिथि के रूप में शामिल हुए। इस अवसर पर सम्मेलन में प्रस्तुत शोध-पत्रों के सार का संकलन ‘बुक ऑफ एब्स्ट्रैक्ट्स’ डिजिटल रूप से जारी किया गया।
सम्मेलन में घरेलू और अंतरराष्ट्रीय आर्बिट्रेशन से जुड़े महत्वपूर्ण प्रश्नों पर तीन पैनल चर्चाएं आयोजित की गईं। पहली चर्चा में राज्य की भूमिका, सार्वजनिक कानून और निजी विवाद निपटान के बीच संबंध तथा न्यायिक निगरानी की सीमाओं पर विचार-विमर्श हुआ। इसमें न्यायमूर्ति जी. रघुराम, मद्रास उच्च न्यायालय के वरिष्ठ अधिवक्ता एवं एचएनएलयू के विशिष्ट विधिवेत्ता प्रोफेसर पी. वी. एस. गिरिधर, महिंद्रा यूनिवर्सिटी के स्कूल ऑफ लॉ के डीन प्रो. ई. आर. जयराम तथा राष्ट्रीय विधि विश्वविद्यालय, दिल्ली के एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. डैनियल मैथ्यू ने भाग लिया। पैनल की अध्यक्षता न्यायमूर्ति रघुराम ने की, जबकि एचएनएलयू की एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. कौमुदी चल्ला ने चर्चा का संचालन किया।
दूसरी चर्चा में युवा विधि विशेषज्ञों के लिए अंतरराष्ट्रीय आर्बिट्रेशन के बदलते अवसरों और चुनौतियों पर ध्यान केंद्रित किया गया। इसमें पश्चिम बंगाल राष्ट्रीय न्यायिक विज्ञान विश्वविद्यालय, कोलकाता के कुलपति प्रो. ओ. वी. नंदीमठ, उत्तराखंड विश्वविद्यालय के लॉ कॉलेज देहरादून की प्रो. प्रिया विनजामुरी, हैदराबाद स्थित आईएएमसी के मुख्य कार्यकारी अधिकारी एवं रजिस्ट्रार ए. जे. जवाद तथा संयुक्त राष्ट्र अंतरराष्ट्रीय व्यापार कानून आयोग (यूएनसीआईटीआरएएल) की राष्ट्रीय समन्वय समिति, भारत की सचिव एवं अधिवक्ता अद्वैता शर्मा ने विचार रखे। चर्चा का संचालन एचएनएलयू के सहायक विधि प्राध्यापक डॉ. अमितेश देशमुख ने किया।
तीसरी चर्चा में घरेलू आर्बिट्रेशन से वैश्विक स्तर पर भारत की स्थिति मजबूत करने की संभावनाओं और इसके लिए आवश्यक संस्थागत एवं व्यावसायिक विकास पर विचार किया गया। इसमें ए. जे. जवाद, स्वतंत्र मध्यस्थ एवं वैकल्पिक विवाद समाधान सलाहकार अजय थॉमस, छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय की वरिष्ठ अधिवक्ता एवं छत्तीसगढ़ इंस्टीट्यूट ऑफ आर्बिट्रेशन एंड मेडिएशन की कार्यकारी निदेशक हमीदा सिद्दीकी तथा पश्चिम बंगाल सरकार के स्थायी अधिवक्ता लोकनाथ चटर्जी शामिल हुए। चर्चा का संचालन एचएनएलयू के सहायक विधि प्राध्यापक डॉ. अनिंद्य तिवारी ने किया।
सम्मेलन के दौरान सात समानांतर तकनीकी सत्र भी आयोजित किए गए। इनमें संधि व्याख्या, अंतरराष्ट्रीय निवेश, वाणिज्यिक विवाद, मध्यस्थता निर्णयों के प्रवर्तन, लोक नीति, राष्ट्रीय सुरक्षा, जलवायु परिवर्तन और उभरती प्रौद्योगिकियों जैसे विषयों पर शोध-पत्र प्रस्तुत किए गए और अकादमिक विमर्श हुआ।
शोध-पत्रों के लिए प्रतिभागियों को सम्मान
11 अक्टूबर को आयोजित समापन समारोह में एचएनएलयू की फैकल्टी कन्वीनर डॉ. अनीता सिंह ने स्वागत संबोधन दिया, जबकि डॉ. अमितेश देशमुख ने सम्मेलन की रिपोर्ट प्रस्तुत की। कुलपति प्रो. वी. सी. विवेकानंदन ने संबोधित किया। स्वतंत्र मध्यस्थ एवं वैकल्पिक विवाद समाधान सलाहकार अजय थॉमस तथा महिंद्रा यूनिवर्सिटी के स्कूल ऑफ लॉ के डीन प्रो. ई. आर. जयराम ने भी विचार रखे। पश्चिम बंगाल राष्ट्रीय न्यायिक विज्ञान विश्वविद्यालय, कोलकाता के कुलपति प्रो. ओ. वी. नंदीमठ समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए।
समापन समारोह में सात तकनीकी सत्रों के अंतर्गत उत्कृष्ट शोध-पत्र प्रस्तुत करने वाले प्रतिभागियों को सर्वश्रेष्ठ शोध-पत्र पुरस्कार प्रदान किए गए। सम्मानित प्रतिभागियों में इलाहाबाद विश्वविद्यालय के विधि संकाय के विवेक कुशवाहा और देवराज सिंह रावत; राष्ट्रीय फॉरेंसिक विज्ञान विश्वविद्यालय, दिल्ली के लेफ्टिनेंट कर्नल डॉ. महिपाल लाठर तथा एचएनएलयू, रायपुर के प्रत्युष पांडेय; महाराष्ट्र राष्ट्रीय विधि विश्वविद्यालय, नागपुर के आयुष पाठक और अभिनव ओझा; एचएनएलयू, रायपुर के राजीब कुमार मोहंती तथा राष्ट्रीय विधि विद्यालय, बेंगलुरु के अनमोल साई; धर्मशास्त्र राष्ट्रीय विधि विश्वविद्यालय, जबलपुर की अनुष्का शर्मा और मेहक जोशी; राष्ट्रीय विधि विश्वविद्यालय, ओडिशा के श्रेयांश जैन और कीर्ति सिन्हा; तथा राष्ट्रीय रक्षा विश्वविद्यालय, गांधीनगर के अनिरुद्ध गुप्ता और अभिषेक कुमार शामिल रहे।
सम्मेलन के आयोजन में स्कूल ऑफ पब्लिक पॉलिसी के निदेशक प्रो. योगेंद्र श्रीवास्तव ने स्वागत किया। सेंटर फॉर इंटरनेशनल लॉ एंड डिप्लोमेसी की प्रमुख डॉ. अनीता सिंह और सेंटर फॉर कमर्शियल आर्बिट्रेशन के प्रमुख डॉ. अमितेश देशमुख ने सम्मेलन की रूपरेखा तैयार करने और संचालन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। छात्र संयोजक अंश पराशर और सुयश कपासिया ने आयोजन में सहयोग किया। इस अवसर पर ‘एचएटी’ (HAT) यानी ‘एचएनएलयू आर्बिट्रेशन थॉट बुक’ के प्रस्तावित प्रकाशन की भी जानकारी दी गई। ‘थॉटस्केपिंग द फ्यूचर ऑफ आर्बिट्रेशन’ अवधारणा पर आधारित इस प्रकाशन को वर्ष 2027 से शुरू करने की योजना है।
****
आरडीजे/बीकेटी
(रिलीज़ आईडी: 2322909)
आगंतुक पटल : 10
इस विज्ञप्ति को इन भाषाओं में पढ़ें:
English