सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्रालय
नशे की लत से आत्मनिर्भरता की ओर: नशे से मुक्त होने और एक नई आशा के साथ फिर से आगे बढ़ने का सफर
एनएपीडीडीआर के माध्यम से गोरखपुर, उत्तर प्रदेश के अमित कुमार की नशामुक्त होकर, वित्तीय स्थिरता प्राप्त करने तक की यात्रा
प्रविष्टि तिथि:
13 OCT 2026 8:10PM by PIB Delhi
सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्रालय, नशीली दवाओं की मांग में कमी लाने के लिए राष्ट्रीय कार्य योजना (एनएपीडीडीआर) के माध्यम से मादक पदार्थों के सेवन से प्रभावित व्यक्तियों को उपचार, परामर्श, पुनर्वास और समाज में पुनःएकीकरण सेवाओं के जरिए सहायता प्रदान करता है।
नशामुक्ति उपचार, पुनर्वास और निरंतर मनोवैज्ञानिक सहायता तक पहुँच व्यक्तियों को मादक पदार्थों पर निर्भरता से उबरने और अपने जीवन को फिर से सँवारने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।
अमित कुमार (नाम परिवर्तित), जिनकी आयु 47 वर्ष है, उत्तर प्रदेश के गोरखपुर जिले के निवासी हैं और अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) समुदाय से संबंध रखते हैं। वे स्वरोजगार में लगे हुए थे, लेकिन नशे की लत के कारण उन्हें व्यक्तिगत, सामाजिक और आर्थिक स्तर पर गंभीर चुनौतियों का सामना करना पड़ा। बुरी संगति और तनाव के प्रभाव में उन्हें धूम्रपान करने और नशीले पदार्थों का सेवन करने की आदत पड़ गई। समय के साथ, उनकी इस लत का उनके शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ा, उनका आत्मविश्वास कम हो गया और नियमित रूप से काम करने तथा स्वस्थ सामाजिक संबंध बनाए रखने में कठिनाइयाँ उत्पन्न होने लगीं। आर्थिक रूप से कमजोर परिवार से होने के कारण, उन्हें अनियमित रोजगार के चलते आर्थिक कठिनाइयों और अस्थिर आय का सामना करना पड़ा। नशे की लत के चलते समाज में हुई बदनामी ने उनके अलगाव को और बढ़ाया, जबकि पारिवारिक संबंधों में तनाव ने उनकी कठिनाइयों को और बढ़ा दिया।
इन चुनौतियों के बावजूद, अमित कुमार अपनी नशे की लत से उबरने, आत्मसम्मान पुनः प्राप्त करने, स्वस्थ जीवन जीने और अपने परिवार को आर्थिक रूप से सहयोग देने की आकांक्षा रखते थे। उन्होंने इससे पहले 2018 में उपचार कराया था और उनकी स्थिति में सुधार भी हुआ था, लेकिन बाद में वे फिर से नशे की लत के शिकार हो गए। स्वस्थ होने और अपने जीवन को फिर से सँवारने के दृढ़ संकल्प के साथ, उन्होंने दोबारा उपचार लेने का निर्णय लिया और नशामुक्ति की प्रक्रिया के प्रति स्वयं को समर्पित कर दिया।

13 अगस्त 2021 को अमित कुमार को उत्तर प्रदेश के गोरखपुर स्थित बासुदेव तिवारी सेवा संस्थान के पुनर्जन्म एकीकृत नशामुक्ति एवं पुनर्वास केंद्र (आईआरसीए) के माध्यम से नशीली दवाओं की मांग में कमी लाने के लिए राष्ट्रीय कार्य योजना (एनएपीडीडीआर) के अंतर्गत सहायता प्राप्त हुई। केंद्र ने निःशुल्क नशामुक्ति उपचार, चिकित्सा देखभाल, निर्धारित दवाएँ, मनोवैज्ञानिक परामर्श और प्रेरक सहायता प्रदान की। नियमित परामर्श सत्रों और अनुवर्ती देखभाल से उन्हें नशे की लत से जुड़ी चुनौतियों का सामना करने और नशामुक्ति की प्रक्रिया के प्रति प्रतिबद्ध रहने में मदद मिली। पारिवारिक परामर्श और भावनात्मक सहयोग ने भी उनका आत्मविश्वास पुनः स्थापित करने, पारिवारिक संबंधों में सुधार लाने और समाज में उनके पुनःएकीकरण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
केंद्र से निरंतर सहायता और अपने दृढ़ संकल्प के बल पर अमित कुमार ने धूम्रपान और मादक पदार्थों का सेवन पूरी तरह छोड़ दिया। नशामुक्ति के बाद उन्होंने फिर से काम करना शुरू किया और अपना ऑटो-रिक्शा चलाकर आजीविका अर्जित करने लगे। अब वे प्रतिमाह लगभग ₹30,000 कमाते हैं, जो पहले के अनियमित काम और अस्थिर आय की उनकी स्थिति के मुकाबले एक महत्वपूर्ण सुधार है। उनकी आय से उनके परिवार की आर्थिक स्थिति बेहतर हुई है और वे घरेलू खर्चों में अधिक नियमित रूप से योगदान दे पा रहे हैं। उपचार, परामर्श, पुनर्वास और अनुवर्ती सहायता के समन्वित प्रयासों से उन्हें अधिक स्वस्थ, जिम्मेदार और आर्थिक रूप से स्थिर जीवन की ओर बढ़ने में मदद मिली है।
अमित कुमार की यात्रा मादक पदार्थों पर निर्भरता से प्रभावित व्यक्तियों के उपचार, पुनर्वास और सामाजिक-आर्थिक पुनःएकीकरण में नशीली दवाओं की मांग में कमी लाने के लिए राष्ट्रीय कार्य योजना की भूमिका को रेखांकित करती है। पुनर्जन्म एकीकृत नशामुक्ति एवं पुनर्वास केंद्र (आईआरसीए) के माध्यम से प्रदान की गई सहायता से उन्हें अपना आत्मविश्वास पुनः प्राप्त करने, उत्पादक कार्य फिर से शुरू करने और आर्थिक आत्मनिर्भरता की दिशा में आगे बढ़ने में मदद मिली। उनका अनुभव दर्शाता है कि समय पर उपचार, मनोवैज्ञानिक सहायता और परिवार की भागीदारी किस प्रकार व्यक्तियों को नशे की लत से उबरने, संबंधों को फिर से मजबूत बनाने और सम्मानजनक जीवन जीने के अवसर प्रदान कर सकती है।
नशे की लत और आर्थिक अनिश्चितता से उबरकर नशामुक्त जीवन और आजीविका की सुरक्षा की ओर अमित कुमार का परिवर्तन दृढ़ता और नई आशा का प्रेरणादायक उदाहरण है। उनकी यात्रा नशामुक्ति सेवाओं तक सुलभ पहुँच और निरंतर पुनर्वास सहायता के महत्व को रेखांकित करती है, जो व्यक्तियों को अपना जीवन फिर से सँवारने, अपने परिवारों को सशक्त बनाने और अधिक स्वस्थ एवं सुरक्षित भविष्य की ओर बढ़ने में मदद करती है।
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पीके/केसी/आरटी/पीके/एसएस
(रिलीज़ आईडी: 2322996)
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