विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी मंत्रालय
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भारत ने विदेश मंत्रालय–सीएसआईआर तकनीक परिचय कार्यक्रम के ज़रिए 'ग्लोबल साउथ' के देशों के साथ विज्ञान और प्रौद्योगिकी साझेदारी को मज़बूत किया


29 देशों के 33 राजदूतों और दूतावास अधिकारियों ने स्थायी अवसंरचना, जीनोमिक्स और स्वास्थ्य सेवा के क्षेत्र में सीएसआईआर के नवाचारों का अवलोकन किया

प्रविष्टि तिथि: 14 OCT 2026 7:55PM by PIB Delhi

'ग्लोबल साउथ' के देशों के साथ भारत की विज्ञान और प्रौद्योगिकी साझेदारी को मज़बूत करने की एक महत्वपूर्ण  पहल के तहत, वैज्ञानिक और औद्योगिक अनुसंधान परिषद (सीएसआईआर) ने भारत सरकार के विदेश मंत्रालय (एमईए) के 'नई, उभरती और रणनीतिक तकनीकें' (एनईएसटी) प्रभाग के साथ मिलकर 14 अक्टूबर 2026 को ' पहला एमईए–सीएसआईआर तकनीक परिचय कार्यक्रम' शुरू किया।

इस कार्यक्रम में 29 देशों के 33 राजदूत और दूतावास के वरिष्ठ अधिकारी शामिल हुए। उन्हें सीएसआईआर की वैज्ञानिक क्षमताओं, स्वदेशी तकनीकों और उन्नत अनुसंधान अवसंरचना को करीब से जानने का मौका मिला। पहले आयोजन के दौरान नई दिल्ली में सीएसआईआर की दो प्रमुख प्रयोगशालाओं— सीएसआईआर- केंद्रीय सड़क अनुसंधान संस्थान (सीएसआईआर-सीआरआरआई) और सीएसआईआर-जीनोमिक्स और एकीकरण जीव विज्ञान संस्थान (सीएसआईआर-आईजीआईबी) – के दौरे शामिल थे।

सीएसआईआर और एमईए द्वारा संयुक्त रूप से परिकल्पित इस पहल का मकसद सहयोगी देशों, खासकर 'ग्लोबल साउथ' के देशों के साथ मज़बूत वैज्ञानिक और तकनीकी संबंध बनाना है। इसके लिए भारत की शोध क्षमताओं को प्रदर्शित किया गया और साझा विकास संबंधी चुनौतियों से निपटने के लिए मिलकर शोध करने, तकनीक हस्तांतरण, क्षमता निर्माण और अभिनव समाधानों को लागू करने के मौकों की पहचान की गई।

उद्घाटन सत्र के दौरान, सीएसआईआर के अंतर्राष्ट्रीय एस&टी कार्यक्रम निदेशालय के प्रमुख डॉ. रामा स्वामी बंसल ने सीएसआईआर की वैज्ञानिक और तकनीकी क्षमताओं, इसके अंतरराष्ट्रीय सहयोग और 'ग्लोबल साउथ' के देशों के साथ सहयोग के संभावित मॉडलों के बारे में जानकारी दी। एमईए के संयुक्त सचिव डॉ. सद्र आलम ने कार्यक्रम की शुरुआत, इसके उद्देश्यों और उम्मीदों के बारे में बताया और विज्ञान और प्रौद्योगिकी के ज़रिए अंतरराष्ट्रीय साझेदारी को बढ़ावा देने में इसकी भूमिका पर ज़ोर दिया।

सीएसआईआर-सीआरआरआई के निदेशक डॉ. चालुमूरी रवि शेखर और सीएसआईआर-आईजीआईबी के निदेशक डॉ. सौविक मैती ने दौरे पर आए हुए प्रतिनिधिमंडल को अपने-अपने संस्थानों की शोध क्षमताओं, तकनीकी उपलब्धियों और स्थायी अवसंरचना और स्वास्थ्य सेवा के क्षेत्रों में उनके योगदान के बारे में जानकारी दी।

 

सीएसआईआर-सीआरआरआई में, प्रतिनिधिमंडल ने कई उन्नत शोध सुविधाओं और तकनीकों को देखा, जिनमें ड्राइविंग सिम्युलेटर, साइक्लिक लोड टेस्ट फैसिलिटी, स्टील स्लैग लेबोरेटरी, बायो-बाइंडर टेक्नोलॉजी का 3D मॉडल और ड्रोन मॉडल शामिल थे। एक मुख्य आकर्षण 'इकोफिक्स' का लाइव प्रदर्शन था, जो स्टील स्लैग पर आधारित एक त्वरित गड्ढा-मरम्मत मिश्रण है और इसे तेज़ी से सड़क के रखरखाव के लिए विकसित किया गया है। इस प्रदर्शन में दिखाया गया कि कैसे स्वदेशी तकनीकें औद्योगिक कचरे को मूल्यवान संसाधनों में बदल सकती हैं और साथ ही अवसंरचना विकास के लिए व्यावहारिक, स्थायी और किफायती समाधान प्रदान कर सकती हैं।

इसके बाद प्रतिनिधिमंडल ने सीएसआईआर-आईजीआईबी का दौरा किया, जहाँ प्रतिभागियों को जीनोम सीक्वेंसिंग, बायोसेफ्टी, ज़ेब्राफिश शोध, बायोबैंकिंग और अच्छी विनिर्माण प्रथाएं (जीएमपी) जैसी आधुनिक सुविधाओं के बारे में बताया गया। इस दौरे में जीनोमिक्स, बायोमेडिकल शोध, सटीक स्वास्थ्य सेवा और जैव-प्रौद्योगिकी में भारत की बढ़ती क्षमताओं की जानकारी दी गयी और स्वास्थ्य देखभाल सेवा में वैज्ञानिक सहयोग और क्षमता निर्माण के अवसरों पर प्रकाश डाला गया।

एक संवाद सत्र के साथ कार्यक्रम का समापन हुआ, जिसके दौरान राजदूतों और दूतावास के अधिकारियों ने सीएसआईआर के साथ भविष्य के जुड़ाव के लिए अपने विचार, प्राथमिकताएं और उम्मीदें साझा कीं। चर्चाओं में संयुक्त शोध, तकनीकी साझेदारी, ज्ञान के आदान-प्रदान, क्षमता निर्माण और साझेदार देशों की विशिष्ट विकास संबंधी ज़रूरतों को पूरा करने के लिए भारतीय तकनीकों को अपनाने के अवसरों पर बातचीत की गई।

पहला एमईए–सीएसआईआर तकनीक परिचय कार्यक्रम भारत की वैज्ञानिक और तकनीकी क्षमताओं को सार्थक अंतरराष्ट्रीय साझेदारियों में बदलने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। विदेशी राजनयिक प्रतिनिधियों को सीधे सीएसआईआर की प्रयोगशालाओं में लाकर और वैज्ञानिकों व तकनीक विकास करने वालों के साथ बातचीत की सुविधा प्रदान करके, यह पहल सहयोग के व्यावहारिक क्षेत्रों की पहचान करने और अभिनव समाधानों को अपनाने में तेज़ी लाने के लिए एक मंच प्रदान करती है।

इस कार्यक्रम से सीएसआईआर और ग्लोबल साउथ के देशों के बीच निरंतर जुड़ाव के नए रास्ते खुलने की उम्मीद है, जिससे समावेशी और सतत विकास के लिए वैज्ञानिक ज्ञान, तकनीकी विशेषज्ञता और स्वदेशी नवाचार को साझा करने की भारत की प्रतिबद्धता सुदृढ़ होगी।

 

 

 

पीके / केसी / आरटी / जेके/डीके

 

 


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