विद्युत मंत्रालय
सीईए विचार-मंथन कार्यक्रम: भारत के विद्युत क्षेत्र को एआई-योग्य बनाना (अंतर्राष्ट्रीय सम्मेलन सह प्रदर्शनी)
प्रविष्टि तिथि:
14 OCT 2026 7:53PM by PIB Delhi
"भारत के विद्युत क्षेत्र को एआई-योग्य बनाना" विषयवस्तु के अंतर्गत, केंद्रीय विद्युत प्राधिकरण (सीईए) ने 14 अक्टूबर 2026 को नई दिल्ली के मानेकशॉ सेंटर में अपने दो दिवसीय अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन-सह-प्रदर्शनी के पहले दिन का आयोजन किया।

भारत सरकार के केंद्रीय विद्युत एवं आवासन और शहरी कार्य मंत्री श्री मनोहर लाल और शिक्षा, उपभोक्ता मामले, खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण एवं नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा मंत्री श्री प्रहलाद जोशी ने इस मौके पर अपना संदेश दिया। उद्घाटन के दौरान केंद्रीय विद्युत एवं नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा राज्य मंत्री श्री श्रीपाद येसो नाइक; केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग एवं इलेक्ट्रॉनिकी एवं सूचना प्रौद्योगिकी राज्य मंत्री श्री जितिन प्रसाद; विद्युत मंत्रालय सचिव श्री पंकज अग्रवाल; केंद्रीय ऊर्जा आयोग अध्यक्ष श्री घनश्याम प्रसाद; नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय में अतिरिक्त सचिव श्री मयंक तिवारी भी मौजूद रहे।

उद्घाटन सत्र में वरिष्ठ सरकारी अधिकारियों और सीईए के नेतृत्व ने संबोधित किया। विद्युत मंत्रालय के सचिव श्री पंकज अग्रवाल और नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय के अतिरिक्त सचिव श्री मयंक तिवारी ने सभा को संबोधित करते हुए उभरती चुनौतियों और तकनीकी विकास को ध्यान में रखते हुए भारत के विद्युत क्षेत्र को आगे बढ़ाने के महत्व पर प्रकाश डाला। इसके साथ ही, सीईए अध्यक्ष श्री घनश्याम प्रसाद ने सम्मेलन की पृष्ठभूमि प्रस्तुत की। यह बताया गया कि सीईए ने आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस (एआई) के 54 एंथुजिआस्ट/ ब्रांड एंबेसडर की एक टीम का गठन किया है। वे विद्युत क्षेत्र के सभी क्षेत्रों में इसे आगे बढ़ाएंगे। सभी विद्युत कंपनियों को भी समर्पित एआई टीम बनानी चाहिए।
इस सत्र में सीईए के विद्युत द्वार पोर्टल का शुभारंभ और सीईए ट्रांसमिशन प्लानिंग क्राइटेरिया मैनुअल, 2026 का विमोचन भी हुआ। सत्र के दौरान सीईए कर्मचारियों के लिए पुरस्कार भी वितरित किए गए, जिनमें सीईए कर्मचारियों की ओर से उत्कृष्ट प्रदर्शन और असाधारण योगदान को मान्यता दी गई।
इस कार्यक्रम में विद्युत क्षेत्र के हितधारकों को एक साथ लाया गया, जिससे उत्पादन, विनियमन, नवीकरणीय ऊर्जा एकीकरण, पारेषण और वितरण प्रणालियों में एआई के व्यावहारिक अनुप्रयोगों पर विचार-विमर्श किया जा सके। पहले दिन के तकनीकी कार्यक्रम में छः समानांतर विषयगत चर्चाएं: पारंपरिक स्रोतों के लिए एआई के माध्यम से उत्पादन का अनुकूलन; एआई का इस्तेमाल कर नियामक सुधार; एक लचीले ग्रिड के लिए एआई-सक्षम नवीकरणीय ऊर्जा एकीकरण; एआई के माध्यम से वितरण का आधुनिकीकरण; एआई के माध्यम से पारेषण आधुनिकीकरण, ग्रिड स्थिरता और प्रणाली बहाली; और एआई-सक्षम रूफटॉप सोलर, माइक्रोग्रिड और मिनी-ग्रिड, शामिल थीं।
पारंपरिक ऊर्जा उत्पादन पर सत्र में यह जांच की गई कि एआई किस प्रकार ऊष्मा दर और दहन अनुकूलन, लचीले संयंत्र संचालन, पूर्वानुमानित रखरखाव, डिजिटल ट्विन, सहायक विद्युत अनुकूलन और उत्सर्जन निगरानी में मदद कर सकता है। ये अनुप्रयोग संयंत्र की उपलब्धता और परिचालन दक्षता में सुधार करने में सहायक हो सकते हैं, साथ ही नवीकरणीय ऊर्जा के विस्तार के साथ-साथ पारंपरिक स्टेशनों को बदलती प्रणाली आवश्यकताओं के प्रति अधिक लचीले ढंग से प्रतिक्रिया देने में सक्षम बना सकते हैं।

नियामक सुधारों पर चर्चा के दौरान, कुल राजस्व आवश्यकता और शुल्क संबंधी दस्तावेजों की समीक्षा करने, प्रस्तुतियां सत्यापित करने, नियामक ज्ञान को व्यवस्थित करने, अनुपालन की निगरानी करने और बाजार निगरानी में सहयोग देने के लिए आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस (एआई), एडवांस विश्लेषण और डिजिटल उपकरणों के इस्तेमाल पर विचार किया गया। चर्चा में यह भी स्पष्ट किया गया कि एआई मानव-पर्यवेक्षित निर्णय-सहायता उपकरण के रूप में कार्य कर सकता है और यह वैधानिक निर्णय, प्रक्रियात्मक निष्पक्षता या नियामक जवाबदेही की जगह नहीं ले सकता।
नवीकरणीय ऊर्जा एकीकरण पर सत्र में परिवर्तनशील नवीकरणीय उत्पादन और मांग के एआई-आधारित पूर्वानुमान, वितरित ऊर्जा संसाधनों की बेहतर दृश्यता, भंडारण अनुकूलन, भीड़ प्रबंधन और आभासी विद्युत संयंत्रों के माध्यम से नवीकरणीय संपत्तियों के समन्वय पर चर्चा की गई। इसका मुख्य उद्देश्य बेहतर डेटा, पूर्वानुमान और संसाधनों के समन्वय के माध्यम से एक लचीला और विश्वसनीय ग्रिड तैयार करना था।

स्मार्ट मीटर, नेटवर्क और परिसंपत्ति डेटा की बढ़ती उपलब्धता के संदर्भ में वितरण प्रणालियों के आधुनिकीकरण पर चर्चा की गई। संभावित अनुप्रयोगों में मांग का पूर्वानुमान, बिजली खरीद का अनुकूलन, वितरण ट्रांसफार्मरों का पूर्वानुमानित रखरखाव, बिजली कटौती का पता लगाना और दोष का स्थान निर्धारण, ऊर्जा लेखापरीक्षा, हानि विश्लेषण, बिलिंग और राजस्व आश्वासन, उपभोक्ता सेवाएं और नियामक रिपोर्टिंग शामिल हैं। ये अनुप्रयोग अधिक विश्वसनीय आपूर्ति, कम हानि और अधिक प्रतिक्रियाशील उपभोक्ता सेवाओं में सहायक हो सकते हैं।
ट्रांसमिशन आधुनिकीकरण और ग्रिड स्थिरता पर हुई चर्चा में एआई-सक्षम नेटवर्क नियोजन, कॉरिडोर और राइट-ऑफ-वे अनुकूलन, ड्रोन-आधारित निरीक्षण और कंप्यूटर विजन, पूर्वानुमानित रखरखाव, डिजिटल ट्विन, गतिशील लाइन रेटिंग, भीड़भाड़ और आकस्मिकता विश्लेषण, जड़ता पूर्वानुमान और सिस्टम बहाली तथा ब्लैक-स्टार्ट की तैयारी के लिए निर्णय सहयोग जैसे विषयों पर विचार किया गया। प्रतिभागियों ने व्यापक स्तर पर अपनाने में सहायक डेटा, डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर, साइबर सुरक्षा, शासन और क्षमता निर्माण संबंधी जरूरतों पर भी गौर किया।
आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस वाले रूफटॉप सोलर, माइक्रोग्रिड और मिनीग्रिड पर आयोजित सत्र में विकेंद्रीकृत ऊर्जा संसाधनों की बुद्धिमत्तापूर्ण योजना और संचालन पर ध्यान केंद्रित किया गया। इसमें रूफटॉप सोलर की पहचान और आकार निर्धारण, फीडर-स्तर पर पूर्वानुमान, स्वायत्त माइक्रोग्रिड संचालन, भंडारण अनुकूलन, कृषि-फीडर विश्लेषण, मांग प्रतिक्रिया और रूफटॉप सोलर, बैटरी, इलेक्ट्रिक वाहन और लचीले भारों का एकीकरण जैसे विषय शामिल थे।
चर्चाओं के दौरान, एक आम विषय यह था कि अलग-थलग प्रौद्योगिकी प्रदर्शनों से हटकर विश्वसनीय डेटा, अंतरसंचालनीयता, उचित सुरक्षा उपायों, संस्थागत क्षमता और मापने योग्य प्रदर्शन संकेतकों द्वारा समर्थित प्राथमिकता-आधारित, कार्यान्वयन योग्य इस्तेमाल की ओर बढ़ना आवश्यक है। इस विचार-मंथन का उद्देश्य भारतीय विद्युत क्षेत्र में एआई अनुप्रयोगों को जिम्मेदारीपूर्वक अपनाने और उनका विस्तार करने के लिए व्यावहारिक मार्ग तैयार करना है।
दो दिवसीय विचार-मंथन कार्यक्रम का आयोजन समग्र पहल के हिस्से के रूप में किया जा रहा है, जिसका उद्देश्य विद्युत मूल्य श्रृंखला में एआई को अपनाने के लिए एक समन्वित और परिणाम-उन्मुख दृष्टिकोण विकसित करना है, जो कुशल और लचीली विद्युत आपूर्ति, विश्वसनीय और बुद्धिमान नेटवर्क, उत्तरदायी संस्थानों, सुरक्षित डिजिटलीकरण और मजबूत घरेलू औद्योगिक क्षमता का सहयोग करता है।
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पीके/केसी/आरटी/एमएम
(रिलीज़ आईडी: 2323656)
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