पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय
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केंद्रीय पर्यावरण मंत्री ने जीबी पंत हिमालयी पर्यावरण और विकास सोसायटी की 27वीं बैठक की अध्यक्षता की; 4 प्रकाशनों का विमोचन किया


श्री भूपेंद्र यादव जैव विविधता संरक्षण में पहुंच और लाभ-साझाकरण के अधिकारों तथा सामुदायिक भागीदारी के महत्व पर जोर दिया

प्रविष्टि तिथि: 15 OCT 2026 12:30PM by PIB Delhi

केंद्रीय पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्री श्री भूपेंद्र यादव ने आज नई दिल्ली में जीबी पंत हिमालयी पर्यावरण और विकास सोसायटी की 27वीं बैठक की अध्यक्षता की। इस बैठक में पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय (एमओईएफसीसी) में सचिव श्री नरेंद्र भूषण, महानिदेशक (वन) और मंत्रालय में विशेष सचिव श्री संतोष तिवारी, मंत्रालय के अन्य वरिष्ठ अधिकारी और जीबी पंत सोसायटी के सदस्य उपस्थित रहे।

बैठक के दौरान, श्री यादव ने हिमालयी परितंत्र में रहने वाले स्थानीय ग्रामीणों की आजीविका में सुधार लाने और उनके व्यापक कल्याण में योगदान देने के लिए पहुंच तथा लाभ-साझाकरण अधिकारों और जन जैव विविधता रजिस्टरों (पीबीआर) के महत्व पर जोर दिया।

आज दिल्ली में जीबी पंत हिमालयी पर्यावरण और विकास सोसायटी की 27वीं बैठक की अध्यक्षता की। हिमालयी परितंत्र में रहने वाले स्थानीय ग्रामीणों की आजीविका में सुधार लाने और उनके व्यापक हित के लिए पहुंच और लाभ-साझाकरण अधिकारों तथा जन जैव विविधता रजिस्टर के महत्व पर जोर दिया। माननीय प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी के नेतृत्व में, 2047 तक भारतीय हिमालयी क्षेत्र में पारिस्थितिक सुरक्षा और सतत सामाजिक-आर्थिक विकास के बीच संतुलन स्थापित करने वाले नीतिगत ढांचे पर समन्वित रूप से ध्यान केंद्रित किया गया है। संस्थान द्वारा किए गए कार्यों के ज्ञान भंडार में वृद्धि करने वाले चार प्रकाशन जारी किए गए: 1. भागीरथी पर्यावरण संवेदनशील क्षेत्र के लिए जैव विविधता और उसके संरक्षण के तरीके 2. गंगोत्री हिमनदी प्रणाली 3. भारतीय हिमालयी क्षेत्र के लिए ई-पीबीआर शासन 4. भारतीय हिमालयी क्षेत्र की रामसर आर्द्रभूमि

– भूपेन्द्र यादव (@byadavbjp) 15 अक्टूबर, 2026

श्री यादव ने जोर देते हुए कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में 2047 तक भारतीय हिमालयी क्षेत्र में पारिस्थितिक सुरक्षा और सतत सामाजिक-आर्थिक विकास के बीच संतुलन स्थापित करने वाले नीतिगत ढांचे को विकसित करने पर ठोस ध्यान केंद्रित किया गया है।

बैठक के दौरान चार प्रकाशन जारी किए गए, जिससे संस्थान द्वारा किए गए कार्यों के ज्ञान भंडार में वृद्धि हुई। इन प्रकाशनों में भागीरथी पर्यावरण संवेदनशील क्षेत्र में जैव विविधता संरक्षण तरीकों, गंगोत्री हिमनदी प्रणाली, ई-पीबीआर प्रशासन और भारतीय हिमालयी क्षेत्र में रामसर आर्द्रभूमि शामिल किए गए हैं।

आज जारी की गई चार प्रकाशनें इस प्रकार हैं:

1. भागीरथी पर्यावरण संवेदनशील क्षेत्र के लिए जैव विविधता और उसके संरक्षण के उपाय

2. गंगोत्री हिमनदी प्रणाली

3. भारतीय हिमालयी क्षेत्र के लिए ई-पीबीआर शासन

4. भारतीय हिमालयी क्षेत्र की रामसर आर्द्रभूमि

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पीके/केसी/आरटी/एके/एसके


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