पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय
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सीएक्यूएम ने एनसीआर में निर्देश संख्या 98 के अंतर्गत आने वाले सभी उद्योगों के लिए पीटीजेड कैमरा-आधारित रिमोट मॉनिटरिंग का विस्तार किया है

प्रविष्टि तिथि: 16 OCT 2026 8:31PM by PIB Delhi

राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (एनसीआर) और आसपास के क्षेत्रों में वायु प्रदूषण के नियंत्रण के लिए गठित आयोग (सीएक्यूएम) ने सांविधिक निर्देश संख्या 98 के अंतर्गत आने वाली सभी श्रेणियों के उद्योगों के लिए पैन-टिल्ट-जूम (पीटीजेड) कैमरों की स्थापना और संचालन को अनिवार्य बनाते हुए वायु प्रदूषण फैलाने वाले उद्योगों की दूर से निगरानी (रिमोट मॉनिटरिंग) की प्रणाली को और अधिक मजबूत कर दिया है। इससे ईंधन के उपयोग, औद्योगिक उत्सर्जन और निर्धारित प्रदूषण नियंत्रण उपायों के पालन की प्रौद्योगिकी-सक्षम निगरानी का दायरा और बढ़ जाएगा। यह आदेश आयोग के 05.10.2026 के पिछले आदेश का स्थान लेगा।

आयोग ने निर्देश दिया है कि एनसीआर में संचालित होने वाले सीपीसीबी द्वारा चिह्नित अत्यधिक प्रदूषण फैलाने वाले 17 उद्योग, लाल श्रेणी (मध्यम और बड़े) के वायु प्रदूषण फैलाने वाले उद्योग, बॉयलर/थर्मिक फ्लूइड हीटर वाले खाद्य और खाद्य प्रसंस्करण और कपड़ा उद्योग, तथा भट्ठियों वाले धातु उद्योग निम्नलिखित आवश्यकताओं का अनुपालन सुनिश्चित करेंगे:

  1. पीटीजेड कैमरों की स्थापना और स्थिति

संचालन के दौरान ईंधन के उपयोग की निगरानी में सुविधा के लिए बॉयलरों, थर्मिक फ्लूइड हीटरों, भट्ठियों, किल्न और अन्य ईंधन से चलने वाले औद्योगिक उपकरणों के सभी ईंधन-फीडिंग/चार्जिंग बिंदुओं पर पीटीजेड कैमरे लगाए जाएंगे।

 गैसीय ईंधन का उपयोग करने वाली औद्योगिक इकाइयों में, निगरानी के लिए पर्याप्त दृश्यता सुनिश्चित करते हुए, गैस मीटरों/गेजों और उससे जुड़ी मीटरिंग व्यवस्था को कैप्चर करने के लिए पीटीजेड कैमरे उपयुक्त रूप से लगाए जाएंगे।

 औद्योगिक इकाइयां स्टैक एमिशन और ओसीईएमएस नमूनाकरण/पोर्ट-होल स्थानों की निगरानी के लिए पीटीजेड कैमरों की स्थापना सुनिश्चित करेंगी।

औद्योगिक इकाइयां जहां भी लागू हो, फ्यूम एक्सट्रैक्शन सिस्टम क्षेत्रों की निगरानी के लिए भी पीटीजेड कैमरों की स्थापना सुनिश्चित करेंगी।

  • कैमरों की संख्या, स्थान और दृश्य क्षेत्र इस प्रकार पर्याप्त होने चाहिए कि वे संबंधित क्षेत्रों और कार्यों को प्रभावी ढंग से कवर कर सकें और कोई महत्वपूर्ण ब्लाइंड स्पॉट न हो। यदि एक कैमरा निर्धारित स्थानों को पर्याप्त रूप से कवर नहीं कर पाता है, तो अतिरिक्त कैमरे लगाए जाने चाहिए।

 

(ii) वास्तविक समय वीडियो निगरानी और कनेक्टिविटी

  • इस आदेश के तहत स्थापित किए गए सभी पीटीजेड कैमरों को सीपीसीबी और संबंधित एसपीसीबी/डीपीसीसी के निर्दिष्ट सर्वर/पोर्टल पर रियल टाइम स्ट्रीमिंग प्रोटोकॉल (आरटीएसपी) के माध्यम से वीडियो फीड के निरंतर, वास्तविक समय में प्रसारण की सुविधा होगी।
  • औद्योगिक इकाइयां यह सुनिश्चित करेंगी कि कैमरे और संबंधित संचार प्रणालियाँ काम करती रहें और दूरस्थ निगरानी के लिए संबंधित नियामक अधिकारियों को वीडियो फीड उपलब्ध हों।
  • कैमरों इस प्रकार स्थापित और संचालित किए जाएंगे जिससे रात के समय के संचालन सहित, जहां भी लागू हो, संबंधित परिचालनों की पर्याप्त स्पष्ट छवि और दृश्यता प्रदान कर सकें
  • (iii) पावर बैकअप और रखरखाव
  • सभी औद्योगिक इकाइयां पीटीजेड कैमरों, संचार उपकरणों और संबंधित कनेक्टिविटी प्रणालियों के लिए उपयुक्त पावर बैकअप सहित पर्याप्त और निर्बाध बिजली आपूर्ति सुनिश्चित करेंगी।
  • किसी भी खराबी या व्यवधान की स्थिति में, कैमरे और कनेक्टिविटी व्यवस्था के उचित संचालन, रखरखाव और समय पर बहाली की जिम्मेदार औद्योगिक इकाइयां होगी।
  • वीडियो प्रसारण में किसी भी प्रकार की दीर्घकालिक रुकावट या खराबी की सूचना तुरंत संबंधित एसपीसीबी/डीपीसीसी दी जाएगी, साथ ही किए गए सुधारात्मक कार्यों की जानकारी भी दी जाएगी।

(iv) अनुपालन समयसीमा

इस आदेश के अंतर्गत आने वाली सभी औद्योगिक इकाइयों को 30.11.2026 तक आवश्यक पीटीजेड कैमरों की स्थापना और संचालन सुनिश्चित करना होगा, जिसमें वीडियो फीड के वास्तविक समय प्रसारण की व्यवस्था भी शामिल है।

सीपीसीबी, संबंधित एसपीसीबी/डीपीसीसी के समन्वय से, उद्योगों से वास्तविक समय के वीडियो फीड प्राप्त करने और उन तक पहुंचने के लिए निर्दिष्ट पोर्टल, सर्वर और संबंधित बुनियादी ढांचे सहित आवश्यक तकनीकी व्यवस्था सुनिश्चित करेगा। संबंधित एसपीसीबी/डीपीसीसी अनुपालन की निगरानी करेंगे और अपने-अपने अधिकार क्षेत्र में इसके प्रभावी कार्यान्वयन को सुनिश्चित करेंगे।

हरियाणा, उत्तर प्रदेश और राजस्थान की संबंधित राज्य सरकारें और जीएनसीटीडी, सीपीसीबी और संबंधित एसपीसीबी/डीपीसीसी के साथ मिलकर इस आदेश का प्रभावी कार्यान्वयन सुनिश्चित करेंगे। इस आदेश के अंतर्गत निर्धारित आवश्यकताएं, आयोग, सीपीसीबी और अन्य प्राधिकरणों द्वारा लागू पर्यावरण कानूनों के तहत निर्धारित उत्सर्जन मानकों, अनुमोदित ईंधनों के उपयोग, ओसीईएमएस और अन्य प्रदूषण नियंत्रण उपायों से संबंधित मौजूदा निर्देशों के अतिरिक्त होंगी।

औद्योगिक उत्सर्जन, जिसमें चिमनियों से निकलने वाले कण पदार्थ (पीएम) और विभिन्न औद्योगिक प्रक्रियाओं से उत्पन्न होने वाले अनियंत्रित उत्सर्जन शामिल हैं, राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (एनसीआर) में वायु प्रदूषण में महत्वपूर्ण योगदान देते हैं। कण पदार्थ की सांद्रता को सीधे बढ़ाने के अलावा, औद्योगिक उत्सर्जन द्वितीयक कण पदार्थ के निर्माण में भी योगदान देते हैं, जिससे परिवेशी वायु गुणवत्ता पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है। ऐसे उत्सर्जनों का प्रभाव सर्दियों के महीनों में अधिक स्पष्ट हो जाता है, जब प्रतिकूल मौसम की स्थिति प्रदूषकों के फैलाव को सीमित कर देती है।

आयोग औद्योगिक वायु प्रदूषण को कम करने के लिए कई उपाय कर रहा है, जिनमें स्वच्छ ईंधन की ओर संक्रमण, प्रदूषणकारी ईंधनों पर प्रतिबंध और समय-समय पर कड़े उत्सर्जन मानकों का निर्धारण शामिल है। एनसीआर भर में औद्योगिक इकाइयों के निरीक्षण के दौरान आयोग के फ्लाइंग स्क्वाड ने अनधिकृत ईंधनों के उपयोग के मामले दर्ज किए हैं, जो अनुपालन निगरानी और पर्यवेक्षण तंत्र को मजबूत करने की आवश्यकता को दर्शाते हैं। तदनुसार, इस आदेश के साथ निगरानी तंत्र को और मजबूत किया गया है।

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