PIB Backgrounder
पंप स्टोरेज परियोजना
भारत को स्वच्छ नवीकरणीय ऊर्जा प्रदान करती हुई
प्रविष्टि तिथि:
19 OCT 2026 11:02AM by PIB Delhi
|
जैसे-जैसे स्वच्छ ऊर्जा भारत के बिजली क्षेत्र का परिदृश्य बदल रही है, वैसे-वैसे एक अत्यन्त महत्वपूर्ण तकनीक ऊर्जा के एक सशक्त नए भविष्य का मार्ग प्रशस्त कर रही है। अक्सर ‘वॉटर बैटरी’ के रूप में वर्णित पंप्ड स्टोरेज जल और गुरुत्वाकर्षण का उपयोग करके बिजली का भंडारण करता है। यह बिजली के उत्पादन और उसकी आवश्यकता के समय के बीच के अंतर को पाटता है। जलाशयों से लेकर आधुनिक विद्युत ग्रिड तक, यह तकनीक स्वच्छ, अधिक विश्वसनीय और सुदृढ़ ऊर्जा भविष्य के निर्माण में मदद कर रही है।
|
ऊर्जा भंडारण के साथ भारत के ऊर्जा भविष्य का निर्माण
भारत की नवीकरणीय ऊर्जा सुरक्षा और स्थिरता को मजबूत करने के लिए नवीकरणीय ऊर्जा पर तेजी से केन्द्रित हो रहा है। देश में बिजली की बढ़ती मांग को स्वच्छ स्रोतों के माध्यम से पूरा करने के लिए सौर और पवन ऊर्जा क्षमता का तेजी से विस्तार किया जा रहा है। जुलाई 2026 तक, भारत की स्थापित गैर-जीवाश्म ईंधन आधारित विद्युत उत्पादन क्षमता 300 गीगावाट के आंकड़े को पार कर चुकी है। वित्त वर्ष 2025–26 के दौरान भारत ने लगभग 55.29 गीगावाट गैर-जीवाश्म ईंधन आधारित क्षमता जोड़ी। भारत ने वर्ष 2030 तक गैर-जीवाश्म ईंधन आधारित क्षमता को 500 गीगावाट तक पहुंचाने का लक्ष्य भी निर्धारित किया है। इस लक्ष्य को हासिल करने में सौर और पवन ऊर्जा का महत्वपूर्ण योगदान होगा।
हालांकि, नवीकरणीय ऊर्जा का उत्पादन सूर्य के प्रकाश, मौसम और दैनिक मांग के स्वरूप के अनुसार बदलता रहता है। इस परिवर्तनशीलता के कारण उस समय बिजली का भंडारण करने की आवश्यकता बढ़ रही है, जब नवीकरणीय ऊर्जा का उत्पादन मांग से अधिक होता है। इसके बाद, नवीकरणीय ऊर्जा का उत्पादन कम होने या बिजली की मांग चरम पर पहुंचने के दौरान ऊर्जा भंडारण प्रणालियों के माध्यम से बिजली की आपूर्ति की जा सकती है।
नवीकरणीय ऊर्जा क्षमता के विस्तार के साथ ऊर्जा भंडारण की आवश्यकता भी तेजी से बढ़ने की संभावना है। केन्द्रीय विद्युत प्राधिकरण (सीईए) ने वित्त वर्ष 2031–32 तक 73.93 गीगावाट ऊर्जा भंडारण क्षमता की आवश्यकता का अनुमान लगाया है। इसमें 26.69 गीगावाट पंप्ड स्टोरेज परियोजनाओं (पीएसपी) और 47.24 गीगावाट बैटरी ऊर्जा भंडारण प्रणालियों (बीईएसएस) से प्राप्त क्षमता शामिल है।
दीर्घ अवधि के ऊर्जा भंडारण की इस आवश्यकता को पूरा करने में पंप्ड स्टोरेज परियोजनाएं महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती हैं। इन परियोजनाओं में अतिरिक्त बिजली उत्पादन की अवधि के दौरान पानी को पंप करके ऊपरी जलाशय में पहुंचाया जाता है। जब बिजली की मांग बढ़ती है, तो संग्रहित पानी को टर्बाइनों से गुजारा जाता है, जिससे बिजली उत्पन्न होती है। इस प्रकार, पंप्ड स्टोरेज परियोजनाएं नवीकरणीय ऊर्जा से उत्पन्न बिजली का उपयोग अलग-अलग समय पर करने में सक्षम बनाती हैं और विद्युत ग्रिड की स्थिरता बनाए रखने में सहायता करती हैं। ये परियोजनाएं दीर्घ अवधि के ऊर्जा भंडारण और अधिकतम मांग के समय बिजली की आपूर्ति में भी सहयोग देती हैं, जिससे बड़ी नवीकरणीय ऊर्जा क्षमता को ग्रिड में एकीकृत करने में इनका महत्व बढ़ जाता है।
|
ऊर्जा भंडारण के प्रकार
बैटरी ऊर्जा भंडारण प्रणालियां (बीईएसएस) और पंप्ड स्टोरेज परियोजनाएं (पीएसपी), नवीकरणीय ऊर्जा को विद्युत ग्रिड में एकीकृत करने के लिए एक-दूसरे की पूरक समाधान प्रदान करती हैं। बीईएसएस कम अवधि की आवश्यकताओं पर तेजी से प्रतिक्रिया दे सकती हैं तथा आवृत्ति विनियमन, अधिकतम मांग के प्रबंधन और ग्रिड संतुलन बनाए रखने में सहायता करती हैं। वहीं, पीएसपी दीर्घ अवधि के ऊर्जा भंडारण की सुविधा प्रदान करती हैं और अतिरिक्त बिजली उत्पादन तथा मांग की अवधि के बीच बड़ी मात्रा में बिजली के उपयोग को संभव बनाती हैं। बीईएसएस को अपेक्षाकृत कम समय में स्थापित किया जा सकता है और इन्हें नवीकरणीय ऊर्जा उत्पादन केन्द्रों या खपत केन्द्रों के निकट तैनात किया जा सकता है। पीएसपी के लिए उपयुक्त भौगोलिक परिस्थितियों की आवश्यकता होती है, लेकिन ये लंबे समय तक बड़े पैमाने पर ऊर्जा भंडारण उपलब्ध करा सकती हैं। इनका लंबा परिचालन जीवन भी विद्युत ग्रिड की अवसंरचना संबंधी दीर्घकालिक आवश्यकताओं को पूरा करने में सहायक है।
|
पंप्ड स्टोरेज परियोजनाओं (पीएसपी) को समझना: ऊर्जा भंडारण और आपूर्ति का चक्र
एक पंप्ड स्टोरेज परियोजना में आमतौर पर अलग-अलग ऊंचाइयों पर स्थित दो जलाशय होते हैं। अतिरिक्त बिजली उपलब्ध होने की अवधि के दौरान, पानी को निचले जलाशय से पंप करके ऊपरी जलाशय में पहुंचाया जाता है, जहां इसे संभावित ऊर्जा के रूप में संग्रहित किया जाता है। जब बिजली की आवश्यकता होती है, तो ऊपरी जलाशय से पानी को टर्बाइनों के माध्यम से छोड़ा जाता है, जिससे बिजली उत्पन्न होती है। मांग कम होने के बाद, अतिरिक्त बिजली उपलब्ध होने की अवधि में पानी को वापस ऊपरी जलाशय में पंप किया जाता है, जिससे भंडारण चक्र पूरा होता है। इस प्रकार, पंप्ड स्टोरेज परियोजनाएं बड़े पैमाने पर ऊर्जा भंडारण प्रणालियों के रूप में कार्य करती हैं तथा विद्युत ग्रिड की स्थिरता बनाए रखने और नवीकरणीय ऊर्जा को ग्रिड में एकीकृत करने में योगदान देती हैं।
पंप्ड स्टोरेज विद्युत संयंत्रों का वर्गीकरण
पंप्ड स्टोरेज परियोजनाओं (पीएसपी) का वर्गीकरण इस आधार पर किया जाता है कि उनके जलाशय प्राकृतिक जलधाराओं से किस प्रकार जुड़े हुए हैं या उनके सापेक्ष किस स्थिति में स्थित हैं। इन्हें तीन प्रकारों में वर्गीकृत किया जाता है: ऑन-स्ट्रीम, ऑफ-स्ट्रीम ओपन-लूप और ऑफ-स्ट्रीम क्लोज्ड-लूप योजनाएं। ये विभिन्न प्रकार की परियोजनाएं उनके जलाशयों और प्राकृतिक जलधाराओं के बीच संबंधों की भिन्नता को दर्शाती हैं।
ऑन-स्ट्रीम पंप्ड स्टोरेज योजनाओं में दोनों जलाशय किसी नदी, जलधारा या नाले पर स्थित होते हैं। बिजली की मांग को पूरा करने के लिए ऊपरी जलाशय में संग्रहित पानी को टर्बाइनों से गुजारा जाता है, जिससे बिजली उत्पन्न होती है। बिजली की मांग कम होने या अतिरिक्त बिजली उपलब्ध होने की अवधि के दौरान, पानी को पुनः उपयोग के लिए पंप करके ऊपरी जलाशय में वापस पहुंचाया जाता है।
ऑफ-स्ट्रीम ओपन-लूप पंप्ड स्टोरेज
ऑफ-स्ट्रीम ओपन-लूप पंप्ड स्टोरेज योजनाओं में एक जलाशय किसी नदी, जलधारा या नाले पर स्थित होता है। इसके विपरीत, दूसरा जलाशय किसी नदी, बारहमासी जलधारा या बारहमासी नाले पर स्थित नहीं होता है। बिजली की आवश्यकता होने पर, ऊपरी जलाशय से पानी टर्बाइनों के माध्यम से प्रवाहित होता है, जिससे बिजली उत्पन्न होती है। इसके बाद, अतिरिक्त बिजली का उपयोग पानी को वापस पंप करके ऊपरी जलाशय में पहुंचाने के लिए किया जाता है, जिससे प्रणाली अगले चक्र के लिए तैयार हो जाती है
ऑफ-स्ट्रीम क्लोज्ड-लूप पंप्ड स्टोरेज
ऑफ-स्ट्रीम क्लोज्ड-लूप पंप्ड स्टोरेज योजना में कोई भी जलाशय नदी, बारहमासी जलधारा या बारहमासी नाले पर स्थित नहीं होता है। दोनों जलाशय बारहमासी प्राकृतिक जलधाराओं से दूर स्थित होते हैं। बिजली की आवश्यकता होने पर, ऊपरी जलाशय से पानी टर्बाइनों के माध्यम से प्रवाहित होता है, जिससे बिजली उत्पन्न होती है। इसके बाद, बिजली की मांग कम होने या अतिरिक्त बिजली उपलब्ध होने की अवधि के दौरान, पानी को वापस पंप करके ऊपरी जलाशय में पहुंचाया जाता है।
पंप्ड स्टोरेज परियोजनाओं के इन तीनों प्रकारों की भूमिका स्थल-विशिष्ट भौगोलिक और तकनीकी परिस्थितियों पर निर्भर करती है। हालांकि, नदियों से दूर स्थित अधिक ऑफ-स्ट्रीम परियोजनाओं की पहचान करने के प्रयास किए जा रहे हैं, ताकि परियोजनाओं का क्रियान्वयन तेजी से किया जा सके और जलीय पारिस्थितिकी तथा आसपास के पर्यावरण पर पड़ने वाले प्रभावों को न्यूनतम किया जा सके।
ऊर्जा भंडारण का विस्तार: भारत में पंप्ड स्टोरेज की बढ़ती गति
भारत अपने बढ़ते नवीकरणीय ऊर्जा आधार को समर्थन देने के लिए पंप्ड स्टोरेज क्षमता का तेजी से विस्तार कर रहा है। इस दिशा में विकास कार्य परिचालन, निर्माण और निर्माण-पूर्व चरणों में आगे बढ़ रहे हैं। परियोजनाओं की यह विस्तारित श्रृंखला भारत के दीर्घ-अवधि ऊर्जा भंडारण संबंधी अवसंरचना को सुदृढ़ कर रही है।
- परिचालन क्षमता: अगस्त 2026 तक, भारत में 10 परियोजनाओं के अंतर्गत 7.43 गीगावाट की पंप्ड स्टोरेज परियोजना (पीएसपी) क्षमता परिचालन में है। इन परियोजनाओं की स्थापित क्षमता 25 मेगावाट से अधिक है।
- निर्माणाधीन/कार्यान्वयन के चरण में: देशभर में 11 पंप्ड स्टोरेज परियोजनाओं के अंतर्गत 15.87 गीगावाट की अतिरिक्त क्षमता निर्माणाधीन और/या कार्यान्वयन के चरण में है।
- अगले चरण की परियोजनाएँ: केन्द्रीय विद्युत प्राधिकरण (सीईए) द्वारा 8 परियोजनाओं के अंतर्गत 10.40 गीगावाट क्षमता की परियोजनाओं पर सहमति दी गई है या उनका मूल्यांकन किया गया है।
भारत में क्षेत्रीय विविधता के साथ पंप्ड स्टोरेज की संभावनाएँ

भारत में कुल 345.38 गीगावाट की संयुक्त संभावित क्षमता वाली 320 पंप्ड स्टोरेज परियोजनाओं की पहचान की गई है। इनमें 56.67 गीगावाट क्षमता वाली 62 ऑन-स्ट्रीम परियोजनाएँ और 288.71 गीगावाट क्षमता वाली 258 ऑफ-स्ट्रीम परियोजनाएँ शामिल हैं। ये परियोजनाएँ देश के सभी पाँच क्षेत्रों में फैली हुई हैं और विकास के विभिन्न चरणों में हैं। इनमें पहले से परिचालन में आ चुकी परियोजनाएँ भी शामिल हैं।
पंप्ड स्टोरेज परियोजनाओं (पीएसपी) के विकास और स्थलों की उपयुक्तता के आकलन के लिए कई तकनीकी एवं पर्यावरणीय पहलुओं का मूल्यांकन आवश्यक है। इनमें स्थलाकृति, भूविज्ञान, जलविज्ञान, जलाशयों की विशेषताएँ, नींव की स्थिति, भूकंपीय गतिविधियाँ और पर्यावरण संबंधी पहलू शामिल हैं। परियोजनाओं के मूल्यांकन के दौरान निर्माण सामग्री, विद्युत उत्पादन की संभावनाओं और पारेषण नेटवर्क से कनेक्टिविटी की भी जाँच की जाती है। पश्चिमी क्षेत्र में 129.72 गीगावाट की सर्वाधिक चिह्नित संभावित क्षमता है। केंद्रीय विद्युत प्राधिकरण (सीईए) के अनुसार, इसका प्रमुख कारण पश्चिमी घाट से निकलने वाली नदियों की स्थलाकृतिक विशेषताएँ और तीव्र ढाल हैं। महाराष्ट्र में 67.36 गीगावाट की संभावित क्षमता है, जिसके बाद गुजरात 33.36 गीगावाट के साथ दूसरे स्थान पर है।
दक्षिणी क्षेत्र में 97.76 गीगावाट की संभावित क्षमता है, जिसमें आंध्र प्रदेश, तेलंगाना और तमिलनाडु का प्रमुख योगदान है। पूर्वी क्षेत्र में 53.41 गीगावाट की क्षमता है, जिसमें ओडिशा की हिस्सेदारी 41.53 गीगावाट है। उत्तरी क्षेत्र में 50.32 गीगावाट की क्षमता है, जिसमें उत्तर प्रदेश और हिमाचल प्रदेश का प्रमुख योगदान है। पूर्वोत्तर क्षेत्र का चिह्नित राष्ट्रीय संभावित क्षमता में 14.18 गीगावाट का योगदान है। सामूहिक रूप से, इन क्षेत्रीय संसाधनों से भारत में पंप्ड स्टोरेज के विकास की व्यापक संभावनाओं और देशभर में इसके विस्तृत भौगोलिक विस्तार का पता चलता है।
पंप्ड स्टोरेज परियोजनाओं की अनुमानित क्षमता वृद्धि
यह व्यापक संसाधन आधार दीर्घ-अवधि ऊर्जा भंडारण के विस्तार के लिए एक मजबूत नींव प्रदान करता है। इसी को ध्यान में रखते हुए, केन्द्रीय विद्युत प्राधिकरण ने वर्ष 2035-36 तक क्षमता में उल्लेखनीय वृद्धि की रूपरेखा तैयार की है। वर्ष 2035-36 तक कुल 100.81 गीगावाट क्षमता वाली परियोजनाओं को चालू किए जाने की परिकल्पना की गई है। इसमें निर्माणाधीन परियोजनाएँ भी शामिल हैं। इससे पंप्ड स्टोरेज परियोजनाओं (पीएसपी) की संचयी क्षमता बढ़कर 105.56 गीगावाट हो जाएगी। नियोजित विस्तार ग्रिड के लचीलेपन की क्षमता में उल्लेखनीय वृद्धि कर सकता है और वर्तमान बिजली ग्रिड में स्वच्छ ऊर्जा का अधिक हिस्सा शामिल किया जा सकता है। इससे भारत की भावी विद्युत प्रणाली में पंप्ड स्टोरेज की भूमिका एक महत्त्वपूर्ण स्तंभ के रूप में और मजबूत होगी।
|
वर्ष
|
क्षमता में वृद्धि (गीगावाट)
|
संचयी क्षमता (गीगावाट)
|
|
2024-25 तक
|
–
|
4.745
|
|
2025-26
|
2.68
|
7.425
|
|
2026-27
|
2.92
|
10.345
|
|
2027-28
|
1.6
|
11.945
|
|
2028-29
|
6.35
|
18.295
|
|
2029-30
|
13.5
|
31.795
|
|
2030-31
|
21.19
|
52.985
|
|
2031-32
|
8.8
|
61.785
|
|
2032-33
|
14.59
|
76.375
|
|
2033-34
|
11.88
|
88.255
|
|
2034-35
|
5.7
|
93.955
|
|
2035-36
|
11.6
|
105.555
|
|
कुल
|
100.81
|
|

|
विश्व में पंप्ड स्टोरेज परियोजनाओं की स्थापित क्षमता
पंप्ड स्टोरेज जलविद्युत, बड़े पैमाने पर ऊर्जा भंडारण का विश्व में सबसे व्यापक रूप से उपयोग किया जाने वाला स्वरूप है। यह अन्य ऊर्जा भंडारण प्रौद्योगिकियों की तुलना में अपने स्थापित पैमाने और परिपक्वता को दर्शाता है। अंतरराष्ट्रीय नवीकरणीय ऊर्जा एजेंसी (आईआरईएनए) के अनुसार, वर्ष 2025 के अंत में विश्व में पंप्ड हाइड्रो स्टोरेज की कुल स्थापित क्षमता 159.8 गीगावाट थी। इसमें चीन की हिस्सेदारी लगभग 66 गीगावाट थी। इसके बाद जापान और अमेरिका क्रमशः लगभग 22 गीगावाट और 19 गीगावाट की स्थापित क्षमता के साथ दूसरे और तीसरे स्थान पर थे। भारत पंप्ड स्टोरेज की स्थापित क्षमता के मामले में विश्व में चौथे स्थान पर है। वर्ष 2025 के अंत में भारत की स्थापित क्षमता 7.18 गीगावाट थी। जुलाई 2026 तक देश की यह क्षमता बढ़कर 7.43 गीगावाट हो गई, जो वैश्विक पंप्ड स्टोरेज परिदृश्य में भारत की बढ़ती भूमिका को रेखांकित करती है।
|
सरकार ने पंप्ड स्टोरेज परियोजनाओं के विकास और कार्यान्वयन को बढ़ावा देने के लिए नीतिगत, नियामक, मांग-पक्षीय और आपूर्ति-पक्षीय उपायों की एक श्रृंखलाबद्ध पहल की है।
- समर्पित पंप्ड स्टोरेज परियोजनाओं के लिए दिशानिर्देश: विद्युत मंत्रालय ने अप्रैल 2023 में भारत में पंप्ड स्टोरेज परियोजनाओं के विकास को बढ़ावा देने संबंधी दिशानिर्देश अधिसूचित किए। ये दिशानिर्देश पंप्ड स्टोरेज परियोजनाओं के विकास में तेजी लाने के लिए एक नीतिगत ढाँचा प्रदान करते हैं।
ये दिशानिर्देश पंप्ड स्टोरेज परियोजनाओं (PSP) के विकास में तेजी लाने के लिए एक नीतिगत ढाँचा प्रदान करते हैं। दिशा-निर्देश देखने के लिए यहां क्लिक करें Click to Access Guidelines
- सहायक बुनियादी ढांचे के लिए सहयोग: बजटीय सहायता के अंतर्गत पंप्ड स्टोरेज परियोजनाओं के विकास के लिए आवश्यक बुनियादी ढांचा उपलब्ध कराया जाता है। इसमें सड़कें, पुल, रेलवे साइडिंग, रोपवे, संचार सुविधाएँ और पारेषण लाइनें शामिल हैं। इन उपायों से परियोजनाओं की कनेक्टिविटी बेहतर होती है और उनकी व्यवहार्यता मजबूत होती है।
- प्रतिस्पर्धी खरीद ढाँचा: फरवरी 2025 में टैरिफ-आधारित प्रतिस्पर्धी बोली (टीबीसीबी) संबंधी दिशानिर्देश अधिसूचित किए गए। ये दिशानिर्देश पंप्ड स्टोरेज परियोजनाओं से भंडारण क्षमता और भंडारित ऊर्जा की खरीद के लिए एक पारदर्शी एवं मानकीकृत ढाँचा प्रदान करते हैं।
- अंतरराज्यीय पारेषण प्रणाली शुल्क में छूट: 30 जून 2028 तक निर्माण के लिए आवंटित पंप्ड स्टोरेज परियोजनाएँ 100 प्रतिशत आईएसटीएस शुल्क छूट के लिए पात्र हैं। यह छूट वाणिज्यिक परिचालन शुरू होने की तारीख से 25 वर्षों तक लागू होगी। इस उपाय से पंप्ड स्टोरेज परियोजनाओं की वित्तीय व्यवहार्यता मजबूत होती है।
- परियोजना अनुमोदन में तेजी: केन्द्रीय विद्युत प्राधिकरण (सीईए) के संशोधित दिशानिर्देशों के तहत विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (डीपीआर) पर सहमति देने की समय-सीमा कम कर दी गई है। सभी पंप्ड स्टोरेज परियोजनाओं के लिए यह अवधि 90 दिनों से घटाकर 50 दिन कर दी गई है। अंतरराज्यीय पहलुओं से संबंधित मंजूरी की आवश्यकता भी समाप्त कर दी गई है। इन उपायों से परियोजनाओं के विकास में तेजी लाने में मदद मिलती है।
- पर्यावरणीय मूल्यांकन प्रक्रिया को सुव्यवस्थित करना: पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय ने पंप्ड स्टोरेज परियोजनाओं के लिए अलग-अलग श्रेणियों के अनुरूप मूल्यांकन संबंधी प्रावधान लागू किए हैं। पात्र परियोजनाओं को लागू प्रावधानों के तहत बी2 श्रेणी में वर्गीकृत किए जाने का लाभ मिल सकता है। ऑफ-स्ट्रीम परियोजनाओं के लिए आधारभूत आँकड़ों से संबंधित आवश्यकताओं को भी कम किया गया है। इन उपायों से नियामकीय सुरक्षा उपायों को बनाए रखते हुए पर्यावरणीय मूल्यांकन में तेजी लाई जा सकती है।
- सर्वेक्षण एवं अन्वेषण को सुगम बनाना: पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय (एमओईएफऔरसीसी) ने पंप्ड स्टोरेज परियोजनाओं के लिए वन भूमि सर्वेक्षण संबंधी प्रावधानों का विस्तार किया है और बोरहोल अन्वेषण की सीमा बढ़ाई है। इससे तकनीकी रूप से सुदृढ़ विस्तृत परियोजना रिपोर्ट समय पर तैयार करने में मदद मिलती है।
- एकीकृत ग्रिड एवं पारेषण योजना: राष्ट्रीय विद्युत योजना में ऊर्जा भंडारण और पारेषण के विकास को एकीकृत किया गया है। यह दृष्टिकोण नवीकरणीय ऊर्जा की परिवर्तनशीलता से निपटने, ग्रिड में भीड़भाड़ कम करने और उसकी विश्वसनीयता मजबूत करने में सहायक है। एक रूपरेखा के तहत वर्ष 2025-26 से 2035-36 के बीच 100 गीगावाट पंप्ड स्टोरेज क्षमता को एकीकृत करने की परिकल्पना की गई है।
- डिजिटल परियोजना निगरानी: केन्द्रीय विद्युत प्राधिकरण का जल विद्युत डीपीआर पोर्टल सर्वेक्षण एवं अन्वेषण गतिविधियों की वास्तविक समय में निगरानी करने में सक्षम बनाता है। यह परियोजना की तैयारी के दौरान विभिन्न हितधारकों के बीच समन्वय को भी सुगम बनाता है। इस डिजिटल व्यवस्था से अनुमोदन प्रक्रिया को सुव्यवस्थित करने और पंप्ड स्टोरेज परियोजनाओं के विकास में तेजी लाने में मदद मिलती है।
- सीईए की सहमति के लिए आवश्यक पूंजीगत व्यय की सीमा की समीक्षा: भारत सरकार ने 1 अगस्त 2025 की राजपत्र अधिसूचना के माध्यम से जलविद्युत उत्पादन केन्द्रों की स्थापना से संबंधित योजनाओं के लिए पूंजीगत व्यय की सीमा संशोधित कर 3,000 करोड़ रुपये कर दी है। इस सीमा के अंतर्गत आने वाली योजनाओं के लिए केन्द्रीय विद्युत प्राधिकरण (सीईए) की सहमति आवश्यक है। इसके अतिरिक्त, ऑफ-स्ट्रीम क्लोज्ड-लूप पंप्ड स्टोरेज योजनाओं को पूंजीगत व्यय की राशि पर ध्यान दिए बिना सीईए की सहमति प्राप्त करने की आवश्यकता से छूट दी गई है।
नीतिगत स्पष्टता, वित्तीय सहायता, मंजूरी प्रक्रियाओं को सुव्यवस्थित करने, प्रतिस्पर्धी खरीद और एकीकृत ग्रिड योजना से जुड़े इन उपायों ने पंप्ड स्टोरेज परियोजनाओं (पीएसपी) के त्वरित विकास के लिए अनुकूल वातावरण तैयार किया है।
नवीकरणीय ऊर्जा की अगली अनिवार्य आवश्यकता
भारत का वर्ष 2030 तक 500 गीगावाट गैर-जीवाश्म ईंधन आधारित क्षमता हासिल करने का लक्ष्य देश के विद्युत परिदृश्य में एक बुनियादी बदलाव का प्रतीक है। जैसे-जैसे नवीकरणीय ऊर्जा की भूमिका बढ़ रही है, वैसे-वैसे एक विश्वसनीय और संतुलित विद्युत प्रणाली बनाए रखने के लिए ऊर्जा का भंडारण करने तथा माँग के अनुरूप उसकी आपूर्ति करने की क्षमता का महत्त्व भी बढ़ता जाएगा। पंप्ड स्टोरेज जलविद्युत इस आवश्यकता को पूरा करने के लिए उपयुक्त स्थिति में है। यह बड़े पैमाने पर दीर्घ-अवधि ऊर्जा भंडारण की सुविधा प्रदान करने के साथ-साथ विद्युत प्रणाली की व्यापक आवश्यकताओं को पूरा करने में भी सहायक है। इसकी भूमिका अधिकतम माँग के प्रबंधन और परिवर्तनशील नवीकरणीय ऊर्जा के एकीकरण से लेकर ग्रिड के लचीलेपन एवं लचीलापन क्षमता को मजबूत करने तक विस्तृत है। स्वच्छ ऊर्जा का इकोसिस्टम निरंतर विकसित हो रहा है। ऐसे में, उत्पादन और पारेषण अवसंरचना के साथ ऊर्जा भंडारण का प्रभावी उपयोग एक ऐसी विद्युत प्रणाली के निर्माण में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाएगा, जो अधिक स्वच्छ, अधिक लचीली और भविष्य की आवश्यकताओं के लिए तैयार हो।
संदर्भ :
विद्युत मंत्रालय
· https://www.pib.gov.in/PressReleasePage.aspx?PRID=2286558&lang=1®=3&utm_source
· https://www.pib.gov.in/PressReleasePage.aspx?PRID=2286558&lang=1®=3
· https://www.pib.gov.in/PressReleasePage.aspx?PRID=2293896&lang=2®=48&utm_source
· https://www.pib.gov.in/PressReleasePage.aspx?PRID=2047047&lang=2®=48&utm_source
· https://www.pib.gov.in/PressReleasePage.aspx?PRID=2290015®=48&lang=2
नवीन और नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय
· https://mnre.gov.in/en/physical-progress/
· https://www.pib.gov.in/newsite/erelcontent.aspx?lang=2®=48&relid=293063&utm_source
केन्द्रीय विद्युत प्राधिकरण
राष्ट्रीय ताप बिजली निगम लिमिटेड
- https://ntpc.co.in/media/employee-blog/role-water-batteries-energy-transition-and-green-energy-integration-india?utm_source
अंतर्राष्ट्रीय नवीकरणीय ऊर्जा एजेंसी
पीआईबी रिसर्च
हिंदी PDF फ़ाइल के लिए यहाँ क्लिक करें
****
पीके/केसी/आरटी/केपी
(रिलीज़ आईडी: 2325001)
आगंतुक पटल : 182