नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय
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भारत ने वैश्विक दक्षिण में पहली बार एग्रीवोल्टाइक्स विश्व सम्मेलन 2026 की मेजबानी की


केंद्रीय कृषि मंत्री और केंद्रीय नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा मंत्री ने संयुक्त रूप से एग्रीवोल्टाइक्स विश्व सम्मेलन 2026 का उद्घाटन किया

एग्रीवोल्टाइक्स नीतियाँ भारत के छोटे और सीमांत किसानों की व्यावहारिक आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए बनाई जानी चाहिए: श्री चौहान

पीएम-कुसुम का अगला चरण कृषि क्षेत्र में सौर ऊर्जा का और अधिक विस्तार करेगा: श्री जोशी

प्रविष्टि तिथि: 21 OCT 2026 5:40PM by PIB Delhi

भारत के केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान और केंद्रीय नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा, शिक्षा तथा उपभोक्ता मामले, खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण मंत्री श्री प्रल्हाद जोशी ने आज यहाँ तीन दिवसीय एग्रीवोल्टाइक्स विश्व सम्मेलन 2026 का संयुक्त रूप से उद्घाटन किया।

उद्घाटन सत्र को संबोधित करते हुए कृषि मंत्री ने इस बात पर जोर दिया कि माननीय प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में किसान खेती के साथ-साथ सौर ऊर्जा अपनाकर अन्नदाता और ऊर्जादाता दोनों बन सकते हैं। श्री चौहान ने इस बात को रेखांकित किया कि कृषि और सौर ऊर्जा का एकीकरण वैश्विक कल्याण को बढ़ावा देने के साथ-साथ किसानों की आर्थिक समृद्धि को भी बढ़ा सकता है। उन्होंने जोर दिया कि एग्रीवोल्टाइक्स (कृषि-फोटोवोल्टिक) संबंधी नीतियाँ भारत के छोटे और सीमांत किसानों की व्यावहारिक आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए बनाई जानी चाहिए, जो देश के कुल कृषक समुदाय का 85 प्रतिशत से अधिक हिस्सा हैं।

श्री चौहान ने बताया कि एग्रीवोल्टाइक्स के अंतर्गत कृषि भूमि के ऊपर लगाए गए पैनलों के माध्यम से सौर ऊर्जा का उत्पादन किया जाता है, जबकि फसलों की खेती भी जारी रहती है। उन्होंने कहा कि बिजली आधुनिक जीवन और कृषि के लिए अपरिहार्य हो गई है, जिससे ऊर्जा उत्पादन को खेती के साथ एकीकृत करना किसानों के कल्याण की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम बन गया है।

कृषि क्षेत्र में भारत की प्रगति को रेखांकित करते हुए, मंत्री महोदय ने याद दिलाया कि पहले देश अपनी खाद्य सुरक्षा संबंधी आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए खाद्यान्न आयात पर निर्भर था। उन्होंने कहा कि अब भारत के खाद्यान्न भंडार में गेहूँ और चावल पर्याप्त मात्रा में उपलब्ध हैं, जो किसानों के योगदान को दर्शाता है। उन्होंने आगे बताया कि कृषि क्षेत्र ने 4.5 प्रतिशत की विकास दर बनाए रखी है और कृषि निर्यात बढ़कर 52.55 अरब अमेरिकी डॉलर के रिकॉर्ड स्तर पर पहुँच गया है।

केंद्रीय कृषि मंत्री ने कृषि क्षेत्र के समक्ष मौजूद संरचनात्मक चुनौतियों की ओर ध्यान आकर्षित करते हुए कहा कि देश में औसत जोत का आकार केवल 0.96 हेक्टेयर है। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि एग्रीवोल्टाइक्स मॉडल ऐसे होने चाहिए, जिनमें खेती को सौर ऊर्जा उत्पादन से प्रतिस्थापित करने के बजाय किसान खेती जारी रख सकें।

उन्होंने ऐसे व्यावहारिक प्रणाली अभिकल्पों की आवश्यकता पर बल दिया, जिनमें पैनलों की ऊँचाई, सहायक संरचनाओं के बीच की दूरी और कृषि मशीनरी की आवाजाही का ध्यान रखा जाए, जिससे किसान अपनी आवश्यकताओं के अनुसार जुताई करने तथा फसलों और फसल प्रारूपों में बदलाव करने में सक्षम हों।

श्री चौहान ने मृदा अपरदन को रोकने और जल के इष्टतम उपयोग को सुनिश्चित करने के लिए वर्षा जल की प्रभावी निकासी और संचयन की व्यवस्था की आवश्यकता पर भी बल दिया। उन्होंने ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार के अवसर सृजित करने के लिए किसान उत्पादक संगठनों (एफपीओ) की सक्रिय भागीदारी तथा उपकरणों के संचालन, मरम्मत और रख-रखाव के लिए ग्रामीण युवाओं और महिलाओं को प्रशिक्षण देने की भी पैरवी की।

केंद्रीय नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा मंत्री श्री प्रल्हाद जोशी ने अपने संबोधन में आर्थिक विकास के साथ-साथ स्वच्छ ऊर्जा क्षमता के विस्तार में भारत की प्रगति को रेखांकित किया। उन्होंने बताया कि भारत की गैर-जीवाश्म ईंधन आधारित संस्थापित विद्युत क्षमता बढ़कर 308.03 गीगावाट हो गई है, जो देश की लगभग 560 गीगावाट की कुल संस्थापित विद्युत क्षमता के 55 प्रतिशत से अधिक है।

नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा मंत्री ने माननीय प्रधानमंत्री के दूरदर्शी नेतृत्व में भारत के व्यापक आर्थिक और तकनीकी परिवर्तन को रेखांकित किया

खाद्य सुरक्षा, ऊर्जा आवश्यकताओं और भूमि की उपलब्धता के बीच संतुलन के महत्व पर जोर देते हुए, मंत्री महोदय ने एग्रीवोल्टाइक्स को एक ऐसे दृष्टिकोण के रूप में वर्णित किया, जिससे किसान एक ही भूमि पर खेती और विद्युत उत्पादन, दोनों से आय अर्जित कर सकते हैं। उन्होंने “एक भूमि, दो फसलें” के सिद्धांत को दोहराया

उन्होंने द एनर्जी एंड रिसोर्सेज़ इंस्टीट्यूट (टेरी) के एक अध्ययन का उल्लेख किया, जिसके अनुसार 4.75 करोड़ हेक्टेयर भूमि, यानी भारत की 16 करोड़ हेक्टेयर कृषि भूमि का लगभग 30 प्रतिशत हिस्सा, तकनीकी रूप से एग्रीवोल्टाइक्स के लिए उपयुक्त था। 1.6 करोड़ हेक्टेयर भूमि पर एग्रीवोल्टाइक्स की स्थापना के एक परिदृश्य में वार्षिक विद्युत उत्पादन 12,775 टेरावाट-घंटे होने का अनुमान लगाया गया था, जो वर्ष 2050 तक भारत की 5,250–10,020 टेरावाट-घंटे की अनुमानित विद्युत मांग के बराबर या उससे अधिक हो सकता है। मंत्री महोदय ने उल्लेख किया कि ये तकनीकी अनुमान थे और वास्तविक स्थापना स्थानीय परिस्थितियों तथा व्यवहार्यता पर निर्भर करेगी। महाराष्ट्र, राजस्थान, आंध्र प्रदेश, मध्य प्रदेश, कर्नाटक और उत्तर प्रदेश में भारत की अनुमानित एग्रीवोल्टाइक्स क्षमता का लगभग 50 प्रतिशत हिस्सा था

श्री जोशी ने रेखांकित किया कि एग्रीवोल्टाइक्स को विभिन्न कृषि गतिविधियों के अनुरूप अपनाया जा सकता है, जिनमें फल एवं बागान फसलें, सब्जियाँ, मसाले, उद्यानिकी, पुष्पकृषि और चारा उत्पादन के साथ-साथ उपयुक्त परिस्थितियों में पशुपालन भी शामिल हैं। उन्होंने बताया कि क्षेत्रीय अध्ययनों से संकेत मिले हैं कि उपयुक्त प्रणालियों के अंतर्गत कुछ फसलों की उपज में 10–20 प्रतिशत तक की वृद्धि और जल की खपत में लगभग 30 प्रतिशत तक कमी की संभावना है

मंत्री महोदय ने कृषि अवसंरचना को विद्युत ग्रिड की योजना के साथ एकीकृत करने की संभावनाओं पर भी प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना के अंतर्गत 7.70 लाख से अधिक भू-टैग की गई ग्रामीण सुविधाओं का मानचित्रण किया गया है और प्रधानमंत्री किसान संपदा योजना के अंतर्गत 400 से अधिक एकीकृत शीत श्रृंखला परियोजनाओं को मंजूरी दी गई है। उन्होंने सुझाव दिया कि कृषि सुविधाओं के मानचित्रों को ग्रिड अवसंरचना के साथ एकीकृत किया जा सकता है, जिससे मंडियों, गोदामों और शीत श्रृंखलाओं के निकट उपयुक्त परियोजना स्थलों की पहचान की जा सके, जिससे रसद व्यवस्था और परियोजनाओं की व्यवहार्यता में सुधार हो सके।

कृषि क्षेत्र में सौर ऊर्जा के विस्तार के लिए किए जा रहे मौजूदा प्रयासों पर प्रकाश डालते हुए, श्री जोशी ने बताया कि पीएम-कुसुम योजना के अंतर्गत विकेंद्रीकृत सौर ऊर्जा संयंत्रों, स्टैंडअलोन सौर पंपों और मौजूदा ग्रिड से जुड़े पंपों के सौरकरण, जिसमें फीडर स्तर पर सौरकरण भी शामिल है, को सहायता प्रदान की गई है। उन्होंने विकेंद्रीकृत सौर क्षमता के योगदान को भी रेखांकित किया, जो पिछले वर्ष 16.3 गीगावाट तक पहुंच गई थी। इसमें पीएम-कुसुम योजना के अंतर्गत 7.6 गीगावाट और रूफटॉप सौर ऊर्जा के अंतर्गत 8.7 गीगावाट क्षमता शामिल थी। रूफटॉप सौर ऊर्जा का विस्तार मुख्यतः पीएम सूर्य घर मुफ्त बिजली योजना के माध्यम से हुआ, जिसके लाभार्थियों की संख्या 63 लाख से अधिक हो गई थी

मंत्री महोदय ने घोषणा की कि पीएम-कुसुम योजना के अगले चरण के अंतर्गत विश्व के सबसे महत्वाकांक्षी एग्रीवोल्टाइक्स कार्यक्रमों में से एक शुरू किया जाएगा। उन्होंने कहा कि इस पहल से मौजूदा कृषि कार्यक्रमों के साथ इस योजना का तालमेल स्थापित करके कृषि क्षेत्र में सौर ऊर्जा का और अधिक विस्तार करने का अवसर मिलेगा। उन्होंने उल्लेख किया कि ऊंची और झुकी हुई संरचनाओं के कारण एग्रीवोल्टेइक संयंत्रों की लागत पारंपरिक जमीन पर स्थापित सौर संयंत्रों की तुलना में 25–30 प्रतिशत अधिक हो सकती है और सरकार का उद्देश्य एग्रीपीवी क्षमता सृजन को सहायता प्रदान करके लागत के इस अंतर को कम करना है

श्री जोशी ने बताया कि वर्ष 2025–26 में विद्युत आपूर्ति की औसत लागत लगभग ₹7 प्रति यूनिट रही, जबकि कुछ एग्रीवोल्टाइक्स आकलनों में विशिष्ट मान्यताओं के आधार पर ₹3.20–₹3.30 प्रति यूनिट की संभावित विद्युत उत्पादन लागत का संकेत मिला। उन्होंने रेखांकित किया कि प्रतिस्पर्धी परियोजना डिजाइन और वित्तपोषण मॉडल एग्रीवोल्टाइक्स को व्यावसायिक रूप से व्यवहार्य बनाने में मदद कर सकते हैं

अंतरराष्ट्रीय अनुभवों का उल्लेख करते हुए, मंत्री महोदय ने बताया कि वर्ष 2025 में वैश्विक एग्रीवोल्टाइक्स बाजार की संस्थापित क्षमता 18.4 गीगावाट से अधिक हो गई थी। उन्होंने इटली के किसानों, सौर ऊर्जा विकासकर्ताओं और अनुसंधान संस्थानों के लिए 1.7 अरब यूरो के वित्तपोषण कार्यक्रम; जापान द्वारा सभी श्रेणियों की कृषि भूमि पर एग्रीवोल्टाइक्स की अनुमति देने और रियायती टैरिफ के माध्यम से छोटी प्रणालियों को सहायता प्रदान करने; तथा जर्मनी द्वारा सहायता को कृषि उपयोग जारी रखने और न्यूनतम फसल उपज संबंधी आवश्यकताओं से जोड़ने की पहल को रेखांकित किया।

उन्होंने इस क्षेत्र में रोजगार सृजन की संभावनाओं पर भी प्रकाश डाला। विज्ञान, प्रौद्योगिकी एवं नीति अध्ययन केंद्र की एग्रीपीवी पुस्तिका के अनुसार, एग्रीवोल्टाइक्स से 1.10 लाख से 3.32 लाख तक पूर्णकालिक समतुल्य रोजगार सृजित हो सकते हैं, जिससे कृषि उत्पादकता, कौशल विकास, उद्यमिता और ग्रामीण रोजगार को बढ़ावा मिलेगा

मंत्री महोदय ने वैश्विक दक्षिण की आवश्यकताओं के अनुरूप एग्रीवोल्टाइक्स समाधान विकसित करने में अंतरराष्ट्रीय साझेदारियों के महत्व पर जोर दिया। उन्होंने जर्मन साझेदारों, एग्रीवोल्टाइक्स पर भारत-जर्मनी सहयोग, अंतरराष्ट्रीय सौर गठबंधन और इस क्षेत्र को आगे बढ़ाने के लिए कार्यरत अन्य संस्थानों के योगदान को स्वीकार किया। उन्होंने उल्लेख किया कि अफ्रीका, एशिया और लैटिन अमेरिका के देशों को छोटे और सीमांत किसानों, जल संकट, विश्वसनीय स्वच्छ ऊर्जा तथा किफायती प्रौद्योगिकियों से जुड़ी समान चुनौतियों का सामना करना पड़ता है। उन्होंने परस्‍पर सीखने और स्थानीय परिस्थितियों के अनुरूप समाधानों पर आधारित सहयोग का आह्वान किया।

श्री जोशी ने वैश्विक एग्रीवोल्टाइक्स जलवायु-क्षेत्र तकनीकी रूपरेखा के शुभारंभ को इस प्रौद्योगिकी को व्यापक रूप से अपनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम बताया। इस रूपरेखा का उद्देश्य सरकारों, किसानों, विकासकर्ताओं, शोधकर्ताओं और वित्तपोषकों को सोच-समझकर निर्णय लेने, तकनीकी मानक स्थापित करने तथा अलग-अलग प्रायोगिक परियोजनाओं से आगे निकलकर, व्यापक स्तर पर कार्यान्वयन की दिशा में बढ़ने में सहायता प्रदान करना था।

नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय के सचिव, श्री संतोष कुमार सारंगी ने कृषि क्षेत्र में सौर ऊर्जा को बढ़ावा देने में पीएम-कुसुम योजना के योगदान को रेखांकित किया। उन्होंने बताया कि इस कार्यक्रम के अंतर्गत लगभग 25 लाख पंप सेटों का सौरकरण किया गया है, जिससे लगभग 25 लाख किसानों को लाभ हुआ है और वे डीजल से चलने वाले पंपों के स्थान पर सौर ऊर्जा से चलने वाले पंपों का उपयोग कर सके हैं। उन्होंने डीजल की खपत कम करने और कच्चे तेल के आयात पर विदेशी मुद्रा व्यय घटाने में भी इस कार्यक्रम के योगदान को रेखांकित किया

श्री सारंगी ने बताया कि मंत्रालय किसानों की प्रगति, आय सृजन और आजीविका में सुधार पर व्यापक ध्यान केंद्रित करते हुए पीएम-कुसुम योजना के अगले चरण को विकसित करने के लिए कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय के साथ मिलकर कार्य कर रहा है। उन्होंने अंतरराष्ट्रीय और राष्ट्रीय संस्थानों के साथ साझेदारी के महत्व पर जोर दिया तथा बड़े पैमाने पर एग्रीवोल्टाइक्स को बढ़ावा देने के लिए विद्युत वितरण कंपनियों और राज्य ऊर्जा विभागों की भागीदारी से उपयुक्त विद्युत क्रय मॉडल विकसित करने के लिए जारी प्रयासों को रेखांकित किया।

उद्घाटन समारोह में नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा तथा विद्युत राज्य मंत्री श्री श्रीपाद येसो नाइक, भारत सरकार के कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय के सचिव श्री अतिश चंद्र और अन्य गणमान्य व्यक्ति उपस्थित थे। इस तीन दिवसीय विश्व सम्मेलन का समापन 23 अक्टूबर, 2026 को होगा

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