सामाजिक न्‍याय एवं अधिकारिता मंत्रालय
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पीएम दक्ष योजना के तहत 2020-21 से 2023-24 के दौरान 1,87,305 उम्मीदवारों को प्रशिक्षित किया गया और 96,162 को रोजगार दिलाया गया


2024-25 से, पीएम दक्ष का एमएसडीई की पीएमकेवीवाई योजना में विलय कर दिया गया है

मूल्यांकन अध्ययन की रिपोर्ट के अनुसार, 90% से अधिक लाभार्थियों ने पाया कि उनका प्रशिक्षण उनके करियर लक्ष्यों और स्थानीय श्रम बाजार की जरूरतों के अनुरूप था

प्रविष्टि तिथि: 22 OCT 2026 7:29PM by PIB Delhi

'प्रधानमंत्री दक्षता और कुशलता संपन्न हितग्राही' (पीएम दक्ष) एक केंद्रीय क्षेत्र की योजना है। इसे 2020-21 में शुरू किया गया था। इसका उद्देश्य अनुसूचित जातियों (एससी), अन्य पिछड़ा वर्गों (ओबीसी), आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों (ईडब्लूएस), गैर-अधिसूचित जनजातियों (डीएनटी) और सफाई कर्मचारियों (जिसमें कचरा बीनने वाले भी शामिल हैं) को कौशल प्रशिक्षण देना है। यह प्रशिक्षण सूचीबद्ध प्रशिक्षण संस्थानों के माध्यम से दिया जाता है, ताकि इन लोगों के सामाजिक-आर्थिक विकास के लिए उन्हें स्वरोजगार और वेतन-आधारित रोजगार पाने में मदद मिल सके।

मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि इस योजना को सामाजिक न्याय और अधिकारिता विभाग (डीओएसजेई) के तीन निगमों द्वारा लागू किया गया था। ये निगम हैं: राष्ट्रीय अनुसूचित जाति वित्त एवं विकास निगम (एनएसएफडीसी), राष्ट्रीय पिछड़ा वर्ग वित्त एवं विकास निगम (एनबीसीएफडीसी), और राष्ट्रीय सफाई कर्मचारी वित्त एवं विकास निगम (एनएसकेडीसी)।

अधिकारी ने बताया कि 2024-25 से, पीएम दक्ष को एमएसडीई के पीएमकेवीवाई में विलय करने का निर्णय लिया गया है। चूंकि पीएम दक्ष, पीएमकेवीवाई के अतिरिक्त एक योजना थी और इसमें कौशल प्रशिक्षण के लिए सभी रोजगार भूमिकाएं 'स्किल इंडिया डिजिटल हब' (एसआईडीएच) पोर्टल से ली गयी थीं, जो पहले से ही पीएमकेवीवाई के अंतर्गत आते हैं, इसलिए काम के दोहराव से बचने के लिए पीएम दक्ष को पीएमकेवीवाई में शामिल कर लिया गया।

अधिकारी ने बताया कि सामाजिक न्याय और अधिकारिता विभाग इन निगमों को कोष जारी करता है। ये निगम, योजना के दिशा-निर्देशों और कार्य-आदेश के अनुसार, कौशल विकास और उद्यमिता मंत्रालय (एमएसडीई) की 'प्रधानमंत्री कौशल विकास योजना' (पीएमकेवीवाई) के तहत सूचीबद्ध प्रशिक्षण संस्थानों को प्रशिक्षण की लागत का भुगतान करते हैं।

उन्होंने बताया कि प्रशिक्षण पूरा होने के बाद, संस्थानों को कम से कम 70% प्रशिक्षित उम्मीदवारों को वेतन-आधारित रोजगार या स्वरोजगार दिलाना अनिवार्य है। यदि यह शर्त पूरी नहीं होती है, तो प्रशिक्षण लागत का 30% हिस्सा, जो तीसरी किस्त के रूप में होता है, जब्त कर लिया जाता है। प्रशिक्षण संस्थानों के लिए यह भी अनिवार्य है कि वे संबंधित उद्योगों के साथ तालमेल बनाए रखें, ताकि प्रशिक्षित उम्मीदवारों को रोजगार के अवसर मिल सकें। अधिकारी ने बताया कि ये तीनों निगम लक्षित समूह के पात्र युवाओं को उनकी परियोजना शुरू करने के लिए ऋण की सुविधा और सहायता देते हैं, साथ ही उन्हें हर कदम पर मार्गदर्शन व सहयोग भी प्रदान करते हैं।

अधिकारी ने बताया कि 2020-21 से 2023-24 तक पीएम दक्ष के लिए कुल 276.47 करोड़ रुपये आवंटित किए गए थे, जबकि अब तक कुल 309.5 करोड़ रुपये खर्च हो चुके हैं। 2020-21 से 2023-24 के दौरान 1,87,305 उम्मीदवारों को प्रशिक्षण दिया गया और 96,162 उम्मीदवारों को रोजगार दिलाया गया।

अधिकारी ने कहा कि पीएम-दक्ष योजना के मूल्यांकन अध्ययन से पता चलता है कि यह योजना बहुत प्रासंगिक और सीखने में प्रभावी है। 90% से अधिक लाभार्थियों ने बताया कि उनका प्रशिक्षण, उनके करियर लक्ष्यों और स्थानीय श्रम बाजार की जरूरतों के अनुरूप है, और उन्होंने अपने सीखने के उद्देश्य भी हासिल किए हैं। अधिकारी ने आगे कहा कि इसके प्रभाव के परिणाम बताते हैं कि लाभार्थियों, खासकर महिलाओं और वंचित समूहों को गैर-आर्थिक लाभ भी हुए हैं, जैसे विश्वास में बढ़ोतरी, आत्म-सम्मान और सामाजिक मान्यता। स्थायित्व के परिणाम भी काफी सकारात्मक हैं, क्योंकि अधिकांश लाभार्थी प्राप्त कौशलों का उपयोग जारी रख रहे हैं, दीर्घकालिक आय वृद्धि की उम्मीद कर रहे हैं, विकास में पुनः निवेश कर रहे हैं और सुधार को स्वतंत्र रूप से बनाए रखने में सक्षम महसूस कर रहे हैं।

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