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प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने ओडिशा के भुवनेश्वर में आरबीआई के नवनिर्मित डेटा सेंटर और साइबर सुरक्षा प्रशिक्षण संस्थान का उद्घाटन किया


एक अधिक सुरक्षित वित्तीय प्रणाली की ओर एक बड़ा कदम; भुवनेश्वर में आरबीआई की नई सुविधाएं डिजिटल बुनियादी ढांचे और साइबर सुरक्षा क्षमताओं को मजबूत करेंगी: प्रधानमंत्री

महाप्रभु के आशीर्वाद से, आज भुवनेश्वर नए भारत को एक नया संस्थान दे रहा है; भुवनेश्वर में आरबीआई के डेटा सेंटर और साइबर सुरक्षा प्रशिक्षण संस्थान दोनों का उद्घाटन एक महत्वपूर्ण अवसर है; यह ओडिशा के लोगों और देश के लिए बहुत फायदेमंद होगा: प्रधानमंत्री

हम जन-हितैषी, सक्रिय और सुशासन के मॉडल से प्रेरित हैं; हमारे लिए विकास का अर्थ भारत की न्यायसंगत प्रगति है, जहाँ अवसर हमारे गाँवों और छोटे शहरों तक एक समान पहुँचें: प्रधानमंत्री

आज डिजिटल बैंकिंग ने हर भारतीय को 24 घंटे की बैंकिंग सेवाओं से जोड़ दिया है: प्रधानमंत्री

आज जिनके पास बैंक को गारंटी के रूप में देने के लिए कुछ भी नहीं है, वे भी किफायती और सुलभ ऋण प्राप्त करके अपना काम शुरू करने में सक्षम हैं; छोटे उद्यमियों से लेकर पारंपरिक कारीगरों तक, रेहड़ी-पटरी वालों से लेकर असंगठित क्षेत्र के श्रमिकों तक, पहली बार उन्हें औपचारिक बैंकिंग का लाभ मिला है: प्रधानमंत्री

बीता दशक उन लोगों तक बैंकिंग पहुँचाने का था जो इससे वंचित थे; आने वाला दशक बैंकिंग को अधिक कुशल और अधिक विश्वसनीय बनाने का है: प्रधानमंत्री

आजकल केवल हथियारों से ही युद्ध नहीं लड़े जाते; किसी राष्ट्र को उसकी अर्थव्यवस्था पर हमला करके भी कमजोर किया जा सकता है, और जैसे-जैसे भारत आर्थिक रूप से मजबूत हो रहा है, हमें अपने बैंकिंग तंत्र को साइबर लुटेरों और साइबर आतंकियों से बचाना होगा: प्रधानमंत्री

प्रविष्टि तिथि: 25 OCT 2026 7:29PM by PIB Delhi

प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने आज ओडिशा के भुवनेश्वर में भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) के नवनिर्मित डेटा सेंटर और साइबर सुरक्षा प्रशिक्षण संस्थान का उद्घाटन किया। महाप्रभु जगन्नाथ के आशीर्वाद का स्मरण करते हुए, प्रधानमंत्री ने नए भारत को भुवनेश्वर द्वारा एक महत्वपूर्ण नया संस्थान समर्पित किए जाने पर प्रसन्नता व्यक्त की। उन्होंने इन दोनों सुविधाओं का शुभारंभ करने के लिए आरबीआई और इससे जुड़े सभी लोगों को बधाई दी। श्री मोदी ने कहा, "यह ओडिशा के लोगों और पूरे देश के लिए अत्यंत लाभदायक सिद्ध होगा।"

उद्घाटन के व्यापक महत्व को रेखांकित करते हुए, प्रधानमंत्री ने कहा कि यह कार्यक्रम देश के प्रशासनिक दृष्टिकोण में आए एक मौलिक बदलाव को दर्शाता है। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि आज के दौर का सुशासन विकास को प्राथमिकता देने, इसके दायरे का विस्तार करने और अंतिम व्यक्ति तक सुविधाएं (लास्ट-माइल डिलीवरी) पहुँचाने पर आधारित है। प्रधानमंत्री श्री मोदी ने कहा,"आज का कार्यक्रम इस बात का प्रमाण है कि भारत में गवर्नेंस का तरीका किस तरह बदला है।"

प्रधानमंत्री ने जन-केंद्रित और सक्रिय सुशासन के उस मॉडल की चर्चा की, जो संतुलित क्षेत्रीय विकास, गरीबों के सम्मान और यह सुनिश्चित करने पर केंद्रित है कि कोई भी नागरिक पीछे न छूटे। उन्होंने कहा कि आज एक्सप्रेसवे छोटे शहरों को आपस में जोड़ रहे हैं, एम्स जैसे संस्थानों का अनेक राज्यों में विस्तार हुआ है, छोटे शहरों में मेडिकल कॉलेज खोले जा रहे हैं, गांवों में लगभग 1.75 लाख आयुष्मान आरोग्य मंदिर स्थापित किए जा चुके हैं और दूरदराज के क्षेत्रों में डिजिटल कनेक्टिविटी का विस्तार हो रहा है। श्री मोदी ने जोर देते हुए कहा, “नागरिकों के जीवन को आसान बनाना और उनके सपनों को नए अवसर प्रदान करना ही अब सुशासन का वास्तविक उद्देश्य है।”

प्रधानमंत्री ने रेखांकित किया कि 1960 और 1970 के दशक में गरीबों के कल्याण के नाम पर बैंकों का राष्ट्रीयकरण किए जाने के बावजूद, 2014 तक आधी से अधिक आबादी बैंकिंग व्यवस्था से बाहर थी। उस समय मध्यम वर्ग के लिए बैंक से ऋण लेना दूर का सपना था, जबकि छोटे किसानों, भूमिहीनों और महिलाओं के लिए इसकी कल्पना करना भी मुश्किल था। उन्होंने कहा कि वित्तीय समावेशन के आधुनिक दौर ने देशभर में इस स्थिति को बदल दिया है। प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने कहा, “आज भारत में डिजिटल बैंकिंग ने हर किसी को 24 घंटे बैंकिंग सेवाओं से जोड़ दिया है।”

श्री मोदी ने जोर देते हुए कहा, “आज डिजिटल बैंकिंग के माध्यम से देश का हर परिवार लाभार्थी बन गया है।” प्रधानमंत्री ने कहा कि अब सरकारी सहायता के वितरण में होने वाली किसी भी तरह की लीकेज पूरी तरह समाप्त हो गई है। उन्होंने स्पष्ट किया कि केंद्र सरकार की ओर से जारी किया जाने वाला एक-एक रुपया अब बिना किसी कटौती के सीधे लाभार्थी के खाते में पहुंचता है। प्रधानमंत्री श्री मोदी ने कहा, “यह देश में खोले गए लगभग 60 करोड़ जनधन खातों के कारण ही संभव हो पाया है।”

प्रधानमंत्री ने इस बात पर जोर दिया कि अब बिना किसी संपत्ति को गिरवी (कोलैटरल) रखे भी लोग अपना कारोबार शुरू करने के लिए किफायती दरों पर औपचारिक ऋण (फॉर्मल क्रेडिट) प्राप्त कर सकते हैं। उन्होंने बताया कि लक्षित योजनाओं और पहलों के माध्यम से छोटे उद्यमी, पारंपरिक कारीगर, रेहड़ी-पटरी वाले और असंगठित क्षेत्र के श्रमिक आगे बढ़ रहे हैं। उन्होंने कहा कि मुद्रा योजना के तहत 13 करोड़ लोग पहली बार उद्यमी बने, पीएम स्वनिधि और पीएम विश्वकर्मा योजनाओं के माध्यम से लाखों रेहड़ी-पटरी वालों और कुशल कारीगरों को औपचारिक ऋण मिला तथा एक करोड़ ग्रामीण महिलाओं का प्रतिनिधित्व करने वाले स्वयं सहायता समूहों को बैंकों से हजारों करोड़ रुपये की वित्तीय सहायता प्राप्त हुई। श्री मोदी ने कहा, “पहली बार उन्हें औपचारिक बैंकिंग व्यवस्था का लाभ मिला है।”

प्रधानमंत्री ने कहा कि एक समय डेबिट और क्रेडिट कार्ड केवल संपन्न लोगों तक सीमित थे, लेकिन आज करोड़ों रुपे कार्डों के माध्यम से ये सुविधाएं हर नागरिक तक पहुंच गई हैं। उन्होंने कहा कि रुपे कार्ड आत्मसम्मान और आत्मनिर्भरता का प्रतीक बन गए हैं। प्रधानमंत्री ने इस बदलाव में बैंकिंग क्षेत्र की महत्वपूर्ण भूमिका की सराहना करते हुए भारतीय रिजर्व बैंक, वाणिज्यिक बैंकों और देशभर के प्रत्येक बैंक कर्मचारी के सामूहिक प्रयासों की प्रशंसा की। प्रधानमंत्री श्री मोदी ने सराहना करते हुए कहा, “इस गौरव के आप सभी सहभागी हैं।”

‘नागरिक देवो भव’ के मंत्र से प्रेरित होकर आर्थिक सशक्तीकरण के साथ सामाजिक सुरक्षा के दायरे में अभूतपूर्व विस्तार का उल्लेख करते हुए प्रधानमंत्री ने बताया कि अटल पेंशन योजना के तहत 9 करोड़ नागरिकों को कवर किया जा रहा है, जिनमें ओडिशा के 38 लाख लोग शामिल हैं। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री सुरक्षा बीमा योजना के तहत मात्र 20 रुपये के वार्षिक प्रीमियम पर 2 लाख रुपये का दुर्घटना बीमा और प्रधानमंत्री जीवन ज्योति बीमा योजना के तहत 450 रुपये से कम के वार्षिक प्रीमियम पर जीवन बीमा उपलब्ध कराया जा रहा है। इन योजनाओं ने बीमा जैसी सुविधा, जो कभी लग्जरी मानी जाती थी, गरीबों और मध्यम वर्ग के लोगों के लिए भी सुलभ बना दी है। प्रधानमंत्री ने रेखांकित किया कि अन्य सरकारें ऐसे बीमा दावों के भुगतान को बड़े प्रचार और सुर्खियों का विषय बनातीं, जबकि कठिन समय में परिवारों को 25,000 करोड़ रुपये से अधिक की दावा राशि बिना किसी शोर-शराबे के वितरित की जा चुकी है। श्री मोदी ने जोर देकर कहा, “यही सुशासन है।”

प्रधानमंत्री ने कहा कि पिछले दशक में बैंकिंग सुविधाओं से वंचित लोगों को बैंकिंग व्यवस्था से जोड़ने पर ध्यान केंद्रित किया गया, जबकि आने वाला दशक ओडिशा के नए डेटा सेंटर और मजबूत कंप्यूटिंग प्रणालियों की मदद से बैंकिंग सेवाओं को अधिक कुशल और विश्वसनीय बनाने के लिए समर्पित है। उन्होंने आगाह किया कि आधुनिक युद्ध के तौर-तरीकों में बदलाव के साथ साइबर खतरों के जरिए अर्थव्यवस्थाओं को निशाना बनाया जा रहा है। प्रधानमंत्री ने जोर दिया कि उभरती आर्थिक शक्ति के रूप में भारत को अपनी वित्तीय प्रणाली को साइबर लुटेरों और साइबर आतंकवादियों से सुरक्षित रखना होगा। इसके लिए पुराने प्रशिक्षण साधनों को आधुनिक बुनियादी ढांचे और कुशल मानव संसाधन से सुसज्जित करना आवश्यक है। श्री मोदी ने कहा, “ऐसे में इस नए साइबर सुरक्षा संस्थान की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण हो जाती है।”

प्रधानमंत्री ने विकसित भारत के निर्माण में पूर्वी भारत को विकास का एक सशक्त इंजन बताते हुए कहा कि ओडिशा में वर्तमान सरकार के नेतृत्व में विकास कार्यों को नई गति मिली है। उन्होंने कहा कि राज्य अपने पारंपरिक खनिज-आधारित उद्योगों के साथ-साथ सेमीकंडक्टर, इलेक्ट्रॉनिक्स, डेटा सेंटर और उन्नत कंप्यूटिंग के नए इकोसिस्टम को विकसित कर रहा है। इस तरह ओडिशा खदानों से लेकर माइक्रोचिप तक की विकास यात्रा के माध्यम से अपने भविष्य के बड़े अवसर बना रहा है। प्रधानमंत्री ने विश्वास व्यक्त किया कि विकास के ये उभरते क्षेत्र व्यापक अवसरों के द्वार खोलेंगे और ओडिशा के युवाओं के बड़े सपनों को साकार करने में मदद करेंगे। उन्होंने पर्व-त्योहार के अवसर पर सभी को शुभकामनाएं देते हुए जय जगन्नाथ के उद्घोष के साथ अपना संबोधन समाप्त किया। श्री मोदी ने विश्वासपूर्वक कहा, “आप देखेंगे, ओडिशा खदानों से माइक्रोचिप तक की यात्रा के जरिए एक नया भविष्य लिखने जा रहा है।”

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