प्रविष्टि तिथि:
26 OCT 2026 11:33AM by PIB Delhi
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इमर्सिव टेक्नोलॉजीज़ का भारत के शिक्षा, उद्योग और रचनात्मक क्षेत्रों में विस्तार हो रहा है। सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय, मुंबई में इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ क्रिएटिव टेक्नोलॉजीज़ (आईआईसीटी) जैसी पहलों के माध्यम से एनीमेशन, विजुअल इफेक्ट्स, गेमिंग, कॉमिक्स एंड एक्सटेंडेड रियलिटी (एवीजीसी-एक्सआर) इकोसिस्टम को बढ़ावा दे रहा है। एक राष्ट्रीय उत्कृष्टता केंद्र के रूप में स्थापित आईआईसीटी, रचनात्मक शिक्षा, कौशल विकास और नवाचार को सुदृढ़ करने के लिए गूगल, मेटा, एडोबी और नेटफ्लिक्स सहित वैश्विक प्रौद्योगिकी कंपनियों के साथ मिलकर कार्य करता है। इस इकोसिस्टम को और अधिक सहायता देने के लिए, केंद्रीय बजट 2026–27 में 250 करोड़ रुपये की राशि आवंटित की गई, ताकि समूचे भारत में 15,000 माध्यमिक विद्यालयों और 500 महाविद्यालयों में एवीजीसी कॉन्टेंट क्रिएटर लैब स्थापित की जा सकें।
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डिजिटल से इमर्सिव की ओर: भारत की अगली छलांग

पिछले दशक में, भारत ने एक ऐसा मजबूत डिजिटल इकोसिस्टम विकसित किया है, जिसने प्रौद्योगिकी के साथ लोगों की दैनिक गतिविधियों और संवाद के तरीकों को बदल दिया है। यूपीआई, आधार, डिजिलॉकर, उमंग और भाषिणी जैसे प्लेटफॉर्मों ने सेवाओं और सूचनाओं तक पहुँच का विस्तार किया है। जिस तरह डिजिटल प्लेटफॉर्म अधिक व्यापक होते जा रहे हैं, अगला अवसर इन संवादों को और अधिक परस्पर संवादात्मक, दृश्यात्मक और अनुभव आधारित बनाने में निहित है। कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई), हाई स्पीड कनेक्टिविटी और कंप्यूटिंग के क्षेत्र में हुई तीव्र प्रगति केवल डिजिटल सेवाओं तक पहुँच तक सीमित न रहकर उनका प्रत्यक्ष अनुभव कर पाने को संभव बना रही है। इस बारे में विस्तार से पढ़ने के लिए - इंडियाज डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर और ट्रांसफॉर्मिंग इंडिया विद एआई पर क्लिक कीजिए
यह उभरता चरण इमर्सिव टेक्नोलॉजीज़ द्वारा आकार ले रहा है, जो डिजिटल कॉन्टेंट को लोगों की वास्तविक दुनिया के अनुभव के और करीब लाती हैं। वर्चुअल रियलिटी, ऑगमेंटेड रियलिटी , मिक्स्ड रियलिटी और 360-डिग्री एक्सपीरिएंस परस्पर संवादात्मक वातावरण का निर्माण कर सकते हैं और उपयोगकर्ताओं को डिजिटल कॉन्टेंट के साथ नए तरीकों से जुड़ने में सक्षम बना सकते हैं। ये क्षमताएँ वर्चुअल सिमुलेशन के माध्यम से शिक्षा, इमर्सिव प्रशिक्षण के माध्यम से स्वास्थ्य सेवा और आभासी भ्रमण के माध्यम से पर्यटन के क्षेत्र में बदलाव ला सकती हैं। इसके अतिरिक्त, ये संस्कृति, गेमिंग, मनोरंजन, खुदरा व्यापार और अन्य क्षेत्रों में अधिक आकर्षक अनुभव प्रदान कर सकती हैं। इस प्रकार, इमर्सिव टेक्नोलॉजीज़ पारंपरिक स्क्रीन आधारित संवाद से आगे बढ़कर भारत के मौजूदा डिजिटल इकोसिस्टम के प्रभाव और पहुँच का विस्तार कर सकती हैं।
इस अवसर की व्यापकता भारत के तेजी से बढ़ते इमर्सिव टेक्नोलॉजी बाजार में परिलक्षित होती है। इस बाजार से वर्ष 2023 में 1,259.5 मिलियन डॉलर का राजस्व प्राप्त हुआ था और वर्ष 2030 तक इसके 29.8 प्रतिशत सीएजीआर की दर से बढ़कर 7,818.7 मिलियन डॉलर तक पहुँचने का अनुमान है। अपने डिजिटल इकोसिस्टम, बढ़ते मध्यम वर्ग और ई कॉमर्स को अपनाने में वृद्धि होने के कारण भारत के एशिया प्रशांत क्षेत्र का सबसे तेजी से बढ़ने वाला क्षेत्रीय बाजार बनने का अनुमान है। यह वृद्धि भारत के लिए केवल एक बड़ा बाजार होने से आगे बढ़कर इमर्सिव टेक्नोलॉजी के वैश्विक केंद्र के रूप में उभरने का अवसर प्रस्तुत करती है। अनुसंधान, स्टार्टअप, प्रतिभा, कॉन्टेंट और स्वदेशी प्रौद्योगिकियों के क्षेत्र में क्षमताओं का विकास भारत को इमर्सिव अनुभवों की अगली पीढ़ी को आकार देने तथा वैश्विक डिजिटल अर्थव्यवस्था में अपनी स्थिति मजबूत करने में सहायता कर सकता है।
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Creative Minds, Catalyzing Science, Empowering Technologies
भारत के उभरते विज्ञान, प्रौद्योगिकी और नवाचार सम्मेलन का दूसरा संस्करण, ईएसटीआईसी 2026, नई दिल्ली के भारत मंडपम में 27 से 29 अक्टूबर 2026 तक आयोजित किया जाएगा। यह सम्मेलन “रचनात्मक मस्तिष्क, विज्ञान को गति प्रदान करना और प्रौद्योगिकियों को सशक्त बनाना” विषय के अंतर्गत आयोजित होगा। वैज्ञानिक एवं औद्योगिक अनुसंधान परिषद (सीएसआईआर) द्वारा आयोजित ईएसटीआईसी 2026 में विभिन्न मंत्रालयों, शोधकर्ताओं, नवाचारकर्ताओं, उद्योग जगत के दिग्गजों, डीप टेक स्टार्टअप और वैश्विक विशेषज्ञों को एक साथ लाया जाएगा, ताकि उभरते विज्ञान और प्रौद्योगिकी को आगे बढ़ाया जा सके। इस सम्मेलन में इमर्सिव टेक: जनरेटिव एक्सआर और स्पेशियल कंप्यूटिंग सहित 12 विषयगत क्षेत्र शामिल होंगे। इस कार्यक्रम के तहत पूर्ण सत्र, तकनीकी चर्चाएँ और प्रदर्शनियाँ आयोजित की जाएँगी। कार्यक्रम की रूपरेखा के बारे में अधिक जानने के लिए देखिए : ईएसटीआईसी 2026
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इमर्सिव टेक्नोलॉजीज़ को समझना

इमर्सिव टेक्नोलॉजीज़ उभरती हुई प्रौद्योगिकियों का एक समूह हैं, जो परस्पर संवादात्मक, आकर्षक और वास्तविक अनुभव प्रदान करने वाले डिजिटल वातावरण का निर्माण करती हैं। इमर्सिव टेक्नोलॉजीज़ वास्तविक और डिजिटल दुनिया को एक साथ जोड़ सकती हैं। इनके माध्यम से उपयोगकर्ता डिजिटल कॉन्टेंट के साथ अधिक स्वाभाविक और अनुभवात्मक तरीके से जुड़ सकते हैं। उपयोगकर्ता डिजिटल वस्तुओं के साथ परस्पर संवाद कर सकते हैं और कृत्रिम रूप से निर्मित परिस्थितियों पर प्रतिक्रिया दे सकते हैं। पारंपरिक डिजिटल मीडिया के विपरीत, ये प्रौद्योगिकियाँ इंद्रियों को विभिन्न स्तरों पर सक्रिय कर सकती हैं और किसी वातावरण में वास्तव में उपस्थित होने का अधिक सशक्त अनुभव प्रदान करती हैं। उदाहरण के लिए, कोई विद्यार्थी केवल स्क्रीन पर चित्र देखने के बजाय एक आभासी प्रयोगशाला का अन्वेषण कर सकता है। इसी प्रकार, कोई पर्यटक किसी ऐतिहासिक धरोहर स्थल पर वास्तविक रूप से जाने से पहले उसका आभासी भ्रमण कर सकता है। इमर्सिव टेक्नोलॉजी के तीन सबसे सामान्य प्रकार वर्चुअल रियलिटी (वीआर), ऑगमेंटेड रियलिटी (एआर) और मिक्स्ड रियलिटी (एमआर) हैं । सामूहिक रूप से, इन प्रौद्योगिकियों को अक्सर एक्सटेंडेड रियलिटी (एक्सआर) कहा जाता है।
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एक्सटेंडेड रियलिटी (एक्सआर)
एक्सटेंडेड रियलिटी (एक्सआर) का आशय उन प्रौद्योगिकियों से है, जो कंप्यूटर प्रणालियों और पहनने योग्य उपकरणों के माध्यम से वास्तविक और डिजिटल वातावरण को एक साथ जोड़ती हैं। यह लोगों और डिजिटल कॉन्टेंट के बीच परस्पर संवाद के विभिन्न स्तरों का निर्माण करती है। एक्सआर में वर्चुअल रियलिटी (वीआर), ऑगमेंटेड रियलिटी (एआर) और मिक्स्ड रियलिटी (एमआर) शामिल हैं।
- वर्चुअल रियलिटी (वीआर) पूरी तरह से डिजिटल वातावरण का निर्माण करती है, जो उपयोगकर्ता को चारों ओर से घेर लेता है। यह मुख्य रूप से दृष्टि और ध्वनि इंद्रियों को सक्रिय करके वास्तविक रूप से उस वातावरण में मौजूद होने का सशक्त अनुभव प्रदान करती है। उपयोगकर्ता विशेष उपकरणों की सहायता से इस कृत्रिम वातावरण का अन्वेषण और उसके साथ परस्पर संवाद कर सकते हैं।
- ऑगमेंटेड रियलिटी (एआर) उपयोगकर्ता के मौजूदा भौतिक परिवेश में डिजिटल जानकारी जोड़ती है। यह वास्तविक दुनिया के वातावरण को दृश्यमान रखते हुए दृष्टि और ध्वनि को सक्रिय कर सकती है। उदाहरण के लिए, एआर वास्तविक दुनिया पर दिशाओं, सूचना या डिजिटल वस्तुओं को प्रदर्शित कर सकती है।
- मिक्स्ड रियलिटी (एमआर) एक परस्पर संवादात्मक वातावरण में वास्तविक और डिजिटल दुनियाओं का संयोजन करती है। यह दृष्टि और ध्वनि, दोनों इंद्रियों को सक्रिय कर सकती है तथा डिजिटल वस्तुओं को वास्तविक परिवेश के साथ परस्पर क्रिया करने में सक्षम बनाती है। उपयोगकर्ता डिजिटल वस्तुओं को इस प्रकार देख सकते हैं और उनके साथ अंतःक्रिया कर सकते हैं, मानो वे वास्तविक परिवेश का ही हिस्सा हों।
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360-डिग्री वीडियो और हैप्टिक टेक्नोलॉजी जैसी अन्य संबंधित तकनीकें भी व्यापक इमर्सिव टेक्नोलॉजी इकोसिस्टम का हिस्सा हैं। 360-डिग्री वीडियो उपयोगकर्ताओं को किसी दृश्य को सभी दिशाओं में देखने की सुविधा प्रदान करती है। उपयोगकर्ता देखने की दिशा बदल सकते हैं और रिकॉर्ड किए गए वातावरण के विभिन्न हिस्सों का अन्वेषण कर सकते हैं। हैप्टिक टेक्नोलॉजी स्पर्श आधारित प्रतिक्रिया प्रदान करने के लिए कंपन, दबाव या अन्य शारीरिक संवेदनाओं का उपयोग करती है। यह आभासी या परस्पर संवादात्मक अनुभवों के दौरान शारीरिक संवेदनाओं का अनुकरण करके डिजिटल गतिविधियों को अधिक वास्तविक महसूस कराने में मदद करती है।
अनुभव की दुनिया में कदम: भारत इमर्सिव टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल कैसे कर रहा है
आईआईटी मद्रास के शोधकर्ता ग्रामीण विद्यालयों के लिए एआर / वीआर सक्षम शिक्षण समाधान विकसित कर रहे हैं। इस पहल में माध्यमिक विद्यालयों के विद्यार्थियों के लिए शिक्षण और सीखने की प्रक्रिया को बेहतर बनाने हेतु डिजिटल प्रौद्योगिकियों का उपयोग किया जा रहा है। इसका उद्देश्य ऐसे इमर्सिव, वीआर आधारित शिक्षण वातावरण तैयार करना है, जहाँ विद्यार्थी इतिहास, सामाजिक विज्ञान, विज्ञान और भाषाओं जैसे विषयों का अध्ययन परस्पर संवादात्मक अनुभवों के माध्यम से कर सकें।
ये प्रौद्योगिकियाँ कक्षा में सीखने की प्रक्रिया को अधिक रोचक बना सकती हैं। उदाहरण के लिए, एआर आधारित मोबाइल एप्लिकेशन एनिमेटेड तस्वीरों, इंटरैक्टिव मानचित्रों और ऐतिहासिक अभिलेखों के माध्यम से भारत के 500 वर्षों के इतिहास को जीवंत रूप में प्रस्तुत कर सकता है। इसी प्रकार, वीआर सिमुलेशन विद्यार्थियों को सौरमंडल का अन्वेषण करने या त्रि-आयामी मॉडलों के माध्यम से मानव शरीर का अध्ययन करने की सुविधा प्रदान कर सकते हैं। अमूर्त अवधारणाओं को दृश्य रूप में समझना आसान बनाकर, ये दृष्टिकोण सीखने की प्रक्रिया को अधिक समृद्ध कर सकते हैं और विद्यार्थियों को उच्च शिक्षा के लिए तैयार करने में सहायता कर सकते हैं।
भारत की सांस्कृतिक विरासत को अधिक सुलभ और आकर्षक बनाने के लिए सरकार एक्सटेंडेड रियलिटी (एक्स आर) तथा अन्य डिजिटल प्रौद्योगिकियों का उपयोग कर रही है। संस्कृति मंत्रालय ने संग्रहालयों में आगंतुकों के अनुभव को बेहतर बनाने और संग्रहालयों के संग्रह से संबंधित जानकारी को संरक्षित करने के लिए डिजिटल उपकरणों को अपनाया है। जतन सॉफ्टवेयर ऐसा ही एक उपकरण है, जो संग्रहालय की कलाकृतियों और उनसे संबंधित अभिलेखों का डिजिटलीकरण करने में सहायता करता है। जतन का उपयोग करके अब तक आठ राष्ट्रीय स्तर के संग्रहालयों और भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) के दो संग्रहालयों का डिजिटलीकरण किया जा चुका है। म्यूजियम्स ऑफ इंडिया नामक डिजिटल संग्रह के माध्यम से इनके संग्रह देखे जा सकते हैं, जिससे लोग भारत की विरासत का ऑनलाइन अन्वेषण कर सकते हैं।
इस डिजिटल आधार को आगे बढ़ाते हुए, संग्रहालय आगंतुकों के लिए परस्पर संवादात्मक अनुभव भी प्रस्तुत कर रहे हैं। इंडियन म्यूज़ियम, कोलकाता ने दीर्घाओं के भ्रमण को अधिक समृद्ध बनाने के लिए एआई आधारित इंटरैक्टिव सुविधाएँ और एआर उपकरण शुरू किए हैं। इसने डिजिटल टेक्नोलॉजी के माध्यम से सांस्कृतिक विरासत को प्रदर्शित करने वाली एक आभासी प्रदर्शनी के लिए गूगल आर्ट्स एंड कल्चर के साथ भी सहयोग किया है। इसी प्रकार, कर्नाटक के हम्पी और बिहार के नालंदा स्थित एएसआई के संग्रहालय अपने संग्रहों का मोबाइल आधारित आभासी भ्रमण करने की सुविधा प्रदान करते हैं। ये पहल आगंतुकों को डिजिटल माध्यम से कलाकृतियों का अन्वेषण करने में सहायता करती हैं, जिससे संग्रहालय परिसर से बाहर भी सांस्कृतिक अनुभव अधिक आकर्षक और सुलभ बनते हैं। इंडियन म्यूज़ियम, कोलकाता के वर्चुअल टूर के लिए क्लिक करें
इमर्सिव टेक्नोलॉजीज़ भारत में अवसंरचना की योजना बनाने और उसके प्रबंधन के तरीकों को भी प्रभावित कर रही हैं। दूरसंचार विभाग ने “संगम: डिजिटल ट्विन” पहल शुरू की है, जिसमें बेहतर अवसंरचना नियोजन के लिए डिजिटल ट्विन टेक्नोलॉजी को 5जी, आईओटी और एआई के साथ जोड़ा गया है। डिजिटल ट्विन मैपिंग पहले से ही शहरी नियोजन में सहायता कर रही है, जिसका उदाहरण वाराणसी अर्बन 3डी स्पेशियल प्लानिंग प्रोजेक्ट है। वर्ष 2035 तक, भारत का लक्ष्य प्रमुख शहरी केंद्रों के लिए नेशनल डिजिटल ट्विन विकसित करना है। इसके अंतर्गत शहरी नियोजन और प्रबंधन को बेहतर बनाने के लिए शहरों की डिजिटल प्रतिकृतियाँ तैयार की जाएँगी।
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डिजिटल ट्विन क्या है?
डिजिटल ट्विन वास्तविक दुनिया की किसी वस्तु, प्रणाली या स्थान का आभासी मॉडल होता है। यह वास्तविक दुनिया से प्राप्त डेटा का उपयोग करके उसकी स्थितियों और कार्यप्रणाली को दर्शाता है। इससे उपयोगकर्ताओं को परिस्थितियों की निगरानी करने और संभावित परिवर्तनों का डिजिटल रूप से परीक्षण करने में सहायता मिलती है। उदाहरण के लिए, किसी मशीन का डिजिटल ट्विन संभावित खराबियों की पहचान करने में मदद कर सकता है, जबकि किसी शहर का मॉडल योजनाकारों को ढाँचागत परियोजनाओं के कार्यान्वयन से पहले उनके संभावित प्रभावों का आकलन करने में सहायता कर सकता है। इसका एक उदाहरण दूरसंचार विभाग (डीओटी) द्वारा इंडिया मोबाइल कांग्रेस 2025 में प्रदर्शित मोबिलिटी डिजिटल ट्विन है। यह दूरसंचार से प्राप्त आवागमन संबंधी डेटा का उपयोग करके इस बात का विश्लेषण करता है कि लोग विभिन्न क्षेत्रों में किस प्रकार यात्रा और आवागमन करते हैं। दिल्ली के वसंत कुंज और सेंट्रल विस्टा में किए गए प्रदर्शनों के दौरान लोगों के दैनिक आवागमन के पैटर्न का अध्ययन किया गया और मेट्रो स्टेशनों के प्रभाव क्षेत्रों का आकलन करने में सहायता मिली। अयोध्या में, पर्यटकों के आवागमन, परिवहन के साधनों और ठहरने के पैटर्न का अध्ययन करने के लिए मोबिलिटी डेटा का उपयोग किया गया। इन विश्लेषणों से प्राप्त जानकारियाँ अधिकारियों को परिवहन संपर्क बेहतर बनाने, पर्यटन अवसंरचना में सुधार करने और परियोजनाओं को अंतिम रूप देने से पहले अधिक सूचित निर्णय लेने में सहायता कर सकती हैं।
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रचनात्मक अर्थव्यवस्था और मनोरंजन
इमर्सिव टेक्नोलॉजी भारत के मीडिया और मनोरंजन क्षेत्र का तेजी से बढ़ता हुआ हिस्सा है, जिसका एवीजीसी-एक्सआर ढाँचे से घनिष्ठ संबंध है। एक स्वतंत्र रिपोर्ट के अनुसार, भारत के गेमिंग क्षेत्र के वर्ष 2024 में 3.8 बिलियन डॉलर से बढ़कर वित्त वर्ष 2029 तक 9.2 बिलियन डॉलर तक पहुँचने का अनुमान है, जो इस उभरती हुई अर्थव्यवस्था के व्यापक पैमाने को दर्शाता है। इसके अतिरिक्त, वेव्ज शिखर सम्मेलन जैसे राष्ट्रीय मंच भारत की रचनात्मक और इमर्सिव मीडिया क्षमताओं को वैश्विक दर्शकों के समक्ष प्रस्तुत कर रहे हैं।
इमर्सिव टेक्नोलॉजी को बढ़ावा देना: भारत की मुख्य पहलें
इमर्सिव टेक्नोलॉजी को सरकार के व्यापक एवीजीसी-एक्सआर ढाँचे के माध्यम से समर्थन प्रदान किया जाता है। इस ढाँचे में एनीमेशन, विजुअल इफेक्ट्स, गेमिंग, कॉमिक्स और एक्सटेंडेड रियलिटी शामिल हैं। इमर्सिव टेक्नोलॉजी के लिए भारत का नीतिगत समर्थन किसी अलग स्वतंत्र योजना के रूप में नहीं, बल्कि इन क्षेत्रों को बढ़ावा देने के लिए किए जा रहे व्यापक और एकीकृत प्रयासों के हिस्से के रूप में प्रदान किया जाता है। अधिक जानकारी के लिए: पावरिंग द एवीजीसी-एक्सआर रिवॉल्यूशन पर क्लिक करें
एवीजीसी-एक्सआर प्रमोशन टास्क फोर्स
एवीजीसी प्रमोशन टास्क फोर्स का गठन सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय (एआईबी) द्वारा अप्रैल 2022 में किया गया था। इसमें एनीमेशन, विजुअल इफेक्ट्स, गेमिंग और कॉमिक्स (एवीजीसी) उद्योग, शिक्षाविदों तथा सरकार के प्रतिनिधियों को शामिल किया गया है। यह टास्क फोर्स इस क्षेत्र की वृद्धि और विकास को सुदृढ़ करने के समन्वित प्रयासों हेतु एक मंच प्रदान करती है। इसका कार्यादेश तीन प्रमुख सिद्धांतों पर आधारित है। इनमें सार्वजनिक- निजी सहयोग, विभिन्न मंत्रालयों के बीच समन्वय और क्षेत्रीय विकास के लिए एकीकृत दृष्टिकोण शामिल हैं।
इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ क्रिएटिव टेक्नोलॉजीज (आईआईसीटी)
टास्क फोर्स की सिफारिश पर, सरकार ने एवीजीसी-एक्सआर क्षेत्र के लिए कुशल प्रतिभाएँ तैयार करने के उद्देश्य से राष्ट्रीय उत्कृष्टता केंद्र (एनसीओई) स्थापित किया। इसी पहल के परिणामस्वरूप वर्ष 2025 में इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ क्रिएटिव टेक्नोलॉजीज (आईआईसीटी) की स्थापना हुई। मार्च 2026 तक, आईआईसीटी ने एवीजीसी - एक्सआर क्षेत्र के विभिन्न विषयों में 18 पाठ्यक्रम शुरू किए हैं, जिनमें 135 से अधिक विद्यार्थियों ने नामांकन कराया है।
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जेनेसिस (जेन-नेक्स्ट सपोर्ट फॉर इनोवेटिव स्टार्टअप्स)
इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय ने टियर-II और टियर-III शहरों में स्टार्टअप इकोसिस्टम को बढ़ावा देने के लिए जेनेसिस योजना को मंजूरी दी। वर्ष 2022 में शुरू की गई इस योजना का उद्देश्य पाँच वर्षों में लगभग 1,600 प्रौद्योगिकी स्टार्टअप को सहायता प्रदान करना है। इनमें इमर्सिव टेक्नोलॉजीज़, जैसे एआर, वीआर और स्पेशियल कंप्यूटिंग पर काम करने वाले स्टार्टअप भी शामिल हैं। इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय स्टार्टअप हब के माध्यम से, यह योजना वर्तमान में 84 एआर / वीआर स्टार्टअप को सहायता प्रदान कर रही है। इसके अतिरिक्त, यह देश भर में 106 इनक्यूबेटरों को भी समर्थन देती है।
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एवीजीसी कॉन्टेंट क्रिएटर लैब्स
केंद्रीय बजट 2026–27 के अंतर्गत, सरकार ने 15,000 माध्यमिक विद्यालयों और 500 महाविद्यालयों में एनीमेशन, विजुअल इफेक्ट्स, गेमिंग और कॉमिक्स (एवीजीसी) कॉन्टेंट क्रिएटर लैब स्थापित करने के लिए 250 करोड़ रुपये आवंटित किए हैं। इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ क्रिएटिव टेक्नोलॉजीज (आईआईसीटी), मुंबई इस पहल की योजना बनाने, समन्वय करने और कार्यान्वयन के लिए नोडल एजेंसी के रूप में कार्य करेगा। इन प्रयोगशालाओं का उद्देश्य विद्यार्थियों को एनीमेशन, विजुअल इफेक्ट्स, गेमिंग और डिजिटल कॉन्टेंट के निर्माण में व्यावहारिक कौशल प्रदान करना है। यहाँ उन्हें अपने रचनात्मक विचारों को विकसित करने तथा उद्योग में उपयोग के लिए उपयुक्त उपकरणों और प्रौद्योगिकियों का व्यावहारिक अनुभव प्राप्त करने के अवसर मिलेंगे। इस पहल का उद्देश्य युवा प्रतिभाओं को प्रोत्साहित करना और भारत की बढ़ती रचनात्मक अर्थव्यवस्था में उभरते करियर के लिए विद्यार्थियों को तैयार करना है।
वेवएक्स, सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय द्वारा शुरू किया गया एक समर्पित मीडिया - टेक स्टार्टअप एक्सेलरेटर एवं इनक्यूबेटर है। यह एवीजीसी - एक्सआर और अन्य उभरती मीडिया प्रौद्योगिकियों के क्षेत्र में काम करने वाले स्टार्टअप्स को सहायता प्रदान करता है। वेवएक्स का उद्देश्य स्टार्टअप को अपनी प्रौद्योगिकियों को सुदृढ़ करने, बाजार के लिए तैयार समाधान विकसित करने और वैश्विक अवसरों का पता लगाने में मदद करना है।
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भारत की एवीजीसी - एक्सआर विकास गाथा का नेतृत्व करने वाले राज्य
- कर्नाटक की एवीजीसी-एक्सआर नीति 3.0 एवीजीसी- एक्सआर कंपनियों के लिए कौशल विकास, अवसंरचना, उत्पादन अनुदान और वित्तीय प्रोत्साहन प्रदान करती है। राज्य में केआईटीवीईएन एवीजीसी कोष भी संचालित है, जिसके पास 20 करोड़ रुपये का कोष है। यह कोष एवीजीसी और संबंधित क्षेत्रों में कार्यरत कंपनियों में निवेश करता है।
- महाराष्ट्र की एवीजीसी-एक्सआर नीति 2025 की वित्तीय योजना 3,268 करोड़ रुपये की है और इसका विजन वर्ष 2050 तक के लिए है। यह नीति सरकारी सहायता और अवसंरचना के माध्यम से राज्य के एवीजीसी-एक्सआर इकोसिस्टम के विस्तार के लिए एक समर्पित ढाँचा प्रदान करती है।
- तेलंगाना की 2016 की इमेज नीति ने एनीमेशन, वीएफएक्स, गेमिंग और कॉमिक्स के लिए एक समर्पित ढाँचा स्थापित किया, जिसका प्रमुख केंद्र हैदराबाद का इमेज टॉवर है। इस इकोसिस्टम में 150 से अधिक एवीजीसी/ वीएफएक्स कंपनियाँ, 140 से अधिक गेमिंग और एनीमेशन कंपनियाँ, 30,000 प्रत्यक्ष रोजगार तथा सॉफ्टवेयर टेक्नोलॉजी पार्क्स ऑफ इंडिया (एसटीपीआई) – इमेज के माध्यम से शामिल किए गए 100 स्टार्टअप हैं, जिन्हें निर्माण संबंधी अवसंरचना, प्रशिक्षण और ग्लोबल क्लाउड एक्सेस से समर्थन प्राप्त है।
- तमिलनाडु की एवीजीसी-एक्सआर नीति 2026 का लक्ष्य वर्ष 2030 तक 200 से अधिक स्टार्टअप स्थापित करना, लगभग 2 लाख रोजगार सृजित करना और भारत के एवीजीसी-एक्सआर बाजार में 20 प्रतिशत तक हिस्सेदारी प्राप्त करना है। यह नीति चेन्नई में ''ईएलसीओटी वियान एवीजीसी-एक्सआर उत्कृष्टता केंद्र'' को समर्थन देने का भी प्रावधान करती है। अगले तीन वर्षों में कोयंबटूर, मदुरै, तिरुचिरापल्ली, सेलम और तिरुनेलवेली क्षेत्रों में इसके सहायक केंद्र विकसित करने की योजना है।
- केरल की एवीजीसी-एक्सआर नीति 2024 विशेष रूप से इस क्षेत्र के लिए कुशल प्रतिभाओं की निरंतर उपलब्धता सुनिश्चित करने पर केंद्रित है। इसमें उद्योग की आवश्यकताओं के अनुरूप रोजगार भूमिकाओं, शिक्षकों के विकास और स्कूलों से लेकर उच्च शिक्षा तक वीआर, एआर, गेमिंग, वीएफएक्स तथा डिजिटल आर्ट से संबंधित पाठ्यक्रमों का प्रस्ताव है। इस मिशन का लक्ष्य वर्ष 2029 तक एवीजीसी-एक्सआर उद्योग में 50,000 नए रोजगार सृजित करना है, जिससे ज्ञान-आधारित अर्थव्यवस्था को बढ़ावा देने की केरल की प्रतिबद्धता मजबूत होती है।
- मध्य प्रदेश की एवीजीसी-एक्सआर नीति 2025 में उत्कृष्टता केंद्रों, एवीजीसी-एक्सआर प्रयोगशालाओं और लक्षित कौशल प्रशिक्षण को निवेश प्रोत्साहनों के साथ जोड़ा गया है। यह नीति पूँजी निवेश, रोजगार सृजन, निर्माण लागत, गुणवत्ता प्रमाणन और बौद्धिक संपदा के सृजन के लिए भी सहायता प्रदान करती है।
- उत्तर प्रदेश नोएडा अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे और प्रस्तावित अंतरराष्ट्रीय फिल्म सिटी के निकट जेवर में एवीजीसी-एक्सआर पार्क विकसित कर रहा है। इस पार्क में एनीमेशन, वीएफएक्स, गेमिंग, मोशन कैप्चर, वर्चुअल प्रोडक्शन और एक्सआर सुविधाओं को एकीकृत किया जाएगा। इसका उद्देश्य निवेश आकर्षित करना, स्टार्टअप को समर्थन देना, कुशल रोजगार सृजित करना और राज्य की डिजिटल रचनात्मक अर्थव्यवस्था को सुदृढ़ करना है।
- राजस्थान ने अपने 2024–25 के बजट में एवीजीसी-एक्सआर नीति 2024 की घोषणा की, जिसका उद्देश्य एनीमेशन, वीएफएक्स, गेमिंग, कॉमिक्स और इमर्सिव टेक्नोलॉजी के इकोसिस्टम को मजबूत करना है। इस नीति के अंतर्गत पात्र एनीमेशन/ वीएफएक्स/ एआर/ वीआर परियोजनाओं के लिए 50 लाख रुपये तक और पात्र गेम डेवेलपमेंट परियोजनाओं के लिए 1 करोड़ रुपये तक निर्माण प्रोत्साहन प्रदान किया जाता है।
- गुजरात लक्षित सरकारी पहलों के माध्यम से स्वयं को एक प्रमुख एवीजीसी-एक्सआर केंद्र के रूप में स्थापित करने की दिशा में सक्रिय रूप से कार्य कर रहा है। राज्य एक व्यापक एवीजीसी-एक्सआर नीति तैयार करने के उन्नत चरण में है, जिसमें अवसंरचना, कौशल विकास और स्टार्टअप को समर्थन देने पर ध्यान दिया जाएगा। इसके अतिरिक्त, राज्य में पहले से ही एक मजबूत शैक्षणिक आधार मौजूद है—यहाँ 16 संस्थान एनीमेशन, वीएफएक्स और गेमिंग से संबंधित पाठ्यक्रम प्रदान करते हैं, जिससे इस क्षेत्र के लिए प्रतिभाओं की उपलब्धता सुनिश्चित करने में सहायता मिलती है।
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आगे की राह
इमर्सिव टेक्नोलॉजीज़ केवल मनोरंजन का एक नया माध्यम ही नहीं, बल्कि भारत की रचनात्मक अर्थव्यवस्था, शिक्षा प्रणाली और सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण का एक रणनीतिक साधन भी हैं। भारत राष्ट्रीय और राज्य स्तर पर समन्वित प्रयासों के माध्यम से अपने एवीजीसी-एक्सआर इकोसिस्टम को सुदृढ़ कर रहा है, जिससे उसके लिए इमर्सिव डिजिटल कॉन्टेंट और नवाचार के वैश्विक केंद्र के रूप में उभरने की अनुकूल संभावनाएँ हैं। रचनात्मकता और अत्याधुनिक प्रौद्योगिकी का यह समन्वय विकसित भारत 2047 के दृष्टिकोण के अनुरूप है, जिसमें प्रौद्योगिकी की दृष्टि से सशक्त और आत्मनिर्भर भारत उभरते क्षेत्रों में अग्रणी भूमिका निभाएगा।
संदर्भ :
सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय
संस्कृति मंत्रालय
संचार मंत्रालय
अन्य
पीआईबी शोध
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