प्रविष्टि तिथि:
28 OCT 2026 12:51PM by PIB Delhi
प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने आज एक संस्कृत सुभाषितम् को साझा किया, जिसमें सभी के कल्याण और समृद्धि के लिए प्रकृति की रक्षा और देखभाल के महत्व पर बल दिया गया है:
पालयन् प्रकृतिं राजा सुखी भवति नान्यथा।
प्रकृतिश्च हिता यस्य स राजा सर्वकामधुक्॥
इस श्लोक का अभिप्राय है कि जो राजा प्रकृति की रक्षा करता है और उसके कल्याण की दिशा में कार्य करते हुए उसकी प्रसन्नता और समृद्धि को सुनिश्चित करता है। इसके फलस्वरूप, प्रकृति उन व्यक्त्यिों की आशाओं को परिपूर्ण करती है जो उसकी रक्षा और देखभाल करते हैं।
प्रधानमंत्री ने एक्स पर पोस्ट किया:
पालयन् प्रकृतिं राजा सुखी भवति नान्यथा।
प्रकृतिश्च हिता यस्य स राजा सर्वकामधुक्॥
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