सांख्यिकी एवं कार्यक्रम कार्यान्‍वयन मंत्रालय
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28 से 30 अक्टूबर 2026 तक केरल के तिरुवनंतपुरम में 'राज्य स्तरीय औद्योगिक उत्पादन सूचकांक' के आधार वर्ष में संशोधन पर कार्यशाला का आयोजन

प्रविष्टि तिथि: 28 OCT 2026 8:23PM by PIB Delhi

राज्य स्तरीय औद्योगिक उत्पादन सूचकांक(आईआईपी) के आधार वर्ष में संशोधन विषय पर तीन दिवसीय क्षेत्रीय प्रशिक्षण कार्यशाला का शुभारंभ 28 अक्टूबर 2026 को तिरुवनंतपुरम स्थित होटल डिमोरा इंटरनेशनल में हुआ। इस कार्यशाला का आयोजन भारत सरकार के सांख्यिकी और कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय(एमओएसपीआई) द्वारा केरलम सरकार के अर्थशास्त्र एवं सांख्यिकी विभाग(डीईएस) के सहयोग से किया गया है। यह कार्यशाला 30 अक्टूबर 2026 तक चलेगी।

एमओएसपीआई के महानिदेशक(केंद्रीय सांख्यिकी) डॉ. दिलीप सिंह कार्यशाला का औपचारिक उद्घाटन कर रहे हैं

कार्यक्रम का शुभारंभ गणमान्य अतिथियों द्वारा दीप प्रज्वलन के साथ हुआ। तीन दिवसीय कार्यशाला के उद्घाटन सत्र में सांख्यिकी और कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय(एमओएसपीआई) के महानिदेशक(केंद्रीय सांख्यिकी) डॉ. दलीप सिंह, केरलम सरकार के योजना एवं आर्थिक कार्य विभाग के विशेष सचिव श्री गोकुल जी. आर., आईएएस, एमओएसपीआई के निदेशक श्री दीपक धनावत, केरलम के अर्थशास्त्र एवं सांख्यिकी निदेशालय की निदेशक सुश्री शैलम्मा के. तथा केरलम के अर्थशास्त्र एवं सांख्यिकी निदेशालय के अपर निदेशक श्री वी. के. श्रीजन सहित अनेक विशिष्ट गणमान्य अतिथि उपस्थित रहे। इस कार्यशाला में 16 राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों के लगभग 60 प्रतिभागियों ने भाग लिया।

केरलम के अर्थशास्त्र एवं सांख्यिकी निदेशालय की निदेशक सुश्री शैलम्मा के. ने गणमान्य अतिथियों और प्रतिभागियों का स्वागत किया। उन्होंने क्षेत्रीय प्रशिक्षण कार्यक्रम के आयोजन में सांख्यिकी और कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय(एमओएसपीआई) द्वारा प्रदान किए गए सहयोग के लिए आभार व्यक्त किया। साथ ही, उन्होंने औद्योगिक उत्पादन सूचकांक(आईआईपी) के आधार वर्ष में संशोधन की प्रक्रिया को प्रभावी ढंग से लागू करने के लिए राज्य के सांख्यिकी कार्यालयों की तकनीकी क्षमता को मजबूत करने के महत्त्व पर प्रकाश डाला।

सांख्यिकी और कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय(एमओएसपीआई) के निदेशक श्री दीपक धनावत ने कार्यशाला के उद्देश्यों और इसकी पृष्ठभूमि की रूपरेखा प्रस्तुत की। उन्होंने राज्यों के औद्योगिक प्रदर्शन पर नजर रखने में राज्य स्तरीय औद्योगिक उत्पादन सूचकांक(आईआईपी) के महत्त्व को बतलाया। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि राज्यों को सूचकांक का संकलन अखिल भारतीय औद्योगिक उत्पादन सूचकांक के समान कार्यप्रणाली के अनुसार करना चाहिए।

केरलम सरकार के योजना एवं आर्थिक कार्य विभाग के विशेष सचिव श्री गोकुल जी. आर., आईएएस, ने उद्घाटन सत्र की अध्यक्षता की। अपने अध्यक्षीय संबोधन में उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि सोशल मीडिया के माध्यम से आर्थिक सूचनाओं पर व्यापक चर्चा होने और वित्तीय एवं खुदरा निवेश में आम लोगों की भागीदारी बढ़ाने के संदर्भ में विश्वसनीय आधिकारिक सांख्यिकी का सार्वजनिक महत्त्व लगातार बढ़ रहा है। उन्होंने कहा कि जनहित से जुड़े मुद्दों पर सूचित चर्चा और साक्ष्य-आधारित नीतिगत निर्णय लेने के लिए समयबद्ध, विश्वसनीय तथा वैज्ञानिक कार्यप्रणाली पर आधारित सांख्यिकी आवश्यक है। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि औद्योगिक उत्पादन सूचकांक(आईआईपी) तैयार करने के लिए इस्तेमाल की जाने वाली वस्तुओं की टोकरी को उद्योग की वर्तमान संरचना और उत्पादन के तौर-तरीकों में आए बदलावों को प्रतिबिंबित करना चाहिए। उन्होंने प्राथमिक आंकड़ों के संग्रह की गुणवत्ता को सुदृढ़ करने, मापन संबंधी त्रुटियों को कम करने तथा यह सुनिश्चित करने की आवश्यकता पर भी जोर दिया कि रिपोर्टिंग इकाइयों द्वारा उपलब्ध कराई गई जानकारी औद्योगिक गतिविधियों को सही ढंग से दर्शाती हो।

सांख्यिकी और कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय के महानिदेशक(केंद्रीय सांख्यिकी) डॉ. दलीप सिंह ने कार्यशाला का औपचारिक उद्घाटन किया। अपने उद्घाटन संबोधन में डॉ. दलीप सिंह ने राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के बीच एकरूपता एवं तुलनीयता में सुधार के लिए संशोधित राज्य स्तरीय औद्योगिक उत्पादन सूचकांक(आईआईपी) श्रृंखला को अद्यतन राष्ट्रीय कार्यप्रणाली के अनुरूप बनाने की आवश्यकता पर जोर दिया। उन्होंने वर्ष 2022–23 का उल्लेख प्रस्तावित नए आधार वर्ष के रूप में किया और इस बात पर जोर दिया कि सूचकांक में औद्योगिक अर्थव्यवस्था में हो रहे परिवर्तनों को समुचित रूप से दर्शाने के लिए वस्तुओं की टोकरी को अपडेट करना आवश्यक है। उन्होंने प्रमुख एवं गौण खनिजों सहित औद्योगिक उत्पादों और खनिजों से संबंधित आंकड़ों की उपलब्धता एवं गुणवत्ता में सुधार करने तथा आंकड़ों के संग्रह और सत्यापन के लिए उपयोग की जाने वाली प्रणालियों को सुदृढ़ करने की आवश्यकता की ओर भी ध्यान आकर्षित किया। उन्होंने राष्ट्रीय औद्योगिक वर्गीकरण(एनआसी) 2025 को अपनाने, संबंधित सिफारिशों के अनुरूप गैस आपूर्ति, जल आपूर्ति, मल-जल निकासी एवं अपशिष्ट प्रबंधन जैसे क्षेत्रों के उचित समावेशन तथा विविध प्रकृति वाले उत्पादों के लिए उपयुक्त मूल्य-आधारित विजन अपनाने सहित विभिन्न कार्यप्रणाली संबंधी पहलुओं के बारे में बात की। उन्होंने राज्यों को औद्योगिक उत्पादन सूचकांक के नियमित मासिक संकलन के लिए अपनी क्षमता मजबूत करने तथा यह सुनिश्चित करने के लिए प्रोत्साहित किया कि संशोधित सूचकांक श्रृंखला विश्वसनीय, समयबद्ध और तुलनात्मक हो।

आधार वर्ष को 2011–12 से संशोधित कर 2022–23 करने का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि औद्योगिक उत्पादन सूचकांक(आईआईपी) वर्तमान औद्योगिक संरचना, विनिर्मित उत्पादों की विविधता में हुए बदलावों तथा उत्पादन के बदलते स्वरूप को अधिक सटीक रूप से प्रतिबिंबित करे। यह सूचकांक औद्योगिक उत्पादन में अल्पकालिक उतार-चढ़ाव की निगरानी करने तथा आर्थिक विश्लेषण और नीतिगत निर्णयों के निर्माण में सहायता प्रदान करने वाला एक महत्त्वपूर्ण संकेतक है।

इस कार्यशाला का उद्देश्य राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के अधिकारियों को आधार वर्ष संशोधन की प्रक्रिया के प्रमुख चरणों के संबंध में व्यावहारिक एवं कार्यप्रणाली संबंधी मार्गदर्शन प्रदान करना है। इसमें वस्तुओं की टोकरी और कारखानों का चयन, मदों का समूहीकरण, भारांक आरेख तैयार करना, आंकड़ों के स्रोत तथा ‘अन्यत्र वर्गीकृत नहीं (एनईसी)’ श्रेणी में आने वाली मदों के निपटान जैसे विषय शामिल हैं। कार्यक्रम में राष्ट्रीय औद्योगिक वर्गीकरण(एनआईसी) 2025 की समीक्षा, संशोधित राष्ट्रीय उत्पाद वर्गीकरण(एनपीसी) पर सुझाव, आंकड़ों के आदान-प्रदान की व्यवस्था तथा प्रतिस्थापन और आरोपण की पद्धतियों पर भी चर्चा की जाएगी।

उद्घाटन सत्र के दौरान मंच पर मौजूद गणमान्य व्यक्ति

पहले दिन के तकनीकी सत्रों में सांख्यिकी और कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय(एमओएसपीआई) की उपमहानिदेशक सुश्री अंकिता सिंह द्वारा औद्योगिक उत्पादन सूचकांक(आईआईपी) के आधार वर्ष संशोधन की नई विशेषताओं पर प्रस्तुति दी गई। इसके बाद राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में आधार वर्ष संशोधन की प्रक्रिया की प्रगति पर प्रस्तुतियां दी गईं। सत्रों में विभिन्न क्षेत्रों, आंकड़ों के स्रोतों तथा ‘अन्यत्र वर्गीकृत नहीं(एनईसी)’ श्रेणी की मदों के निपटान से संबंधित विषयों पर भी चर्चा की गई। इस कार्यशाला में 16 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के कुल 60 प्रतिनिधि भाग ले रहे हैं। आगामी दो दिनों के सत्र में आधार वर्ष संशोधन के तकनीकी एवं सत्यापन संबंधी पहलुओं पर ध्यान केंद्रित किया जाएगा। इन सत्रों में राज्यों को अपने सवाल पूछने और सुझाव साझा करने के अवसर भी मिलेंगे।

उद्घाटन सत्र का समापन केरलम के अर्थशास्त्र एवं सांख्यिकी निदेशालय के अपर निदेशक श्री वी. के. श्रीजन द्वारा धन्यवाद ज्ञापन के साथ हुआ। उन्होंने कार्यशाला के आयोजन तथा तकनीकी सहायता प्रदान करने के लिए सांख्यिकी और कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय(एमओएसपीआई) के प्रति आभार व्यक्त किया। साथ ही, उन्होंने केरलम सरकार तथा विभिन्न राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों से आए अधिकारियों के सहयोग की सराहना की। उन्होंने कार्यक्रम के आयोजन में शामिल गणमान्य अतिथियों, विषय विशेषज्ञों और अधिकारियों के प्रति भी आभार व्यक्त किया।

क्षेत्रीय प्रशिक्षण कार्यशाला में उपस्थित गणमान्य व्यक्ति तथा भाग लेने वाले राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के प्रतिनिधि

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पीके/केसी/आरटी/पीकेपी


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