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गुजरात के बनासकांठा में विकास परियोजनाओं के शुभारंभ के अवसर पर प्रधानमंत्री के भाषण का मूल पाठ

प्रविष्टि तिथि: 30 OCT 2026 3:51PM by PIB Delhi

भारत माता की जय।

भारत माता की जय।

गुजरात के लोकप्रिय मुख्यमंत्री श्रीमान भूपेंद्र भाई पटेल, उप-मुख्यमंत्री भाई हर्ष संघवी जी, विधानसभा अध्यक्ष श्रीमान शंकरभाई चौधरी, गुजरात सरकार के सभी मंत्रीगण, सांसद और विधायकगण, अन्य जनप्रतिनिधि, भाइयों और बहनों।

आज टेक्नोलॉजी से भी हमारे साथ देश के सभी जिलों के किसान जुड़े हुए हैं। आज टेक्नोलॉजी से हमारे साथ गुजरात के हर एक गांव के किसान जुड़े हुए हैं। राज्यों के मुख्यमंत्री, मंत्री, ये सब आज किसानों के इस महत्वपूर्ण कार्यक्रम में हमारे साथ हैं। मैं उन सबका भी हृदय से स्वागत करता हूं।

आज बनासकांठा ने अपना रूतबा जमाया है। अभी स्क्रिन पर देख रहा था कि शायद दुनिया में इतनी बड़ी चारपाई (खाटला) सभा कभी नहीं हुई होगी। देश के लोगों के लिए भी अजूबा होगा कि इस सभा में सारे लोग चारपाई पर बैठे हुए हैं। हमारे गांव की इस महान परंपरा को आज हमारे बनासकांठा ने जीवित कर दिया है। अगर शायद पहले से आपने गिनीज बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड वालों को बोला होता, तो वो जरूर आज एक रिकॉर्ड के रूप में उसको दर्ज कर देते। अभी यहां उल्लेख हुआ। 

आप लोगो ने मुझे जो जिम्मेदारी दी थी उसे पूरा करते हुए आज 25 वर्ष हो गए हैं। और संजोग देखो कि 25 वर्ष पूरे होने के बाद मेरा प्रथम आगमन हमारे बनासकांठा में हुआ। आप लोगों को याद दिला दूँ कि 2001 में मुख्यमंत्री बनने के बाद पहला सबसे बड़ा सार्वजनिक कार्यक्रम, मुख्यमंत्री बनने के बाद का पहला कार्यक्रम, सार्वजनिक कार्यक्रम, वो डिसा में किया था, लोक कल्याण मेला, जो पुराने लोगों होंगे उन्हे याद होगा। और वो कार्यक्रम शायद ऐतिहासिक कार्यक्रम रहा, एक जिले से तीन लाख लोग उस कार्यक्रम में थे, मैं नहीं मानता कि वो रिकॉर्ड आज तक किसी ने तोड़ा हो। वो रिेकॉर्ड बनासकांठा के खाते में दर्ज है। जहाँ से यात्रा की शुरूआत की थी, वहाँ 25 वर्ष की सेवा यात्रा का हिसाब देने का मुझे आज अवसर मिला है।

नवरात्र के कुछ ही दिन बाद माँ अंबा की पावन भूमि पर आने का अवसर मिला है। मैं, माँ  अंबा के चरणों में प्रणाम करता हूँ। थोड़ी देर पहले यहां से मातृशक्ति के लिए, बच्चों के लिए, किसानों-पशुपालकों के लिए, अनेक परियोजनाओं का शिलान्यास और लोकार्पण हुआ है। देश के करोड़ों छोटे किसानों के खाते में पीएम किसान सम्मान निधि की नई किश्त भी पहुंची है। मैं गुजरात के लोगों को, देशवासियों को, देशभर के किसानों को बहुत-बहुत बधाई देता हूँ।

साथियों, 

एक तो मुझे गुजरात के और बनासकांठा के लोग माफ करें, मुझे हिन्दी इसलिए बोलना पड़ेगा, क्योंकि देशभर के लोग हमारे साथ कार्यक्रम में जुड़े हैं, तो आपकी परमिशन है न कि मैं हिन्दी में बोलूं? शाबाश। 

साथियों,

हमारे किसान, हमारे अन्नदाता, विकसित भारत के सबसे मजबूत स्तंभों में से एक है, और हमारी सरकार ने हमेशा किसानों के कल्याण को, किसानों को सशक्त करने को प्राथमिकता दी है। 2013-14 की तुलना में देश का कृषि बजट अब 5 गुणा से अधिक हो गया है। पीएम किसान सम्मान निधि, अब करोड़ों छोटे किसानों के जीवन का हिस्सा बन गई है। आज करीब 10 करोड़ किसानों के खातों में 18 हजार करोड़ रुपये से अधिक की राशि भेजी गई है। गुजरात के 50 लाख से अधिक किसानों को भी इसका लाभ मिला है। इनके खातों में एक हजार करोड़ रुपये से अधिक जमा हुए हैं। यहां बनासकांठा के लाखों किसान परिवारों के खाते में भी करीब 50 करोड़ रुपये पहुंचे हैं।

साथियों,

बीते वर्षों में हमारी सरकार की नीतियों की वजह से 50 लाख करोड़ रुपए से ज्यादा किसानों को मिले हैं या उनकी बचत हुई है, 50 लाख करोड़ रुपया। मैं आपको सिर्फ पांच योजनाओं का उदाहरण दूंगा। पीएम किसान सम्मान निधि के करीब साढ़े चार लाख करोड़ रुपए सीधे छोटे किसानों के बैंक खाते में पहुंचे हैं। बेन तुने मुझे पराजित किया, मुझे था कि तुम थोड़ी देर में बैठ जाओगी, तेरे हाथ दर्द करते होंगे। हमारे एसपीजी के लोगों को विनती है कि यह बेटी सरस फोटो बनाकर लाई है, उससे ले लीजिए, वरना वह हाथ ऊपर उठाकर थक जाएगी। यहाँ से ले लेंगे बेटा, यहाँ से वहां आयेंगे, तुम यहीं खड़ी रहो, जरा एसपीजी के लोग जाकर के इसको कलेक्ट कर लें। आजादी के बाद कभी इन छोटे किसानों की जरूरतों को नहीं समझा गया, कभी उन्हें पूछा नहीं गया। जबकि देश में छोटे किसानों की संख्या 85 प्रतिशत से ज्यादा है। हमारे देश में छोटे किसानो की संख्या 85 प्रतिशत है।   ऐसे छोटे किसानों की हमारी सरकार ने ही चिंता की और उन्हें पीएम किसान सम्मान निधि से मदद पहुंचाई।

साथियों,

बीते कुछ सालों में वैश्विक अनिश्चिता के बीच खाद की कीमतों में बहुत उछाल आया, लेकिन किसानों को समर्पित हमारी सरकार ने इसका बोझ किसानों पर नहीं पड़ने दिया। इस पर सरकार ने करीब 16 लाख करोड़ रुपए खर्च किए हैं। आप लोगों को खाद सस्ता मिले, इसलिए तिजोरी में से 16 लाख करोड़ रूपये देने पड़े है ताकि आप लोगों पर बोझ न आए।

साथियों,

पहले की सरकारें MSP को लेकर भी किसानों को धोखा ही दे रही थीं, लेकिन ये हमारी सरकार है, जिसने MSP का वायदा पूरा किया है। पिछले 12 वर्षों में, गेहूं और धान किसानों को गेहूँ और चावल, ऐसे किसानो को एमएसपी के रूप में 24 लाख करोड़ रूपये, 24 लाख करोड़ रूपया किसानों के खाते में गये हैं।

साथियों,

हमारी सरकार ने पीएम फसल बीमा योजना का एक बहुत सशक्त सुरक्षा कवच किसानों को दिया है। हमने किसान बीमा योजना शुरू की, बड़े तौर पर शुरू की। पिछले 10-12 वर्षों में किसानों को फसल बीमा के मुआवजे में भी 2 लाख करोड रुपए से अधिक मिल चुके हैं। खेती को नुकसान हुआ, तब बीमा के रूप में किसानों के पास 2 लाख करोड़ रूपये पहुंचे हैं। हमारा निरंतर प्रयास है कि सिंचाई पर किसान की लागत भी कम हो, इसमें पीएम कुसुम योजना की भूमिका लगातार बढ़ रही है। इसके तहत, अभी तक करीब 12 लाख सोलर पंप दिए जा चुके हैं। 12 लाख सूर्य ऊर्जा से चलने वाले पंप, पानी निकालने के लिए किसानों को दिए गए हैं, 12 लाख पंप। और उसके कारण बिजली की जरूरत, डीजल की जरूरत सब हो गया। अगर ये सोलर पंप न मिलते, तो 80 करोड़ से अधिक, 80 करोड़ लीटर से, 80 करोड़ लीटर से अधिक का डीजल किसानों को खरीदना पड़ता। यानि इसमें जो पैसा लगता, वो इन लाखों किसानों की बचत हुई है। और इससे, जो अतिरिक्त बिजली पैदा हुई, वो अलग। एक तरह से देखें, तो सिर्फ इन पांच योजनाओं या निर्णयों की वजह से देश के किसानों को 50 लाख करोड़ रुपए के बराबर की बचत भी हुई है या तो जमा हुए हैं। 50 लाख करोड़ रुपये का आँकड़ा बहुत बड़ा है। इन 50 लाख करोड़ रुपयों ने देश के किसानों की आय बढ़ाई है, भारत में खेती का सामर्थ्य बढ़ाया है। 

साथियों,

खेती हमारे देश की परंपरा भी है, खेती हमारी संस्कृति भी है, Agriculture is our culture. पिछले 12 वर्षों में हमारी सरकार ने खेती में साइंस और टेक्नोलॉजी का भी व्यापक समावेश किया है। हमने खेती को, पशुपालन को वैज्ञानिकता से जोड़ा है। सॉयल हेल्थ कार्ड इसका बेहतरीन उदाहरण है। पहले किसान को ये पता लगाने में मुश्किल होती थी कि उसके खेत को कौन सी खाद चाहिए, कितनी मात्रा में चाहिए। सॉयल हेल्थ कार्ड ने इस समस्या का समाधान किया है। आज 26 करोड़ से अधिक सॉयल हेल्थ कार्ड देश के किसानों के पास हैं। इनसे खेती के तौर-तरीकों में आधुनिकता आई है।

साथियों,

किसान के लिए मौसम में हो रहा बदलाव बहुत बड़ी चुनौती है। इसलिए, हमारा प्रयास है कि किसान को लगातार बीजों की नई किस्में उपलब्ध हों, जो बदलती जलवायु के अनुकूल हो। बीते वर्षों में बीजों की करीब तीन हज़ार नई किस्में किसानों को उपलब्ध कराई गई हैं।

साथियों,

पशुपालन हमारी ग्रामीण अर्थव्यवस्था का महत्वपूर्ण अंग है, इसमें हमारी बहनों की बहुत बड़ी भागीदारी है। बीते दशक में हमने पशुपालन और डेयरी सेक्टर में भी विज्ञान और टेक्नोलॉजी के इस्तेमाल पर जोर दिया है। क्योंकि पशु की नस्ल बेहतर होगी, तो दूध उत्पादन बढ़ेगा। अभी शंकर भाई बता रहे थे कि चार गाय से जितना दूध मिलता है, हम चाहते हैं कि एक ही गाय से उतना मिले। समय पर टीकाकरण और इलाज मिलेगा, तो बीमारी से होने वाला नुकसान कम होगा। यानी, पशु स्वस्थ होगा, तो मेरे पशुपालक भाई-बहनों की कमाई भी बढ़ेगी।

साथियों,

आप राष्ट्रीय गोकुल मिशन के बारे में जानते हैं। इसके तहत देशी नस्लों के संरक्षण और वैज्ञानिक प्रजनन को बढ़ावा दिया जा रहा है। बनासकांठा में बना नया रिसर्च सेंटर इस मिशन को और मजबूती देगा। यहां गीर, साहीवाल और कांकरेज जैसी देशी गायों और मेहसाणा, मुर्रा तथा जाफराबादी जैसी भैंसों की नस्लों का संरक्षण होगा। साथ ही, उनकी गुणवत्ता बढ़ाने में भी बहुत बड़ा काम होगा। कांकरेज नस्ल के लिए तो देश में अपनी तरह की यह पहली सुविधा है। इसे एक उदाहरण से समझिए, अगर किसी किसान के पास अच्छी नस्ल की गाय है, जो ज्यादा दूध देती है और कम खर्च में स्वस्थ रहती है, तो वह चाहेगा कि गाय की आने वाली पीढ़ी में भी ये गुण बने रहें। IVF जैसी आधुनिक तकनीक इसमें मदद करती है। इससे अच्छी नस्ल के गुण अगली पीढ़ी तक पहुंचाने की संभावना बढ़ती है। इसका सीधा लाभ पशुपालक को मिलेगा।

साथियों,

पशुओं को बीमारियों से बचाना भी हमारी प्राथमिकता है। खुरपका और मुंहपका बीमारी से पशुओं की सेहत और दूध उत्पादन, दोनों पर असर पड़ता है। इसलिए हमने देशभर में मुफ्त टीकाकरण अभियान शुरू किया। अब तक करीब डेढ़ सौ करोड़ टीके पशुओं को लगाए जा चुके हैं। 8 करोड़ से अधिक किसानों के पशुओं को मुफ्त टीके लगे हैं। इससे पशुपालकों का, उनका जो खर्च का बोझ है, वो भी कम हुआ है। 

साथियों,

इन प्रयासों का असर दूध उत्पादन में भी दिख रहा है। वर्ष 2013-14 में एक गाय या भैंस, उससे औसतन एक दिन में 5 लीटर से भी कम दूध मिलता था। आप लोगों ने मुझे दिल्ली भेजा उस समय का यह समाचार है। पांच लीटर से भी कम दूध 1 दिन में।  आज यह औसत बढ़कर करीब 8 लीटर हो गया है, पूरे देश में एवरेज 8 लीटर। भारत में दूध उत्पादन की उत्पादकता बढ़ने की गति दुनिया में सबसे तेज है। दूध उत्पादन में भारत दुनिया में नंबर वन है। इसका लाभ गांवों को मिला, किसान परिवारों की कमाई बढ़ी है।

साथियों,

हम चाहते हैं कि पशुपालक की दूध के साथ गोबर से भी कमाई बढ़े। गोबर और खेती के अवशेषों से बायोगैस, बायो-CNG और जैविक खाद बनाने के लिए इंफ्रास्ट्रक्चर तैयार किया जा रहा है। इसमें बनास डेयरी जैसे संस्थानों की महत्वपूर्ण भूमिका है। आज यहां दो बायो-CNG प्लांट का शिलान्यास भी हुआ है। हमारा लक्ष्य साफ है- पशु स्वस्थ हों, दूध उत्पादन बढ़े और गोबर का भी पूरा उपयोग हो। हम पशुपालन को केवल परंपरा नहीं, बल्कि किसान की आमदनी बढ़ाने और गांवों को समृद्ध बनाने का मजबूत साधन बना रहे हैं। अभी सारी बहनों से मैं बात कर रहा था, तब बहनों ने कहा हम 2 करोड़ रूपये का दूध भरते हैं। 2 करोड़ रूपये का दूध और मैंने पूछा कितना पढ़ी है? बोले, 4 किताब, और 2 करोड़ रूपये का दूध।

साथियों,

बीते वर्षों में हमने गांव की समृद्धि के लिए होलिस्टिक अप्रोच से संपूर्णता में काम किया है। आप मछली पालन का ही क्षेत्र देखिए, कितना विस्तार हुआ है। आपको सुनकर अच्छा लगेगा कि भारत का सी-फूड, सी-फूड निर्यात दोगुने से अधिक हो गया है। समुद्र में हमारे सागर खेडू जाते हैं और मच्छी और झिंगा पकड़ते हैं, और बेचते हैं। आज खूब बड़ी छलांग लगाई है, दुनिया के देशों में उसकी मांग बढ़ी है। मछली पालन के क्षेत्र में सहकारिता को भी बढ़ावा दिया जा रहा है।

साथियों,

एक और क्षेत्र है, जिससे हमारे किसानों को आय का एक और साधन मिला है। ये क्षेत्र, मधुमक्खी पालन का है। बीते 12 वर्षों में शहद का उत्पादन दोगुना हुआ है। और मुझे याद है कि मैं बनासकांठा में आया, तब आप सबको आह्वान किया था कि हमें स्वीट रिवॉल्युशन करना है, मधुर क्रांति करनी है, और आज बनासकांठा मधु, मधु उत्पादन में नए रिकॉर्ड बनाने लगा है। आज बहनों को मिला, तब उन्होंने कहा हम 35 लाख का मध बेचते है। आपको जानकर गर्व होगा कि हमारा देश प्राकृतिक शहद का दूसरा सबसे बड़ा निर्यातक बन गया है, और ये जो मधु क्रांति आई है, स्वीट रिवॉल्युशन आया है, इसमें हमारी बहनों के सेल्फ हेल्प ग्रुप्स का योगदान भी बढ़ता जा रहा है।

साथियों,

कुछ दिन पहले ही 7 अक्टूबर को मुझे सरकार के मुखिया के रूप में सेवा करते हुए 25 वर्ष पूरे हुए हैं। ऐसा लगता है कि कल की ही बात है, ओ हो-हो यह तो कल की ही तो बात है। जब 7 अक्टूबर 2001 को मैंने पहली बार शपथ ली थी, आपने, अपने नरेंद्र भाई को बहुत सारा प्यार दिया है, खूब प्रेम दिया आपने मुझे। आज मुझे यहां थोड़ा अटपटा सा लग रहा था, देशभर में जो चल रहा, वो चलेगा, पर यहाँ हमारे शंकरभाई ने कहा कि प्रधानमंत्री साहब, प्रधानमंत्री साहब, आप ही बताये मेरे गले के नीचे यह संबोधन उतरेगा क्या? हमें तो आदत है कि हमारे नरेंद्र भाई, कौन आया है भई, हमारे नरेन्द्र भाई। अच्छा लगे कि न लगे, ऐसा बोलने में? अरे, प्राधनमंत्री और साहब उसमें क्या मज़ा आयेगा। और मुझे भी जब गुजरात के मेरे भाई ऐसा कहे कि हमारे नरेंद्र भाई तब मेरी छाती गदगद होती है। और प्यार से भी ज्यादा, एक-एक गुजराती ने मुझे बहुत कुछ सिखाया है, सही रास्ते पर जाने का मुझे मार्गदर्शन किया, प्रेरणा दी है। तब, सरकारी दफ्तर, सरकार, फाइलों के बारे में कुछ नहीं जानता था। एक सामान्य परिवार से निकला व्यक्ति, जिसकी पीढ़ियों ने कभी गाँव का प्रधान बनने का सपना तक नहीं देखा था, उसको आपने इस लायक समझा। पहले गुजरात की और फिर देश की सेवा की जिम्मेदारी दी। अभी मैं बहनों के साथ बात कर रहा था, तब उन्होंने प्रश्न पूछा कि आपको ऐसे विचार कैसे आए ज्योति ग्राम, पानी लाए, प्राकृतिक खेती, पशुओं के लिए ये सब किया? यह सब कैसे लेकर आए? कैसे आए यह विचार? मैंने कहा इसमें कोई नया गणित नहीं है, आप सबने सिखाया और मैंने वहाँ जाकर किया।

साथियों, 

मैं सिर्फ, दो ही बातें जानता था - जनसेवा से राष्ट्रसेवा और गुजरात के विकास से देश का विकास। बाकी, कैसे करना है, कैसे आगे बढ़ना है, ये आपने मुझे सिखाया है। मैं देश के लिए जो कुछ भी कर पाया, इसका यश सभी देशवासियों को है, आप सबको भी है। इसके लिए मैं आपका जीवन भर ऋणी रहूँगा, मैं जीवनभर आपका कर्जदार रहूँगा। और जीवन के अंतिम क्षण तक आपकी सेवा में ही जुटा रहूंगा। अंतिम साँस तक सेवा-सेवा-सेवा, देशवासियों की सेवा, आप सबकी सेवा।

साथियों,

यहां जो बड़ी आयु के साथी हैं, उनको पुरानी बातें आज भी याद होंगी। 25 वर्ष पहले जब मैं यहां आता था, तब यहां बिजली-पानी की कितनी समस्या थी। मैं तब भी कहता था कि हमें बिजली और पानी बचाना होगा, ये किसान मेरे खिलाफ आंदोलन करते थे कि मोदी कौन होता है, हमको कहता है कि पानी बचाओ, और बिजली नहीं दूँगा। मैं आपसे लड़ता रहा, आखिरकार आपने मेरी बात मानी। और आज, आज देखिए, आज हम कहाँ से कहाँ पहुँच गए हैं। आज वो पुरानी समस्याएं सिर्फ यादों में रह गई हैं। मैं आज आपको फिर वही बात कहूँगा कि पानी बचाना है, बिजली भी बचानी है।

साथियों, 

नर्मदा के नीर ने और टपक सिंचाई जैसी आधुनिक तकनीक ने, बनासकांठा की तस्वीर बदल दी है, बनासकांठा की तकदीर बदल दी है। बनासकांठा का आलू आज विश्व-प्रसिद्ध है और कोई बनासकांठा वाले को आकर नहीं कहेगा कि मैं आलू का सोना बनाऊँगा, वो कहता है मैं पहले से बनाता हूँ। यहां बनास डेयरी जैसा सहकारिता का ब्रैंड है, जो काशी समेत देश के अन्य हिस्सों में भी सहकारिता के आंदोलन को विस्तार दे रहा है। मैं बनास डेयरी का विशेष रूप से आभारी हूं, क्योंकि मेरी काशी में भी आपके अनुभव का, आपकी सेवा का लाभ मिल रहा है। अब तो फ्रेंच-फ्राइज़ बनाने वाले आलू प्लांट भी, उसकी क्षमता भी बढ़ाई गई है। इससे आलू की ज्यादा खरीद संभव हो पाएगी। ये आलू किसानों के लिए बहुत बड़ी सुविधा है।

साथियों, 

फल और सब्जी की खेती, ये करने वाले किसानों के लिए क्लस्टर डेवलपमेंट प्रोग्राम चल रहा है। इसके तहत, आज 12 क्लस्टर स्वीकृत किए गए हैं। ये क्लस्टर, टमाटर, आलू, मिर्च, अंगूर, केला, प्याज, संतरा, अनार और कोको जैसे फल-सब्जियों से जुड़े हैं। इसके लिए किसानों को नए बाग लगाने और पुराने लोगों के कायाकल्प के लिए, पुराने बागों के कायाकल्प के लिए लोगों को तैयार करके आगे ले जाया जाएगा और इस पूरे प्रोजेक्ट के लिए सब्सिडी दी जाएगी। उत्तर गुजरात में जो दो क्लस्टर मिले हैं, इनसे बनासकांठा और साबरकांठा के आलू किसानों को बहुत लाभ होगा।

साथियों, 

आज गुजरात के विकास से जुड़े और भी कई प्रोजेक्ट्स का शिलान्यास और लोकार्पण हुआ है। आज गुजरात को अमदाबाद-वाराणसी साबरमती एक्सप्रेस ट्रेन और मेहसाणा-बेचारजी-साबरमती मेमू ट्रेन, ये दो नई रेल सेवाएं मिली हैं, बहुत महत्व की दोनों रेल कनेक्टिविटी है। इसके अलावा, अमदाबाद मेट्रो सेवा का भी विस्तार हो रहा है। आज गिफ्ट सिटी और एयरपोर्ट को जोड़ने के लिए मेट्रो प्रोजेक्ट्स का शिलान्यास किया गया है। अमदाबाद-मेहसाणा हाईवे अब फोर लेन से eight lane का होने जा रहा है।

साथियों, 

आज गुजरात के बच्चों के लिए 4 हज़ार से अधिक आधुनिक आंगनबाड़ियों का भी शुभारंभ हो रहा है। इनसे करीब 4 लाख बच्चों को, गर्भवती माताओं को फायदा होगा।

साथियों, 

विकास का ऐसा हर प्रयास भारत को विकसित बनाने के लिए है। आज देश का हर किसान, हर नौजवान, हर बहन-बेटी विकसित भारत बनाने के संकल्प के साथ आगे बढ़ रहा है। लेकिन दुर्भाग्य से कुछ लोगों को ये अच्छा नहीं लग रहा, कुछ लोगों की नहीं सेट हो रहा। और ये ऐसे लोग हैं, जो देश को मुश्किल में देखना चाहते हैं। देश में संकट हो, तो उनको आनंद मिलता है। जब देश पर संकट आते हैं, तो इनको खुशी मिलती है।

साथियों, 

इसका ताज़ा उदाहरण ईरान और उस खाड़ी देशों के आसपास चल रहा है युद्ध। भारत, जब एकजुट होकर इसका सामना करने में जुटा है, तब ये लोग अफवाहें फैलाने में लगे रहें, अफवाहें फैलाई गईं, किसानों को खाद के लिए डराया गया, खाद नहीं मिलेगा, कतारें लगा दी artificial, वातावरण बिगाड़ दिया। बहनों को डरा दिया, अब गैस नहीं मिलने वाला, खाना कैसे पकाओगे, बच्चे स्कूल कैसे जाएंगे। इनका प्लान देश में अफरा-तफरी फैलाने का था, ताकि ये मोदी को बदनाम कर सकें।

साथियों, 

मैं देश के किसान बहनों-भाइयों को याद दिलाना चाहता हूं, .मैंने कहा था, कि मोदी आपके साथ मजबूती से खड़ा रहेगा। और आप देखिए, ये युद्ध आज भी चल रहा है, लेकिन मोदी ने किसानों के लिए खाद की कमी नहीं होने दी, खाद कम नहीं पड़ने दिया।

साथियों, 

इस युद्ध के कारण दुनिया में फर्टिलाइजर की कीमतें बहुत बढ़ गई हैं। खाद बनाने के लिए जो केमिकल लगते हैं, उनकी कीमतें भी बहुत बढ़ गई। इसका बोझ भी सरकार ने किसानों पर नहीं पड़ने दिया। दुनिया में यूरिया की जो बोरी, दुनिया में 3 हजार रूपये में खाद की बोरी मिलती है, वही बोरी भारत के किसानों को 300 रूपये से भी कम में मिलती है, खाद की यूरिया की बोरी की दुनिया में तीन हजार की कीमत है, यह सारा भार सरकार अपने कंधे पर लेती है और आपको 300 रूपये में देती है। DAP खाद की कीमत तो, दुनिया में पांच हज़ार रुपए से ऊपर पहुंच गई है। लेकिन भारत के किसानों को वही, वही बोरी, साढ़े तेरह सौ रुपए में मिल रही है। देश ये मदद इसलिए कर रहा है, ताकि हमारा किसान सशक्त हो, किसान का जीवन बेहतर हो।

साथियों, 

अनिश्चितता से भरी दुनिया में भारत का तेज़ विकास पूरी दुनिया के लिए नई उम्मीद है। ऐसे में हमें एक भारत श्रेष्ठ भारत के पथ पर निरंतर आगे बढ़ना है। और कल, यानि 31 अक्तूबर को इस संकल्प को मजबूती देने का दिन है। कल, सरदार वल्लभभाई पटेल की जन्मजयंती है, राष्ट्रीय एकता दिवस है। कल सरदार साहब की जयंती है, पूरा देश राष्ट्रीय एकता दिवस मनाएगा। इस दिन पूरा देश में Run for Unity,  एकता की दौड़ देशभर में लगती है। अभी चारों-तरफ से खबरें आ रही हैं कि कैसे रन फॉर यूनिटी के लिए शानदार तैयारियां की गई हैं। मैं सभी देशवासियों से विशेष रूप से अपने युवा साथियों से आग्रह करुंगा कि कल सुबह रन फॉर यूनिटी में बढ़-चढ़कर के हिस्सा लें।

साथियों, 

हर साल 31 अक्टूबर की सुबह ही एकता नगर में एकता पर्व मनाया जाता रहा है। लेकिन इस बार रन फॉर यूनिटी और अन्य कार्यक्रमों को ध्यान में रखते हुए, अब ये कार्यक्रम सुबह की बजाय, शाम को होने वाला है, इसमें बदलाव भी है। एकता नगर में कल शाम को साढ़े पांच बजे धूम-धाम से एकता पर्व मनाया जाएगा। कल शाम साढ़े पांच बजे बहुत बड़े पैमाने में एकता पर्व मनाने वाले हैं। आप लोग टीवी पर देखना कि गुजरात की धरती पर ऐसी परेड़ होगी कि आपको 26 जनवरी की याद आ जायेगी, दिल्ली की याद आ जायेगी, आप जरूर देखना। पुलिस और सुरक्षाबलों की परेड होगी, झांकियां निकलेंगी। मैं सभी देशवासियों से कहूंगा, कल शाम को इस आयोजन से भी जरूर जुड़ें। कश्मीर से कन्याकुमारी तक, कच्छ से कामाख्या तक, हम सभी, पूरा देश, सरदार पटेल को नमन करे। एक भारत, श्रेष्ठ भारत के संकल्प को दोहराए। इसी आग्रह के साथ एक बार फिर से आप सभी को विकास कार्यों की बहुत-बहुत  शुभकामनाएं।

 बहुत बहुत धन्यवाद।

 वहां पीछे बैठी बहनें मेरी बलाईयाँ ले रही हैं, माताजी आपके पैर छूता हूँ, आप बलाईयाँ लेकर मुझे बहुत शक्ति दे रही हो, आपका बहुत बहुत आभार।

 भारत माता की जय !

 भारत माता की जय !

डिस्क्लेमर: प्रधानमंत्री के भाषण का कुछ अंश गुजराती भाषा में भी है, जिसका यहाँ भावानुवाद किया गया है।

  

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MJPS/SS/SS/RK


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