विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी मंत्रालय
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भारत की भविष्य की आर्थिक वृद्धि में भू-स्थानिक क्षमताएं एक प्रमुख आधार होंगी: केंद्रीय मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह


डॉ. जितेंद्र सिंह ने भारत की भू-स्थानिक अर्थव्यवस्था को आगे बढ़ाने के लिए सरकार और उद्योग के बीच मजबूत साझेदारी का आह्वान किया

'भारतीय सर्वेक्षण विभाग' ने तकनीक-प्रधान युग की आवश्यकताएं पूरा करने के लिए स्वयं को बदला है: डॉ. जितेंद्र सिंह


भू-स्थानिक क्षेत्र के लिए आगे बढ़ने का रास्ता है - "सक्षम बनाना, निवेश करना और अपनाना": डॉ. जितेंद्र सिंह


डॉ. जितेंद्र सिंह ने विभिन्न विभागों से भू-स्थानिक अनुप्रयोगों पर 'भारती सर्वेक्षण विभाग' के साथ मिलकर काम करने का आग्रह किया


डॉ. जितेंद्र सिंह ने एक गोलमेज चर्चा में भू-स्थानिक क्षेत्र की संभावनाओं को पूरी तरह से सामने लाने के लिए, कारोबार के अनुकूल वातावरण बनाने पर बल दिया

प्रविष्टि तिथि: 30 OCT 2026 5:00PM by PIB Delhi

विज्ञान और प्रौद्योगिकी तथा पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय के केंद्रीय राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) डॉ. जितेंद्र सिंह ने आज नई दिल्ली में “भू-स्थानिक परिवर्तन के लिए सरकार और उद्योग तालमेल: विकसित भारत 2047 के लिए भू-स्थानिक अर्थव्यवस्था का सह-निर्माण” विषय पर आयोजित एक कार्यशाला में मुख्य भाषण दिया। डॉ सिंह ने कहा कि भू-स्थानिक क्षमताएं भारत की भविष्य की आर्थिक वृद्धि का एक प्रमुख आधार होंगी। यह कार्यशाला भारत सरकार के विज्ञान और प्रौद्योगिकी विभाग (डीएसटी) के अंतर्गत ‘भारतीय सर्वेक्षण विभाग’ द्वारा आयोजित की गई थी।

केंद्री मंत्री महोदय ने भू-स्थानिक क्षेत्र को आगे बढ़ाने के अवसरों, चुनौतियों और दृष्टिकोणों पर वरिष्ठ सरकारी अधिकारियों और उद्योग जगत के नेताओं के साथ एक गोलमेज चर्चा में भी भाग लिया।

डॉ. जितेंद्र सिंह ने प्रदर्शनी का उद्घाटन किया और प्रदर्शकों से बातचीत की। उन्होंने कहा कि भू-स्थानिक जानकारी अब केवल मानचित्रण और सर्वेक्षण के लिए एक तकनीकी संसाधन नहीं रह गई है, बल्कि यह आर्थिक विकास के लिए एक महत्वपूर्ण राष्ट्रीय संपत्ति बन गई है। उन्होंने बताया कि प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के प्रोत्साहन से पिछले 12-13 वर्षों में कई दूरगामी भू-स्थानिक सुधार किए गए हैं। डॉ सिंह ने कहा कि सुधारों को लागू करने के लिए साहस और दृढ़ संकल्प की आवश्यकता थी।

केंद्रीय मंत्री महोदय ने ‘भारतीय सर्वेक्षण विभाग’ में आए बदलावों का उल्लेख किया। उन्होंने बताया कि पहले यह संस्था पारंपरिक और अधिक श्रम-साध्य सर्वेक्षण कार्यों पर केंद्रित थी, लेकिन अब यह उपग्रह-आधारित मानचित्रण, ड्रोन और कंप्यूटर-आधारित तकनीकों को अपना रही है। देहरादून परिसर के अपने दौरे का समरण करते हुए उन्होंने कहा कि वहां की पुरानी कार्य-प्रणालियां उस समय की भौतिक आवश्यकताओं को दर्शाती थीं, जबकि आज के काम के लिए तकनीक और गणनात्मक कौशल वाले युवा पेशेवरों की जरूरत है।

डॉ. जितेंद्र सिंह ने बाजारों का विस्तार करने, व्यावहारिक व्यापारिक मॉडल विकसित करने और स्टार्टअप्स तथा एमएसएमई को बढ़ावा देने के लिए मजबूत सार्वजनिक-निजी भागीदारी का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि 'राष्ट्रीय भू-स्थानिक नीति 2022' एक ऐसा खुला ढांचा प्रदान करती है, जिसमें भू-स्थानिक आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस जैसी उभरती हुई तकनीकों को शामिल किया जा सकता है। एआई को एक ऐसे उपकरण के रूप में बताते हुए जो काम की गति और सटीकता में सुधार कर सकता है, उन्होंने कहा कि सभी क्षेत्रों में इसके उपयोग को प्रोत्साहित किया जाना चाहिए।

केंद्रीय मंत्री महोदय ने सरकारी विभागों से उन क्षेत्रों की पहचान करने का आग्रह किया, जिनमें वे 'भारतीय सर्वेक्षण विभाग' के साथ मिलकर काम कर सकते हैं। उन्होंने महा सर्वेक्षक से कहा कि वे सरकारी विभागों के साथ वर्चुअल बैठकें आयोजित करें, ताकि उन्हें 'भारतीय सर्वेक्षण विभाग' की क्षमताओं के बारे में जानकारी मिल सके। उन्होंने कहा कि बेहतर जागरूकता से सरकारी विभागों और निजी उद्योगों को सहयोग के अवसर खोजने में सहायता मिल सकती है। इस क्षेत्र को आगे बढ़ाने में उद्योग की भूमिका पर बल देते हुए, उन्होंने कहा कि आगे बढ़ने का तरीका "सक्षम बनाना, निवेश करना और अपनाना" है—यानी आत्मविश्वास बढ़ाने के लिए सक्षम बनाना, क्षमता विकसित करने के लिए निवेश करना और आर्थिक विकास के लिए भू-स्थानिक समाधानों को अपनाना है।

विज्ञान और प्रौद्योगिकी विभाग (डीएसटी) के सचिव, प्रो. उमेश वी. वाघमारे ने कहा कि भू-स्थानिक बुनियादी ढांचा राष्ट्रीय संसाधनों से जुड़ी जानकारी को व्यवस्थित करने और उनके अधिकतम उपयोग में सहायता कर सकता है, जिसमें ऊर्जा उपयोग में परिवर्तन के दौरान भी सहायता मिलना शामिल है। उन्होंने बताया कि 'राष्ट्रीय भू-स्थानिक नीति 2022' में डीएसटी को भू-स्थानिक क्षेत्र के लिए संचालक एजेंसी के रूप में मान्यता दी गई है और यह डेटा के निर्माण, उपलब्धता और उपयोग के लिए एक अनुकूल वातावरण प्रदान करती है।

प्रो. वाघमारे ने उपग्रह और ड्रोन तकनीकों, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, ऑप्टिक्स और तेजी से डेटा प्रोसेसिंग के एक साथ आने पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि सरकार की प्राथमिकताएं वास्तविक दुनिया के अनुप्रयोगों और उद्योग की जरूरतों पर आधारित होनी चाहिए। प्रो. वाघमारे ने कहा कि भू-स्थानिक अवसंरचना भारत की विविध जरूरतों को पूरा करने, स्वदेशी नवाचार और उद्यमिता को बढ़ावा देने, वैश्विक साझेदारी मजबूत करने और जलवायु परिवर्तन जैसी चुनौतियों से निपटने में सहायता कर सकता है।

भारत के महा सर्वेक्षक, श्री एस. के. सिन्हा ने भू-स्थानिक सुधारों को आगे बढ़ाने में मार्गदर्शन और सहयोग के लिए डॉ. जितेंद्र सिंह को धन्यवाद दिया। उन्होंने कहा कि 'राष्ट्रीय भू-स्थानिक नीति 2022' ने एक खुले और नवाचार-आधारित इकोसिस्टम की नींव रखी है। उन्होंने जोर देकर कहा कि भू-स्थानिक क्षेत्र की संभावनाओं को आर्थिक अवसरों में बदलने के लिए सरकार, उद्योग जगत और शिक्षा जगत को मिलकर काम करना होगा। उन्होंने बताया कि 'भारतीय सर्वेक्षण विभाग' उद्योग जगत के साथ मिलकर काम कर रहा है, ताकि बुनियादी भू-स्थानिक डेटा और पोजिशनिंग इंफ्रास्ट्रक्चर के जरिए सरकार के प्रमुख कार्यक्रमों को सहयोग दिया जा सके। उन्होंने विश्वास जताया कि यह कार्यशाला साझा दृष्टिकोण को सामूहिक कार्रवाई में बदलने में सहायक सिद्ध होगी।

केंद्रीय मंत्री महोदय ने गोलमेज चर्चा के दौरान कहा कि सरकार प्रक्रियाओं को सरल बनाकर, अनावश्यक नियमों को हटाकर और नवाचार को बढ़ावा देकर, कारोबार के लिए अधिक अनुकूल और सुविधाजनक वातावरन बनाने के लिए प्रतिबद्ध है। सरकार और निजी क्षेत्र के बीच सहयोग के महत्व पर बल देते हुए, केंद्रीय मंत्री महोदय ने अंतरिक्ष और जैव प्रौद्योगिकी जैसे क्षेत्रों के सफल मॉडलों का जिक्र किया, जिन्हें विकास की गति तेज करने के लिए अन्य क्षेत्रों में भी अपनाया जा सकता है। उन्होंने संबंधित पक्षों को प्रोत्साहित किया कि वे प्रक्रियात्मक बाधाओं की पहचान करें, सरकारी सहायता का लाभ उठाएं और भू-स्थानिक क्षेत्र की अपार संभावनाओं को साकार करने के लिए मिलकर काम करें।

इस कार्यशाला में भारत के महा-सर्वेक्षक श्री एस. के. सिन्हा; महा-सर्वेक्षक डेटा संवर्धन और विकास समिति (गीडीपीडीसी) के अध्यक्ष श्री श्रीकांत शास्त्री; और विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग (डीएसटी) के सचिव प्रो. उमेश वी. वाघमारे शामिल हुए।

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पीके/केसी/आरटी/एमकेएस/एसएस

 


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