प्रविष्टि तिथि:
30 OCT 2026 8:02PM by PIB Delhi
भारत सरकार के पर्यटन मंत्रालय द्वारा अरुणाचल प्रदेश सरकार और अन्य पूर्वोत्तर राज्यों के सहयोग से आयोजित 14वें अंतर्राष्ट्रीय पर्यटन मार्ट (आईटीएम) के मुख्य सत्र आज अरुणाचल प्रदेश के तवांग में सफलतापूर्वक संपन्न हुए। 29 से 31 अक्टूबर 2026 तक आयोजित इस मार्ट में देश-विदेश के पर्यटन क्षेत्र के हितधारक एक जुट हुए, ताकि पूर्वोत्तर क्षेत्र की पर्यटन संभावनाओं को प्रदर्शित किया जा सके, व्यावसायिक साझेदारियों को मजबूत किया जा सके और टिकाऊ तथा अनुभव-आधारित पर्यटन को बढ़ावा दिया जा सके।
इस मार्ट में 22 देशों के 43 अंतरराष्ट्रीय खरीदारों, 16 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के 42 घरेलू खरीदारों और 81 विक्रेताओं के साथ-साथ मीडिया प्रतिनिधि, इन्फ्लुएंसर और पर्यटन क्षेत्र से जुड़े अन्य लोग शामिल हुए। इसमें भाग लेने वाले देशों में ऑस्ट्रेलिया, बेलारूस, भूटान, मिस्र, फ्रांस, जर्मनी, इंडोनेशिया, इटली, जापान, केन्या, मलेशिया, फिलीपींस, पोलैंड, रूस, सिंगापुर, दक्षिण कोरिया, स्पेन, श्रीलंका, थाईलैंड, संयुक्त अरब अमीरात, ब्रिटेन और अमेरिका शामिल थे।

इस मार्ट की चर्चाओं का समापन पूर्वोत्तर राज्यों के पर्यटन मंत्रियों की एक क्षेत्रीय बैठक के साथ हुआ। यह बैठक 30 अक्टूबर 2026 को केंद्रीय पर्यटन और संस्कृति मंत्री श्री गजेंद्र सिंह शेखावत की अध्यक्षता में आयोजित की गई थी। इस बैठक में पूर्वोत्तर राज्यों के पर्यटन मंत्री और वरिष्ठ अधिकारी शामिल हुए, जिन्होंने पर्यटन विकास की प्राथमिकताओं, क्षेत्रीय सहयोग, पर्यटन के नए अवसरों और पूरे क्षेत्र में पर्यटकों की सुविधाओं को बेहतर बनाने के उपायों पर चर्चा की।

बैठक के दौरान, पर्यटन मंत्रियों के समक्ष देखो अपना देश 2.0 और नेशनल डिजिटल टूरिज्म स्टैक (एनडीटीएस) पर विषय-आधारित प्रस्तुतियां दी गईं। देखो अपना देश 2.0 पर दी गई प्रस्तुति का मुख्य उद्देश्य पर्यटन की मांग को अन्य स्थानों की ओर मोड़ना और कम प्रसिद्ध पर्यटन स्थलों को बढ़ावा देना था। इसका लक्ष्य लोकप्रिय पर्यटन केंद्रों के विकल्प के रूप में, पर्यटन के लिए तैयार अन्य स्थानों को बढ़ावा देना है। एनडीटीएस पर दी गई प्रस्तुति में एक साझा डिजिटल पर्यटन परितंत्र विकसित करने पर जोर दिया गया। इससे पर्यटन अनुभवों को खोजना आसान होगा, ऑनलाइन बुकिंग की सुविधा मिलेगी और स्थानीय पर्यटन सेवा प्रदाताओं (जैसे गाइड, होमस्टे और पर्यटन उद्यमियों) के लिए बाजार तक पहुंच बेहतर होगी।
इसके अलावा, लाइव कॉन्सर्ट इकोनॉमी और पूर्वोत्तर क्षेत्र में रिस्ट्रिक्टेड एरिया परमिट (आरएपी) / प्रोटेक्टेड एरिया परमिट (पीएपी) की आवश्यकताओं पर भी प्रस्तुतियां दी गईं। लाइव इवेंट इकोनॉमी पर हुई चर्चा में बताया गया कि कैसे संगीत कार्यक्रम, सांस्कृतिक उत्सव और अन्य आयोजन पर्यटकों को आकर्षित कर सकते हैं, उन्हें लंबे समय तक रुकने के लिए प्रोत्साहित कर सकते हैं और इनसे स्थानीय व्यवसायों के लिए अवसर उपलब्ध हो सकते हैं। आरएपी/पीएपी की आवश्यकताओं पर दी गई प्रस्तुति का केंद्रबिंदु सुरक्षा पहलुओं को ध्यान में रखते हुए, आवेदन प्रक्रिया को सरल बनाना, परमिट की शर्तों को अधिक स्पष्ट करना और समय पर आवेदन प्रक्रिया करना था, ताकि पर्यटकों को बेहतर सुविधा मिल सके। पूर्वोत्तर के आठ राज्यों के पर्यटन मंत्रियों ने भी पर्यटन विकास की प्राथमिकताओं और क्षेत्रीय सहयोग पर अपने विचार और सुझाव साझा किए।

अंतर्राष्ट्रीय पर्यटन मार्ट का एक प्रमुख घटक व्यवस्थित व्यापार-से-व्यापार (बी2बी) बैठकें थीं, जिनसे घरेलू और अंतर्राष्ट्रीय खरीदारों तथा पर्यटन विक्रेताओं के बीच सीधे संपर्क के लिए एक मंच उपलब्ध हुआ। कुल 1580 बी2बी बैठकें आयोजित की गईं, जिससे नए पर्यटन यात्रा कार्यक्रम विकसित करने, वाणिज्यिक साझेदारी करने और पूर्वोत्तर राज्यों में पर्यटन उत्पादों और अनुभवों को बढ़ावा देने के अवसर मिले।
इससे पहले, तकनीकी सत्रों के दौरान, पर्यटन मंत्रालय के अतिरिक्त सचिव और महानिदेशक श्री सुमन बिल्ला ने अपने मुख्य भाषण में भारत में घरेलू पर्यटन के क्षेत्र में हुई महत्वपूर्ण वृद्धि की चर्चा की। उन्होंने बताया कि घरेलू पर्यटकों की संख्या 2014 के 1.32 बिलियन से बढ़कर 2025 में 4.34 बिलियन हो गई है, जो लगभग 11% की सीएजीआर है। उन्होंने कहा कि पर्यटन क्षेत्र से 89 मिलियन नौकरियों में मदद मिलती है और यह राष्ट्रीय जीडीपी में 5.22% का योगदान देता है। उन्होंने कनेक्टिविटी में सुधार के बारे में कहा कि पूर्वोत्तर राज्यों में हवाई अड्डों की संख्या में वृद्धि हुई है।

इस क्षेत्र में यह संख्या 2014 के 9 से बढ़कर 17 हो गई है, जबकि राष्ट्रीय राजमार्ग नेटवर्क 10,905 किमी से बढ़कर 16,207 किमी तक फैल गया है। उन्होंने इस क्षेत्र में निवेश की संभावनाओं और विशेषरूप से होमस्टे, एडवेंचर, इको, वेलनेस और अनुभवात्मक पर्यटन के माध्यम से समुदाय-आधारित पर्यटन विकास के अवसरों पर भी जोर दिया।

तकनीकी सत्रों में आठों पूर्वोत्तर राज्यों—अरुणाचल प्रदेश, असम, मणिपुर, मेघालय, मिजोरम, नागालैंड, सिक्किम और त्रिपुरा—ने अपने पर्यटन आकर्षणों, उभरते हुए स्थलों और पर्यटन सर्किटों को प्रदर्शित किया।
इस मार्ट का उद्घाटन 29 अक्टूबर 2026 को केंद्रीय पर्यटन और संस्कृति मंत्री श्री गजेंद्र सिंह शेखावत, पर्यटन तथा पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस राज्य मंत्री श्री सुरेश गोपी, अरुणाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री श्री पेमा खांडू, सिक्किम के मुख्यमंत्री श्री प्रेम सिंह तमांग और अन्य गणमान्य व्यक्तियों की उपस्थिति में किया गया। श्री शेखावत ने उद्घाटन सत्र को संबोधित करते हुए इस बात पर जोर दिया कि इस क्षेत्र की पर्यटन क्षमता को स्थानीय समुदायों के लिए टिकाऊ व्यावसायिक अवसरों और आजीविका के साधनों में बदला जाना चाहिए।
इस मार्ट में नॉर्थ ईस्ट बाज़ार के माध्यम से पूर्वोत्तर क्षेत्र की समृद्ध सांस्कृतिक और प्राकृतिक विरासत को भी प्रदर्शित किया गया। इसमें पारंपरिक हस्तशिल्प, हथकरघा, वस्त्र और क्षेत्रीय उत्पादों के साथ ही इस क्षेत्र की परंपराओं को दर्शाने वाले सांस्कृतिक कार्यक्रम भी शामिल थे। प्रतिनिधिमंडलों और मीडिया प्रतिनिधियों को विशेष रूप से तवांग मठ, तवांग युद्ध स्मारक और उरगेलिंग गोम्पा का भ्रमण कराया गया।
अंतिम दिन, 31 अक्टूबर 2026 को बुद्ध पार्क, पीटीएसओ (पीटीएसओ) झील और शेरनुप गांव के तकनीकी दौरे निर्धारित किए गए हैं। अंतरराष्ट्रीय प्रतिनिधियों के लिए 'मार्ट के बाद परिचयात्मक दौरे (एफएएम टूर्स) 1 नवंबर 2026 को गुवाहाटी से शुरू होंगे, जिससे उन्हें संपूर्ण पूर्वोत्तर क्षेत्र के पर्यटन स्थलों और उत्पादों को करीब से जानने का अवसर मिलेगा।
14वां अंतर्राष्ट्रीय पर्यटन मार्ट 13 वर्ष बाद तवांग में आयोजित किया गया है, इससे पहले 2013 में द्वीतीय अंतर्राष्ट्रीय पर्यटन मार्ट यहां आयोजित किया गया था। इस मार्ट से पर्यटन साझेदारियां सुदृढ़ करने, कम प्रसिद्ध पर्यटन स्थलों को बढ़ावा देने और पूर्वोत्तर क्षेत्र को टिकाऊ तथा अनुभव-आधारित पर्यटन के लिए एक प्रमुख गंतव्य के रूप में स्थापित करने की प्रतिबद्धता को बल मिला है।
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