प्रविष्टि तिथि:
02 NOV 2026 9:37AM by PIB Delhi
अरुणाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री श्री पेमा खांडू ने 31 अक्टूबर, 2026 को तवांग में नई दिल्ली के राष्ट्रीय संग्रहालय से लाए गए शाक्यमुनि बुद्ध के पवित्र अवशेष को औपचारिक रूप से प्राप्त किए। इसी के साथ अरुणाचल प्रदेश में भारत की बौद्ध विरासत की एक महत्वपूर्ण प्रदर्शनी की शुरुआत हुई। इन पवित्र अवशेषों का ऐतिहासिक गादेन नामग्याल ल्हात्से (तवांग मठ) में पारंपरिक धार्मिक स्वागत किया गया, जिसमें केंद्रीय संस्कृति और पर्यटन मंत्री श्री गजेंद्र सिंह शेखावत, सम्मानित बौद्ध भिक्षु, धार्मिक नेता और भक्त उपस्थित रहे।
इस प्रदर्शनी का आयोजन केंद्रीय संस्कृति मंत्रालय अरुणाचल प्रदेश सरकार, अंतर्राष्ट्रीय बौद्ध परिसंघ (आईबीसी) और नई दिल्ली स्थित राष्ट्रीय संग्रहालय के साथ मिलकर कर रहा है। इससे भक्तों और आम लोगों को बौद्ध धर्म के तीन महत्वपूर्ण केंद्रों - तवांग, बोमडिला और नामसाई में पवित्र अवशेषों को श्रद्धांजलि देने का मौका मिलेगा।
अरूणाचल प्रदेश के तवांग में उद्घाटन कार्यक्रम में केंद्रीय संस्कृति और पर्यटन मंत्री श्री गजेंद्र सिंह शेखावत के साथ अरुणाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री श्री पेमा खांडू, आदरणीय बौद्ध भिक्षु, अंतर्राष्ट्रीय बौद्ध परिसंघ के प्रतिनिधि, अन्य गणमान्य व्यक्ति और भक्त शामिल हुए।
इस मौके पर अपने संदेश में, प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने अरुणाचल प्रदेश में भगवान बुद्ध के पवित्र अवशेषों की प्रदर्शनी पर खुशी जताई और इसे आध्यात्मिक तथा सांस्कृतिक महत्व का मौका बताया। उन्होंने एक सदी से भी ज़्यादा समय बाद पवित्र पिपराहवा अवशेषों की घर वापसी को गर्व और खुशी का पल बताया, और भरोसा जताया कि इस प्रदर्शनी से भारत की समृद्ध बौद्ध विरासत और भगवान बुद्ध की सार्वभौमिक शिक्षाओं का महत्व और मज़बूत होगा।
इस प्रदर्शनी का खास आध्यात्मिक महत्व है क्योंकि अभी तिब्बती बौद्ध परंपरा में बुद्ध के स्वर्ग से नीचे उतरने की याद में एक महत्वपूर्ण अवसर ल्हाबाब दुचेन मनाया जा रहा है।
ये पवित्र अवशेष उत्तर प्रदेश के पिपरहवा से आए हैं, जो प्राचीन कपिलवस्तु और भगवान बुद्ध की शाक्य परंपरा से जुड़ा एक पुरातात्विक स्थल है। नई दिल्ली के राष्ट्रीय संग्रहालय में रखे इन अवशेषों का बौद्ध समुदायों के लिए बहुत ज़्यादा ऐतिहासिक, पुरातात्विक और आध्यात्मिक महत्व है।
इस आयोजन के साथ में एक प्रदर्शनी, जिसका शीर्षक है पवित्र पिपराहवा की खोज: पवित्र बुद्ध अवशेषों और उनकी खोज की कहानी। इस प्रदर्शनी में पिपराहवा में पुरातात्विक खोजों का इतिहास, अवशेषों की पूजा का महत्व और पिपराहवा विरासत की यात्रा, जिसमें भारत में इसकी वापसी भी शामिल है, को प्रस्तुत किया जाएगा।
अंतर्राष्ट्रीय बौद्ध परिसंघ, अरुणाचल प्रदेश सरकार के साथ मिलकर, 2 नवंबर 2026 को तवांग के कलावांगपो सम्मेलन कक्ष में “बौद्ध धर्म: हिमालयी क्षेत्र और उससे आगे प्रसार” नाम से एक अंतर्राष्ट्रीय सम्मेलन भी आयोजित करेगा।
यह प्रदर्शनी 1 से 7 नवंबर तक तवांग मठ में चलेगी, इसके बाद 8 से 13 नवंबर तक टीजीएल मठ (लोअर गोम्पा), बोमडिला में और 14 से 20 नवंबर 2026 तक गोल्डन पैगोडा, नामसाई में चलेगी। पवित्र अवशेष 21 नवंबर 2026 को नई दिल्ली स्थित राष्ट्रीय संग्रहालय में वापस लाए जाएंगे।
यह प्रदर्शनी भारत की बौद्ध विरासत को उत्तर पूर्वी क्षेत्र के समुदायों के करीब लाने की एक ज़रूरी पहल है। इसके साथ ही, इससे भगवान बुद्ध की शांति, करुणा, अहिंसा और सद्भाव की सार्वभौमिक शिक्षाओं को बढ़ावा मिलेगी।
ऐसी कोशिशों के ज़रिए, भारत सरकार देश की समृद्ध बौद्ध विरासत को बचाने, बढ़ावा देने तथा विस्तार करने और दुनिया भर के बौद्ध समुदायों के साथ भारत के ऐतिहासिक और आध्यात्मिक संबंधों को मज़बूत करने की अपनी कोशिशें जारी रखे हुए है।
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