प्रविष्टि तिथि:
02 NOV 2026 6:08PM by PIB Delhi
भारतीय दूरसंचार विनियामक प्राधिकरण (ट्राई) ने आज दूरसंचार उपभोक्ता शिकायत निवारण (चौथा संशोधन) विनियम, 2026 जारी किया।
शिकायत निवारण प्रणाली के आधुनिकीकरण की बदलती जरूरतों को पूरा करने हेतु, प्राधिकरण ने 7 मई 2026 को दूरसंचार उपभोक्ता शिकायत निवारण (चौथा संशोधन) विनियम, 2026 के मसौदे पर एक परामर्श पत्र जारी किया, जिसमें क्रमशः 12 और 19 जून 2026 तक टिप्पणियां और प्रति-टिप्पणियां आमंत्रित की गईं। हितधारकों से कुल 32 टिप्पणियां और 24 प्रति-टिप्पणियां प्राप्त हुई और ट्राई की वेबसाइट पर अपलोड की गईं। 17 जुलाई 2026 को एक ऑनलाइन ओपन हाउस चर्चा आयोजित की गई।
उपर्युक्त परामर्शों के आधार पर, प्राधिकरण ने संशोधन विनियमों को अंतिम रूप दिया है। इनकी मुख्य विशेषताएं निम्नलिखित हैं:
- संशोधित विनियम पिछले वित्तीय वर्ष के अंतिम दिन तक दस हजार से अधिक ग्राहकों वाले इंटरनेट सेवा प्रदाताओं पर लागू होंगे। पांच करोड़ रुपये से अधिक के वार्षिक वित्तीय कारोबार के आधार पर मौजूदा वैकल्पिक मानदंड को समाप्त कर दिया गया है, इस प्रकार प्रयोज्यता खंड को सरल बनाया गया है।
- अब उपभोक्ता शिकायत केंद्र, वेबसाइट और वेब पोर्टल जैसे मौजूदा माध्यमों के अलावा, सेवा प्रदाता के मोबाइल एप्लिकेशन से भी शिकायतें और अपील दर्ज करा सकेंगे, सेवा अनुरोध (सर्विस रिक्वेस्ट) कर सकेंगे और सेवा से संबंधित जानकारियां प्राप्त कर सकेंगे। इससे उपभोक्ताओं को शिकायत और अपील दर्ज कराने के लिए अधिक विकल्प, सुविधा मिलेगी।
- शिकायत केंद्रों के माध्यम से उपभोक्ता सहायता अब सप्ताह के सातों दिन, चौबीसों घंटे उपलब्ध होगी, जबकि अभी यह सुविधा केवल 16 घंटे ही मिलती है। यह सहायता प्रतिनिधियों, स्वचालित प्रणालियों, एआई एजेंटों, ग्राहक-केंद्रित अन्य तकनीकी समाधानों या इनके मिले-जुले रूप के माध्यम से प्रदान की जा सकती है। मानवीय सहायता प्रतिदिन कम से कम 16 घंटे उपलब्ध रहेगी। तकनीक पर आधारित समाधानों का संचालन उचित मानवीय निगरानी के साथ किया जाएगा। इससे उपभोक्ताओं के लिए आसानी और सुविधा सुनिश्चित होगी तथा सेवा प्रदाताओं को शिकायत केंद्रों के प्रबंधन में सहूलियत मिलेगी।
- प्रत्येक सेवा प्रदाता को अपने शिकायत केंद्र या उपभोक्ता सहायता केंद्र में विशेष डेस्क या हेल्पलाइन की व्यवस्था करनी होगी। इन पर ऐसे कर्मचारी या सहायक तकनीक होनी चाहिए जो दिव्यांगजनों की कॉल प्राप्त कर सकें। सेवा प्रदाता यह सुनिश्चित करेंगे कि उनके मोबाइल ऐप, वेबसाइट और पोर्टल में ऐसे एक्सेसिबिलिटी फीचर हों, जो भारत सरकार द्वारा दिव्यांगजनों के लिए जारी किए गए एक्सेसिबिलिटी संबंधी दिशा-निर्देशों या मानकों के अनुरूप हों।
- शिकायत के निपटारे के बाद अपील दायर करने की समय-सीमा को 30 दिन से घटाकर 15 दिन कर दिया गया है, क्योंकि उपभोक्ता आमतौर पर जल्द से जल्द अपील करना चाहते हैं, जबकि अधिक समय देने से अनुपालन संबंधी आवश्यकताएं अनावश्यक रूप से बढ़ जाती हैं। अब उपभोक्ता ई-मेल, डाक, व्यक्तिगत रूप से या ग्राहक सेवा नंबर जैसे उपलब्ध माध्यमों के अलावा, सेवा प्रदाता के मोबाइल एप्लिकेशन, वेबसाइट या पोर्टल के जरिए भी अपील दायर कर सकते हैं। इससे अपील का समाधान तेजी से हो सकेगा।
- इसके अलावा, इस संशोधन के माध्यम से अपीलीय प्राधिकरण को और अधिक उत्तरदायी बनाया गया है। यह अनिवार्य कर दिया गया है कि अपीलीय प्राधिकरण में एक या एक से अधिक ऐसे व्यक्ति शामिल हों, जो सेवा प्रदाता के प्रबंधन में नियमित कर्मचारी हों और जिनके पास कम से कम पांच वर्षों का अनुभव हो। अपीलीय प्राधिकरण अपील की जांच करेगा, शिकायत के समाधान के लिए उचित कार्रवाई करेगा, और अपील प्राप्त होने के 15 दिनों के भीतर अपने अंतिम निर्णय की सूचना देगा।
- अपील से जुड़े मामलों का कुशल और समयबद्ध निपटारा सुनिश्चित करने के लिए सलाहकार समिति के माध्यम से अपील के निपटारे की पुरानी व्यवस्था को खत्म कर दिया गया है।
- "फीडबैक सर्वे" की एक नई व्यवस्था शुरू की गई है। किसी शिकायत या अपील के समाधान या निपटारे के बाद, सेवा प्रदाता एक ऑनलाइन फीडबैक सर्वे कराएगा, ताकि यह पता लगाया जा सके कि उपभोक्ता समाधान से कितना संतुष्ट है। फीडबैक पांच-पॉइंट स्केल पर ली जाएगी, जिसमें "पूरी तरह संतुष्ट" (5 पॉइंट) से लेकर "पूरी तरह असंतुष्ट" (1 पॉइंट) तक के विकल्प होंगे। सेवा प्रदाता इन फीडबैक सर्वे के नतीजों को हर तिमाही अपनी वेबसाइट पर प्रकाशित करेगा।
- यह भी अनिवार्य किया गया है कि प्रत्येक सेवा प्रदाता शिकायतों और अपीलों के निपटारे तथा फीडबैक सर्वेक्षण के परिणामों पर एक त्रैमासिक रिपोर्ट अपने मुख्य कार्यकारी अधिकारी या निदेशक मंडल के समक्ष प्रस्तुत करे। ऐसा इसलिए किया गया है ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि सेवा प्रदाताओं द्वारा शिकायतों और अपीलों के निपटारे की उचित समीक्षा हो और उच्चतम स्तर पर इसकी निगरानी की जा सके।
- उपभोक्ता शिकायत निवारण निगरानी समिति की नई व्यवस्था शुरू की गई है। प्रत्येक सेवा प्रदाता को एक उपभोक्ता शिकायत निवारण निगरानी समिति बनानी होगी, जो उसकी शिकायत निवारण प्रणाली के कामकाज की निगरानी करेगी और समय-समय पर उसकी समीक्षा करेगी। इस समिति में सेवा प्रदाता के प्रतिनिधि शामिल होंगे। इसके अलावा, लाइसेंस प्राप्त सेवा क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले राज्य या केंद्र शासित प्रदेश में, प्राधिकरण के साथ पंजीकृत प्रत्येक उपभोक्ता संगठन से कम से कम एक प्रतिनिधि को भी इसमें शामिल करना होगा। सेवा प्रदाताओं को ऐसी समिति बनानी होगी जिसमें उन सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के प्रतिनिधि अनिवार्य रूप से शामिल हों जहां उनके दस हजार से अधिक ग्राहक हैं। यह समिति शिकायत निवारण प्रणाली की समीक्षा करने के लिए साल में कम से कम एक बार बैठक करेगी।
- इस संशोधन में नियामक समीक्षा की एक नई व्यवस्था शुरू की गई है। प्राधिकरण, सेवा प्रदाताओं की शिकायत निवारण प्रणाली के कामकाज की समय-समय पर समीक्षा कर सकता है, जिसके तहत: -
- सेवा प्रदाता के रिकॉर्ड का ऑडिट और निरीक्षण,
- सेवा प्रदाता द्वारा प्रस्तुत त्रैमासिक कार्य-प्रदर्शन रिपोर्ट का ऑडिट और विश्लेषण,
- उपभोक्ता की प्रतिक्रिया पर आधारित समीक्षा करना।
- इस संशोधन में ऐसे मामलों के लिए आर्थिक दंड का प्रावधान शामिल किया गया है, जिनमें ऑडिट, निरीक्षण, विश्लेषण या समीक्षा के दौरान यह पाया जाता है कि किसी शिकायत या अपील का निपटारा इन नियमों के प्रावधानों का उल्लंघन करके किया गया है।
- त्रैमासिक कार्य-प्रदर्शन रिपोर्ट जमा न करने या देर से जमा करने पर आर्थिक दंड का प्रावधान भी लागू किया गया है।
ये संशोधन उपभोक्ता शिकायत निवारण प्रणाली को मजबूत करते हैं। इसके तहत उपभोक्ताओं को बेहतर डिजिटल पहुंच, चौबीसों घंटे चलने वाले शिकायत केंद्र, दिव्यांगजनों के लिए आसान पहुंच, और शिकायतों व अपीलों को तेजी से दायर करने और उनका निपटारा करने की सुविधा मिलती है। अपीलीय तंत्र को भी मजबूत किया गया है। उचित पर्यवेक्षण और नियमों का पालन सुनिश्चित करने के लिए कई कदम उठाए गए हैं, जिनमें उपभोक्ताओं से सुव्यवस्थित फीडबैक लेना, शिकायत निवारण की निगरानी करने वाली समितियां बनाना, बेहतर विनियामक समीक्षा करना, और नियमों का पालन न करने के कुछ मामलों में आर्थिक दंड लगाना शामिल है।
विनियम का संपूर्ण विवरण ट्राई की वेबसाइट www.trai.gov.in पर उपलब्ध है। किसी भी स्पष्टीकरण या जानकारी हेतु, ट्राई के सलाहकार (उपभोक्ता मामले) से ई-मेल आईडी: adv.ca@trai.gov.in या टेलीफोन नंबर +91-11-26769605 पर संपर्क किया जा सकता है।
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