नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय
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बीआरई समिट एवं एक्सपो 2026 ने नवीकरणीय ऊर्जा के क्षेत्र में एक प्रमुख वैश्विक शक्ति के रूप में भारत की स्थिति को और सुदृढ़ किया: केंद्रीय नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा मंत्री श्री प्रल्हाद जोशी


यह शिखर सम्मेलन सुदृढ़ स्वच्छ ऊर्जा अर्थव्यवस्था, आकर्षक निवेश गंतव्य और सतत विकास के लिए वैश्विक भागीदार के रूप में भारत की स्थिति को और सुदृढ़ करता है: श्री जोशी

प्रविष्टि तिथि: 05 NOV 2026 5:19PM by PIB Delhi

भारत नवीकरणीय ऊर्जा के क्षेत्र में एक प्रमुख वैश्विक शक्ति के रूप में उभरा है और दुनिया इसकी प्रगति तथा बढ़ती महत्वाकांक्षाओं पर ध्यान दे रही है। यह बात केंद्रीय नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा, शिक्षा तथा उपभोक्ता मामले, खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण मंत्री श्री प्रल्हाद जोशी ने आज यहां भारत नवीकरणीय ऊर्जा (बीआरई) शिखर सम्मेलन 2026 के समापन पर मीडिया को संबोधित करते हुए कही।

उन्होंने कहा कि भारत मंडपम में दुनिया भर के वैश्विक नीति-निर्माता, निवेशक, उद्योग जगत के प्रमुख प्रतिनिधि और नवप्रवर्तक एक मंच पर एकत्र हुए। 135 से अधिक देशों की भागीदारी के साथ, यह शिखर सम्मेलन नवीकरणीय ऊर्जा के क्षेत्र में भारत के सबसे बड़े वैश्विक मंचों में से एक के रूप में उभरा। उन्होंने कहा कि यह पहली बार था जब नवीकरणीय ऊर्जा क्षेत्र के तीन महत्त्वपूर्ण आयोजन एक साथ आयोजित किए गए। इसमें घरेलू और अंतरराष्ट्रीय हितधारकों की व्यापक भागीदारी ने भारत की नवीकरणीय ऊर्जा विकास यात्रा में वैश्विक विश्वास को प्रदर्शित किया।

माननीय प्रधानमंत्री ने 2 नवंबर, 2026 को इस शिखर सम्मेलन का उद्घाटन किया। अपने संबोधन में प्रधानमंत्री ने कोविड-19 महामारी और पश्चिम एशिया संकट से उत्पन्न वैश्विक व्यवधानों के प्रति देश की सुदृढ़ता बढ़ाने में नवीकरणीय ऊर्जा के क्षेत्र में भारत के निरंतर निवेश के रणनीतिक महत्त्व को रेखांकित किया। उन्होंने कहा कि नवीकरणीय ऊर्जा क्षेत्र में भारत के निवेश ने देश को इन व्यवधानों के प्रभावों से काफी हद तक सुरक्षित रखा है।

प्रधानमंत्री ने इस बात पर जोर दिया कि भारत की नवीकरणीय ऊर्जा यात्रा न केवल देश के घरेलू ऊर्जा परिदृश्य को बदल रही है, बल्कि ऐसे समाधान और अनुभव भी विकसित कर रही है, जो पूरी दुनिया के लिए लाभकारी हो सकते हैं। मानवता के साथ अपने नवाचारों और उपलब्धियों को साझा करने की भारत की प्रतिबद्धता पर जोर देते हुए, उन्होंने इस बात को रेखांकित किया कि स्वच्छ ऊर्जा के क्षेत्र में भारत की सफलता में दुनिया भर के देशों में ऊर्जा परिवर्तन को समर्थन देने की क्षमता है। स्वच्छ ऊर्जा नवाचार पारिस्थितिकी तंत्र में अधिक भागीदारी का आह्वान करते हुए, प्रधानमंत्री ने स्टार्टअप, आईआईटी, नवप्रवर्तकों और उद्यमियों को ऐसे समाधान और व्यवसाय मॉडल विकसित करने के लिए आमंत्रित किया, जिनके माध्यम से घरेलू ऊर्जा की बढ़ती आवश्यकताओं को स्वच्छ ऊर्जा के उपयोग से पूरा किया जा सके।

2 से 5 नवंबर तक आयोजित इस चार दिवसीय शिखर सम्मेलन में स्वच्छ ऊर्जा की ओर बदलाव को आगे बढ़ाने के लिए वैश्विक नीति-निर्माताओं, उद्योग जगत के प्रमुख प्रतिनिधियों, निवेशकों, प्रौद्योगिकी प्रदाताओं, शोधकर्ताओं, स्टार्टअप और अंतरराष्ट्रीय संस्थानों को एक साझा मंच पर एक साथ लाया गया। इस शिखर सम्मेलन में 75,000 से अधिक आगंतुकों, 400 से अधिक प्रदर्शकों और 113 सत्रों में 627 से अधिक वक्ताओं की व्यापक भागीदारी रही। इसमें 135 देशों के लगभग 800 प्रतिनिधियों ने भाग लिया, जिनमें भागीदार देश, अंतरराष्ट्रीय सौर गठबंधन (आईएसए) के सदस्य, अंतरराष्ट्रीय संगठन और भारत में स्थित राजनयिक मिशनों के प्रतिनिधि शामिल थे। उच्च-स्तरीय मंत्रिस्तरीय भागीदारी में 32 अंतरराष्ट्रीय मंत्री, 6 मुख्यमंत्री और 10 राज्य ऊर्जा मंत्री शामिल थे, जो राष्ट्रीय और उप-राष्ट्रीय, दोनों स्तरों के हितधारकों की मजबूत भागीदारी को दर्शाता है।

नीति-निर्माताओं, निवेशकों, उद्योग जगत, अनुसंधान संस्थानों, स्टार्टअप और अंतरराष्ट्रीय विकास भागीदारों को एक मंच पर लाकर, इस शिखर सम्मेलन ने भारत के स्वच्छ ऊर्जा बाजार में विश्वास को सुदृढ़ किया है और राष्ट्रीय एवं वैश्विक महत्वाकांक्षाओं को कार्यान्वयन के लिए एक भविष्योन्मुखी कार्यसूची में रूपांतरित करने में मदद की है।

शिखर सम्मेलन में इस बात को रेखांकित किया गया कि भारत की स्वच्छ ऊर्जा नीतियाँ और ऊर्जा परिवर्तन का लोकतंत्रीकरण, आर्थिक विकास को जीवाश्म ईंधन से होने वाले उत्सर्जन से अलग करने में सहायक हैं। पिछले कुछ वर्षों में भारत ने अपनी ऊर्जा परिवर्तन की गति तेज की है। पिछले वित्त वर्ष में भारत की वार्षिक बिजली खपत का एक-चौथाई से अधिक हिस्सा नवीकरणीय ऊर्जा स्रोतों से प्राप्त हुआ। भारत के अनुभव ने साबित किया है कि अनुकूल एवं स्थिर नीतिगत व्यवस्था, संस्थागत सुधारों और प्रौद्योगिकी नवाचारों के सहयोग से नवीकरणीय ऊर्जा में निरंतर निवेश, आर्थिक विकास को समर्थन देने के साथ-साथ ऊर्जा सुरक्षा को भी सुदृढ़ कर सकता है।

शिखर सम्मेलन का एक प्रमुख परिणाम भारत में स्वच्छ ऊर्जा निवेश की संभावनाओं के प्रति घरेलू और अंतरराष्ट्रीय निवेशकों द्वारा व्यक्त किया गया मजबूत विश्वास रहा। 500 गीगावाट गैर-जीवाश्म ईंधन क्षमता का राष्ट्रीय लक्ष्य हासिल करने के लिए भारत को लगभग 220 अरब अमेरिकी डॉलर के निवेश की आवश्यकता है। शिखर सम्मेलन के दौरान हुई चर्चाओं से यह स्पष्ट हुआ कि पूंजी की उपलब्धता कोई बाधा नहीं है। निवेशकों ने भारत की दीर्घकालिक स्वच्छ ऊर्जा विकास संभावनाओं में सकारात्मक रुचि व्यक्त की, जो वर्ष 2030 की त्‍वरित आवश्यकताओं से कहीं आगे तक विस्‍तृत हैं।

महत्त्वपूर्ण बात यह है कि निवेशकों की भागीदारी पारंपरिक रणनीतिक निवेशकों तक ही सीमित नहीं रही, बल्कि इसमें पेंशन फंड, संस्थागत निवेशक और दीर्घकालिक धैर्यशील पूंजी उपलब्ध कराने वाले निवेशक भी शामिल हुए। यह भारत के स्वच्छ ऊर्जा वित्तपोषण पारिस्थितिकी तंत्र की बढ़ती परिपक्वता को दर्शाता है।

इन चर्चाओं में बैंक वित्तपोषण के अनुकूल विद्युत खरीद समझौतों, पूर्वानुमेय बिजली खरीद व्यवस्थाओं, जोखिमों के अधिक स्पष्ट आवंटन और अधिक विकसित बॉन्ड बाजारों के महत्त्व को रेखांकित किया गया। बड़े पैमाने पर पूंजी जुटाने में अवसंरचना निवेश न्यासों (इनविट्स) और मिश्रित वित्तपोषण जैसे नए वित्तीय साधनों की भूमिका पर भी चर्चा की गई।

केंद्रीय नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा मंत्री ने शिखर सम्मेलन के दौरान कई उच्च-स्तरीय बैठकें कीं। इनमें मुख्य सचिवों, राज्य ऊर्जा मंत्रियों, वरिष्ठ सरकारी अधिकारियों और उद्योग जगत के नेताओं की भागीदारी वाली मुख्य कार्यकारी अधिकारी (सीईओ) स्तर की स्वच्छ ऊर्जा निवेश गोलमेज बैठक भी शामिल थी। इस गोलमेज बैठक में नवीकरणीय ऊर्जा संबंधी महत्वाकांक्षाओं को धरातल पर उतारने के लिए प्राथमिकताओं की पहचान की गई। इनमें ऊर्जा उत्पादन, पारेषण, भंडारण और मांग केंद्रों की समन्वित योजना तथा भूमि, अनुमोदन और कार्यान्वयन के संबंध में अधिक निश्चितता सुनिश्चित करना शामिल है। इसके अलावा, उन्होंने फ्रांस के पारिस्थितिक संक्रमण मंत्री प्रतिनिधि और डेनमार्क के व्यापार एवं प्रतिस्पर्धात्मकता मंत्री के साथ द्विपक्षीय बैठकें कीं। इन बैठकों में नेताओं ने साझा हितों के मुद्दों और वैश्विक ऊर्जा परिदृश्यों पर चर्चा की। शिखर सम्मेलन ने 100 से अधिक कारोबार-से-कारोबार (बी2बी) बैठकों के आयोजन के लिए भी मंच प्रदान किया। सम्मेलन के साथ-साथ आयोजित इन बैठकों से व्यवसायों को साझेदारियाँ और सहयोग स्थापित करने के अवसर मिले।

शिखर सम्मेलन में हुई चर्चाओं से भारत के स्वच्छ ऊर्जा एजेंडे में नवीकरणीय ऊर्जा की स्थापित क्षमता बढ़ाने से आगे बढ़कर एक विश्वसनीय, लचीली और एकीकृत विद्युत प्रणाली विकसित करने की दिशा में हो रहे बदलाव का संकेत मिला। उद्योग, शीतलन, विद्युत गतिशीलता और डेटा सेंटरों से बिजली की बढ़ती मांग को देखते हुए, ऊर्जा परिवर्तन के अगले चरण में ऊर्जा भंडारण, पारेषण अवसंरचना, ग्रिड में लचीलापन, सहायक सेवाओं, पूर्वानुमान, मांग प्रतिक्रिया और ग्रीन ओपन एक्सेस पर अधिक जोर देने की आवश्यकता होगी।

ऊर्जा भंडारण निकट भविष्य की सबसे महत्त्वपूर्ण प्राथमिकताओं में से एक के रूप में उभरा। चर्चाओं में नवीकरणीय ऊर्जा की खरीद और उभरते मांग केंद्रों के साथ ऊर्जा भंडारण एवं पारेषण की योजना में तालमेल बिठाने की आवश्यकता पर भी जोर दिया गया। इसके साथ ही, संस्थागत व्यवस्थाओं, ग्रिड प्रबंधन और पवन एवं सौर ऊर्जा उत्पादन का पूर्वानुमान लगाने के लिए आधुनिक एआई-आधारित प्रणालियों को सुदृढ़ करने पर भी बल दिया गया। चौबीसों घंटे नवीकरणीय ऊर्जा और सुनिश्चित एवं मांग के अनुसार उपलब्ध कराई जा सकने वाली नवीकरणीय ऊर्जा (एफडीआरई) जैसी नई अनुबंध व्यवस्थाओं और तकनीकी प्रारूपों पर भी चर्चा की गई। इनमें हालिया एसईसीआई निविदा में प्राप्त 5.25 रुपये प्रति यूनिट की वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी दर भी शामिल थी। इन पहलों ने विदेशी प्रतिनिधियों और नीति-निर्माताओं की भारी रुचि आकर्षित की।

शिखर सम्मेलन में औद्योगिक प्रतिस्पर्धात्मकता बढ़ाने, निर्यात को समर्थन देने और औद्योगिक कार्बन उत्सर्जन में कमी लाने में हरित खरीद के बढ़ते महत्त्व को भी रेखांकित किया गया। इसमें जीवाश्म ईंधन पर निर्भर पेट्रो-अर्थव्यवस्था से स्वतंत्र विद्युत ऊर्जा प्रणालियों पर आधारित इलेक्ट्रो-अर्थव्यवस्था की ओर बदलाव में बढ़ती रुचि को भी उजागर किया गया।

भारत के घरेलू स्वच्छ ऊर्जा विनिर्माण पारिस्थितिकी तंत्र को और सुदृढ़ करना बीआरई शिखर सम्मेलन एवं एक्सपो 2026 का एक अन्य प्रमुख केंद्र-बिंदु रहा। चर्चाओं में साझा प्रयोगशालाओं, प्रायोगिक विनिर्माण लाइनों, प्रदर्शन सुविधाओं तथा परीक्षण एवं प्रमाणन अवसंरचना के सहयोग से केवल असेंबली तक सीमित रहने के बजाय सामग्री, घटकों, उपकरणों और उन्नत प्रौद्योगिकियों के घरेलू विनिर्माण की दिशा में आगे बढ़ने की आवश्यकता पर जोर दिया गया।

शिखर सम्मेलन में अगली पीढ़ी की सौर प्रौद्योगिकियों, पेरोव्स्काइट सेल, पुनर्चक्रण योग्य पवन टरबाइन सामग्री, दीर्घावधि ऊर्जा भंडारण, इलेक्ट्रोलाइज़र, ईंधन सेल, नवीकरणीय ऊर्जा में कृत्रिम बुद्धिमत्ता के अनुप्रयोगों और फ्लोटिंग सौर ऊर्जा के क्षेत्र में कार्यरत हितधारकों को एक साथ लाया गया।

शिखर सम्मेलन में अनुसंधान एवं नवाचार को व्यावसायिक स्तर पर क्रियान्वयन से जोड़ने पर विशेष जोर दिया गया। भारतीय प्रौद्योगिकियों के व्यावसायीकरण में तेजी लाने के लिए सार्वजनिक खरीद, क्षेत्रीय प्रदर्शन, परीक्षण एवं प्रमाणन अवसंरचना तथा उद्योग और अनुसंधान संस्थानों के बीच सहयोग को महत्त्वपूर्ण साधनों के रूप में चिह्नित किया गया।

युवाओं की भागीदारी और उद्यमशीलता नवाचार एजेंडे के अभिन्न अंग रहे। शिखर सम्मेलन में आरई हैकाथॉन में विकास के विभिन्न चरणों और शुरुआती चरण के 300 से अधिक स्टार्टअप की उत्साहजनक भागीदारी देखने को मिली। आरई जेन चैलेंज में भी आईआईटी, विश्वविद्यालयों, कॉलेजों और स्कूलों के युवाओं की व्यापक भागीदारी रही। एक्सपो में नवाचार पारिस्थितिकी तंत्र के अंतर्गत 70 स्टार्टअप पॉड्स, 40 शैक्षणिक पोस्टर और 10 शोध पत्र प्रदर्शित किए गए, जिनके माध्यम से युवा प्रतिभाओं, शोधकर्ताओं और उद्यमियों को भारत के उभरते स्वच्छ ऊर्जा प्रौद्योगिकी पारिस्थितिकी तंत्र में योगदान देने के लिए एक मंच पर लाया गया।

हरित हाइड्रोजन पर चौथे अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन ने भारत की हरित हाइड्रोजन संबंधी महत्वाकांक्षाओं को आगे बढ़ाने के लिए एक महत्त्वपूर्ण मंच प्रदान किया। इसमें विश्वसनीय घरेलू मांग विकसित करने, दीर्घकालिक खरीद व्यवस्थाओं, निर्यात के अवसरों, मानकों एवं प्रमाणन, परीक्षण तथा सुरक्षा संबंधी रूपरेखाओं पर विशेष रूप से चर्चा की गई।

एक महत्त्वपूर्ण व्यावसायिक घटनाक्रम के तहत, भारतीय सौर ऊर्जा निगम (एसईसीआई) और रॉटरडॅम स्थित पावर2एक्स के बीच भारत से अंतरराष्ट्रीय बाजारों तक हरित अणुओं की आपूर्ति और खरीद को आगे बढ़ाने के लिए एक समझौता ज्ञापन (एमओयू) पर हस्ताक्षर किए गए। इसके पहले चरण में प्रति वर्ष 3 लाख टन हरित मेथनॉल की संभावित मात्रा का संकेत मिला, जो उभरते वैश्विक हरित अणु बाजारों में भारत के लिए बढ़ते अवसरों को दर्शाता है।

आईएसए सभा के नौवें सत्र ने अंतरराष्ट्रीय सौर सहयोग में एक महत्त्वपूर्ण उपलब्धि दर्ज की। सभा में वर्ष 2026 के लिए महानिदेशक की रिपोर्ट, वर्ष 2027 की कार्ययोजना और बजट, वर्ष 2025 के लेखापरीक्षित लेखों तथा अफ्रीकी संघ, कोमेसा, सेल्को, एसएनवी और ऑल इंडिया डिस्कॉम्स एसोसिएशन को भागीदार संगठन का दर्जा देने संबंधी प्रस्तावों पर विचार किया गया।

आईएसए के तहत प्रस्तावित 200 मिलियन अमेरिकी डॉलर की अफ्रीका सोलर फैसिलिटी एक प्रमुख अंतरराष्ट्रीय घोषणा रही। इसका उद्देश्य अफ्रीकी देशों में वित्त तक बेहतर पहुंच सुगम बनाना और सौर ऊर्जा की स्‍थापना में तेजी लाना है। चर्चाओं में निवेश जुटाने के लिए परियोजनाओं का समेकन, मिश्रित वित्तपोषण, दीर्घकालिक धैर्यशील पूंजी, स्थानीय मुद्रा में वित्तपोषण और भुगतान संबंधी जोखिमों का न्यूनीकरण महत्त्वपूर्ण साधनों के रूप में चिह्नित किए गए। अफ्रीका50 डिस्ट्रिब्‍यूटिड रीन्‍यूएबल एनर्जी फंड और नाइजीरिया डीआरई फंड को वित्तपोषण के मॉडलों के रूप में रेखांकित किया गया। अफ्रीका50 डीआरई फंड को छोटी डीआरई परियोजनाओं से जुड़ी निवेश संबंधी बाधाओं, जिनमें परियोजना-स्तरीय जोखिम और भुगतान संबंधी जोखिम शामिल हैं, को क्षेत्रीय और वैश्विक वित्तपोषण संरचनाओं के संयोजन के माध्यम से दूर करने के लिए तैयार किया गया है। फ्रैंकोफोन और साहेल एनर्जी रेजि़लिएंस पहल को भी रेखांकित किया गया। इसका ध्यान महत्त्वपूर्ण विद्युत आवश्यकताओं की पूर्ति के लिए सौर ऊर्जा एवं भंडारण समाधानों, सार्वजनिक सुविधाओं के लिए छतों पर सौर ऊर्जा संयंत्रों की स्थापना तथा कृषि एवं आजीविका के लिए उत्पादक उपयोग हेतु सौर ऊर्जा पर केंद्रित है।

कृषि पंपों को सौर ऊर्जा से संचालित करने के भारत के अनुभव के आधार पर, आईएसए ने वैश्विक स्तर पर 10 लाख सौर पंप स्थापित करने के अपने लक्ष्य को भी आगे बढ़ाया। आईएसए का लघु द्वीपीय विकासशील देश (एसआईडीएस) मंच, वर्ष 2030 तक इन देशों में 500 मेगावाट तक की सौर ऊर्जा क्षमता स्थापित करने में सहायता करने का लक्ष्य रखता है। सौर फोटोवोल्टिक और बैटरी के चक्रीय उपयोग से संबंधित, सनराइज नेटवर्क का विस्तार 35 देशों तक हो गया है।

ये पहलें वैश्विक दक्षिण की स्वच्छ ऊर्जा आकांक्षाओं को समर्थन देने के लिए घरेलू अनुभव, प्रौद्योगिकी, वित्तपोषण, क्षमता विकास और कार्यान्वयन क्षमताओं को एक साथ जोड़ने के भारत के दृष्टिकोण को दर्शाती हैं।

शिखर सम्मेलन के दौरान आईएसए अकादमी और ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर – शाइन का शुभारंभ किया गया, जिनका उद्देश्य क्षमता विकास, डिजिटल शिक्षण और ग्रिड संबंधी क्षेत्रों में सहयोग को सुदृढ़ करना है। शिखर सम्मेलन के दौरान कुल 10 समझौता ज्ञापनों और रूपरेखा समझौतों पर हस्ताक्षर किए गए, जिससे प्रौद्योगिकी, अनुसंधान, क्षमता विकास, विनिर्माण और परियोजना कार्यान्वयन के क्षेत्रों में सहयोग का विस्तार हुआ।

आईएसए ने ब्रेकथ्रू एनर्जी वेंचर्स, कैलिफोर्निया यूनिवर्सिटी, बर्कले के इंडिया एनर्जी एंड क्लाइमेट सेंटर और श्नाइडर इलेक्ट्रिक फाउंडेशन के साथ रूपरेखा समझौतों पर हस्ताक्षर किए। शिखर सम्मेलन के दौरान घोषित अन्य साझेदारियों के अलावा, आईएसए ने शक्ति पंप्स (इंडिया) लिमिटेड और रेलवे एनर्जी मैनेजमेंट कंपनी लिमिटेड के साथ समझौता ज्ञापनों (एमओयू) पर हस्ताक्षर किए।

बीआरई शिखर सम्मेलन एवं एक्सपो 2026 के दौरान 37 रिपोर्टों, आकलनों, मार्गदर्शिका पुस्तकों और डिजिटल प्लेटफॉर्म के विमोचन के माध्यम से भारत के नवीकरणीय ऊर्जा पारिस्थितिकी तंत्र के ज्ञान एवं साक्ष्य आधार को भी सुदृढ़ किया गया।

इस अवसर पर जारी किए गए प्रकाशन नीतिगत पहलुओं, विनिर्माण, कार्यान्वयन, कौशल विकास और सुरक्षा को शामिल करते हैं तथा इन सभी क्षेत्रों में नवीकरणीय ऊर्जा पारिस्थितिकी तंत्र को सुदृढ़ करने में सहायक होंगे। ‘ईज़ ऑफ डूइंग सोलर’ और नवीकरणीय ऊर्जा राज्य आकलन रूपरेखा (आरई-एसएएफ) नीति-निर्माताओं और राज्यों को प्रगति का आकलन करने तथा बाधाओं की पहचान करने के लिए एक साझा आधार प्रदान करते हैं। राष्ट्रीय हाइड्रोजन सर्वेक्षण हरित हाइड्रोजन क्षेत्र के लिए भी इसी दिशा में योगदान देता है। सौर विनिर्माण, पवन ऊर्जा में स्वदेशीकरण और बैटरी इलेक्ट्रोलाइट पर किए गए अध्ययन यह दर्शाते हैं कि घरेलू क्षमता में अभी कहाँ कमियाँ हैं और उद्योग किन क्षेत्रों में आपूर्ति शृंखलाएँ विकसित कर सकता है। शीर्ष 100 नवीकरणीय ऊर्जा जिलों के लिए कौशल विकास रूपरेखा कार्यबल की तैयारी को नवीकरणीय ऊर्जा की स्‍थापना से जोड़ती है। समग्र रूप से, ये प्रकाशन निवेशकों, परियोजना विकासकर्ताओं, विद्युत वितरण कंपनियों और राज्य एजेंसियों को योजना बनाने और निर्णय लेने के लिए अधिक स्पष्ट साक्ष्य उपलब्ध कराएंगे। इनसे सरकार, उद्योग और विकास भागीदारों के बीच समन्वय में भी सुधार होगा तथा घरेलू विनिर्माण को बढ़ावा देने और नवीकरणीय ऊर्जा की स्‍थापना में तेजी लाने के भारत के प्रयासों को समर्थन मिलेगा।

इस शिखर सम्मेलन ने वैश्विक ऊर्जा सुरक्षा, सतत विकास और जलवायु कार्रवाई में योगदान देते हुए अपने स्वच्छ ऊर्जा लक्ष्यों को प्राप्त करने के प्रति भारत की प्रतिबद्धता को दोहराया। इसने यह भी प्रदर्शित किया कि भारत की नवीकरणीय ऊर्जा यात्रा अब केवल क्षमता वृद्धि के पैमाने तक ही सीमित नहीं है, बल्कि एकीकृत ऊर्जा प्रणालियों के विकास, दीर्घकालिक निवेश आकर्षित करने, नवाचार को बढ़ावा देने, घरेलू विनिर्माण को सुदृढ़ करने और सफल समाधानों को दुनिया के साथ साझा करने की उसकी क्षमता से भी परिभाषित हो रही है।

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पीके/केसी/आरटी/पीके/डीए


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