प्रविष्टि तिथि:
06 NOV 2026 4:38PM by PIB Delhi
भारतीय नौसेना के पोत 'त्रिशूल' ने भूमध्य सागर में अपनी तैनाती के हिस्से के रूप में 03 नवंबर 2026 को ग्रीस के सौडा बे में अपना पोर्ट कॉल (बंदरगाह पर कुछ अवधि तक रुकने का कार्यक्रम) पूरा किया। इस यात्रा से भारतीय नौसेना और ग्रीस नौसेना के बीच पेशेवर बातचीत, परिचालन संबंधी चर्चाओं और सांस्कृतिक आदान-प्रदान के माध्यम से समुद्री संबंधों को और मजबूत करने का अवसर मिला।
पोर्ट कॉल के दौरान आईएनएस त्रिशूल के कमांडिंग ऑफिसर ने ग्रीस नौसेना के वरिष्ठ अधिकारियों के अलावा नाटो मैरीटाइम इंटरडिक्शन ऑपरेशनल ट्रेनिंग सेंटर (एनएमआईओटीसी) और सौडा बे स्थित अमेरिकी नौसेना सहायता गतिविधि (एनएसए) के प्रमुखों से मुलाकात की। इन मुलाकातों में परिचालन संबंधी रणनीतिक आवश्यकताओं, सहयोग और मित्र नौसेनाओं के बीच आपसी समर्थन पर ध्यान केंद्रित किया गया। चर्चाओं के दौरान साझा हितों के विषयों पर विचार-विमर्श करने और परिचालन संबंधी सहयोग एवं सहायता बढ़ाने के अवसरों को तलाशने का मौका मिला।
भारतीय और ग्रीस नौसेना कर्मियों के बीच पेशेवर गतिविधियों में एक-दूसरे के पोतों का दौरा और आपसी बातचीत शामिल थी। ग्रीस नौसेना कर्मियों ने आईएनएस त्रिशूल का दौरा किया और जहाज पर घूमकर उसकी क्षमताओं के बारे में जानकारी प्राप्त की। इन मुलाकातों से दोनों नौसेनाओं के कर्मियों को एक-दूसरे की पेशेवर कार्यप्रणालियों को समझने और अपने अनुभव साझा करने का अवसर मिला।
ग्रीस में भारत के राजदूत श्री रवि शंकर ने भी जहाज का दौरा किया। उन्हें आईएनएस त्रिशूल की युद्ध क्षमताओं के बारे में जानकारी दी गई और उन्होंने जहाज के चालक दल (क्रू) के साथ बातचीत की। जहाज पर एक सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित किया गया, जिसमें ग्रीस में भारत के राजदूत; नाटो मिसाइल फायरिंग इंस्टॉलेशन के कमांडर मेजर जनरल एन. दिमित्राकोस; ग्रीस और अमेरिकी नौसेना के वरिष्ठ अधिकारी तथा वहां रहने वाले भारतीय समुदाय के सदस्य शामिल हुए। इस कार्यक्रम ने राजनयिक प्रतिनिधियों, नौसेना कर्मियों और भारतीय समुदाय के सदस्यों के बीच बातचीत का एक अच्छा अवसर प्रदान किया।
सौडा बे से रवाना होने के बाद आईएनएस त्रिशूल ने ग्रीस नौसेना के एचएस लिमनोस (एफ451) के साथ एक 'पैसेज एक्सरसाइज' में हिस्सा लिया। इस अभ्यास में समुद्र में कई तरह की समन्वित गतिविधियां शामिल थीं। इनमें जहाज को अलग-अलग दिशाओं में घुमाने का अभ्यास (मैन्यूवरिंग ड्रिल), रसद आपूर्ति (रिप्लेनिशमेंट) से जुड़ी प्रक्रियाएं, जहाज पर मौजूद हेलीकॉप्टर की 'क्रॉस-डेक लैंडिंग' और संचार प्रक्रियाओं का अभ्यास प्रमुख था। इस अभ्यास के जरिए दोनों नौसेनाओं को समुद्र में मिलकर काम करने, अपनी पेशेवर विशेषज्ञता और बेहतरीन कार्य-पद्धतियों को साझा करने का मौका मिला, जिससे उनके बीच परिचालन सहयोग और आपसी तालमेल और मजबूत हुआ।
आईएनएस त्रिशूल की इस बंदरगाह यात्रा ने समुद्री सहयोग, पेशेवर संबंधों और द्विपक्षीय रिश्तों को मजबूत करने की दिशा में दोनों देशों की नौसेनाओं की प्रतिबद्धता को फिर से दोहराया। अपनी इस यात्रा को सफलतापूर्वक पूरा करने के बाद आईएनएस त्रिशूल अब अपनी तैनाती (डिप्लॉयमेंट) के अगले चरण के लिए आगे बढ़ गया है।
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