प्रविष्टि तिथि:
08 NOV 2026 3:08PM by PIB Delhi
रक्षा मंत्री श्री राजनाथ सिंह ने 8 नवंबर, 2026 को सिक्किम के अग्रिम क्षेत्रों में तैनात त्रिशक्ति कोर (33 कोर) के सैनिकों के साथ दीपावली मनाई। इस अवसर पर उनके साथ थल सेनाध्यक्ष जनरल धीरज सेठ, पूर्वी कमान के जनरल ऑफिसर कमांडिंग-इन-चीफ लेफ्टिनेंट जनरल वी.एम.बी. कृष्णन, 33 कोर के जनरल ऑफिसर कमांडिंग लेफ्टिनेंट जनरल मान राज सिंह मान और भारतीय सेना के अन्य वरिष्ठ अधिकारी भी उपस्थित थे।


श्री राजनाथ सिंह ने शेराथांग में सैनिकों से बातचीत के दौरान उन्हें दीपावली का सबसे उज्ज्वल प्रकाश बताया। उन्होंने कहा कि सीमाओं पर सैनिकों के समर्पण और सतर्कता के कारण ही पूरा देश सुरक्षित महसूस करता है। रक्षा मंत्री ने कहा, “जिस तरह एक दीपक बिना किसी दिखावे के अंधकार दूर करता है, उसी तरह सैनिक भी चुपचाप अपना कर्तव्य निभाते हैं, ताकि देशवासी शांति और सुरक्षा के साथ त्योहार मना सकें।”

रक्षा मंत्री ने सैनिकों की कार्य कुशलता के साथ दक्षता, उच्च मनोबल और दुर्गम पहाड़ी क्षेत्रों में देश की सीमाओं की रक्षा के प्रति उनके अटूट संकल्प की सराहना की। श्री सिंह ने सैनिकों से इसी उत्साह और समर्पण के साथ मातृभूमि की रक्षा करते रहने का आह्वान किया। साथ ही, उन्होंने उन सैनिकों के त्याग एवं बलिदान को नमन किया, जो अपने परिवारों से दूर रहकर और निजी सुख-सुविधाओं तथा त्योहारों से ऊपर उठकर राष्ट्र के प्रति अपने कर्तव्य को सर्वोपरि रखते हैं।
श्री राजनाथ सिंह ने अनुशासन और साहस के महत्व का दृढ़ता से उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि तकनीक कितनी भी उन्नत क्यों न हो जाए, अनुशासन और साहस के बिना उसका कोई महत्व नहीं है। रक्षा मंत्री ने कहा कि सैनिकों का आचरण, वर्दी, भाषा और संयम स्थानीय समुदायों के बीच सेना की छवि तय करते हैं। उन्होंने सैनिकों से शेराथांग व इसके आसपास के क्षेत्रों में भारतीय सेना तथा स्थानीय लोगों के बीच विश्वास एवं सद्भाव के संबंधों को और सशक्त बनाने का आग्रह किया।


रक्षा मंत्री ने शेराथांग युद्ध स्मारक पर देश की सेवा में सर्वोच्च बलिदान देने वाले वीर सैनिकों को श्रद्धांजलि अर्पित की। उन्होंने बाबा हरभजन सिंह स्मारक पर जाकर उन्हें नमन किया। बाबा हरभजन सिंह की विरासत आज भी इस क्षेत्र की सैन्य और असैन्य परंपराओं में विशेष स्थान रखती है।

श्री राजनाथ सिंह ने शेराथांग युद्ध स्मारक के महत्व को रेखांकित करते हुए कहा कि ऐसे स्मारक केवल अतीत की घटनाओं एवं बलिदानों की याद नहीं दिलाते, बल्कि सामूहिक स्मृति को संजोने के साथ राष्ट्रीय चेतना और गौरव की भावना भी जागृत करते हैं। उन्होंने बताया कि इस स्मारक में सम्मानित सैनिक देश के विभिन्न हिस्सों नागालैंड, उत्तर प्रदेश, तमिलनाडु, राजस्थान और असम से थे। इन वीर सैनिकों ने देशवासियों की रक्षा के लिए अपने प्राण न्योछावर कर दिए और इस दौरान क्षेत्र, भाषा या समुदाय का भेदभाव नहीं किया गया। रक्षा मंत्री ने कहा कि एकता व निस्वार्थ सेवा की यही भावना भारत की आत्मा और मूल पहचान है, जहां प्रत्येक नागरिक अपने साथी भारतीयों को एक ही परिवार का सदस्य मानता है।
रक्षा मंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में सरकार ने नई दिल्ली में राष्ट्रीय समर स्मारक की स्थापना की है। इसका उद्देश्य देश की सेवा में सर्वोच्च बलिदान देने वाले वीर सैनिकों को सम्मान देना है। उन्होंने कहा, “शहीद सैनिकों के अद्वितीय साहस और बलिदान को सम्मान देने के लिए राष्ट्रीय समर स्मारक पर उनके लगभग 26 हजार नाम स्वर्ण अक्षरों में अंकित किए गए हैं। स्मारक पर अपने किसी प्रियजन का नाम देखकर शहीदों के परिवारों, रिश्तेदारों और उनके पैतृक गांवों तथा क्षेत्रों के लोगों में गर्व की गहरी भावना जागृत होती है। ऐसे स्मारक वर्तमान और आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा के स्रोत हैं।”

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