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प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने बस्तर, छत्तीसगढ़ के करनपुर स्थित कोबरा ऑपरेशंस बेस पर सुरक्षा बलों के साथ दिवाली मनाई


यह पहली दिवाली है, जब देश का हर जिला नक्सलवाद से मुक्त है: प्रधानमंत्री

47 वर्षों में पहली बार ऐसा हुआ है कि पिछले एक साल में ड्यूटी के दौरान सीआरपीएफ का एक भी जवान शहीद नहीं हुआ है; यह देश की ठोस नीतियों और मज़बूत संकल्प की जीत है: प्रधानमंत्री

सेवा-भाव से प्रेरित होकर, हमने नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में लोगों का जीवन बदल दिया है; परिणामस्वरूप, नक्सलवाद के शिकार लोग भी अब सरकार और सुरक्षाबलों के साथ मजबूती से खड़े हैं: प्रधानमंत्री

आज, एक तरफ जहाँ 50 करोड़ लोग अत्यधिक गरीबी से बाहर आए हैं, वहीं दूसरी तरफ देश में नक्सली हिंसा का भी अंत हो गया है: प्रधानमंत्री

प्रविष्टि तिथि: 08 NOV 2026 4:04PM by PIB Delhi

प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने आज बस्तर, छत्तीसगढ़ के करनपुर स्थित कोबरा ऑपरेशंस बेस का दौरा किया, जो बस्तर और अबूझमाड़ में नक्सल-विरोधी अभियानों के लिए प्रशिक्षण केंद्र और लॉन्च पैड के रूप में कार्य करता है। यहाँ प्रधानमंत्री ने सुरक्षा बलों के साथ दिवाली मनाई। इस अवसर पर जवानों को संबोधित करते हुए, जब देश और दुनिया भर में करोड़ों भारतीय अपने प्रियजनों के साथ रोशनी का पवित्र त्योहार मना रहे हैं, प्रधानमंत्री ने कारगिल और हिमालय में लेपचा से लेकर तटीय क्षेत्र के सर क्रीक और समुद्र में आईएनएस विक्रांत तक, बहादुर सैनिकों के साथ मनाई गई अपनी यादगार दिवाली का ज़िक्र किया। श्री मोदी ने कहा, "सीमाओं पर और देश के भीतर, जो देश की रक्षा करते हैं, माँ भारती के वे बहादुर बेटे—आप सभी मेरे अपने हैं, आप सभी मेरे परिवार का हिस्सा हैं।"

प्रधानमंत्री ने 2026 की दिवाली को बेहद खास बताते हुए कहा कि यह माओवादी आतंक के खिलाफ भारत की दशकों पुरानी लड़ाई जीतने के बाद रोशनी का पहला त्योहार है। इस जीत ने हर जिले को नक्सल-मुक्त बना दिया है और करोड़ों नागरिकों को डर से मुक्त कर दिया है। प्रधानमंत्री ने बताया कि वे बस्तर इसलिए आए हैं ताकि इस असाधारण उपलब्धि का जश्न उन लाखों सुरक्षाकर्मियों के साथ मना सकें, जिन्होंने इसे संभव बनाया है और 140 करोड़ नागरिकों की ओर से उनका आभार व्यक्त कर सकें। प्रधानमंत्री मोदी ने कहा, "आज मैं आपके बलिदान, समर्पण और सेवा भाव के प्रति आभार प्रकट करने आया हूँ।"

प्रधानमंत्री ने प्राचीन संस्कृत श्लोक 'आभ्यन्तरं भयं रक्ष्याम्, असारं बाह्यतो भयम्' का उल्लेख करते हुए समझाया कि जिस देश की आंतरिक सुरक्षा मजबूत होती है, उसे बाहरी दुश्मन नुकसान नहीं पहुँचा सकते; लेकिन जब आंतरिक सुरक्षा कमजोर होती है, तो बाहरी दुश्मन सिर उठाने लगते हैं। प्रधानमंत्री ने सुरक्षा बलों की आंतरिक भूमिका की तुलना सीमाओं पर तैनात सशस्त्र बलों से की। उन्होंने सीआरपीएफ, कोबरा, बीएसएफ, आईटीबीपी, एसएसबी, आईआरबी, राज्य पुलिस बलों, बस्तर फाइटर्स कमांडो और महिला लड़ाकों के असीम बलिदानों की सराहना की और देश की सीमाओं की रक्षा कर रहे जवानों को त्योहार की बधाई दी। श्री मोदी ने कहा, "यह देश आपकी सेवाओं का ऋणी है और करोड़ों देशवासियों को आप पर गर्व है।"

प्रधानमंत्री ने उस भयावह दौर को याद किया, जब वामपंथी उग्रवाद ने बिहार, महाराष्ट्र, ओडिशा, उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ सहित लगभग 20 राज्यों के 230 से अधिक जिलों को अपनी चपेट में ले रखा था। उस समय वहां डर के कारण शाम को कर्फ्यू जैसे हालात रहते थे, लोगों से उनके वोट देने के अधिकार छीन लिए गए थे, हर साल 2,000 तक हमले होते थे, अकेले छत्तीसगढ़ में 1,000 से अधिक सुरक्षाकर्मियों ने अपनी जान गंवाई, कई सैनिकों ने आईईडी विस्फोटों में अपने अंग खो दिए और 2010 में दंतेवाड़ा में हुए अलग-अलग हमलों में सीआरपीएफ के 76 जवान और 44 निर्दोष नागरिक मारे गए थे। प्रधानमंत्री ने बताया कि 2004 से 2013 के बीच, मारे गए नक्सलियों की तुलना में हर साल शहीद होने वाले सुरक्षाकर्मियों की संख्या अधिक थी, जिससे माओवादी नेताओं के हौसले बुलंद हो गए थे।

इस बात पर जोर देते हुए कि कोई भी देश अपने दुश्मनों के प्रति नरम रुख अपनाकर तरक्की नहीं कर सकता, बल्कि ऊंचे मनोबल के साथ रणनीतिक रूप से उनका सफाया करना चाहिए, प्रधानमंत्री ने कहा कि 2014 के बाद दशकों से चली आ रही उस प्रवृत्ति को बदल दिया गया, जिसमें सुरक्षा बलों को सबसे ज्यादा नुकसान उठाना पड़ता था। उन्होंने बताया कि पिछले एक साल में एक ऐतिहासिक उपलब्धि हासिल हुई है—47 वर्षों में पहली बार ऐसा हुआ है कि ड्यूटी के दौरान सीआरपीएफ का एक भी जवान शहीद नहीं हुआ। श्री मोदी ने कहा, "यह देश की सही नीतियों और मजबूत इच्छाशक्ति की जीत है और यह आपकी वीरता, साहस और संयम की जीत है।"

प्रधानमंत्री ने कहा कि सफलता के लिए सही इरादे और सही नीतियों, दोनों की जरूरत होती है। उन्होंने उल्लेख किया कि सरकार ने राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े कई कड़े फैसले लिए—जिनमें से कुछ को सार्वजनिक भी नहीं किया गया था—जिससे नक्सलियों और अलगाववादियों की धन-जुटाने पर चोट हुई और नकली नोटों का नेटवर्क नष्ट हुआ। प्रधानमंत्री मोदी ने कहा, "इससे न केवल उनका आर्थिक आधार टूट गया, बल्कि उनकी पूरी आपूर्ति व्यवस्था भी ठप हो गई, जिससे हथियारों की आपूर्ति रुक गई तथा नक्सलियों की आवाजाही तथा नई भर्तियों पर लगाम लग गई।"

प्रधानमंत्री ने बताया कि उनकी सरकार ने सुरक्षा बलों को हर जरूरी फैसला लेने के लिए पूरी कामकाजी स्वतंत्रता दी थी। प्रधानमंत्री ने कहा कि सरकार ने बिना किसी प्रचार या दिखावे के, पूरी लगन से एक ही लक्ष्य के लिए काम किया—यह सुनिश्चित करना कि किसी माँ का बच्चा न बिछड़े, कोई परिवार बर्बाद न हो और कोई युवा हथियार न उठाए। उन्होंने बताया कि कैसे माओवादी आतंक की कमर तोड़ने वाले संवेदनशील सुरक्षा अभियानों को जनसेवा की भावना के साथ जोड़ने से लोगों के जीवन में बदलाव आया। माओवाद से प्रभावित नागरिक सरकार और सुरक्षा बलों के समर्थन में एकजुट हुए। उन्होंने कार्यक्रम में मौजूद स्थानीय नागरिकों को भी उनके महत्वपूर्ण सहयोग के लिए धन्यवाद दिया। प्रधानमंत्री मोदी ने कहा, "जनसेवा की भावना के साथ, हमने नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में लोगों के जीवन को बदल दिया है।"

'राष्ट्र प्रथम' की भावना के साथ काम करने से शांति और सुरक्षा सुनिश्चित होती है, देश विकास की नई ऊंचाइयों पर पहुंचता है और राष्ट्रीय प्रगति में गरीबों व वंचितों की भागीदारी बढ़ती है—यह रेखांकित करते हुए प्रधानमंत्री ने पिछले 12 वर्षों में देश की दोहरी जीत का जिक्र किया। श्री मोदी ने कहा, "पिछले 12 वर्षों में, देश को न केवल नक्सलवाद और अलगाववाद के खिलाफ लड़ाई में जीत मिली है, बल्कि गरीबी के खिलाफ भी एक बड़ी जंग में जीत मिली है।"

दीपावली से ठीक पहले जारी हुई विश्व बैंक की बहुचर्चित रिपोर्ट का उल्लेख करते हुए, प्रधानमंत्री ने बताया कि पिछले 12 वर्षों में 50 करोड़ भारतीय अत्यधिक गरीबी से बाहर निकल आए हैं।

प्रधानमंत्री ने पिछले 12 वर्षों में भारत के कल्याणकारी ढांचे की तुलना दिवाली की रंगोली से की, जिसमें छोटी-छोटी अलग-अलग रेखाएं मिलकर एक भव्य चित्र बनाती हैं। उन्होंने विस्तार से बताया कि कैसे जन धन बैंकिंग, पीएम आवास योजना के तहत पक्के घर, बिना गारंटी वाले मुद्रा ऋण, स्ट्रीट वेंडर्स के लिए स्वनिधि योजना, आयुष्मान भारत स्वास्थ्य सेवा, हर महीने मुफ्त राशन, बच्चों की शिक्षा से जुड़ी नीतियां, स्वच्छ भारत और 'हर घर जल' जैसी योजनाओं ने मिलकर लोगों को मुफ्त दवा, मुफ्त शिक्षा और मुफ्त भोजन उपलब्ध कराया है। इससे परिवारों की बुनियादी चिंताएं दूर हुई हैं, जिससे पीढ़ियों से गरीबी में फंसे परिवारों को अब एक बेहतर भविष्य मिल रहा है। श्री मोदी ने कहा, "गरीब परिवारों का पूरा जीवन पहले सिर्फ चिंताओं में बीत जाता था, लेकिन अब उन्हें सरकार का भरोसा मिला है और उनमें एक नया आत्मविश्वास जगा है।"

प्रधानमंत्री ने बताया कि गरीबी पर यह जीत, नक्सलवाद के खिलाफ लड़ाई से गहराई से जुड़ी है। नक्सलवाद ने पहले लाखों निर्दोष नागरिकों को अभाव में धकेल दिया था—स्कूलों, अस्पतालों, मेडिकल दुकानों, पोलियो टीकाकरण, मोबाइल टावरों और उद्योगों को बाधित किया गया था और रेलवे पटरियों को बम-विस्फोट से उड़ा दिया जाता था। प्रधानमंत्री ने वामपंथी उग्रवाद से प्रभावित क्षेत्रों में चलाए गए विशेष विकास अभियान का जिक्र किया। इसके तहत 15,000 किलोमीटर से अधिक सड़कें, 9,500 से अधिक मोबाइल टावर, लगभग 175 एकलव्य स्कूल, करीब 50 आईटीआई, 50 कौशल विकास केंद्र, और हजारों डाकघर, बैंक शाखाएं व एटीएम बनाए गए। साथ ही, आत्मसमर्पण करने वाले नक्सलियों का पुनर्वास किया गया और 'पीएम जनमन' योजना के तहत दूर-दराज के आदिवासी गांवों में पहली बार पानी, बिजली और सड़कें पहुंचाई गईं। पीएम मोदी ने कहा, "जब हमने नक्सलवाद के खिलाफ लड़ाई शुरू की, तो उसी समय हमने नक्सल प्रभावित क्षेत्रों के विकास के लिए विशेष अभियान भी चलाए।"

प्रधानमंत्री ने कहा कि 'सबका साथ, सबका विकास' अभियान ने गरीबी के खिलाफ लड़ाई को नई ऊर्जा दी, नक्सली हिंसा को खत्म किया और 50 करोड़ लोगों को अत्यधिक गरीबी से बाहर निकाला। उन्होंने इस क्षेत्र में आए बदलाव के प्रतीक के रूप में 'बस्तर ओलंपिक' का उदाहरण दिया। श्री मोदी ने कहा, "आज इसी बस्तर में 'बस्तर ओलंपिक' हो रहा है, जहां बच्चे बंदूकों के बजाय खेलों में अपना हाथ आजमा रहे हैं।"

प्रधानमंत्री ने इस बात पर जोर दिया कि आज की उपलब्धियां कोई अंतिम पड़ाव नहीं हैं, बल्कि एक नई शुरुआत हैं। उन्होंने कहा कि देश की यह नई उड़ान स्वतंत्रता सेनानियों, सीमा पर तैनात सैनिकों और नक्सलवाद व आतंकवाद से लड़ते हुए अपने प्राण न्योछावर करने वाले वीर जवानों के सदियों पुराने सपनों को पूरा करेगी। उन्होंने उन सुरक्षा बलों से, जो 'तेरा गौरव अमर रहे माँ, हम दिन चार रहें न रहें' के जज्बे के साथ जीते हैं, अपनी इस भावना को नए आत्मविश्वास में बदलने का आह्वान किया। श्री मोदी ने कहा, "अब समय आ गया है कि हम देश के लिए जिएं और देश को नई ऊंचाइयों तक ले जाएं।"

प्रधानमंत्री ने कश्मीर में अनुच्छेद 370 को हटाने, हर घर में शौचालय बनाने और टीकाकरण अभियान के विस्तार जैसे बड़े संकल्पों को पूरा करने के देश के शानदार रिकॉर्ड का जिक्र किया। उन्होंने सुरक्षा बलों और नागरिकों पर पूरा भरोसा जताते हुए कहा कि भारत गरीबी को जड़ से मिटाने, और एक नशा-मुक्त, आत्मनिर्भर तथा विकसित भारत बनाने के अपने लक्ष्यों को भी इसी तरह हासिल करेगा। उन्होंने सभी से इन सपनों को सच करने की दिशा में काम करने का आग्रह किया और अपना संबोधन दीपावली की शुभकामनाओं के साथ समाप्त किया। प्रधानमंत्री मोदी ने कहा, "आपका बलिदान और आपकी कड़ी मेहनत 'विकसित भारत' की भव्य इमारत के लिए एक मजबूत आधारशिला बनेगी।"

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