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रक्षा मंत्रालय
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संयुक्त युद्ध अध्ययन केंद्र तथा मौलाना अबुल कलाम आज़ाद एशियाई अध्ययन संस्थान द्वारा राष्ट्रीय समुद्री संगोष्ठी का समापन


प्रतिभागियों ने विकसित भारत 2047 के लिए सहयोगात्मक समुद्री परिकल्पना का आह्वान किया

प्रविष्टि तिथि: 25 JUL 2025 6:01PM by PIB Delhi

संयुक्त युद्ध अध्ययन केंद्र (सी ई.एन.जे.ओ.डब्ल्यू.एस.) और मौलाना अबुल कलाम आज़ाद एशियाई अध्ययन संस्थान (एम.ए.के.ए.आई.ए.एस.), संस्कृति मंत्रालय द्वारा संयुक्त रूप से 'भारत की समुद्री परिकल्पना' पर आयोजित दो दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी (24-25 जुलाई 2025) आज 25 जुलाई, 2025 को नई दिल्ली में संपन्न हुई। प्रतिभागियों ने चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ के संपूर्ण राष्ट्र दृष्टिकोण और विकसित भारत 2047 के राष्ट्रीय परिकल्पना के अनुरूप, विकसित भारत 2047 के लिए एक सहयोगात्मक समुद्री परिकल्पना अपनाने का आह्वान किया।

इस संगोष्ठी में भारत की समुद्री विरासत की पुष्टि करने और समुद्री क्षेत्र में देश की रणनीतिक और सांस्कृतिक महत्वाकांक्षाओं को रेखांकित करने के लिए विभिन्न क्षेत्रों के प्रतिष्ठित लोग एक साथ आए। इस कार्यक्रम ने रक्षा रणनीति, नागरिक समुद्री नीति, शिक्षा और सांस्कृतिक विरासत के महत्वपूर्ण अभिसरण को चिह्नित किया। संगोष्ठी में भारतीय नौसेना और भारतीय तटरक्षक बल के वरिष्ठ सेवारत अधिकारियों के साथ-साथ भारत और विदेशों के संस्थानों के प्रख्यात शिक्षाविदों और समुद्री विद्वानों की सक्रिय भागीदारी देखी गई। पैनल और पूर्ण सत्रों में भारत की प्राचीन समुद्री जड़ों, भारत-प्रशांत में विकसित भू-राजनीतिक अनिवार्यताएं और नीली अर्थव्यवस्था के भीतर उभरते अवसरों पर मजबूत संवाद शामिल थे।

चर्चाओं में प्रमुख रूप से अंतर-एजेंसी सहयोग का आह्वान किया गया, जिसमें विशेषज्ञों ने समुद्री सुरक्षा एजेंसियों, विकासात्मक संस्थानों और सांस्कृतिक निकायों के बीच तालमेल की आवश्यकता पर प्रकाश डाला। इस बात पर जोर दिया गया कि इस तरह की बातचीत रणनीतिक दूरदर्शिता और सभ्यता दोनों मूल्यों में निहित एक व्यापक समुद्री सिद्धांत को आकार देने के लिए महत्वपूर्ण है।

 

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एमजी/एके/केसी/एसजी/डीए
 


(रिलीज़ आईडी: 2148549) आगंतुक पटल : 33
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