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गृह मंत्रालय
azadi ka amrit mahotsav

केन्द्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री श्री अमित शाह ने आज पंचकूला में वीर बाल दिवस पर हरियाणा सरकार के राज्य स्तरीय कार्यक्रम को संबोधित किया


मोदी सरकार द्वारा शुरू ‘वीर बाल दिवस’ भारत ही नहीं, विश्वभर के बच्चों के लिए मातृभूमि के प्रति त्याग की प्रेरणा है

वीर साहिबज़ादों की शहादत आज भी रोंगटे खड़े कर देती है

दशम पिता का जीवन और वीर साहिबज़ादों का बलिदान देश के हर युवा को बताना, हम सभी का दायित्व है

विश्व इतिहास में धर्म व देश के लिए पिता, माता और चार बेटों का बलिदान देने वाले गुरु गोबिंद सिंह जी जैसा कोई दूसरा नहीं है, इसीलिए वे ‘सरबंसदानी’ कहलाए

वीर साहिबजादों का धर्म और देश के प्रति श्रद्धा, लगाव और शहादत के भाव को आजादी के बाद भुलाया गया, मोदी सरकार ‘वीर बाल दिवस’ मना कर उनका महिमामंडन कर रही है

अपने पुत्रों की शहादत पर दशम गुरु की “चार मुए तो क्या हुआ, जीवित कई हजार” उक्ति राष्ट्र और धर्म के प्रति अटूट समर्पण की प्रेरणा बन गई है

नवम गुरु तेग बहादुर जी न होते तो न कोई हिंदू बचा होता न सिख, इसलिए उन्हें ‘हिंद दी चादर’ कहते हैं

देश पर नवम गुरु के जो उपकार हैं, उसके पांच हज़ार साल बाद भी देश उनका आभारी रहेगा

दिल्ली का शीशगंज गुरुद्वारा आज भी सभी देशभक्तों के लिए तीर्थ स्थान बना हुआ है

गुरु नानक देव जी महाराज ने पूरे देश को एकता के सूत्र में पिरोया और अंधविश्वास से मुक्ति के लिए समाज को दिशा दिखाई

अनेक भाषाओं के ज्ञाता, कवि, तीरंदाजी जैसे गुणों और महान विरासत से अलंकृत गुरु गोबिंद सिंह जी युगपुरुष हैं

विभाजन के समय करतारपुर साहिब को भारत में शामिल न किया जाना, बंटवारा करने वालों के विवेक पर सवाल खड़े करता है

मोदी जी ने करतारपुर साहिब कॉरिडोर व जलियांवाला बाग स्मारक बनाया, सिख दंगों के दोषियों को जेल में डाला, और सिख शरणार्थियों को नागरिकता दी

मोदी जी बहुत भाग्यवान प्रधानमंत्री हैं क्योंकि प्रथम गुरु से लेकर दशम पिता तक के जीवन से जुड़े अनेक महत्त्वपूर्ण अवसर उनके कालखंड में आए

प्रविष्टि तिथि: 24 DEC 2025 10:56PM by PIB Delhi

केन्द्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री श्री अमित शाह ने आज हरियाणा के पंचकूला में वीर बाल दिवस पर हरियाणा सरकार के राज्य स्तरीय कार्यक्रम को संबोधित किया। इस अवसर पर हरियाणा के मुख्यमंत्री श्री नायब सिंह सैनी सहित अनेक गणमान्य व्यक्ति उपस्थित थे।

 

अपने संबोधन में केन्द्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री श्री अमित शाह ने कहा कि जब कोई वीर साहबज़ादों की शहादत की बात करता है तो एक ओर मन में दुख होता है कि जिन्होंने अभी जीवन को देखा ही नहीं था, उन बच्चों को इतनी क्रूरता से मार दिया गया। दूसरी ओर छाती गर्व से फूल भी जाती है कि हम ऐसे देश में पैदा हुए हैं, यहां एक बंदा अपने चारों साहबज़ादों को देश और धर्म के लिए समर्पित करने से नहीं चूकता है।

श्री अमित शाह ने कहा कि आज हम जब उस घटना को याद करते हैं तो रोंगटे खड़े हो जाते हैं। उन्होंने कहा कि देशभर के युवाओं को दशम पिता का जीवन और साहबज़ादों की शहीदगी बताना हम सबका राष्ट्रीय दायित्व है। उन्होंने कहा कि धर्म और देश के लिए लड़ने वालों के इतिहास में ऐसा कोई व्यक्ति नहीं मिल सकता, जिसने पिता, माता और चार छोटे बेटों का बलिदान दे दिया और इसीलिए देश की जनता ने उन्हें सरबंसदानी की उपमा दी है। उन्होंने कहा कि यह जुझारूपन, मातृभूमि के प्रति प्यार और धर्म के प्रति समर्पण ही है और यह पूरे देश के सभी लोगों को जानकारी देने का अवसर है। श्री शाह ने कहा कि सबसे पहले मुगलों के आक्रमण के समय नानकदेव महाराज जी से लेकर दशम पिता गुरु गोविंद देव जी तक यह लड़ाई जारी रही और मुगलों की समाप्ति दस गुरुओं के कालखंड में ही हुई।

 

केन्द्रीय गृह मंत्री ने कहा कि गुरु नानक देव जी महाराज ने पूरे देश को एकता के सूत्र में पिरोया और अंधविश्वास से मुक्ति के लिए समाज को दिशा दिखाई। उन्होंने कहा कि गुरु अंगद देव जी ने गुरु नानकदेव जी के सारे उपदेशों को गुरुमुखी में लिपिबद्ध करने का काम किया और अंगद देव जी के इस योगदान को सिख धर्म और भारत कभी नहीं भुला सकेंगे। तृतीय गुरु अमर दास जी ने लंगर की शुरूआत की और माताओं के सम्मान का विषय लेकर उन्होंने पूरे भारत में एक मज़बूत संदेश भेजा कि अगर मां सुरक्षित नहीं है तो कोई भी देश बच नहीं सकता था। गुरु अर्जन देव जी ने भी आदिग्रंथ का संपादन किया और इसमें सिर्फ गुरुओं की वाणी ही नहीं बल्कि सभी धर्मों के संतों और फकीरों की वाणी को समाहित करने का काम किया। श्री शाह ने कहा कि गुरु अर्जन देव जी ने पूरे भारत के आध्यात्म के सार को एक ग्रंथ में सुरक्षित करने का काम किया।

 

श्री अमित शाह ने कहा छठे गुरु जी ने मिरी और पिरी की कल्पना की और कहा कि धर्म की भक्ति की ध्वजा ऊंची रहेगी लेकिन साथ ही सुरक्षा की ध्वजा भी साथ रहेगी और पहली बार मुगलों के जुल्म के खिलाफ गुरुओं की परंपरा ने आगे बढ़ने की शुरूआत की। जब ग्वालियर के किले में 52 हिंदू राजाओं को कैद कर लिया गया था तो दीपावली के दिन उन सबको छुड़ाने का काम गुरु हरगोविंद सिंह जी ने किया इसीलिए आज भी दीपावली को बंदी छोड़ दिवस के रूप में मनाया जाता है। श्री शाह ने कहा कि गुरु हर राय जी ने करूणा, प्रकृति और औषधि को धर्म के साथ जोड़ने का काम किया। अल्पायु में गुरु हर किशन साहिब जी ने भी सेवा का बहुत बड़ा उदाहरण दिया और चेचक महामारी के समय प्राणों की परवाह किए बिना दिल्ली और आसपास के इलाकों में सेवा की बहुत बड़ी परंपरा उन्होंने स्थापित की। गृह मंत्री ने कहा कि अगर गुरु तेग बहादुर न होते तो न कोई हिंदू होता और न कोई सिख होता और पूरा भारत समाप्त हो गया होता, इसलिए उन्हें ‘हिंद दी चादर’ कहते हैं। उन्होंने कहा कि इस देश पर नवम गुरु के जो उपकार हैं उनका पांच हज़ार साल बाद भी शुकराना अदा नहीं हो सकता।

केन्द्रीय गृह मंत्री ने कहा कि इतनी यातनाएं सहने के बाद भी जुल्मी और अत्याचारी लोगों के सामने अपने मज़बूत इरादों को नवम गुरु ने कभी छोड़ा नहीं। कई यातनाएं सहकर अपना बलिदान दिया और दिल्ली का शीशगंज गुरुद्वारा आज सैकड़ों साल बाद भी सभी देशभक्तो के लिए सबसे बड़ा तीर्थ स्थान बना हुआ है। उन्होंने कहा कि यह सभी लोगों को दिखाता है अगर एक व्यक्ति चाहे तो उसका बलिदान उसे शासक के जुल्म से भी ऊपर उठा लेता है। उन्होंने पूरे विशाल देश के सभी धर्मों की रक्षा के लिए अपना बलिदान दिया। श्री शाह ने कहा कि अनेक भाषाओं के ज्ञाता, कवि, तीरंदाजी जैसे गुणों और महान विरासत से अलंकृत गुरु गोबिंद सिंह जी युगपुरुष हैं। उन्होने कहा कि दशम पिता के जीवन को कोई नहीं भूल सकता। आज हम सब दशम पिता को श्रद्धा से देखते हैं और आज उनका वाक्य भी सही हो गया है कि जुल्म करने वाले तो चले गए लेकिन उनके करोड़ों बेटे धर्म और मातृभूमि के लिए लड़ने के लिए तैयार खड़े हैं। उन्होंने कहा कि विभाजन के समय करतारपुर साहिब को भारत में शामिल न किया जाना, बंटवारा करने वालों के विवेक पर सवाल खड़े करता है।

श्री अमित शाह ने कहा कि आज़ादी के बाद इस इतिहास को एक प्रकार से भुला दिया गया। उन्होंने कहा कि धर्म के प्रति श्रद्धा औऱ देश के प्रति लगाव और धर्म और देश के लिए शहीदगी के भाव का महिमामंडन होना चाहिए। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी ने बहुत मन से 9 जनवरी, 2022 को प्रकाश पर्व के दिन तय किया कि 26 दिसंबर को पूरे देश में वीर बाल दिवस मनाया जाएगा। उन्होंने कहा कि आज तीन साल बाद इस देश में हर हिस्से में प्राथमिक स्कूल में 26 दिसंबर को साहिबज़ादों की जीवनी पढ़ी जाती है। वीर बाल दिवस को हमने बहुत मन के साथ मनाने की शुरूआत की है और भारत सरकार के साथ साथ सभी राज्य सरकारों ने इसमें साथ दिया है।

 

केन्द्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी जी बहुत भाग्यवान प्रधानमंत्री हैं क्योंकि उनके ही शासनकाल में गुरु तेग बहादुर जी का 350वां शहीदी दिवस आया, गुरु नानकदेव जी महाराज का 550वां प्रकाश पर्व आया, तेगबहादुर जी का 400वां प्रकाश पर्व आया और दशम पिता का 350वां प्रकाश पर्व आया। उन्होंने कहा कि यह गुरुओं की ही कृपा है कि एक ही प्रधानमंत्री के कालखंड में प्रथम गुरु से लेकर दशम पिता तक सभी के जीवन से जुड़ी हुई घटनाएं आईं। श्री शाह ने कहा कि सभी सिख गुरुओं की परंपरा को पूरी दुनिया के सामने रखने में मोदी सरकार ने कोई कसर नहीं छोड़ी है। उन्होंने कहा कि करतारपुर साहिब का गलियारा, तीन दशकों के बाद सिख दंगों के सभी केसों को दोबारा खोलकर गुनाहगारों को जेल में डाला, जलियांवाला बाग का स्मारक बनाया गया और सिख शरणार्थियों को नागरिकता देने का काम किया। उन्होंने कहा कि सिख पंथ से अधिक सर्वधर्म समभाव रखने वाला कोई और धर्म नहीं हो सकता।

 

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आरके / आरआर / पीआर


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