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भारत के डेयरी क्षेत्र का डिजिटल कायाकल्प


एक स्मार्ट, पारदर्शी और किसान-केंद्रित इकोसिस्टम का निर्माण

प्रविष्टि तिथि: 09 JAN 2026 10:32AM by PIB Delhi

 

प्रमुख बिंदु

  • राष्ट्रीय डिजिटल पशुधन मिशन (एनडीएलएम) के तहत एक अभूतपूर्व उपलब्धि हासिल करते हुए अब तक 35.68 करोड़ से अधिक पशुओं को उनका अपना 'पशु आधार' जारी किया जा चुका है। यह क्रांतिकारी कदम न केवल पशुओं को एक डिजिटल पहचान देता है, बल्कि पूरे पशुधन प्रबंधन को पूरी तरह से पारदर्शी और ट्रैक करने योग्य बनाता है।
  • देश भर की 54 डेयरी यूनियनों से जुड़े 17.3 लाख से अधिक दूध उत्पादक अब ऑटोमैटिक मिल्क कलेक्शन सिस्टम (एएमसीएस) का सीधा लाभ उठा रहे हैं। यह आधुनिक प्रणाली न केवल कामकाज में तेजी ला रही है, बल्कि पारदर्शी भुगतान सुनिश्चित कर किसानों के भरोसे को भी मजबूत कर रही है।
  • वर्तमान में देश की लगभग 198 डेयरी यूनियनें और 15 महासंघ इंटरनेट-आधारित डेयरी सूचना प्रणाली (आई-डीआईएस) का उपयोग कर रहे हैं। यह प्रणाली डेटा के आधार पर सटीक निर्णय लेने और प्रदर्शन की तुलनात्मक जाँच कर रहे हैं।
  • कई राज्यों में सहकारी समितियों ने जीआईएस (भौगोलिक सूचना प्रणाली) तकनीक का उपयोग कर अपने 'मिल्क रूट्स' (दूध परिवहन मार्गों) का सफलतापूर्वक ऑप्टिमाइजेशन किया है। इस आधुनिक पहल ने न केवल परिवहन लागत में भारी बचत सुनिश्चित की है, बल्कि दूध की डिलीवरी को भी अधिक कुशल और समयबद्ध बना दिया है।

 

परिचय

भारत आज विश्व का सबसे बड़ा दूध उत्पादक देश है, जो वैश्विक उत्पादन में 25 प्रतिशत की भारी हिस्सेदारी रखता है। जैसे-जैसे यह क्षेत्र विस्तार कर रहा है, वैसे-वैसे उत्पादकता, पारदर्शिता और किसान कल्याण को बढ़ावा देने में डिजिटल उपकरणों की भूमिका निरंतर महत्वपूर्ण होती जा रही है। इस परिवर्तनकारी यात्रा में राष्ट्रीय डेयरी विकास बोर्ड (एनडीडीबी) सबसे आगे रहा है। एनडीडीबी ऐसे डिजिटल प्लेटफॉर्म विकसित कर रहा है जो किसानों, सहकारी समितियों और डेयरी वैल्यू चेन के सभी हितधारकों को एक सूत्र में पिरोते हैं। इन पहलों का मुख्य उद्देश्य डेयरी परिचालन को आधुनिक बनाना, कमियों को दूर करना और ट्रेसेबिलिटी (सटीक निगरानी) को बढ़ाना है, ताकि दुनिया के इस सबसे बड़े डेयरी इकोसिस्टम को और अधिक सशक्त बनाया जा सके।

राष्ट्रीय डिजिटल पशुधन मिशन (एनडीएलएम)

राष्ट्रीय डेयरी विकास बोर्ड (एनडीडीबी) द्वारा पशुपालन और डेयरी विभाग (डीएएचडी) के सहयोग से कार्यान्वित राष्ट्रीय डिजिटल पशुधन मिशन (एनडीएलएम), एक एकीकृत डिजिटल पशुधन इकोसिस्टम के निर्माण की दिशा में एक बड़ा और क्रांतिकारी कदम है, जिसे “भारत पशुधन” का नाम दिया गया है।

पशुधन प्रबंधन को डेटा-संचालित और सटीक बनाने के लिए, "भारत पशुधन" डेटाबेस में जमीनी स्तर की सभी गतिविधियों का लेखा-जोखा रखा जा रहा है। इसमें पशु प्रजनन, कृत्रिम गर्भाधान, स्वास्थ्य सेवाएँ, टीकाकरण और उपचार जैसी महत्वपूर्ण जानकारियाँ दर्ज की जाती हैं। अब तक इस सिस्टम में 84 करोड़ से अधिक ट्रांजैक्शन दर्ज किए जा चुके हैं। पशु चिकित्सक और एक्सटेंशन वर्कर सहित फील्ड कर्मचारी किसानों को इस सिस्टम तक पहुंचने में मदद करते हैं।

राष्ट्रीय डिजिटल पशुधन मिशन (एनडीएलएम) पशुपालकों को सशक्त बनाने और पशुधन की उत्पादकता बढ़ाने के लिए विशिष्ट पशु पहचान, डेटा इंटीग्रेशन और मोबाइल एप्लीकेशन जैसे आधुनिक डिजिटल उपकरणों का उपयोग कर रहा है। इस मिशन का संकल्प है कि भारत के प्रत्येक पशु की अपनी एक 'डिजिटल पहचान' हो, जिसे उसके स्वास्थ्य रिकॉर्ड और उत्पादन डेटा से सीधे जोड़ा जा सके। इस मिशन को विभिन्न राज्यों में प्रभावी ढंग से लागू करने के लिए, राष्ट्रीय डेयरी विकास बोर्ड तकनीकी मार्गदर्शन और वित्तीय सहायता, दोनों ही मोर्चों पर अपना पूर्ण सहयोग प्रदान कर रहा है।

अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रचलित सर्वोत्तम प्रक्रियाओं के अनुरूप, अब भारत में भी सभी पशुओं के कान में 12-अंकों वाला एक विशिष्ट बार-कोडेड टैग आईडी लगाया जा रहा है। इस विशिष्ट कोड को “पशु आधार” का नाम दिया गया है, जो पशु से संबंधित हर गतिविधि जैसे टीकाकरण, प्रजनन और उपचार आदि के लिए एक 'प्राइमरी की' (मुख्य आधार) के रूप में कार्य करता है। पशु से संबंधित इन सभी गतिविधियों और सेवाओं का विवरण इस टैग आईडी के माध्यम से एक ही स्थान पर देखा जा सकता है। यह डेटा न केवल पशुपालक किसान को उपलब्ध होगा, बल्कि संबंधित क्षेत्र के पशु चिकित्सकों और फील्ड कार्यकर्ताओं को भी उनके अधिकार क्षेत्र के पशुओं के लिए स्पष्ट रूप से दिखाई देगा। डिजिटल पशुधन प्रबंधन की दिशा में एक बड़ी उपलब्धि हासिल करते हुए, नवंबर 2025 तक 35.68 करोड़ से अधिक 'पशु आधार' जारी किए जा चुके हैं। 

राष्ट्रीय डिजिटल पशुधन मिशन के अंतर्गत, '1962 ऐप' पशुपालकों को पशुपालन के सर्वोत्तम तरीकों और सरकारी योजनाओं के बारे में प्रमाणित जानकारी प्रदान करता है। इसके अतिरिक्त, किसानों के लिए टोल-फ्री नंबर 1962 भी उपलब्ध है, जिसके माध्यम से वे 'मोबाइल वेटरनरी यूनिट' के जरिए अपने घर पर ही पशु चिकित्सा सेवाएं प्राप्त कर सकते हैं।

ऑटोमैटिक मिल्क कलेक्शन सिस्टम

भारतीय सहकारी डेयरी मॉडल के मूल में लाखों किसानों से प्रतिदिन होने वाला दूध संकलन है। इस प्रक्रिया को पारदर्शी, कुशल और किसान-अनुकूल बनाने के लिए, राष्ट्रीय डेयरी विकास बोर्ड (एनडीडीबी) ने ऑटोमैटिक मिल्क कलेक्शन सिस्टम (एएमसीएस) विकसित किया है। यह डेयरी सहकारी समितियों (डीसीएस) के कामकाज के हर पहलू को प्रबंधित करने के लिए एक मजबूत और एकीकृत सॉफ्टवेयर प्लेटफॉर्म है।

एएमसीएस प्रत्येक लेन-देन को डिजिटल रूप से दर्ज करके दूध संकलन की पूरी प्रक्रिया को स्वचालित बनाता है। इसमें दूध की मात्रा, गुणवत्ता और फैट (वसा) की मात्रा का सटीक रिकॉर्ड रखा जाता है और इसके आधार पर भुगतान सीधे किसानों के बैंक खातों में तुरंत स्थानांतरित कर दिया जाता है। ओपन-सोर्स तकनीक का उपयोग करते हुए, यह प्रणाली पूरी प्रक्रिया में सटीक निगरानी (ट्रेसिबिलिटी) सुनिश्चित करती है, मानवीय त्रुटियों की गुंजाइश को खत्म करती है और हर स्तर पर पारदर्शिता को बढ़ावा देती है। जहाँ एक ओर किसानों को उनकी दैनिक बिक्री और भुगतान के बारे में मोबाइल पर तुरंत एसएमएस अपडेट प्राप्त होते हैं, वहीं दूसरी ओर सहकारी समितियों को सटीक डेटा और विश्लेषण प्राप्त होता है, जिससे दूध की खरीद और उत्पादन योजना को बेहतर बनाने में मदद मिलती है।

यह प्रणाली यूनियन, राज्य फेडरेशन और राष्ट्रीय स्तर पर एकीकृत है, जो वित्तीय संस्थानों के साथ सीधा जुड़ाव स्थापित करती है और सभी हितधारकों को मोबाइल-आधारित महत्वपूर्ण सूचनाएं प्रदान करती है। वर्तमान में 12 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में संचालित यह एएमसीएस प्रणाली, 26,000 से अधिक डेयरी सहकारी समितियों को कवर करती है और इससे 54 दुग्ध संघों के 17.3 लाख से अधिक दूध उत्पादक लाभान्वित हो रहे हैं (22 अक्टूबर, 2025 तक के आंकड़ों के अनुसार)। यह उपलब्धि एक डिजिटल रूप से सशक्त और समावेशी डेयरी इकोसिस्टम बनाने के प्रति एनडीडीबी की अटूट प्रतिबद्धता को दर्शाती है।

इंटीग्रेटेड एएमसीएस सॉल्यूशन में ये मुख्य एप्लीकेशन/कंपोनेंट हैं।

  1. डीसीएस एप्लीकेशन: यह डेयरी सहकारी समिति (डीसीएस) स्तर पर उपयोग किया जाने वाला एक साझा और बहुभाषी एएमसीएस एप्लीकेशन है। यह विंडोज, लिनक्स और एंड्रॉइड प्लेटफॉर्म पर सुचारू रूप से कार्य करता है।
  2. पोर्टल एप्लीकेशन: यह यूनियन, राज्य फेडरेशन और राष्ट्रीय स्तर पर संचालित होने वाला एक साझा और केंद्रीकृत एएमसीएस पोर्टल है।
  3. एंड्रॉइड ऐप्स: इसके अंतर्गत सोसायटी सेक्रेटरी, डेयरी सुपरवाइजर और किसान के लिए अलग-अलग साझा और बहुभाषी मोबाइल एप्लीकेशन उपलब्ध हैं।

यह एंड्रॉइड-आधारित एप्लीकेशन किसानों के लिए एक डिजिटल पासबुक के रूप में कार्य करती है, जबकि डेयरी  सेक्रेटरी और सुपरवाइजर के लिए यह रीयल-टाइम जानकारी और अलर्ट प्राप्त करने का एक सशक्त मंच है। 22 अक्टूबर, 2025 तक के आंकड़ों के अनुसार, इस एएमसीएस मोबाइल ऐप पर अब तक 2.43 लाख से अधिक किसान, 1,374 सुपरवाइजर और 13,644 सेक्रेटरी अपना पंजीकरण करा चुके हैं।

एनडीडीबी डेयरी ईआरपी (एनडीईआरपी)

एनडीडीबी डेयरी ईआरपी (एनडीईआरपी) एक व्यापक, वेब-आधारित एंटरप्राइज रिसोर्स प्लानिंग सिस्टम है, जिसे विशेष रूप से डेयरी और खाद्य तेल उद्योगों की आवश्यकताओं के अनुरूप विकसित और अनुकूलित किया गया है। ओपन-सोर्स प्लेटफॉर्म (Frappe ERPNext) पर निर्मित होने के कारण, इसमें किसी भी प्रकार के सॉफ्टवेयर इंस्टॉलेशन की आवश्यकता नहीं होती और इसे कंप्यूटर या मोबाइल डिवाइस के माध्यम से कहीं से भी सहजता से उपयोग किया जा सकता है। यह वितरकों के लिए एंड्रॉइड और आईओएस (mNDERP) पर भी उपलब्ध है, जो बिना किसी मालिकाना हक (प्रोप्राइटरी) या बार-बार लगने वाले लाइसेंस शुल्क के एक पूर्ण और किफायती समाधान प्रदान करता है।.

iNDERP पोर्टल (https://inderp.nddb.coop) वितरकों के लिए एक ऑनलाइन प्लेटफॉर्म है जो एनडीईआरपी के साथ इंटीग्रेटेड है। यह उन्हें ऑर्डर, डिलीवरी चालान, इनवॉइस और भुगतान को कुशलतापूर्वक प्रबंधित करने में सक्षम बनाता है। वितरक सीधे इस पोर्टल के माध्यम से अपनी डिलीवरी को ट्रैक कर सकते हैं, बकाया राशि देख सकते हैं और इनवॉइस डाउनलोड कर सकते हैं, जिससे दुग्ध संघों और फेडरेशन के साथ सुचारू समन्वय सुनिश्चित होता है।

mNDERP मोबाइल ऐप एंड्रॉइड और आईओएस दोनों प्लेटफॉर्म पर उपलब्ध है, जो वितरकों को चलते-फिरते (ऑन द गो) वे सभी सुविधाएँ प्रदान करता है जो iNDERP पोर्टल पर उपलब्ध हैं। इसके माध्यम से वितरक अपने स्मार्टफोन का उपयोग करके आसानी से ऑर्डर दे सकते हैं, डिलीवरी की जांच कर सकते हैं, इनवॉइस देख सकते हैं और पेमेंट मॉनिटर कर सकते हैं। यह ऐप डेयरी व्यवसाय के संचालन में पारदर्शिता और सुविधा को बढ़ावा देता है।

एनडीईआरपी में वित्त और लेखा, खरीद, इन्वेंट्री, बिक्री और  मार्केटिंग, मैन्युफैक्चरिंग तथा मानव संसाधन एवं पेरोल जैसे सभी प्रमुख कार्यात्मक मॉड्यूल शामिल हैं। ये सभी मॉड्यूल एडवांस्ड वर्कफ़्लो और मेकर-चेकर जैसी सुविधाओं से एकीकृत हैं, जो परिचालन में उच्च स्तर की पारदर्शिता और नियंत्रण सुनिश्चित करते हैं। इसके साथ ही, इस प्रणाली में डैशबोर्ड और विश्लेषणात्मक उपकरण भी उपलब्ध हैं, जो प्रबंधन के सभी स्तरों पर डेटा-आधारित सटीक निर्णय लेने में सहायक होते हैं।

सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि एनडीईआरपी को 'ऑटोमैटिक मिल्क कलेक्शन सिस्टम' (एएमसीएस) के साथ एकीकृत किया गया है ताकि गाय से लेकर उपभोक्ता तक एक संपूर्ण डिजिटल समाधान तैयार किया जा सके। इसमें दूध के संकलन, प्रसंस्करण और वितरण की पूरी प्रक्रिया शामिल है। कार्यक्षमता बढ़ाने के लिए, यह प्लेटफॉर्म उत्पादन मॉड्यूल में मास-बैलेंसिंग तकनीक का उपयोग करता है, जो डेयरी संयंत्रों को प्रसंस्करण के दौरान होने वाले नुकसान को कम करने में मदद करती है।

सीमेन स्टेशन मैनेजमेंट सिस्टम (एसएसएमएस)

सीमेन स्टेशन मैनेजमेंट सिस्टम (एसएसएमएस) एक व्यापक डिजिटल प्लेटफॉर्म है, जिसे फ्रोजन सीमेन डोज (एफएसडी) के उत्पादन को सुव्यवस्थित करने और भारत सरकार द्वारा निर्धारित न्यूनतम मानक प्रोटोकॉल (एमएसपी) तथा मानक संचालन प्रक्रियाओं (एसओपी) का अनुपालन सुनिश्चित करने के लिए डिजाइन किया गया है। यह प्रणाली सीमेन स्टेशनों के सभी मुख्य कार्यों को कवर करती है, जिसमें बैल की लाइफसाइकिल मैनेजमेंट, सीमेन प्रोडक्शनक्वालिटी कंट्रोल, बायोसिक्योरिटी, फार्म एवं चारा प्रबंधन और बिक्री की ट्रैकिंग शामिल है। सटीक, कुशल और पारदर्शी संचालन सुनिश्चित करने के लिए इसे प्रयोगशाला उपकरणों और बुल आरएफआईडी टैग के साथ एकीकृत किया गया है, जिससे उत्पादन से लेकर वितरण तक के हर चरण की डिजिटल निगरानी संभव हो पाती है।

एसएसएमएस, इन्फॉर्मेशन नेटवर्क फॉर सीमेन प्रोडक्शन एंड रिसोर्स मैनेजमेंट (आईएनएसपीआरएम) से जुड़ा है, जो एक राष्ट्रीय पोर्टल है। यह पोर्टल सीमेन स्टेशनों और आईएनएपीएच (पशु उत्पादकता और स्वास्थ्य हेतु सूचना नेटवर्क) जैसी क्षेत्रीय स्तर की प्रणालियों के बीच रीयल-टाइम डेटा साझा करना संभव बनाता है। यह इंटीग्रेशन देशभर में आपूर्ति किए जाने वाले सीमेन डोज की पूर्ण ट्रेसिबिलिटी (नजर रखने की क्षमता) सुनिश्चित करता है और एक केंद्रीय डेटाबेस के माध्यम से समन्वित निगरानी में मदद करता है। विश्व बैंक द्वारा वित्तपोषित और एनडीडीबी द्वारा कार्यान्वित राष्ट्रीय डेयरी योजना-I (एनडीपी I) के तहत विकसित इस प्रणाली ने देशभर के सीमेन स्टेशनों का आधुनिकीकरण किया है, जिससे भारत के कृत्रिम गर्भाधान नेटवर्क को मजबूती मिली है और डेयरी उत्पादकता में सुधार हुआ है। वर्तमान में, भारत के 38 श्रेणीबद्ध सीमेन स्टेशन सीमेन उत्पादन में गुणवत्ता, पारदर्शिता और मानकीकरण सुनिश्चित करने के लिए एसएसएमएस का उपयोग कर रहे हैं।

आईएनएपीएच

आईएनएपीएच एक ऐसा एप्लीकेशन है जो किसान के द्वार पर दी जाने वाली प्रजनन, पोषण और स्वास्थ्य सेवाओं से संबंधित सटीक और रीयल-टाइम डेटा को दर्ज करने की सुविधा प्रदान करता है। यह विभिन्न परियोजनाओं की प्रगति का आकलन और प्रभावी निगरानी करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।

इंटरनेट-आधारित डेयरी सूचना प्रणाली

डेयरी क्षेत्र में साक्ष्य-आधारित योजना और सूचित निर्णय लेने के लिए कुशल डेटा प्रबंधन अत्यंत महत्वपूर्ण है। राष्ट्रीय डेयरी विकास बोर्ड (एनडीडीबी) द्वारा विकसित इंटरनेट-आधारित डेयरी सूचना प्रणाली (i-DIS) डेयरी सहकारी समितियों, दुग्ध संघों, फेडरेशनों और अन्य संबद्ध इकाइयों को व्यवस्थित रूप से डेटा एकत्र करने, साझा करने और विश्लेषण करने के लिए एक एकीकृत डिजिटल मंच प्रदान करती है। यह प्रणाली प्रतिभागियों को दूध की खरीद और बिक्री, उत्पादों के निर्माण और वितरण, तथा तकनीकी इनपुट की आपूर्ति जैसे प्रमुख प्रदर्शन संकेतकों को ट्रैक करने में सक्षम बनाती है। साथ ही, यह प्रत्येक संगठन को अन्य संगठनों के साथ अपने प्रदर्शन की तुलना करने की सुविधा भी प्रदान करती है।

वर्तमान में, देशभर के लगभग 198 दुग्ध संघ, 29 मार्केटिंग डेयरियां, 54 पशु आहार संयंत्र और 15 फेडरेशन i-DIS का हिस्सा हैं, जो एक विश्वसनीय और व्यापक राष्ट्रीय सहकारी डेयरी उद्योग डेटाबेस बनाने में अपना बहुमूल्य योगदान दे रहे हैं। डेटा पर आधारित यह ईकोसिस्टम डेयरी क्षेत्र के भीतर रणनीतिक निर्णय लेने और नीति निर्धारण में महत्वपूर्ण सहायता प्रदान करता है। साथ ही, एनडीडीबी सहभागी संघों के प्रबंधन सूचना प्रणाली (एमआईएस) अधिकारियों के लिए नियमित रूप से रिफ्रेशर वर्कशॉप आयोजित करता है, ताकि i-DIS के प्रभावी उपयोग में उनकी क्षमता को और सुदृढ़ किया जा सके और योजना व परिचालन कार्यों में इस प्रणाली का सर्वोत्तम लाभ सुनिश्चित किया जा सके।

मिल्क रूट ऑप्टिमाइजेशन

भारत की डेयरी आपूर्ति श्रृंखला की सफलता के लिए दूध का कुशल संकलन और वितरण अत्यंत महत्वपूर्ण है। इस प्रक्रिया को अधिक लागत प्रभावी और व्यवस्थित बनाने के लिए, राष्ट्रीय डेयरी विकास बोर्ड (एनडीडीबी) ने जीआईएस (भौगोलिक सूचना प्रणाली) तकनीक का उपयोग करते हुए मिल्क रूट ऑप्टिमाइजेशन की शुरुआत की है। यह डिजिटल दृष्टिकोण मैनुअल प्लानिंग के स्थान पर दूध की खरीद और वितरण मार्गों को डिजिटल मानचित्रों पर अंकित करता है। इससे विभिन्न मार्ग विकल्पों का आसानी से विश्लेषण करना संभव हो जाता है और डेटा-आधारित सटीक निर्णय लेने में मदद मिलती है।

जीआईएस आधारित रूट प्लानिंग का उपयोग परिवहन की दूरी, ईंधन की लागत और समय को कम करने में मदद करता है, जिससे  दूध खरीदने और वितरण की समग्र दक्षता में सुधार होता है। एनडीडीबी ने अगस्त 2022 में विदर्भ मराठवाड़ा डेयरी विकास परियोजना के तहत मिल्क रूट ऑप्टिमाइजेशन एक्सरसाइज की शुरुआत की थी, जहाँ चार मिल्क चिलिंग सेंटर्स के मार्गों को फिर से तैयार किया गया, जिससे परिवहन लागत में उल्लेखनीय बचत हुई। वाराणसी दुग्ध संघ, पश्चिम असम दुग्ध संघ, झारखंड दुग्ध महासंघ और इंदौर दुग्ध संघ में भी इसी तरह के अभ्यासों के उत्साहजनक परिणाम सामने आए हैं, जो डेयरी लॉजिस्टिक्स में लागत में भारी कमी लाने की अपार संभावनाओं को दर्शाते हैं।

सहकारी समितियों को इस तकनीक को व्यापक रूप से अपनाने में मदद करने के लिए, एनडीडीबी  ने एक वेब-आधारित डायनामिक रूट प्लानिंग सॉफ्टवेयर विकसित किया है। यह सॉफ्टवेयर वाहनों के बेड़े और रूट ऑप्टिमाइजेशन को एक व्यवस्थित, वैज्ञानिक और यूजर-फ्रेंडली तरीके तरीके से सक्षम बनाता है। डेयरी सहकारी समितियों के लिए निःशुल्क उपलब्ध यह टूल रियल-टाइम रूट प्लानिंग बनाने में मदद करता है और बेहतर  ऑपरेशनल कंट्रोल में मदद करता है। तकनीक को सहकारी दक्षता के साथ जोड़कर, एनडीडीबी की यह रूट ऑप्टिमाइजेशन पहल भारत के डेयरी क्षेत्र में सतत और लागत प्रभावी दूध परिवहन के लिए एक नया मानक स्थापित कर रही है। 

निष्कर्ष

दुनिया के कुल दूध उत्पादन में एक-चौथाई की हिस्सेदारी रखने वाला भारत का डेयरी क्षेत्र, आज राष्ट्रीय डेयरी विकास बोर्ड (एनडीडीबी) के नेतृत्व में एक अभूतपूर्व डिजिटल बदलाव के दौर से गुजर रहा है। एनडीएलएम, एएमसीएस, एनडीईआरपी, एसएसएमएस, आई-डीआईएस और रूट ऑप्टिमाइजेशन टूल्स  जैसे एकीकृत प्लेटफॉर्म्स के माध्यम से यह क्षेत्र अब अधिक कार्यक्षमता, पारदर्शिता और समावेशिता की ओर कदम बढ़ा रहा है। ये डिजिटल प्रणालियाँ न केवल परिचालन उत्पादकता को नई ऊंचाइयों पर ले जा रही हैं, बल्कि यह भी सुनिश्चित कर रही हैं कि देश के लाखों छोटे और सीमांत डेयरी किसान सीधे एक आधुनिक, तकनीक-संचालित ईकोसिस्टम से जुड़ें।

सहकारी की ताकत और डिजिटल नवाचार के इस अनूठे संगम से भारत सस्टेनेबल डेयरी विकास के नए मानक स्थापित कर रहा है। यहाँ दूध की हर एक बूंद और हर एक पशु एक ऐसी वैल्यू चेन का हिस्सा है जो पूरी तरह से आपस में जुड़ी, पारदर्शी और कुशल है। ये निरंतर प्रयास एनडीडीबी के उस दृष्टिकोण को दर्शाते हैं जिसमें एक ऐसे डिजिटल रूप से सशक्त डेयरी क्षेत्र की परिकल्पना की गई है जो उत्पादकों और उपभोक्ताओं, दोनों के हितों की रक्षा करता है। यह पहल भारत को सुरक्षित, सतत और तकनीक-आधारित दूध उत्पादन में ग्लोबल लीडर बनने के लक्ष्य के और भी करीब ले जा रही है।

संदर्भ:

  • पीआईबी
  1. https://www.pib.gov.in/PressReleasePage.aspx?PRID=2114715
  2. https://www.pib.gov.in/PressReleseDetail.aspx?PRID=2115188
  1. https://amcs.nddb.coop/
  2. https://amcs.nddb.coop/Home/UnionDetails
  3. https://amcs.nddb.coop/Home/About
  • एनडीडीबी डेयरी ईआरपी
  1. https://nderp.nddb.coop/subpage?i-NDERP
  2. https://nderp.nddb.coop/subpage?m-NDERP
  3. https://nderp.nddb.coop/subpage?NDERP

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