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खाद्य प्रसंस्करण उद्योग मंत्रालय
वर्षांत समीक्षा 2025 - खाद्य प्रसंस्करण उद्योग मंत्रालय की उपलब्धियां और पहलें
प्रविष्टि तिथि:
09 JAN 2026 1:04PM by PIB Delhi
खाद्य प्रसंस्करण क्षेत्र कृषि आय बढ़ाने और कृषि से इतर रोजगार सृजित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। यह क्षेत्र संरक्षण और प्रसंस्करण अवसंरचना में कृषिगत और गैर-कृषिगत निवेश के माध्यम से कृषि और संबद्ध क्षेत्रों में फसल कटाई के बाद होने वाले नुकसान को कम करता है। इसी के अनुरूप, खाद्य प्रसंस्करण उद्योग मंत्रालय ने देश में खाद्य प्रसंस्करण क्षेत्र के विकास को गति देने के लिए कई पहलें की हैं और वर्ष 2025 के दौरान अपनी योजनाओं में महत्वपूर्ण उपलब्धियां हासिल की हैं।
पिछले वर्ष की उल्लेखनीय उपलब्धियां निम्नलिखित हैं: -
- कृषि-खाद्य निर्यात में प्रसंस्कृत खाद्य पदार्थों के निर्यात की हिस्सेदारी 2014-15 में 13.7 प्रतिशत से बढ़कर 2024-25 में 20.4 प्रतिशत हो गई।
- वार्षिक उद्योग सर्वेक्षण (एएसआई), 2023-24 की रिपोर्ट के अनुसार, खाद्य प्रसंस्करण क्षेत्र संगठित विनिर्माण क्षेत्र में सबसे बड़े रोजगार प्रदाताओं में से एक है, जो कुल पंजीकृत/संगठित क्षेत्र में 12.83 प्रतिशत रोजगार प्रदान करता है।
- जनवरी 2025 से अब तक पीएमएफएमई योजना के क्रेडिट लिंक्ड सब्सिडी घटक के तहत कुल 56,542 ऋण स्वीकृत किए गए हैं।
पिछले वर्ष की अन्य उल्लेखनीय उपलब्धियां निम्नलिखित हैं:
- मंत्रालय के बजट के माध्यम से क्षेत्रीय सहायता में वृद्धि-
भारत सरकार ने वर्ष 2026-27 में खाद्य प्रसंस्करण क्षेत्र के विकास के लिए मंत्रालय को 4064 करोड़ रुपये का अनुमानित बजट (बीई) आवंटित किया है, जो कि 2025-26 के संशोधित अनुमान (आरई) 3571.57 करोड़ रुपये से लगभग 13.79 प्रतिशत अधिक है।
- क्षेत्रीय उपलब्धियों में बड़ी छलांग-
- खाद्य प्रसंस्करण क्षेत्र में सकल मूल्य वर्धित (जीवीए) 2014-15 में 1.34 लाख करोड़ रुपये से बढ़कर 2023-24 में 2.24 लाख करोड़ रुपये हो गया है (प्रथम संशोधित अनुमानों के अनुसार)।
- इस क्षेत्र में अप्रैल 2014 से मार्च 2025 के दौरान 7.33 अरब अमेरिकी डॉलर का प्रत्यक्ष विदेशी निवेश हुआ है।
- कृषि-खाद्य निर्यात में प्रसंस्कृत खाद्य पदार्थों के निर्यात की हिस्सेदारी 2014-15 में 13.7 प्रतिशत से बढ़कर 2024-25 में 20.4 प्रतिशत हो गई है।
- वार्षिक उद्योग सर्वेक्षण (एएसआई), 2023-24 की रिपोर्ट के अनुसार, खाद्य प्रसंस्करण क्षेत्र संगठित विनिर्माण क्षेत्र में रोजगार प्रदान करने वाले सबसे बड़े क्षेत्रों में से एक है, जिसमें कुल पंजीकृत/संगठित क्षेत्र में 12.83 प्रतिशत रोजगार शामिल है।
- योजनाओं के अंतर्गत प्राप्त उपलब्धियां -
- प्रधानमंत्री किसान सम्पदा योजना (पीएमकेएसवाई)
- पीएमकेएसवाई को 14वें वित्त आयोग चक्र के लिए 2016-20 (जिसे 2020-21 तक बढ़ाया गया) की अवधि के लिए 6,000 करोड़ रुपये के आवंटन के साथ मंजूरी दी गई थी और 15वें वित्त आयोग चक्र के दौरान पुनर्गठन के बाद 6520 करोड़ रुपये के आवंटन के साथ इसे जारी रखने की मंजूरी दी गई है।
- जनवरी 2025 से, पीएमकेएसवाई की विभिन्न घटक योजनाओं के तहत 36 परियोजनाओं को मंजूरी दी गई है और 94 परियोजनाएं पूरी हो चुकी हैं/चालू हो चुकी हैं, जिसके परिणामस्वरूप प्रसंस्करण और संरक्षण क्षमता 28.48 लाख मीट्रिक टन तक पहुंच गई है। स्वीकृत परियोजनाओं के चालू होने पर 365.21 करोड़ रुपये का निवेश आने की उम्मीद है, जिससे लगभग 1.4 लाख किसानों को लाभ होगा और 0.09 लाख से अधिक प्रत्यक्ष/अप्रत्यक्ष रोजगार सृजित होने की संभावना है।
- पीएमकेएसवाई के शुभारम्भ से लेकर अब तक इसकी विभिन्न घटक योजनाओं के अंतर्गत कुल 1618 परियोजनाओं को मंजूरी दी जा चुकी है। इनमें से 1185 परियोजनाएं चालू हो चुकी हैं, जिसके परिणामस्वरूप प्रसंस्करण और संरक्षण की क्षमता 270.51 लाख मीट्रिक टन तक पहुंच गई है। स्वीकृत परियोजनाओं के चालू होने पर 21917 करोड़ रुपये का निवेश आने की उम्मीद है, जिससे लगभग 51 लाख किसानों को लाभ होगा और 7.22 लाख से अधिक प्रत्यक्ष/अप्रत्यक्ष रोजगार सृजित होने की संभावना है।
- पीएमकेएसवाई ने कृषि उत्पादों की कीमतों में वृद्धि और नुकसान में कमी के संदर्भ में महत्वपूर्ण सकारात्मक प्रभाव डाला है। शीत श्रृंखला परियोजनाओं पर एनएबीकॉन की मूल्यांकन अध्ययन रिपोर्ट से पता चला है कि स्वीकृत परियोजनाओं में से 70 प्रतिशत के पूरा होने से मछली पालन के मामले में अपशिष्ट में 70 प्रतिशत तक और डेयरी उत्पादों के मामले में 85 प्रतिशत तक उल्लेखनीय कमी आई है।
- केंद्रीय मंत्रिमंडल ने 31.07.2025 को हुई अपनी बैठक में 15वें वित्त आयोग चक्र (2021-22 से 2025-26) के दौरान चल रही केंद्रीय क्षेत्र योजना "प्रधानमंत्री किसान संपदा योजना" (पीएमकेएसवाई) के लिए 1920 करोड़ रुपये के अतिरिक्त परिव्यय सहित कुल 6520 करोड़ रुपये के परिव्यय को मंजूरी दी है।
"अनुमोदन में (i) प्रधानमंत्री किसान संपदा योजना (पीएमकेएसवाई) की घटक योजना - एकीकृत शीत श्रृंखला और मूल्यवर्धन अवसंरचना (आईसीसीवीएआई) के तहत 50 बहु-उत्पाद खाद्य विकिरण इकाइयों की स्थापना और खाद्य सुरक्षा एवं गुणवत्ता आश्वासन अवसंरचना (एफएसक्यूएआई) की घटक योजना के तहत एनएबीएल मान्यता प्राप्त 100 खाद्य परीक्षण प्रयोगशालाओं (एफटीएल) की स्थापना के लिए 1000 करोड़ रुपये शामिल हैं, जो वित्त वर्ष 2024-25 के बजट घोषणा के अनुरूप है।
- 50 बहु-उत्पाद खाद्य विकिरण परियोजनाओं के लिए रुचि की अभिव्यक्ति 07.08.2024 और 25.07.2025 को जारी की गई थी। वित्त वर्ष 2025-26 के दौरान 21 प्रस्ताव प्राप्त हुए और 14 प्रस्तावों को मंजूरी दी गई।
- एनएबीएल से मान्यता प्राप्त 100 खाद्य गुणवत्ता एवं सुरक्षा परीक्षण प्रयोगशालाओं के लिए रुचि की अभिव्यक्ति 20.11.2026 को जारी की गई थी, जो 20.01.2026 तक खुली है।
बी. प्रधानमंत्री सूक्ष्म खाद्य प्रसंस्करण उद्यम औपचारिकरण योजना
- आत्मनिर्भर भारत अभियान के तहत, खाद्य प्रसंस्करण उद्योग मंत्रालय ने जून 2020 में प्रधानमंत्री सूक्ष्म खाद्य प्रसंस्करण उद्यम औपचारिकीकरण योजना (पीएमएमएफएमई) नामक एक केंद्र प्रायोजित योजना शुरू की, जिसका उद्देश्य खाद्य प्रसंस्करण क्षेत्र में 'स्थानीय उत्पादों को प्राथमिकता' देने को प्रोत्साहित करना था। इस योजना के लिए वित्त वर्ष 2020-2025 की अवधि में कुल 10,000 करोड़ रुपये का आवंटन किया गया था। इस योजना को वित्त वर्ष 2025-26 तक बढ़ा दिया गया है।
- यह सूक्ष्म खाद्य प्रसंस्करण उद्यमों के लिए सरकार की पहली योजना है और इसका उद्देश्य ऋण से जुड़ी सब्सिडी के माध्यम से 2 लाख उद्यमों को लाभ पहुंचाना और 'एक जिला एक उत्पाद' के मकसद को अपनाना है।
- जनवरी 2025 से अब तक, पीएमएफएमई योजना के क्रेडिट लिंक्ड सब्सिडी घटक के तहत कुल 56,543 ऋण स्वीकृत किए गए हैं। 63,108 स्वयं सहायता समूह (एसएचजी) सदस्यों को बीज पूंजी सहायता के रूप में 240.92 करोड़ रुपये की राशि स्वीकृत की गई है। इस अवधि के दौरान 1 इनक्यूबेशन सेंटर स्वीकृत किया गया और 8 इनक्यूबेशन सेंटर पूर्ण/उद्घाटित/चालू किए गए हैं, जो जमीनी स्तर के सूक्ष्म उद्यमों को उत्पाद विकास सहायता प्रदान करते हैं। सूक्ष्म उद्यमों को ब्रांडिंग सहायता प्रदान करने के लिए विपणन और ब्रांडिंग के 10 प्रस्तावों को मंजूरी दी गई है।
- इस योजना की शुरुआत से अब तक, पीएमएफएमई योजना के क्रेडिट लिंक्ड सब्सिडी घटक के तहत व्यक्तिगत लाभार्थियों, किसान उत्पादक संगठनों (एफपीओ), स्वयं सहायता समूहों (एसएचजी) और उत्पादक सहकारी समितियों को कुल 1,72,707 ऋण स्वीकृत किए गए हैं। 3.76 लाख स्वयं सहायता समूह (एसएचजी) सदस्यों को बीज पूंजी सहायता के रूप में 1282.98 करोड़ रुपये की राशि जारी की गई है। ओडीओपी प्रसंस्करण लाइनों और संबद्ध उत्पाद लाइनों में 208.11 करोड़ रुपये के परिव्यय के साथ 76 इनक्यूबेशन केंद्रों की स्थापना को मंजूरी दी गई है। 23 इनक्यूबेशन केंद्र पूर्ण/उद्घाटित/चालू किए जा चुके हैं।
विपणन और ब्रांडिंग के 27 प्रस्तावों को मंजूरी दी गई है, जिनमें 2 राष्ट्रीय स्तर के प्रस्ताव (एनएएफईडी चरण 1 और चरण 2) और 25 राज्य स्तरीय प्रस्ताव शामिल हैं।
सी. खाद्य प्रसंस्करण उद्योगों के लिए उत्पादन-आधारित प्रोत्साहन योजना (पीएलआईएसएफपीआई)
- केंद्रीय क्षेत्र योजना – “खाद्य प्रसंस्करण उद्योग के लिए उत्पादन-आधारित प्रोत्साहन योजना (पीएलआईएसएफपीआई)” को केंद्रीय मंत्रिमंडल ने 31.03.2021 को 10,900 करोड़ रुपये के परिव्यय के साथ अनुमोदित किया था। इसका उद्देश्य देश के प्राकृतिक संसाधनों के अनुरूप वैश्विक खाद्य विनिर्माण क्षेत्र के सूरमाओं को तैयार करने को बढ़ावा देने और अंतरराष्ट्रीय बाजारों में भारतीय खाद्य उत्पादों के ब्रांडों को समर्थन देना था। यह योजना 2021-22 से 2026-27 तक छह वर्षों की अवधि में कार्यान्वित की जा रही है।
- इस योजना के घटक हैं- चार प्रमुख खाद्य उत्पाद श्रेणियों के विनिर्माण को प्रोत्साहन देना, जिनमें बाजरा आधारित उत्पाद, प्रसंस्कृत फल और सब्जियां, समुद्री उत्पाद और मोज़ेरेला चीज़ (श्रेणी I) जैसे रेडी-टू-कुक/रेडी-टू-ईट (आरटीसी/आरटीई) खाद्य पदार्थ शामिल हैं। दूसरा घटक लघु एवं मध्यम उद्यमों के नवोन्मेषी/जैविक उत्पादों के उत्पादन से संबंधित है (श्रेणी II)। तीसरा घटक विदेशों में ब्रांडिंग और विपणन में मदद से संबंधित है (श्रेणी III), जिसका उद्देश्य इन-स्टोर ब्रांडिंग, शेल्फ स्पेस किराये पर लेने और विपणन के लिए मजबूत भारतीय ब्रांडों के उदय को प्रोत्साहित करना है। पीएलआईएसएफपीआई के तहत बचत से, मोटा अनाज आधारित उत्पादों के लिए उत्पादन-लिंक्ड प्रोत्साहन योजना (पीएलआईएसएमबीपी) के लिए एक घटक भी बनाया गया, ताकि आरटीसी/आरटीई उत्पादों में मोटे अनाज के उपयोग को प्रोत्साहित किया जा सके और इसके उत्पादन, मूल्यवर्धन और बिक्री को बढ़ावा देने के लिए पीएलआई योजना के तहत प्रोत्साहन दिया जा सके।
- खाद्य प्रसंस्करण क्षेत्र में उत्पादन-आधारित प्रोत्साहन योजना (पीएलआईएसएफपीआई) की विभिन्न श्रेणियों के अंतर्गत कुल 170 प्रस्तावों को मंजूरी दी जा चुकी है। इस योजना के तहत अब तक कुल 9702 करोड़ रुपये का निवेश हुआ है, जिससे 34 लाख रोजगार के अवसर सृजित हुए हैं। 161 पात्र मामलों में अब तक कुल 2162.553 करोड़ रुपये के प्रोत्साहन राशि का वितरण किया जा चुका है।
- “विश्व खाद्य भारत-2025” के अंतर्गत गतिविधियां/उपलब्धियां - [डब्ल्यूएफआई प्रभाग]
- खाद्य प्रसंस्करण उद्योग मंत्रालय ने 25 से 28 सितंबर, 2025 तक नई दिल्ली स्थित प्रगति मैदान के भारत मंडपम में वैश्विक खाद्य कार्यक्रम "विश्व खाद्य भारत (डब्ल्यूएफआई)" का आयोजन किया। इस कार्यक्रम ने उत्पादकों, खाद्य प्रसंस्करणकर्ताओं, उपकरण निर्माताओं, लॉजिस्टिक्स कंपनियों, शीत श्रृंखला कंपनियों, प्रौद्योगिकी प्रदाताओं, स्टार्टअप और नवप्रवर्तकों, खाद्य खुदरा विक्रेताओं आदि के बीच संवाद और समन्वय के लिए एक सहायक मंच प्रदान किया और खाद्य प्रसंस्करण क्षेत्र में निवेश स्थल के रूप में भारत को प्रदर्शित किया।
- यह कार्यक्रम नई दिल्ली के भारत मंडपम में 1,00,000 वर्ग मीटर के क्षेत्र में आयोजित किया गया था। उद्घाटन सत्र के अलावा, भारत मंडपम में तकनीकी सत्र, मंत्री स्तरीय बैठकें और उद्योग गोलमेज सम्मेलन आयोजित किए गए। यह कार्यक्रम वरिष्ठ सरकारी अधिकारियों, वैश्विक निवेशकों और प्रमुख वैश्विक एवं घरेलू कृषि-खाद्य कंपनियों के व्यापारिक दिग्गजों के सबसे बड़े सम्मेलनों में से एक था। कार्यक्रम के प्रमुख घटकों में प्रदर्शनी, सम्मेलन एवं ज्ञान सत्र, फूड स्ट्रीट, भारतीय पारंपरिक व्यंजन और विशिष्ट पवेलियन खंड शामिल थे, जो (क) फल और सब्जियां; (ख) डेयरी और मूल्यवर्धित डेयरी उत्पाद; (ग) मशीनरी और पैकेजिंग; (घ) रेडी टू ईट/रेडी टू कुक; (ङ) प्रौद्योगिकी और नवाचार; और (च) पालतू पशु खाद्य उत्पाद आदि पर केंद्रित थे।
- विश्व खाद्य भारत-2025 का उद्घाटन प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने रूस के उप प्रधानमंत्री श्री दिमित्री पात्रुशेव, खाद्य प्रसंस्करण उद्योग मंत्री श्री चिराग पासवान, आयुष राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) और स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण राज्य मंत्री श्री प्रतापराव जाधव और खाद्य प्रसंस्करण उद्योग एवं रेलवे राज्य मंत्री श्री रवनीत सिंह की उपस्थिति में 25 सितंबर, 2025 को भारत मंडपम के पूर्ण सत्र कक्ष में किया।
- 25 सितंबर 2025 को नई दिल्ली स्थित भारत मंडपम के सम्मेलन कक्ष में एक उच्च स्तरीय उद्योग गोलमेज सम्मेलन का आयोजन किया गया। इसकी सह-अध्यक्षता केंद्रीय सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्री श्री नितिन गडकरी और खाद्य प्रसंस्करण उद्योग मंत्री श्री चिराग पासवान ने की। इस सम्मेलन में खाद्य प्रसंस्करण और रेल राज्य मंत्री श्री रवनीत सिंह, केद्र सरकार के विभिन्न मंत्रालयों और राज्य सरकारों के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे। इस सम्मेलन में संबद्ध मंत्रालयों और विभागों के सचिवों और वरिष्ठ सरकारी अधिकारियों के साथ-साथ अमूल, बीकानेरवाला, कोका-कोला, आईटीसी, मोंडेलेज़, डैनोन, लुलु, टेट्रापैक और टाटा कंज्यूमर प्रोडक्ट्स के सीईओ सहित उद्योग जगत के 100 से अधिक प्रतिष्ठित दिग्गज भी शामिल हुए। इस उच्च स्तरीय सीईओ गोलमेज सम्मेलन का मुख्य उद्देश्य कृषि-खाद्य क्षेत्र के प्रमुख दिग्गजों और वरिष्ठ सरकारी अधिकारियों के बीच रणनीतिक संवाद को बढ़ावा देना था। इस विशेष मंच का उद्देश्य सरकारी सब्सिडी ढांचे, कराधान संरचनाओं, व्यापार वर्गीकरण और नियामक जटिलताओं सहित उद्योग की प्रमुख चुनौतियों का समाधान करना था।
- इस भव्य खाद्य कार्यक्रम में केंद्र सरकार के 12 मंत्रालयों और विभागों, 8 सहयोगी संगठनों और 25 राज्यों तथा केंद्र शासित प्रदेशों के सक्रिय सहयोग से एक व्यापक समग्र सरकारी दृष्टिकोण अपनाया गया। डब्ल्यूएफआई -2025 में घरेलू और विदेशी हितधारकों के एक विस्तृत समूह ने भाग लिया। इस समूह में 1725 प्रदर्शक, 28931 बी2बी/बी2जी बैठकें, 12 जी2जी बैठकें, 4 दिवसीय आयोजन के दौरान 95000 से अधिक आगंतुक, 104 कॉर्पोरेट हस्तियां, 4356 शिक्षाविद, 168 राजनयिक और 206 वक्ता शामिल थे।
- इस भव्य खाद्य कार्यक्रम में उल्लेखनीय वैश्विक भागीदारी देखने को मिली, जिसमें 145 अंतर्राष्ट्रीय प्रदर्शक, 115 देशों की भागीदारी, 7 मंत्रिस्तरीय प्रतिनिधिमंडलों सहित 13 अंतर्राष्ट्रीय प्रतिनिधिमंडल और 23 प्रदर्शक देश शामिल थे। सऊदी अरब और न्यूजीलैंड भागीदार देश थे, जबकि जापान, रूस, यूएई और वियतनाम इस आयोजन के फोकस देश थे।
- इसके अलावा, 2025 में आयोजित विश्व खाद्य भारत के चौथे संस्करण डब्ल्यूएफआई-2025 में 1,02,000 करोड़ रुपये से अधिक के समझौता ज्ञापनों पर हस्ताक्षर किए गए जो भारतीय खाद्य प्रसंस्करण क्षेत्र में अब तक की सबसे बड़ी निवेश प्रतिबद्धताओं में से एक है।
- भारतीय खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकरण (एफएसएसएआई) ने विश्व खाद्य भारत-2025 के अंतर्गत वैश्विक खाद्य नियामक शिखर सम्मेलन (जीएफआरएस)-2025 का आयोजन किया। वाणिज्य विभाग और उससे संबद्ध निकायों जैसे एपीईडीए, एमपीईडीए /वस्तु बोर्डों के सहयोग से इस आयोजन के एक भाग के रूप में रिवर्स बायर सेलर मीट (आरबीएसएम) का भी आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम में 74 देशों के 640 अंतरराष्ट्रीय खरीदारों ने भाग लिया।
- इस आयोजन के दौरान समानांतर रूप से आयोजित होने वाले कार्यक्रमों में ग्लोबल फूड रेगुलेटर्स समिट 2025, इंडिया इंटरनेशनल सीफूड शो, मधु मंडपम और इनक्रेडिबल शेफ चैलेंज शामिल हैं। इस आयोजन ने खाद्य प्रसंस्करण उद्योग में नवीनतम प्रगति को प्रदर्शित करने के लिए एक व्यापक मंच प्रदान किया।
- विश्व खाद्य भारत 2025 के अंतर्गत पीएमएफएमई योजना के तहत की गई गतिविधियां/उपलब्धियां
- विश्व खाद्य भारत 2025 के दौरान, प्रधानमंत्री ने 26,000 लाभार्थियों को 778 करोड़ रुपये की ऋण-आधारित सब्सिडी जारी की। प्रधानमंत्री ने पीएमएफएमई योजना के 4 लाभार्थियों से बातचीत भी की।
- खाद्य प्रसंस्करण उद्योग पवेलियन में पीएमएफएमई उत्पाद प्रदर्शन दीवार पर लगभग 250 उत्पाद प्रदर्शित किए गए थे, जिनमें पीएमएफएमई मार्केटप्लेस से जुड़े क्यूआर कोड शामिल थे। मोबाइल फोन और एक इंटरैक्टिव डिस्प्ले स्क्रीन के माध्यम से इन क्यूआर कोड तक पहुंच आसान थी, जिससे इच्छुक खरीदार उद्यम विवरण, लाभार्थियों के नाम, संपर्क जानकारी, उत्पाद विवरण और मूल्य देख सकते थे।
- इसमें 35 राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों के 726 जिलों के कृषि-उपभोक्ता संचालन (ओडीओपी) को दर्शाने वाला डिजिटल ओडीओपी मानचित्र प्रदर्शित किया गया है।
- इस कार्यक्रम में खाद्य प्रसंस्करण उद्योग (पीएमएफएमई) के लाभार्थियों ने 100 से अधिक स्टॉल लगाए, जिससे उन्हें अपने उत्पादों को प्रदर्शित करने का मंच मिला। खाद्य प्रसंस्करण उद्योग मंत्री ने पीएमएफएमई के स्टॉलों का दौरा किया और उद्यमियों से सीधे बातचीत की।
- खाद्य एवं खाद्य प्रौद्योगिकी मंत्रालय के पवेलियन में भारत के मानचित्र के एक इंटरैक्टिव डिस्प्ले के माध्यम से पीएमएफएमई योजना के लाभार्थियों की सफलता की लगभग 110 कहानियों के वीडियो प्रदर्शित किए गए।
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पीके/केसी/एके/एसवी
(रिलीज़ आईडी: 2212960)
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