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विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी मंत्रालय
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उद्योग-समर्थित परियोजनाओं के लिए रिसर्च डेवलपमेंट इनोवेशन (आरडीआई) फंडिंग इस माह के अंत तक शुरू होगी: डॉ. जितेंद्र सिंह


प्रौद्योगिकी विकास बोर्ड (टीडीबी) और जैवप्रौद्योगिकी उद्योग अनुसंधान सहायता परिषद (बीआईआरएसी) को आरडीआई फंड के तहत पहले सेकंड-लेवल फंड मैनेजर (एसएलएफएम) के तौर पर मंज़ूरी मिली है, यह निजी क्षेत्र के नेतृत्व वाले अनुसंधान एवं नवाचार को बढ़ावा देने के लिए 1 लाख करोड़ रुपये की लागत वाली पहल है

केंद्रीय विज्ञान और प्रौद्योगिकी मंत्री ने इनोवेशन फंडिंग और सुधारों की समीक्षा के लिए विज्ञान विभाग के सचिवों की बैठक की अध्यक्षता की

डॉ. जितेंद्र सिंह की अध्यक्षता में हुई समीक्षा बैठक में विज्ञान विभाग ने स्टार्टअप की थीमेटिक क्लस्टरिंग पर जोर दिया

प्रविष्टि तिथि: 19 JAN 2026 5:22PM by PIB Delhi

प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी द्वारा 3 नवंबर, 2025 को की गई घोषणा के बाद, उद्योग-समर्थित परियोजनाओं के लिए अनुसंधान विकास नवाचार यानी रिसर्च डेवलपमेंट इनोवेशन (आरडीआई) फंडिंग इस महीने के आखिर तक शुरू हो जाएगी। फंडिंग कार्यक्रम कार्यान्वयन के चरण में आ गया है, और सार्वजनिक क्षेत्र के दो संस्थान उद्योग-समर्थित परियोजनाओं की फंडिंग के लिए तैयार हैं।

केंद्रीय विज्ञान और प्रौद्योगिकी राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार); पृथ्वी विज्ञान और प्रधानमंत्री कार्यालय, परमाणु ऊर्जा विभाग, अंतरिक्ष विभाग, कार्मिक, लोक शिकायत और पेंशन राज्य मंत्री, डॉ. जितेंद्र सिंह की अध्यक्षता में हुई एक बैठक में अनुसंधान, विकास और नवाचार (आरडीआई) फंड योजना की समीक्षा के बाद यह बताया गया।

बैठक के दौरान, डॉ. जितेंद्र सिंह को अनुसंधान, विकास और नवाचार (आरडीआई) योजना की प्रगति के बारे में जानकारी दी गई, जिसे पिछले साल 1 जुलाई को केंद्रीय कैबिनेट ने मंज़ूरी दी थी और 3 नवंबर को प्रधानमंत्री द्वारा इसके कार्यान्वयन संबंधी दिशानिर्देशों, आवेदन आमंत्रित करने की सूचना और एक समर्पित डिजिटल पोर्टल के शुभारंभ के साथ औपचारिक रूप से शुरू किया गया था। अधिकारियों ने डॉ. जितेंद्र सिंह को बताया कि इस योजना का मकसद हाई-रिस्क, हाई-इम्पैक्ट रिसर्च को समर्थन करना और प्रयोगशालाओं, स्टार्टअप और उद्योग जगत के बीच संबंधों को मजबूत करना है।

विज्ञान और प्रौद्योगिकी विभाग (डीएसटी) ने प्रौद्योगिकी विकास बोर्ड यानी टेक्नोलॉजी डेवलपमेंट बोर्ड (टीडीबी) और जैवप्रौद्योगिकी उद्योग अनुसंधान सहायता परिषद यानी बायोटेक्नोलॉजी इंडस्ट्री रिसर्च असिस्टेंस काउंसिल (बीआईआरएसी) को अनुसंधान, विकास और नवाचार (आरडीआई) फंड के तहत पहले सेकंड-लेवल फंड मैनेजर (एसएलएफएम) के रूप में मंजूरी दी है, जो निजी क्षेत्र के नेतृत्व वाले अनुसंधान और नवाचार को बढ़ावा देने के लिए 1 लाख करोड़ रुपये की पहल है।

स्वीकृत कार्यान्वयन संरचना के तहत, टीडीबी सभी आरडीआई सनराइज और रणनीतिक क्षेत्रों में फैली परियोजनाओं के लिए सेकंड-लेवल फंड मैनेजर के तौर पर काम करेगा, जबकि बीआईआरएसी जैवप्रौद्योगिकी और उससे जुड़े क्षेत्रों में पहलों की देखरेख करेगा। उम्मीद है कि दोनों संगठन जनवरी 2026 के आखिर तक प्रस्ताव के लिए अपना पहला आह्वान जारी करेंगे, जिससे टीआरएल-4 से आगे बढ़ चुके नवाचार-संचालित कारोबार को आरडीआई फंड के संसाधन जल्दी मिल सकेंगे।

अन्य सेकंड लेवल फंड मैनेजर से आवेदन मिलने की आखिरी तारीख 31 जनवरी 2026 है। अन्य फंड मैनेजर अल्टरनेट इन्वेस्टमेंट फंड स्ट्रक्चर (एआईएफ), डेवलपमेंट फाइनेंस इंस्टीट्यूशंस (डीएफआई), नॉन-बैंकिंग फाइनेंस कॉर्पोरेशन (एनबीएफसी) और फोकस्ड रिसर्च ऑर्गनाइजेशन (एफआरओ) हो सकते हैं।

डॉ. जितेंद्र सिंह को बताया गया कि आरडीआई स्कीम के औपचारिक लॉन्च के बाद, विज्ञान और प्रौद्योगिकी विभाग (डीएसटी) को हितधारकों से कार्यान्वयन संबंधी मार्गनिर्देशों पर स्पष्टीकरण मांगने वाली बड़ी संख्या में सवाल मिले। इनकी जांच की गई और उनका जवाब दिया गया, जिसके बाद सेकंड लेवल फंड मैनेजर के लिए आवेदन लेने के लिए ऑनलाइन पोर्टल चालू किया गया। जैसा कि कैबिनेट नोट में बताया गया है, जैव प्रौद्योगिकी उद्योग अनुसंधान सहायता परिषद (बीआईआरएसी) और प्रौद्योगिकी विकास बोर्ड (टीडीबी) को इस भूमिका को निभाने के लिए नामांकन के आधार पर आमंत्रित किया गया था।

डॉ. जितेंद्र सिंह को यह भी बताया गया कि सचिवों के अधिकृत समूह ने 12 जनवरी को हुई अपनी बैठक में, अनुसंधान नेशनल रिसर्च फाउंडेशन (एएनआरएफ) की कार्यकारी परिषद के फैसले के अनुसार बीआईआरएसी और टीडीबी को सेकंड लेवल फंड मैनेजर के रूप में स्वीकृत किया। दोनों संगठनों को पहली तिमाही में 2,000 करोड़ रुपये मिलेंगे, जिससे स्कीम के तहत शुरुआती आवंटन 4,000 करोड़ रुपये हो जाएगा और उम्मीद है कि वे जनवरी के आखिर से पहले स्टार्टअप उद्यमों, कंपनियों और उद्योग से परियोजना प्रस्ताव के लिए आह्वान जारी करेंगे।

डॉ. जितेंद्र सिंह ने समीक्षा बैठक की अध्यक्षता करते हुए आरडीआई योजना को समय पर लागू करने और विज्ञान विभागों के बीच करीबी तालमेल की जरूरत पर जोर दिया। उन्होंने इस बात पर भी जोर दिया कि अनुसंधान और नवाचार के लिए सार्वजनिक वित्त पोषण का नतीजा उद्योग जगत और समाज के लिए मापन-योग्य होना चाहिए और पारदर्शिता तथा भागीदारी में आसानी सुनिश्चित करने के लिए, हितधारकों के फीडबैक के आधार पर लागू करने के दिशानिर्देशों में बदलाव सहित, प्रक्रियाओं को आसान बनाने के लिए उठाए जा रहे कदमों का जायजा लिया।

डॉ. जितेंद्र सिंह ने विज्ञान विभागों के बीच बेहतर तालमेल और आरडीआई योजना सहित प्रमुख पहलों को समय पर लागू करने की जरूरत पर जोर दिया। उन्होंने इस बात पर भी बल दिया कि अनुसंधान में सार्वजनिक निवेश का नतीजा उद्योग जगत और समाज के लिए ठोस होना चाहिए, और राष्ट्रीय विकास की प्राथमिकताओं के साथ मेल खाना चाहिए। डॉ. सिंह ने पारदर्शिता और भागीदारी में आसानी सुनिश्चित करने के लिए हितधारकों के फीडबैक के आधार पर लागू करने के दिशानिर्देशों में बदलाव सहित, प्रक्रियाओं को आसान बनाने के लिए उठाए जा रहे उपायों की भी समीक्षा की।

चर्चा के दौरान, डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि अनुसंधान और विकास में निजी क्षेत्र की भागीदारी को मजबूत करना आरडीआई फ्रेमवर्क का एक मुख्य उद्देश्य बना हुआ है। उन्होंने कहा कि इस योजना का मकसद ट्रांसलेशनल रिसर्च को समर्थन करना और पब्लिक रिसर्च संस्थानों, स्टार्टअप और उद्योग जगत के बीच मजबूत संबंध बनाना है, जिससे वैज्ञानिक नतीजे अधिक प्रभावी ढंग से वाणिज्यिक और सामाजिक उपयोग की ओर बढ़ सकें।

इस बैठक में विज्ञान मंत्रालयों और विभागों के सचिवों तथा वरिष्ठ अधिकारियों ने भाग लिया। यह कार्यवाही भारत सरकार के प्रधान वैज्ञानिक सलाहकार प्रो. अजय के. सूद के स्वागत भाषण से शुरू हुई, जिसके बाद केंद्रीय मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने प्रारंभिक भाषण दिया।

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पीके/केसी/एसकेएस/एसके


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