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खाद्य प्रसंस्करण उद्योग मंत्रालय
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खाद्य प्रसंस्करण मंत्रालय के चिंतन शिविर ने प्रतिस्पर्धी, समावेशी और वैश्विक स्तर पर एकीकृत खाद्य प्रसंस्करण सेक्टर के लिए कार्यनीतिक रूपरेखा तैयार की

प्रविष्टि तिथि: 20 JAN 2026 2:18PM by PIB Delhi

भारत सरकार के खाद्य प्रसंस्करण उद्योग मंत्रालय ने खाद्य प्रसंस्करण उद्योग मंत्री की अध्यक्षता में राजस्थान के उदयपुर में दो दिवसीय चिंतन शिविर का आयोजन किया। इस शिविर में 22 केंद्रीय मंत्रालयों, 27 राज्य सरकारों और केंद्र शासित प्रदेशों के वरिष्ठ प्रतिनिधियों, 30 से अधिक उद्योग सदस्यों, शैक्षणिक संस्थानों, एनआईएफटीईएम और इन्वेस्ट इंडिया के प्रतिनिधियों ने भाग लिया। यह शिविर नीतिगत सुधारों, नवोन्मेषण, मूल्य श्रृंखला एकीकरण और सहयोगात्मक कार्रवाई के माध्यम से भारत के खाद्य प्रसंस्करण इको-सिस्टम को सुदृढ़ करने के सरकार और उद्योग जगत के समग्र विजन को दर्शाता है। विचार-विमर्श में खाद्य प्रसंस्करण उद्योग सचिव, विशेष सचिव और मंत्रालय के अन्य वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे। शिविर में उत्तर प्रदेश और महाराष्ट्र के अतिरिक्त मुख्य सचिवों, आंध्र प्रदेश और पंजाब के प्रधान सचिवों सहित अन्य वरिष्ठ राज्य और केंद्र शासित प्रदेशों के अधिकारियों ने भी सक्रिय रूप से भाग लिया। वाणिज्य विभाग के वरिष्ठ आर्थिक सलाहकार और कृषि एवं किसान कल्याण विभाग के संयुक्त सचिव सहित प्रमुख केंद्रीय मंत्रालयों और विभागों के वरिष्ठ अधिकारियों ने भी चर्चाओं में सक्रिय रूप से भाग लिया और सार्थक एवं परिणामोन्मुखी विचार-विमर्श में योगदान दिया।

 

उद्घाटन सत्र: आधुनिक खाद्य प्रसंस्करण इको-सिस्टम के लिए विजन

केंद्रीय खाद्य प्रसंस्करण उद्योग मंत्री श्री चिराग पासवान ने चिंतन शिविर का उद्घाटन करते हुए आधुनिक, प्रतिस्पर्धी और समावेशी खाद्य प्रसंस्करण क्षेत्र के निर्माण के लिए सरकार की दृढ़ प्रतिबद्धता पर बल दिया, जो किसानों की आय में वृद्धि करे, फसल कटाई के बाद होने वाले नुकसान को कम करे, मूल्यवर्धन को बढ़ावा दे, खाद्य सुरक्षा और पोषण को मजबूत करे और व्यापक स्तर पर- विशेष रूप से युवाओं और महिलाओं के लिए रोजगार सृजित करे।

 

 

श्री पासवान ने कृषि-मूल्य श्रृंखलाओं को सुदढ़ करने, भारत के निर्यात विस्तार को बढ़ाने और राष्ट्रीय विकास प्राथमिकताओं के अनुरूप उच्च गुणवत्ता वाले, मूल्यवर्धित और टिकाऊ खाद्य उत्पादों के एक विश्वसनीय वैश्विक आपूर्तिकर्ता के रूप में देश की स्थिति को सुदृढ़ करने के लिए खाद्य प्रसंस्करण को एक महत्वपूर्ण स्तंभ के रूप में रेखांकित किया।

इस अवसर पर, खाद्य प्रसंस्करण में प्रौद्योगिकीय प्रगति और स्टार्ट-अप ग्रांट चैलेंज के विजेताओं की सफलता गाथाओं को प्रदर्शित करने वाले विशेष लेख जारी किए गए, जो नवोन्मेषण और उद्यमिता पर मंत्रालय के फोकस को सुदृढ़ करते हैं।

 

 

समूह विचार-विमर्श: प्रमुख चुनौतियां और कार्यनीतिक अनुशंसाएं

चिंतन शिविर में छह विषयगत समूहों में गहन और सुनियोजित विचार-मंथन सत्र आयोजित किए गए, जिनमें से प्रत्येक समूह भारत के खाद्य प्रसंस्करण इको-सिस्टम के महत्वपूर्ण आयामों पर केंद्रित था। इन विषयों में लक्षित क्षेत्रीय उपायों के माध्यम से अगले पांच वर्षों में भारत में खाद्य प्रसंस्करण के स्तर को दोगुना करने की कार्यनीति; प्रसंस्कृत खाद्य पदार्थों के निर्यात को बढ़ाना और वैश्विक मंच पर भारत की मजबूत स्थिति स्थापित करना; न्यूट्रास्यूटिकल्स, खाद्य सुदृढ़ीकरण, पौधों पर आधारित प्रोटीन युक्त उत्पाद और मादक पेय जैसे उच्च विकास वाले क्षेत्रों की योजना और विकास; मजबूत नियामक और प्रवर्तन तंत्रों के माध्यम से खाद्य सुरक्षा और गुणवत्ता को बढ़ावा देना; खेत से लेकर थाली तक कृषि-खाद्य मूल्य श्रृंखलाओं को सुदृढ़ करना; और साक्ष्य-आधारित चर्चा के माध्यम से पोषण, स्वास्थ्य और खाद्य सुरक्षा के संदर्भ में प्रसंस्कृत खाद्य पदार्थों से संबंधित मिथकों और चुनौती धारणाओं को दूर करना शामिल था।

 

 

इन सभी विषयों पर समूहों ने व्यावहारिक और परिणामोन्मुखी अनुशंसाओं का एक समूह प्रस्तुत किया। प्रमुख प्रस्तावों में कृषि स्तर पर एकीकरण और लघु एवं मध्यम उद्यमों (एमएसएमई) की भागीदारी को मजबूत करना, आधुनिक प्रसंस्करण क्षमता, कोल्ड-चेन और लॉजिस्टिक्स अवसंरचना का विस्तार करना और प्रसंस्करण स्तर को बढ़ाने के लिए गुणवत्ता और सुरक्षा मानकों में सुधार करना शामिल था। निर्यात बढ़ाने के लिए निर्यात-उन्मुख अवसंरचना, व्यापार समझौतों के माध्यम से बेहतर बाजार पहुंच, 'ब्रांड इंडिया' को बढ़ावा देना, बाजार संबंधी जानकारी और नियामक सहायता के लिए एक एकीकृत डिजिटल प्लेटफॉर्म विकसित करना और पाक कला संबंधित कूटनीति (गैस्ट्रो-डिप्लोमेसी) का लाभ उठाना जैसे पहलुओं पर बल दिया गया। राष्ट्रीय खाद्य प्रसंस्करण संवर्धन परिषद की स्थापना, भारत गुणवत्ता खाद्य चिह्न की शुरुआत, नवोन्मेषण समूहों और डिजिटल ट्रेसिबिलिटी प्लेटफॉर्म का विकास तथा न्यूट्रास्यूटिकल्स, पादप-आधारित प्रोटीन और मादक पेय पदार्थों के लिए समर्पित सहायता जैसे संस्थागत सुधारों की भी अनुशंसा की गई। इसके अतिरिक्त, समूहों ने विज्ञान और जोखिम-आधारित खाद्य सुरक्षा विनियमन, एआई-सक्षम निगरानी और त्वरित परीक्षण प्रणालियों; योजनाओं के संयोजन, मूल्य-श्रृंखला वित्तपोषण और किसान क्षमता निर्माण के साथ क्लस्टर-आधारित कृषि-खाद्य प्रसंस्करण केंद्रों; खाद्य प्रसंस्करण मशीनरी के स्वदेशी निर्माण के लिए सहायता और समग्र ट्रेसिबिलिटी पर बल दिया। पोषण और खाद्य सुरक्षा संबंधी चिंताओं को दूर करने के लिए, अनुशंसाओं में प्रसंस्कृत खाद्य पदार्थों के बारे में मिथकों को दूर करने के लिए वैज्ञानिक संचार, जन जागरूकता पहल, स्कूली पाठ्यक्रम में खाद्य विज्ञान शिक्षा का समावेश, अनुसंधान सहायता, भारतीय खाद्य प्रवृत्तियों के अनुरूप साक्ष्य-आधारित पोषण संबंधी दिशानिर्देश और नवोन्मेषण, स्टार्टअप और अनुसंधान एवं विकास संचालित खाद्य उत्पादों को बढ़ावा देने के लिए सुव्यवस्थित नियामक ढांचे पर बल दिया गया।

 

 

राज्य की सर्वोत्तम कार्यप्रणालियां: समग्र क्षेत्रीय विकास को बढ़ावा

चिंतन शिविर में राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों की सशक्त और सार्थक भागीदारी देखी गई, जिन्होंने खाद्य प्रसंस्करण क्षेत्र के समग्र विकास के उद्देश्य से सर्वोत्तम कार्य प्रणालियों और नीतिगत नवोन्मेषणों को साझा किया। उत्तर प्रदेश ने आकर्षक योजनाओं और प्रोत्साहनों, खाद्य पार्कों के विकास, एक सुदृढ़ एकल-खिड़की निकासी प्रणाली और व्यापक स्तर पर इकाइयों की स्थापना को सुगम बनाकर अपनी खाद्य प्रसंस्करण क्षमता को दोगुना करने के लिए एक व्यापक रूपरेखा प्रस्तुत की। महाराष्ट्र ने पीएमएफएमई योजना के तहत अपने नेतृत्व, क्षेत्रीय विकास के लिए राज्य-विशिष्ट पहलों, फोर्टिफाइड खाद्य पदार्थों को बढ़ावा देने, महिला-केन्द्रित उद्यमों को प्रोत्साहन देने और मजबूत संस्थागत सहायता तंत्रों को रेखांकित किया। आंध्र प्रदेश ने राज्य प्रोत्साहनों और पीएमकेएसवाई तथा पीएमएफएमई जैसी केंद्रीय योजनाओं के माध्यम से समर्थित सफल क्लस्टर-आधारित मूल्य-श्रृंखला युक्तियों का प्रदर्शन किया, जिसमें कॉफी, कोको और मत्स्य पालन में उल्लेखनीय परिणाम प्राप्त हुए।

अन्य राज्यों ने भी सुधार, प्रतिस्पर्धा और निर्यात अनुकूलन के अनुरूप प्रभावशाली पहलें प्रस्तुत कीं। छत्तीसगढ़ ने सुधार-आधारित शासन, मूल्य-श्रृंखला विकास, व्यापार करने में सुगमता और निर्यात-उन्मुख विकास पर बल दिया, जबकि मध्य प्रदेश ने प्रतिस्पर्धी प्रोत्साहनों और एकीकृत प्रसंस्करण समूहों के माध्यम से खाद्य प्रसंस्करण और कृषि निर्यात के उभरते केंद्र के रूप में अपनी पहचान बनाई। उत्तराखंड ने अपने बागवानी-आधारित विकास मॉडल को साझा किया, जिसमें उच्च सब्सिडी सहायता, परिवार कल्याण संगठन (एफपीओ) द्वारा संचालित प्रसंस्करण पहल और शीघ्र नष्ट होने वाली वस्तुओं के प्रति केंद्रित दृष्टिकोण पर प्रकाश डाला गया। इसके अतिरिक्त, बिहार, अंडमान और निकोबार द्वीप समूह और तेलंगाना सहित राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों ने क्षेत्र-विशिष्ट अंतर्दृष्टि और सुझाव दिए, जिससे अंतर-राज्यीय ज्ञानवर्धन में योगदान और चिंतन शिविर की सहयोगात्मक भावना को बल मिला।

खाद्य प्रसंस्करण उद्योग मंत्री ने चिंतन शिविर के अवसर पर राजस्थान के उदयपुर स्थित कृषि उपज मंडी समिति (केयूएमएस) में कॉमन इन्क्यूबेशन सुविधा केन्द्र का उद्घाटन किया। इसका उद्देश्य मसालों के साथ-साथ सीताफल, जामुन, आंवला और एलोवेरा जैसे लघु वन उत्पादों का प्रसंस्करण करना है। खाद्य प्रसंस्करण मंत्रालय की पीएमएफएमई योजना के तहत विकसित इस सुविधा केन्द्र से मूल्यवर्धन को बढ़ावा मिलेगा, स्थानीय उद्यमियों को सहायता मिलेगी और क्षेत्रीय कृषि एवं वन उत्पादों के सतत उपयोग को प्रोत्साहित किया जाएगा, जिससे क्षेत्र में समावेशी विकास और आजीविका सृजन में योगदान मिलेगा।

 

भावी परिदृश्य

खाद्य प्रसंस्करण उद्योग मंत्री ने चिंतन शिविर के समापन पर व्यावहारिक, दूरदर्शी और कार्यान्वयन योग्य अनुशंसाओं तक पहुंचने के लिए सभी प्रतिभागियों के सामूहिक प्रयासों की सराहना की। उन्होंने हितधारकों को सहयोग देने और महत्वपूर्ण कमियों को दूर करने तथा सेक्टर-वार विकास को गति देने के लिए सभी आवश्यक सहायता प्रदान करने की मंत्रालय की तत्परता को दोहराया।

श्री पासवान ने सभी हितधारकों से समयबद्ध तरीके से अनुशंसाओं के कार्यान्वयन की दिशा में सहयोगात्मक रूप से काम करने का आग्रह किया। उन्होंने इस बात पर बल दिया कि केंद्र, राज्यों, उद्योग और संस्थानों के बीच निरंतर समन्वय भारत की खाद्य प्रसंस्करण में वैश्विक रूप से अग्रणी देश बनने की महत्वाकांक्षा को साकार करने की कुंजी होगी।

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पीके/केसी/एसकेजे/एसवी


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