मत्स्यपालन, पशुपालन और डेयरी मंत्रालय
पशुपालन अवसंरचना विकास निधि
प्रविष्टि तिथि:
03 FEB 2026 8:34PM by PIB Delhi
पशुपालन और डेयरी विभाग आधुनिक डेयरी अवसंरचना जैसे दुग्ध प्रसंस्करण संयंत्र, शीतलन इकाइयों, मूल्यवर्धित उत्पाद सुविधाओं और लॉजिस्टिक्स (logistics) को बढ़ावा देने के लिए पशुपालन अवसंरचना विकास निधि (AHIDF) कार्यान्वित कर रहा है। साथ ही, यह निजी क्षेत्र के भागीदारों, FPOs और सहकारी समितियों को डेयरी प्रसंस्करण में निवेश करने के लिए प्रोत्साहित कर रहा है। यह योजना डेयरी पारिस्थितिकी तंत्र के समग्र विकास को सुनिश्चित करने के लिए केंद्र और राज्य सरकार की विभिन्न पहलों के साथ समन्वय स्थापित करने में भी सहायक है। यह योजना दो वर्ष के अधिस्थगन (moratorium) के साथ आठ वर्षों के लिए 3% ब्याज सबवेंशन, अनुसूचित बैंकों और NABARD, NCDC,NDDB और SIDBI जैसे संस्थानों से परियोजना लागत के 90% तक को कवर करने वाले सावधि ऋण और ऋण राशि पर बिना सीमा सहित कई प्रमुख लाभ प्रदान करती है। नाबार्ड की सहायक कंपनी NABसंरक्षण ट्रस्टी प्राइवेट लिमिटेड के माध्यम से MSME परियोजनाओं के लिए सावधि ऋणों पर 25% क्रेडिट गारंटी शामिल हैं।
अब तक, देशभर में 237.87 लाख लीटर प्रति दिन (LLPD) की कुल प्रसंस्करण क्षमता वाली कुल 157 डेयरी परियोजनाओं को अनुमोदन दिया गया है, जिनकी अनुमोदित परियोजना लागत 10480.30 करोड़ रुपये है।
राजस्थान राज्य में 12.88 लाख लीटर प्रति दिन (LLPD) की प्रसंस्करण क्षमता वाली कुल 10 डेयरी परियोजनाओं को अनुमोदन दिया गया है, जिनकी परियोजना लागत 138.91 करोड़ रुपये हैं।
(ख) देश में घरेलू डेयरी उद्योग को सुदृढ़ करने के लिए आत्मनिर्भर भारत अभियान के अंतर्गत पशुपालन अवसंरचना विकास निधि (AHIDF) और पशुधन स्वास्थ्य एवं रोग नियंत्रण कार्यक्रम (LHDCP) नामक दो योजनाएं कार्यान्वित की जा रही हैं।
AHIDF योजना के बारे में
AHIDF योजना के अंतर्गत, विभाग 7 क्षेत्रों में अवसंरचना निर्माण में सहायता प्रदान करता है, जिनमें निम्नलिखित शामिल हैं:
i. डेयरी प्रसंस्करण और मूल्यवर्धन अवसंरचना,
ii. मांस प्रसंस्करण और मूल्यवर्धन अवसंरचना,
iii. पशु आहार संयंत्र,
iv. नस्ल सुधार तकनीकी और नस्ल वृद्धि फार्म,
v. पशु चिकित्सा टीका और औषधि निर्माण सुविधाओं की स्थापना,
vi. पशु अपशिष्ट से संपत्ति प्रबंधन (कृषि अपशिष्ट प्रबंधन), और
vii. देश भर में प्राथमिक ऊन प्रसंस्करण।
इसके अलावा, AHIDF के अंतर्गत, ऋण वितरण प्रणाली को सुदृढ़ करने और डेयरी क्षेत्र में कार्यरत सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यमों (MSMEs) को बिना किसी संपार्श्विक सुरक्षा के झंझट के सुचारू रूप से ऋण प्रवाह को सुगम बनाने के लिए ऋण गारंटी लाभ प्रदान किया जा रहा है। यह डेयरी क्षेत्र के लिए वित्त हेतु आसान पहुंच प्रदान करता है, जिससे मुख्य रूप से पहली पीढ़ी के डेयरी उद्यमियों और समाज के वंचित वर्ग को ऋणदाताओं से वित्तीय सहायता उपलब्ध हो पाती है, जिनके पास अपने उद्यमों को सहारा देने के लिए संपार्श्विक सुरक्षा का अभाव होता है।
यह योजना पशुधन की आनुवंशिक क्षमता को बढ़ाने वाली नस्ल-वृद्धि पहलों को बढ़ावा देकर डेयरी क्षेत्र को महत्वपूर्ण रूप से सुदृढ़ कर रही है, इससे दूध उत्पादन में वृद्धि होती है। यह गोपशु आहार उत्पादन इकाइयों और औषधि तथा टीका निर्माण सुविधाओं की स्थापना में भी सहयोग करती है, जिससे किफायती, उच्च गुणवत्ता वाले पोषण और पशु चिकित्सा संबंधी इनपुट तक पहुंच में सुधार होता है। ये सभी प्रयास मिलकर पशु स्वास्थ्य प्रबंधन को बेहतर बनाने और पशुओं की पूरी आबादी में दूध उत्पादन में निरंतर सुधार लाने में योगदान करते हैं।
नए दूध प्रसंस्करण संयंत्रों में निवेश को प्रोत्साहित करके, यह योजना इस क्षेत्र की प्रसंस्करण क्षमता का विस्तार कर रही है, जिससे उच्च गुणवत्ता वाले प्रसंस्कृत दूध और मूल्यवर्धित दुग्ध उत्पादों का उत्पादन संभव हो रहा है। इससे न केवल दूध मूल्य श्रृंखला की दक्षता बढ़ती है, बल्कि पशुपालकों के लिए स्थिर आय के अवसर भी सृजित होते हैं। श्रेष्ठ पशुधन के प्रजनन पर ध्यान केंद्रित करने से समग्र आनुवंशिक भंडार में और सुधार होता है, जिससे दूध उत्पादन में वृद्धि और दीर्घकालिक उत्पादकता लाभ प्राप्त होते हैं।
इसके अतिरिक्त, यह योजना पशु अपशिष्ट को बायोगैस/CNG और जैव उर्वरकों में परिवर्तित करने वाली परियोजनाओं का समर्थन करके सतत अपशिष्ट-से-संपत्ति पहलों को बढ़ावा देती है, जिससे इस क्षेत्र में चक्रीय (Circular) अर्थव्यवस्था प्रथाओं को आगे बढ़ाया जा रहा है।
अब तक AHIDF योजना के अंतर्गत कुल 237.86 LLPD की प्रसंस्करण क्षमता सृजित की गई है, जिसमें से 12.88 LLPD राजस्थान में है।
पशुधन स्वास्थ्य और रोग नियंत्रण कार्यक्रम (LHDCP)
विभाग केंद्रीय क्षेत्र योजना, पशुधन स्वास्थ्य और रोग नियंत्रण कार्यक्रम (LHDCP) के कार्यान्वयन के माध्यम से सभी राज्यों/संघ राज्य क्षेत्रों की पशुधन उत्पादकता बढ़ाने और पशुधन स्वास्थ्य देखभाल को सुदृढ़ करने में सहायता प्रदान कर रहा है, इस कार्यक्रम का उद्देश्य पशुओं के रोगों के प्रति रोगनिरोधी टीकाकरण, पशु चिकित्सा सेवाओं की क्षमता का निर्माण, रोग निगरानी, प्रशिक्षण एवं जागरूकता, पशु चिकित्सा अवसंरचना को सुदृढ़ करने आदि के माध्यम से पशु स्वास्थ्य के जोखिम को कम करना है।
LHDCP परियोजना निम्नलिखित क्षेत्रों में राज्यों को सहायता प्रदान करती है:
i. 100% केंद्रीय सहायता के अंतर्गत खुरपका और मुंहपका रोग (FMD), ब्रुसेलोसिस, पेस्ट डेस पेटिट्स रूमिनेंट्स (PPR) और क्लासिकल स्वाइन ज्वर (CSF) के लिए टीकाकरण।
ii. अच्छी पशुपालन पद्धतियों और पशुचिकित्सा देखभाल पर जागरुकता प्रशिक्षण और प्रचार के लिए राज्यों/संघ राज्य क्षेत्रों को 100% वित्तीय सहायता सहित राज्य स्तर पर प्राथमिकता प्राप्त पशु रोगों के लिए राज्यों को पशुरोग नियंत्रण के लिए सहायता (ASCAD)
iii. पशु चिकित्सा अस्पतालों और औषधालयों की स्थापना और सुदृढ़ीकरण (ESVHD-MVU) उप-घटक के अंतर्गत, किसानों के घर द्वार तक पशु चिकित्सा स्वास्थ्य सेवाएँ पहुँचाने के लिए मोबाइल पशु चिकित्सा इकाइयों (MVU) की खरीद और अनुकूलन के लिए आवर्ती परिचालन व्यय सहित 100% वित्तीय सहायता प्रदान की जाती है।
iv. इसके अतिरिक्त, LHDCP में पशु औषधि का एक नया घटक में शामिल किया गया है ताकि प्रधानमंत्री किसान समृद्धि केंद्रों (PM-KSK) और सहकारी समितियों के माध्यम से डेयरी किसानों को किफायती मूल्य पर गुणवत्तापूर्ण जेनोरिक पशु चिकित्सा औषधियां उपलब्ध कराई जा सकें।
(ग) राष्ट्रीय गोकुल मिशन (RGM) और राष्ट्रीय डेयरी विकास कार्यक्रम (NPDD) के विवरण नीचे दिए गए हैं:
राष्ट्रीय गोकुल मिशन (RGM)
विभाग निम्नलिखित लक्ष्यों और उद्देश्यों के साथ राष्ट्रीय गोकुल मिशन (RGM) का कार्यान्वयन कर रहा है:
i. उन्नत तकनीकों का उपयोग करके सतत तरीके से बोवाइनों की उत्पादकता बढ़ाना और दूध उत्पादन में वृद्धि करना।
ii. प्रजनन उद्देश्यों के लिए उच्च आनुवंशिक गुणवत्ता वाले सांडों के उपयोग को बढ़ावा देना।
iii. किसानों के घर द्वार तक प्रजनन नेटवर्क को सुदृढ़ करके और कृत्रिम गर्भाधान सेवाएं पहुंचाने के माध्यम से कृत्रिम गर्भाधान कवरेज को बढ़ाना।
iv. वैज्ञानिक और समग्र तरीके से देशी गोपशु और भैंस पालन और संरक्षण को बढ़ावा देना।
देशी नस्लों के विकास और संरक्षण तथा बोवाइन आबादी के आनुवंशिक उन्नयन के लिए RGM के अंतर्गत निम्नलिखित कदम उठाए जा रहे हैं:
i. देशी नस्लों के सांडों सहित उच्च गुणवत्ता वाले सांडों के सीमन का उपयोग करते हुए राष्ट्रव्यापी कृत्रिम गर्भाधान कार्यक्रम (NAIP) का कार्यान्वयन। इस कार्यक्रम के अंतर्गत, 50% से कम कृत्रिम गर्भाधान कवरेज वाले जिलों में किसानों के घर द्वार पर ही कृत्रिम गर्भाधान (AI) सेवाएं निःशुल्क प्रदान की जाती हैं।
ii. पशुपालन और डेयरी विभाग ने सेक्स-सॉर्टेड सीमन उत्पादन सुविधाएं स्थापित की हैं और सेक्स-सॉर्टेड सीमन का उपयोग करते हुए त्वरित नस्ल सुधार कार्यक्रम को कार्यान्वित कर रहा है, जिसका उद्देश्य 90% तक सटीकता के साथ बछड़ियों का उत्पादन करना है, जिससे दुधारू गोपशुओं की संख्या में वृद्धि, नस्ल सुधार और किसानों की आय में वृद्धि हो सके।
iii. उच्च आनुवंशिक गुणता वाले सांडों के उत्पादन के लिए संतति परीक्षण और वंशावली चयन का कार्यान्वयन।
iv. इन-विट्रो फर्टिलाइजेशन (IVF) तकनीक का कार्यान्वयन: यह तकनीक एक ही पीढ़ी में गोपशुओं की आनुवंशिक स्थिति में सुधार लाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। इसके अलावा, किसानों को उचित दरों पर तकनीक उपलब्ध कराने के लिए सरकार ने देशी IVF मीडिया प्रारंभ की है।
v. जीनोमिक चयन: उच्च आनुवंशिक गुणवाले पशुओं का चयन करने और गोपशुओं और भैंसों के आनुवंशिक सुधार में तेजी लाने के लिए, विभाग ने देशी गोपशुओं के लिए गौ चिप और देशी भैंसों के लिए महिष चिप नामक एकीकृत जीनोमिक चिप्स विकसित किए हैं, ये विशेष रूप से देश में उच्च आनुवंशिक गुणवाले पशुओं के जीनोमिक चयन को शुरू करने के लिए डिज़ाइन किए गए हैं।
vi. ग्रामीण भारत में सामुदायिक संसाधन व्यक्तियों/बहुउद्देशीय कृत्रिम गर्भाधान तकनीशियनों (MAITRIs) को किसानों के द्वार पर ही गुणवत्तापूर्ण कृत्रिम गर्भाधान सेवाएं प्रदान करने के लिए प्रशिक्षित और सुसज्जित किया गया है।
राष्ट्रीय डेयरी विकास कार्यक्रम (NPDD)
पशुपालन और डेयरी विभाग (DAHD) वर्ष 2014-15 से राजस्थान सहित पूरे देश में केंद्रीय क्षेत्र योजना - "राष्ट्रीय डेयरी विकास कार्यक्रम (NPDD)" कार्यान्वित कर रहा है, जिसका उद्देश्य दूध और दूध उत्पादों की गुणवत्ता में सुधार करना और संगठित खरीद, प्रसंस्करण, मूल्यवर्धन और विपणन में हिस्सेदारी बढ़ाना है। इस योजना को जुलाई 2021 में पुनर्गठित/पुनर्संरेखित किया गया था ताकि इसे वर्ष 2021-22 से वर्ष 2025-26 तक निम्नलिखित दो घटकों के साथ कार्यान्वित किया जा सके:
I. NPDD का घटक 'क' राज्य सहकारी दूधपरिसंघों/जिला सहकारी दूग्ध उत्पादक संघों/SHG /दूध उत्पादक कंपनियों/किसान उत्पादक संगठनों के लिए प्राथमिक शीतलन सुविधाओं के साथ-साथ गुणवत्तापूर्ण दूध परीक्षण उपकरण और लिए अवसंरचना के निर्माण/सुदृढ़ीकरण पर केंद्रित है।
II. NPDD योजना के घटक 'ख' "सहकारिताओं के माध्यम से डेयरी" नामक JICA समर्थित परियोजना का उद्देश्य किसानों की संगठित बाजार तक पहुंच बढ़ाकर, डेयरी प्रसंस्करण सुविधाओं और विपणन अवसंरचना का उन्नयन और उत्पादक स्वामित्व वाली संस्थाओं की क्षमता बढ़ाकर दूध और डेयरी उत्पादों की बिक्री बढ़ाना है।
NPDD के घटक ‘क’ के अंतर्गत प्रगति
NPDD योजना के घटक ‘क’के अंतर्गत, राजस्थान में 34 परियोजनाओं को अनुमोदन दिया गया है, जिनकी कुल परियोजना लागत 39748.64 लाख रुपये है, जिसमें केंद्रीय हिस्सा 27408.77 लाख रुपये है। इसमें से अब तक 21979.62 लाख रुपये जारी किए जा चुके हैं। इन परियोजनाओं का कार्यान्वयन राजस्थान सहकारी डेयरी परिसंघ द्वारा किया जा रहा है।
राजस्थान में घटक क के अंतर्गत वास्तविक उपलब्धि
|
घटक
|
समेकित परियोजना लक्ष्य
|
उपलब्धि
|
|
दूध प्रसंस्करण क्षमता (TLPD)
|
440.0
|
440.0
|
|
डेयरी सहकारी समिति (संख्या)
|
6432
|
2247
|
|
दूध उत्पादक सदस्य (‘000)
|
227.316
|
122.988
|
|
औसत दैनिक दूध खरीद (TLPD)
|
2470.45
|
599.97
|
|
औसत दैनिक दूध विपणन (TLPD)
|
801.30
|
494.39
|
|
बल्क मिल्क कूलर
|
संख्या
|
1375
|
1037
|
|
क्षमता (TLPD)
|
1659.00
|
1275.50
|
|
डेयरी संयंत्र स्तर की प्रयोगशालाओं का सुदृढ़ीकरण (संख्या)
|
22
|
17
|
|
स्वचालित दूध संग्रहण इकाई/दूध एनालाईजर सहित डेटा प्रसंस्करण इकाई की स्थापना (संख्या)
|
3452
|
3045
|
|
इलेक्ट्रॉनिक दूध मिलावट परीक्षण मशीन की संस्थापना (संख्या)
|
2469
|
2245
|
|
राज्य केंद्रीय प्रयोगशाला की स्थापना
|
1
|
1
|
घटक ख के अंतर्गत प्रगति
घटक ख नामक योजना के अंतर्गतकुल 13 जिले शामिल किए गए हैं।ये जिले हैं, अलवर,भरतपुर, भीलवाड़ा, चुरू, दौसा, डूंगरपुर, जयपुर, जालौर, झुंझुनू, पाली, सिरोही, उदयपुर और कोटा । राजस्थान में कुल 8 परियोजनाओं को अनुमोदन दिया गया है, जिनका कुल अनुमोदित बजट 354.20 करोड़ रुपये है। इसमें से 242.33 करोड़ रुपये ऋण के लिए, 80.86 करोड़ रुपये अनुदान के लिए और शेष निधियांपीआई (PI) का योगदान है।
राजस्थान में 952 DCS समितियों के सुद्दढ़ीकरण के साथ लगभग1598 नई डेयरी सहकारी समितियों का गठन किया गया है। 50 दूध टैंकरों के साथ 52 KL की शीतलन क्षमता के साथकुल 52 BMC स्थापित की गई हैं। पंजीकृत किए गए लगभग 88099 किसानों में से 70208 महिलाएं हैं। लगभग 33 MTPD VAP उत्पादन सुविधा, 500 MTPD वालागोपशु आहार संयंत्र, 50MTPD बाईपास प्रोटीन और12 MTPD खनिज मिश्रण प्रसंस्करण क्षमता स्थापित की गई है। उत्पादकता संवर्धन के अंतर्गत, 100 गांवों को बछड़े-बछड़ी पालन कार्यक्रम के अंतर्गत, 764 गांवों को पशु पोषण परामर्शी के अंतर्गत और 40 गांवों को चारा विकास कार्यक्रम के अंतर्गत कवर किया गया है। परियोजना के अंतर्गत लगभग 88,738 किसानों को प्रशिक्षित किया गया है।
यह जानकारी आज लोकसभा में मत्स्यपालन, पशुपालन और डेयरी मंत्री,भारत सरकार श्री राजीव रंजन सिंह उर्फ ललन सिंह ने प्रश्न के उत्तर में दी।
JP
(रिलीज़ आईडी: 2222836)
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