रक्षा मंत्रालय
भारत अपने पड़ोसियों के कल्याण के लिए प्रतिबद्ध है: रक्षा राज्य मंत्री
प्रविष्टि तिथि:
11 MAR 2026 7:54PM by PIB Delhi
रक्षा राज्य मंत्री श्री संजय सेठ ने आज कहा कि भारत अपने पड़ोसियों के कल्याण के लिए प्रतिबद्ध है, जबकि आतंकवाद के प्रति 'शून्य-सहिष्णुता' की नीति पर दृढ़ है। उन्होंने 11 मार्च, 2026 को नई दिल्ली में मुख्यालय एकीकृत रक्षा स्टाफ (एचक्यू आईडीएस) द्वारा आयोजित "भारत के पड़ोस में बदलती गतिशीलता" विषय पर राष्ट्रीय सेमिनार में मुख्य भाषण में यह बात कही। यह सेमिनार एचक्यू आईडीएस की 25वीं वर्षगांठ के उपलक्ष्य में आयोजित गतिविधियों का हिस्सा था।
उन्होंने भारत की सभ्यतागत भावना - 'वसुधैव कुटुंबकम' - का आह्वान किया, और यह दोहराया कि यह भगवान कृष्ण और छत्रपति शिवाजी की भूमि है, जहाँ करुणा और निर्णायक शक्ति का अद्भुत मेल है। श्री संजय सेठ ने इसअवसर पर 'ऑपरेशन सिंदूर' का विशेष उल्लेख किया। यह ऐतिहासिक सैन्य अभियान था जिसने पहलगाम आतंकी हमले के बाद राष्ट्र के दृढ़ संकल्प को प्रदर्शित किया। उन्होंने यह भी कहा कि 1947 के बाद हुए पिछले सभी युद्धों के विपरीत, 'ऑपरेशन सिंदूर' को विभिन्न स्वदेशी मंचों का उपयोग करके अंजाम दिया गया था; जो रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता की सफलता का सशक्त प्रमाण है।
श्री संजय सेठ ने भारत के रक्षा औद्योगिक आधार में आए बदलावों की रूपरेखा प्रस्तुत करते हुए कहा कि रक्षा निर्यात 2014 के 686 करोड़ रुपये से बढ़कर 2025 में 23,622 करोड़ रुपये तक पहुँच गया है। इसके साथ ही, 2026 के लिए 29,000 करोड़ रुपये और 2029 तक 50,000 करोड़ रुपये का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। रक्षा बजट अब तक के अपने उच्चतम स्तर - 7.85 लाख करोड़ रुपये - तक पहुँच गया है। रक्षा उत्पादन विभाग ने 'सकारात्मक स्वदेशीकरण सूची' के अंतर्गत आने वाले 5,012 रक्षा घटकों में से 3,190 घटकों का स्वदेशीकरण सफलतापूर्वक हासिल कर लिया है। रक्षा क्षेत्र में एमएसएमई इकाइयों की संख्या 2014 के लगभग 1 करोड़ से बढ़कर आज 6.5 करोड़ तक पहुँच गई है, जिससे 25 करोड़ लोगों को रोजगार प्राप्त हुआ है। भारत का स्टार्ट-अप इकोसिस्टम 2014 के 1,000 स्टार्ट-अप से बढ़कर अब 2.9 मिलियन से ज़्यादा हो गया है, जिससे भारत दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा स्टार्ट-अप राष्ट्र बन गया है।
अपने पड़ोसियों के साथ भारत के संबंधों पर टिप्पणी करते हुए, रक्षा राज्य मंत्री ने कहा कि बांग्लादेश महत्वपूर्ण व्यापारिक साझेदार है। उन्होंने कहा कि भारत और नेपाल को अलग नहीं किया जा सकता; वे इतिहास, संस्कृति और साझा सुरक्षा हितों से एक-दूसरे से जुड़े हुए हैं। भारत बुनियादी ढांचा परियोजनाओं के माध्यम से नेपाल को लगातार सहायता प्रदान कर रहा है, जिनमें जनकपुर-कुरथा रेलवे लिंक, जलविद्युत परियोजनाएं, ट्रॉमा सेंटर और मोतिहारी पाइपलाइन शामिल हैं।
इस कार्यक्रम में सैन्य क्षेत्र में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) पर ऐतिहासिक नीति दस्तावेज़ जारी किया गया, जो राष्ट्रीय सुरक्षा में एआई को शामिल करने के प्रति भारत के दूरदर्शी दृष्टिकोण को दर्शाता है — इसका उद्देश्य परिचालन क्षमता को बढ़ाना, निर्णय लेने की श्रेष्ठता को मज़बूत करना और ज़िम्मेदार नवाचार को बढ़ावा देना है। SAMADH (एरियल ड्रोन के लिए स्थितिजन्य जागरूकता), को डीआरडीओ की प्रमुख डीप-टेक प्रयोगशाला — सेंटर फॉर आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस एंड रोबोटिक्स (सीएआईआर) ने डिज़ाइन और विकसित किया है। SAMADH को इस कार्यक्रम में आधिकारिक तौर पर लॉन्च किया गया। SAMADH स्केलेबल, विस्तार योग्य और स्वदेशी एआई प्लेटफ़ॉर्म है, जो युद्ध के पूरे दायरे में वास्तविक समय में स्थितिजन्य जागरूकता प्रदान करता है। इसमें स्वायत्त और झुंड वाले ड्रोन वातावरण भी शामिल हैं। इस अवसर पर भारत के मध्यम-स्तरीय सैन्य नेतृत्व के बीच संयुक्त परिचालन मानसिकता विकसित करने के लिए 'एकीकृत ऑनलाइन प्रशिक्षण और मूल्यांकन कार्यक्रम' (आईओटीईपी) भी लॉन्च किया गया।
चीफ़ ऑफ़ इंटीग्रेटेड डिफ़ेंस स्टाफ़ (सीआईएससी) एयर मार्शल आशुतोष दीक्षित ने इस अवसर पर संबोधन में भारत के पड़ोस में तेज़ी से बदलते भू-राजनीतिक घटनाक्रमों के अत्यंत महत्व पर ज़ोर दिया। उन्होंने इस बात की जानकारी दी कि बदलते रणनीतिक परिदृश्य और निकट पड़ोस में उभरती चुनौतियों के लिए गहन मूल्यांकन और निरंतर जुड़ाव की आवश्यकता है। क्षेत्रीय संबंधों में बढ़ती जटिलताओं पर ज़ोर देते हुए, उन्होंने कहा कि इन चुनौतियों से प्रभावी ढंग से निपटने और इस क्षेत्र में भारत के रणनीतिक हितों को आगे बढ़ाने के लिए विभिन्न हितधारकों के बीच समन्वित और व्यापक प्रयासों की आवश्यकता होगी।
इस कार्यक्रम में वरिष्ठ नीति-निर्माता, राजनयिक, सैन्य नेता, रणनीतिक विद्वान और विशेषज्ञ एक साथ आए। उन्होंने भारत के बदलते सुरक्षा वातावरण और राष्ट्रीय तथा क्षेत्रीय स्थिरता पर इसके व्यापक प्रभावों पर विचार-विमर्श किया।
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पीके/केसी/पीके/एसएस
(रिलीज़ आईडी: 2238615)
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