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मत्स्यपालन, पशुपालन और डेयरी मंत्रालय
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हिमाचल प्रदेश में मत्स्य विकास

प्रविष्टि तिथि: 24 MAR 2026 12:17PM by PIB Delhi

भारत सरकार के मत्स्य विभाग द्वारा वित्तीय वर्ष 2020-21 से सभी राज्यों एवं संघ शासित प्रदेशों, जिसमें हिमाचल प्रदेश भी शामिल है, में प्रमुख योजना, प्रधान मंत्री मत्स्य संपदा योजना (पीएमएमएसवाई) का कार्यान्वयन किया जा रहा है। भारत सरकार के मत्स्य विभाग ने प्रधान मंत्री मत्स्य संपदा योजना के प्रारंभ से हिमाचल प्रदेश सरकार की मत्स्य विकास परियोजनाओं हेतु ₹15,548.08 लाख की राशि के प्रस्तावों को स्वीकृति प्रदान की है, जिसमें ₹7,947.31 लाख का केंद्रीय अंश सम्मिलित है। इसके अतिरिक्त, मत्स्य पालन एवं जलीय कृषि अवसंरचना विकास निधि (एफआईडीएफ) के अंतर्गत, जिला ऊना के गगरेट में अत्याधुनिक मत्स्य प्रशिक्षण केंद्र की स्थापना हेतु ₹5.17 करोड़ की लागत वाली एक परियोजना को भी स्वीकृति प्रदान की गई है। बताया जाता है कि हिमाचल प्रदेश राज्य में मत्स्य उत्पादन में निरंतर वृद्धि देखी गई है, जिसका मुख्य कारण अधिक ऊँचाई वाले क्षेत्रों में ट्राउट मत्स्य पालन का विस्तार तथा जलाशय क्षेत्रों में कार्प मत्स्य पालन का विकास है। वर्ष 2021-22 से हिमाचल प्रदेश सरकार द्वारा प्रतिवेदित वार्षिक मत्स्य उत्पादन, मत्स्य बीज उत्पादन तथा सीएसएस, सीएस घटकों और एनएफडीबी के अंतर्गत जारी निधियों का विवरण निम्‍नानुसार है:

 

वित्तीय वर्ष

मत्स्य उत्पादन (मीट्रिक टन)

कार्प बीज (स्पॉन, लाख में) 

ट्राउट बीज (आईड ओवा, लाख में)

सीएसएस – पीएमएमएसवाई (₹ लाख में) 

सीएस – पीएमएमएसवाई (₹ लाख में)

एनएफडीबी (₹ लाख में)

(i)

(ii)

(iii)

(iv)

(v)

(vi)

(vii)

2021–22

16,015.81

702.21

50.00

1,264.82

25.70

33.18

2022–23

17,026.09

671.31

42.00

1,309.62

0.00

29.30

2023–24

17,721.64

629.49

54.00

562.43

0.00

8.18

2024–25

19,019.83

773.56

60.00

1,476.25

25.70

69.03

2025–26 (फरवरी 2026  तक)

16,861.06

430.70

30.00

0.00

0.00

8.48

(बी) से (ई): जी महोदय, गोविंद सागर तथा महाराणा प्रताप सागर जलाशयों की क्षमताओं का सतत् रूप से उपयोग करने के उद्देश्य से सहकारी समितियों के माध्यम से कैप्चर मत्स्य पालन को बढ़ावा देने तथा संवर्धित (कल्चर आधारित) मत्स्य पालन के प्रोत्साहन हेतु मत्स्य विकास योजनाओं के अंतर्गत सरकारी सहायता प्रदान की जाती है। वाणिज्यिक पंगास मछली पालन को बढ़ावा देने के लिए कुल 48 पिंजरे (प्रत्येक जलाशय में 24) स्थापित किए गए हैं तथा मत्स्य गतिविधियों को बढ़ावा एवं विस्तार देने के लिए पोंग बांध में 15  लैंडिंग केंद्र तथा गोविंद सागर में 8 लैंडिंग केंद्र स्थापित किए गए हैं। 697 मछुआरों को नौकाओं एवं जालों की खरीद हेतु सरकारी सहायता प्रदान की गई है, जबकि राज्य में 9208 मछुआरों को पिछले तीन वर्षों के दौरान क्‍लोज़ सीज़न सहायता प्रदान की गई है। इसके अतिरिक्त, मछुआरों को ₹5.00 लाख (मृत्यु/स्थायी दिव्यांगता) तथा ₹2.50 लाख (आंशिक दिव्यांगता) का बीमा कवरेज प्रदान किया जाता है तथा मत्स्य संसाधनों के संरक्षण हेतु फिंगरलिंग संचयन, पिंजरा मत्स्य पालन एवं क्लोज सीजन जैसी गतिविधियाँ भी क्रियान्वित की जाती हैं।

हिमाचल प्रदेश सरकार ने आगे अवगत कराया है कि वित्तीय वर्ष 2015-16 से 2019-20 के दौरान कार्यान्वित नीली क्रांति (ब्लू रिवॉल्यूशन) योजना के अंतर्गत हिमाचल प्रदेश को ₹3727.47 लाख की केंद्रीय अंश धन राशि प्राप्त हुई, जिसका पूर्ण रूप से उपयोग किया गया। यह सूचित किया गया है कि बीज संचयन, हैचरी विकास, पिंजरा मत्स्य पालन, लैंडिंग केंद्रों तथा आइस प्लांटों के समर्थन हेतु, जलाशय मत्स्य विकास के लिए निधियाँ आवंटित की गईं, जिनमें गोविंद सागर के लिए ₹126.40 लाख, कोल डैम के लिए ₹171.20 लाख तथा पोंग डैम के लिए ₹160.00 लाख सम्मिलित हैं। हिमाचल प्रदेश सरकार ने यह भी अवगत कराया है कि आगामी पाँच वर्षों के लिए समेकित संचयन एवं संरक्षण उपायों के माध्यम से गोविंद सागर तथा महाराणा प्रताप सागर, प्रत्येक जलाशय के लिए प्रतिवर्ष 600 मीट्रिक टन मत्स्य उत्पादन का लक्ष्य निर्धारित किया गया है।

यह जानकारी मत्स्य पालन, पशुपालन एवं डेयरी मंत्री श्री राजीव रंजन सिंह उर्फ ललन सिंह द्वारा लोकसभा में पूछे गए एक प्रश्न के उत्तर में दी गई।

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पीके/केसी/पीके

 


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