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पंचायती राज मंत्रालय
azadi ka amrit mahotsav

मध्य प्रदेश में पंचायती राज संस्थाओं का सुदृढ़ीकरण

प्रविष्टि तिथि: 24 MAR 2026 2:03PM by PIB Delhi

पंचायती राज मंत्रालय निम्नलिखित योजनाओं को लागू कर रहा है: (i) राष्ट्रीय ग्राम स्वराज अभियान (आरजीएसए) की केंद्र प्रायोजित योजना, जिसका प्राथमिक उद्देश्य निर्वाचित प्रतिनिधियों (ईआर) और उनके पदाधिकारियों की क्षमता निर्माण और प्रशिक्षण के माध्यम से पंचायती राज संस्थाओं (पीआरआई) को मजबूत बनाना, ग्राम पंचायत भवन और कम्प्यूटरीकरण जैसी अवसंरचनात्मक सहायता प्रदान करना है; (ii) पंचायतों का प्रोत्साहन (आईओपी), जिसका उद्देश्य पीआरआई के बीच प्रतिस्पर्धात्मक भावना को प्रोत्साहित करना है, जिसके तहत सर्वोत्तम प्रदर्शन करने वाली पंचायतों को उनके अच्छे विकासात्मक कार्यों के लिए वित्तीय प्रोत्साहन सहित पुरस्कार दिए जाते हैं; (iii) ई-पंचायतों पर मिशन मोड परियोजना (एमएमपी-ईपंचायत), जिसके तहत पंचायतों के डिजिटलीकरण की दिशा में विभिन्न ई-गवर्नेंस परियोजनाओं को वित्तपोषित किया जाता है ताकि पीआरआई के कामकाज में कार्यदक्षता, जवाबदेही और पारदर्शिता लाई जा सके और इसका समग्र रूपान्तरण हो सके।ये योजनाएँ देश के सभी राज्यों/संघ राज्य क्षेत्रों के सभी ग्रामीण स्थानीय निकायों में लागू हैं, जिनमें मध्य प्रदेश राज्य और इसके भिंड और दतिया जिले भी शामिल हैं। मध्य प्रदेश राज्य के साथ-साथ अधिकांश अन्य राज्यों/संघ राज्य क्षेत्रों में भी गांवों का सर्वेक्षण और ग्रामीण क्षेत्रों में उन्नत प्रौद्योगिकी द्वारा मानचित्रण (स्वामित्व) की केंद्रीय क्षेत्र योजना लागू की जा रही है, जिसका उद्देश्य गांवों में मकान मालिकों को 'अधिकारों का अभिलेख' उपलब्ध कराना है।

वर्तमान में पंद्रहवें वित्त आयोग (एफएफसी) के तहत, राज्यों के माध्यम से पंचायती राज संस्थाओं (पीआरआई) को केन्द्रीय वित्त आयोग की हस्तांतरित निधि आवंटित की जाती है। एफएफसी अनुदान के दो घटक हैं—टाइड और अनटाइड।

अनटाईड अनुदान, जो कुल अनुदान का 40% है, का उपयोग वेतन या अन्य स्थापना व्यय को छोड़कर, आरएलबी द्वारा संविधान की ग्यारहवीं अनुसूची में निहित 29 विषयों के तहत उनके द्वारा महसूस की गई स्थान-विशिष्ट जरूरतों के लिए किया जा सकता है। टाइड अनुदान, जो कुल अनुदान का 60% है, का उपयोग बुनियादी सेवाएं प्रदान करने के लिए किया जा सकता है (क) स्वच्छता और खुले में शौच से मुक्त (ओडीएफ) स्थिति का रखरखाव, जिसमें घरेलू कचरे का प्रबंधन और उपचार, मानव मल और मल गाद प्रबंधन शामिल है और (ख) पेयजल की आपूर्ति, वर्षा जल संचयन और जल पुनर्चक्रण। यदि किसी स्थानीय निकाय ने एक श्रेणी की जरूरतों को पूरी तरह से पूरा कर दिया है, तो वह अन्य श्रेणी की धनराशि का उपयोग कर सकता है।

आरजीएसए योजना के अंतर्गत निधि किसी जिले या निर्वाचन क्षेत्र को नहीं, बल्कि राज्य/संघ राज्य क्षेत्रों को जारी की जाती है। आईओपी योजना के तहत पंचायतों को प्रदान की गई पुरस्कार राशि के आधार पर, वर्ष 2019-20 से राज्य में प्राप्त जिलावार निधि का विवरण अनुलग्नक-Iमें दिया गया है। वर्ष 2019-20 से वर्ष 2025-26 के दौरान मध्य प्रदेश के संबंध में आरजीएसए योजना और एफएफसी के तहत आवंटित/जारी/उपयोग की गई धनराशि का विवरण इस प्रकार है:

(रुपये करोड़ में)

वित्त आयोग/योजना

आवंटित धनराशि

 जारी की गई धनराशि

उपयोग की गई धनराशि

आरजीएसए

*

354.17

741.57#

आईओपी

*

10.25

7.53

वित्त आयोग अनुदान^

23,618.48

21553.79

13,757.16

नोट: वर्ष 2026-27 के लिए निधि आवंटन नहीं किया गया है।

* निधि का कोई पूर्व विशिष्ट राज्य/जिला आवंटन नहीं किया गया है. 

#इस निधि में उपयोगिता केंद्र का हिस्सा, राज्य का हिस्सा और पिछले वर्ष का अव्ययित शेष शामिल है। 

^ इसमें वर्ष 2020-21 के लिए एफएफसी के अंतरिम पुरस्कार शामिल हैं। ईग्रामस्वराज पोर्टल पर आरएलबी द्वारा दी गई सूचना के अनुसार उपयोगिता वर्ष 2020-21 से है।

ग्राम पंचायत विकास योजना और परियोजना क्रियान्वयन एक सतत प्रक्रिया है। वर्ष 2019-20 से अब तक, मध्य प्रदेश की विभिन्न ग्राम पंचायतों में केंद्रीय वित्त आयोग के अनुदानों का उपयोग करते हुए कुल 16,773 परियोजना कार्य पूरे किए गए हैं, जिनमें से 151 परियोजनाएं भिंड जिले में और 70 परियोजनाएं दतिया जिले में हैं। पंचायत विकास योजनाएँ तैयार करने के बाद एफएफसी और अन्य निधियों का उपयोग करते हुए मध्य प्रदेश की पंचायतों द्वारा निष्पादित क्षेत्रवार परियोजनाएँ, जैसा कि ई-ग्रामस्वराज पोर्टल पर सूचित किया गया है, अनुलग्नक-II में दी गई हैं।

मंत्रालय पंचायती राज संस्थाओं (पीआरआई) की शासन व्यवस्था के विभिन्न क्षेत्रों में क्षमता निर्माण पर ध्यान केंद्रित कर रहा है। इसके लिए मंत्रालय संशोधित राष्ट्रीय ग्राम स्वराज अभियान योजना लागू कर रहा है। वर्ष 2022-23 के दौरान और अब तक पीआरआई के निर्वाचित प्रतिनिधियों और पदाधिकारियों की संचयी संख्या 1.57 करोड़ से अधिक है। इसी अवधि के दौरान मध्य प्रदेश में पीआरआई के निर्वाचित प्रतिनिधियों और उनके पदाधिकारियों की संचयी संख्या 9 लाख से अधिक है, जिन्हें विषयगत योजना निर्माण सहित विभिन्न पहलुओं पर प्रशिक्षण दिया गया है। इसके अतिरिक्त, भारतीय प्रबंधन संस्थान (आईआईएम), भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईटी), ग्रामीण प्रबंधन संस्थान आनंद (आईआरएमए) आदि जैसे उत्कृष्टता संस्थानों के सहयोग से नेतृत्व/प्रबंधन विकास कार्यक्रम (एमडीपी) आयोजित किए जा रहे हैं, जिनका मुख्य उद्देश्य संचार, निर्णय लेने, वित्तीय प्रबंधन और टकराव समाधान सहित आवश्यक नेतृत्व कौशल को निखारना है, जिससे पंचायतों के प्रभावी नेतृत्व गुणों का पोषण हो सके। हाल के वर्षों में पंचायती राज संस्थाओं की क्षमता निर्माण पर विशेष जोर दिया जा रहा है ताकि वे स्वयं के राजस्व स्रोतों (ओएसआर) को जुटा सकें। मंत्रालय ने आईआईएम अहमदाबाद के सहयोग से ग्राम पंचायतों की वित्तीय स्थिति को मजबूत करने के लिए स्वयं के राजस्व स्रोतों (ओएसआर) के सृजन पर एक प्रशिक्षण मॉड्यूल विकसित किया है। यह मॉड्यूल निर्वाचित प्रतिनिधियों और पंचायत पदाधिकारियों को कर और गैर-कर स्रोतों के माध्यम से ओएसआर सृजन को समझने में सक्षम बनाता है। अब तक, मध्य प्रदेश के 3,275 प्रतिभागियों को ओएसआर मॉड्यूल का प्रशिक्षण दिया जा चुका है।

पंचायतों में ई-गवर्नेंस को मजबूत बनाने और बढ़ावा देने के लिए, डिजिटल इंडिया पहल के तहत, स्थानीय ग्रामीण शासन में पारदर्शिता, जवाबदेही और कार्यदक्षता लाने के लिए पंचायती राज मंत्रालय ने विभिन्न डिजिटल प्लेटफॉर्म और ऐप विकसित किए हैं। सिंगल साइन ऑन डिजिटल प्लेटफॉर्म, ईग्रामस्वराज ऐप, जिसे वर्ष 2020-21 में शुरू किया गया था, पंचायत स्तर पर योजना, लेखांकन, निगरानी और ऑनलाइन भुगतान की सुविधा प्रदान करने के लिए बनाया गया है। इस ऐप को सार्वजनिक निधि प्रबंधन प्रणाली, सरकारी ई-मार्केटप्लेस और ऑडिटऑनलाइन ऐप के साथ एकीकृत किया गया है ताकि भुगतान में कोई परेशानी न हो, खरीद प्रक्रिया पारदर्शी हो और पंचायतों के खातों की लेखापरीक्षा की जा सके।वर्तमान वित्त वर्ष 2025-26 के दौरान, देश भर में कुल 2,64,211 ग्राम पंचायतों और समकक्ष निकायों में से, 2,54,604 ग्राम पंचायतें और समकक्ष निकायों (96.36%) ने अपने ग्राम पंचायत विकास योजनाओं (जीपीडीपी) को ईग्रामस्वराज पर अपलोड किया है और 2,42,871 ग्राम पंचायतें और समकक्ष निकायों (91.92%) ने ईग्रामस्वराज-पीएफएमएस इंटरफेस के माध्यम से विक्रेताओं को 38,491 करोड़ रुपये हस्तांतरित किए हैं। मध्य प्रदेश में 23,011 ग्राम पंचायतों में से 22,978 ग्राम पंचायतों (99.85%) ने अपने ग्राम पंचायत विकास योजनाओं (जीपीडीपी) को ईग्रामस्वराज पर अपलोड किया है और 21,950 ग्राम पंचायतों (95.5%) ने ईग्रामस्वराज-पीएफएमएस इंटरफेस के माध्यम से विक्रेताओं को 2156.10 करोड़ रुपये हस्तांतरित किए हैं।

पंचायत राज्य का विषय है, इसलिए राज्य सरकारों का यह दायित्व है कि वे अपने-अपने राज्य पंचायती राज अधिनियमों में निहित प्रावधानों के अनुसार अपनी पंचायतों को वित्तीय शक्तियों सहित शक्तियां हस्तांतरित करें। पंचायती राज मंत्रालय (एमओपीआर) पंचायती राज संस्थाओं (पीआरआई) को सुदृढ़ बनाने और उनके कुशल संचालन को सुनिश्चित करने के लिए राज्य सरकारों के प्रयासों में निरंतर सहयोग और सहायता प्रदान करता है, जिसमें अपनी योजनाओं के तहत वित्तीय सहायता भी शामिल है। मंत्रालय राज्यों को सलाह देता रहा है कि वे पंचायतों को अधिकाधिक शक्तियां सौंपें ताकि वे सभी मामलों में आत्मनिर्भर बन सकें, विशेष रूप से स्वयं के राजस्व स्रोतों का सृजन (ओएसआर) के संबंध में, और इसके लिए उन्हें वित्तीय शक्ति हस्तांतरित की जाए। पंचायतों की वित्तीय स्वायत्तता और तकनीकी सहायता को मजबूत करने हेतु राज्यों द्वारा वित्त आयोग के सभी अनुदान सीधे पंचायतों के खातों में जमा किए जाते हैं, जिससे वे स्थानीय विकास परियोजनाओं को प्रभावी ढंग से क्रियान्वित कर सकें।मंत्रालय पंचायत हस्तांतरण सूचकांक (पीडीआई) जैसे आवधिक अध्ययन करता है, जो राज्यों/संघ राज्य क्षेत्रों द्वारा पंचायतों को निधि, कार्यों और कार्यप्रणाली के क्षेत्रों में हस्तांतरित शक्तियों की स्थिति की समीक्षा करता है, ताकि पंचायतों को अधिक से अधिक शक्तियां सौंपने के लिए राज्यों के बीच प्रतिस्पर्धा को बढ़ावा दिया जा सके।

हाल के वर्षों में स्वयं के राजस्व स्रोतों (ओएसआर) को जुटाने के संबंध में पंचायती राज संस्थाओ के क्षमता निर्माण पर उचित जोर दिया जा रहा है, जिसका उल्लेख ऊपर (घ) में किया गया है।

मंत्रालय ने सोलहवें वित्त आयोग (एसएफसी) को अपने ज्ञापन के माध्यम से आरएलबी की भूमिकाओं और जिम्मेदारियों को देखते, हुए उन्हें अधिक आवंटन की सिफारिश की थी, जिसके परिणामस्वरूप एसएफसी ने आरएलबी के लिए कुल ₹4,35,236 करोड़ के अनुदान की सिफारिश की है, जो पंद्रहवें वित्त आयोग के तहत किए गए आवंटन की तुलना में लगभग 84% अधिक है। इसके अलावा, एसएफसी ने सभी स्तरों की पंचायतों को ओएसआर उत्पादन प्रदर्शन-आधारित अनुदान देने की सिफारिश की है। साथ ही, आयोग ने राज्यों को भी प्रदर्शन-आधारित अनुदान देने की सिफारिश की है, बशर्ते वे अपने संसाधनों से आरएलबी को धनराशि हस्तांतरित करें। सरकार ने इन सिफारिशों को स्वीकार कर लिया है।

अनुलग्नक-I

वर्ष 2022-23 में आईओपी योजना के तहत पंचायतों को जिलावार प्रदान की गई पुरस्कार राशि

 

क्र. स.

जिला का नाम

रुपये लाख में

  1.  

भोपाल

50

  1.  

नरसिंहपुर

50

  1.  

सागर

43

  1.  

छतरपुर

25

  1.  

सीधी

13

  1.  

पूर्वी निमाड़

16

  1.  

हरदा

8

  1.  

उज्जैन

8

  1.  

जबलपुर

8

  1.  

इंदौर

12

  1.  

नीमच

8

  1.  

गुना

16

  1.  

ग्वालियर

5

  1.  

झाबुआ

10

नोट: पिछले तीन वर्षों के दौरान भिंड और दतिया जिलों की पंचायतों को कोई पुरस्कार प्राप्त नहीं हुआ है।

 

अनुलग्नक-II

मध्य प्रदेश में पंचायतों द्वारा 'पंचायत विकास योजनाएँ' तैयार करने के उपरांत एफएफसी अनुदान का उपयोग करते हुए निष्पादित किए गए क्षेत्र-वार परियोजनाएं, जैसा कि ईग्रामस्वराज पोर्टल पर सूचित किया गया है

क्षेत्र

निष्पादित कुल योजनाएं

कृषि गतिविधियाँ

4

भूमि सुधार गतिविधियाँ

158

जल संरक्षण गतिविधियाँ

171

पशुपालन गतिविधियाँ

15

मत्स्य पालन गतिविधियाँ (पूर्ण)

5

वन गतिविधियाँ (पूर्ण)

26

लघु वन गतिविधियाँ

0

औद्योगिक गतिविधियाँ

0

खादी गतिविधियाँ

0

आवास गतिविधियाँ

22

पेयजल गतिविधियाँ

3508

ईंधन गतिविधियाँ

0

सड़क निर्माण गतिविधियाँ

4494

विद्युतीकरण गतिविधियाँ

238

ऊर्जा गतिविधियाँ

6

गरीबी उन्मूलन गतिविधियाँ

3

शिक्षा गतिविधियाँ

118

तकनीकी गतिविधियाँ

10

प्रौढ़ शिक्षा गतिविधियाँ

3

पुस्तकालय गतिविधियाँ

11

सांस्कृतिक गतिविधियाँ

19

बाजार गतिविधियाँ

10

परिवार कल्याण गतिविधियाँ

5

महिला कल्याण गतिविधियाँ

26

समाज कल्याण गतिविधियाँ

180

कमजोर वर्ग कल्याण गतिविधियाँ

12

पीडीएस गतिविधियाँ

43

सामुदायिक परिसंपत्ति निर्माण गतिविधियाँ

240

जनजातीय गतिविधियाँ

0

प्रशासनिक गतिविधियाँ

712

अवसंरचना गतिविधियाँ

239

स्वास्थ्य गतिविधियाँ

130

स्वच्छता गतिविधियाँ

6365

कुल

16773

 

यह जानकारी केंद्रीय मंत्री श्री राजीव रंजन सिंह उर्फ ​​ललन सिंह ने 24 मार्च 2026 को लोकसभा में एक लिखित उत्तर में दी।

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