पंचायती राज मंत्रालय
पंचायती राज संस्थाएं
प्रविष्टि तिथि:
24 MAR 2026 2:06PM by PIB Delhi
पंचायत", "स्थानीय सरकार" होने के कारण, राज्य का विषय है और भारत के संविधान की सातवीं अनुसूची की राज्य सूची का एक हिस्सा है। पंचायतों की स्थापना तथा उनका संचालन संबंधित राज्य पंचायती राज अधिनियमों के माध्यम से किया जाता हैं, जो संविधान के प्रावधानों के अधीन, राज्य से राज्य में भिन्न हो सकते हैं। पंचायतों का प्रदर्शन और विकास,संबंधित राज्यों द्वारा उन्हें सौंपे गए अधिकारों और संसाधनों की सीमा पर निर्भर करता है। तदनुसार, पंचायतों से जुड़े सभी मामले—जैसे पंचायती राज संस्थाओं (पीआरआई) के प्रभावी कामकाज, जनता के प्रति उनकी जवाबदेही सुनिश्चित करने के लिए संस्थागत तंत्र को मजबूत करना और उनके कामकाज की निगरानी व मूल्यांकन—राज्य सरकार के अधिकार क्षेत्र में आते हैं।
यद्यपि, भारत के संविधान का अनुच्छेद 280(3)(ख ख) राज्य में पंचायतों के संसाधनों को बढ़ाने के लिए राज्य के समेकित निधि को सुदृढ़ करने के लिए केंद्रीय वित्त आयोगों के लिए अनुदान की सिफारिश करने का आधार प्रदान करता है। केंद्रीय वित्त आयोग अनुदानों की पर्याप्तता का आकलन करता है और तदनुसार पंचायती राज संस्थाओं के लिए निर्धारित पुरस्कार अवधि हेतु अनुदानों के आवंटन की अनुशंसा करता है।
चौदहवें वित्त आयोग के तहत, संविधान के भाग IX के अंतर्गत गठित ग्राम पंचायतों को वर्ष 2015-16 से वर्ष 2019-20 की अवधि के लिए 26 राज्यों में बुनियादी सुविधाएं प्रदान करने हेतु ₹2,00,292.20 करोड़ आवंटित किए गए थे। इसमें जल आपूर्ति, सेप्टिक प्रबंधन सहित स्वच्छता, सीवरेज और ठोस अपशिष्ट प्रबंधन, तूफानी-जल निकासी, सड़कों और फुटपाथों का रखरखाव आदि शामिल हैं। इस कुल आवंटन में से ₹1,83,248.54 करोड़ जारी किए जा चुके हैं।
इसके अतिरिक्त, पंद्रहवें वित्त आयोग के तहत, वित्त वर्ष 2020-21 की अंतरिम अवधि के लिए ₹60,750 करोड़ और वित्त वर्ष 2021-26 की अवधि के लिए ₹2,36,805 करोड़ का अनुदान तीनों स्तरों की पंचायतों, पारंपरिक स्थानीय निकायों और 28 राज्यों में छठी अनुसूची के क्षेत्रों को आवंटित किया गया था। दिनांक 19.03.2026 तक, ₹ 2,97,555 करोड़ के कुल आवंटन में से ₹2,70,624.83 करोड़ जारी किए जा चुके हैं। पंद्रहवें वित्त आयोग के तहत अनुदान राशि को दो हिस्सों में—बंधित (टाइड) और मूल (अनटाइड) अनुदानों में—विभाजित किया गया है। मूल (अनटाइड) अनुदानों का उपयोग भारत के संविधान की ‘ग्यारहवीं अनुसूची’ में सूचीबद्ध 29 विषयों के अंतर्गत मूलभूत सुविधाओं की स्थानीय आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए किया जा सकता है, किन्तु इसका उपयोग वेतन एवं अन्य स्थापना व्ययों पर नहीं किया जा सकता। बंधित (टाइड) अनुदानों का उपयोग मूलभूत सुविधाओं—विशेषकर पेयजल एवं स्वच्छता—के लिए किया जाना है।
सोलहवें वित्त आयोग ने यह स्पष्ट किया है कि स्थानीय निकायों को पर्याप्त वित्तीय संसाधन उपलब्ध कराने की प्राथमिक ज़िम्मेदारी राज्यों पर ही है। साथ ही, आयोग ने स्थानीय निकायों को अपने संसाधन स्वयं सृजित करने की आवश्यकताओं पर विशेष बल दिया है। आयोग ने अनुशंसा अवधि 2026-31 तक ग्रामीण स्थानीय निकायों के लिए अनुदान के रूप में 4,35,236 करोड़ रुपये (चार लाख पैंतीस हजार दो सौ छत्तीस करोड़ रुपये) निर्धारित किए हैं। आरएलबी के लिए आवंटित अनुदान को फिर मूल अनुदान (रु. 3,48,188 करोड़), आरएलबी निष्पादन अनुदान (रु. 43,524 करोड़) और राज्य निष्पादन अनुदान (रु. 43,524 करोड़) में उप-विभाजित किया गया है। संपूर्ण निष्पादन घटक अनटाइड है। मूल अनुदान को टाइड (रु. 1,74,094 करोड़) और अनटाइड (रु. 1,74,094 करोड़) में समान रूप से विभाजित किया गया है। टाइड घटक को 'स्वच्छता और ठोसअपशिष्ट प्रबंधन' और/या 'जल प्रबंधन' की ओर निदेशित किया जाना चाहिए जिसमें उपरोक्त टाइड मदों के लिए ओ एंड एम व्यय शामिल हैं।
ग्रामीण स्थानीय निकायों के लिए वित्त मंत्रालय के व्यय विभाग द्वारा दिनांक 14.07.2021 को जारी परिचालन दिशानिर्देशों के अनुसार, पंद्रहवें वित्त आयोग के अनुदान प्रत्येक वित्तीय वर्ष में दो किस्तों में राज्यों को जारी किए जाते हैं। मूल (अनटाइड) अनुदानों एवं बंधित (टाइड) अनुदानों को जारी करने की सिफारिश करने के लिए क्रमशः पंचायती राज मंत्रालय तथा पेयजल एवं स्वच्छता विभाग नोडल मंत्रालय हैं। किसी राज्य द्वारा पूर्व में जारी की गई किस्त के संबंध में अनुदान हस्तांतरण प्रमाण-पत्र प्राप्त होने तथा परिचालन दिशानिर्देशों में निर्धारित पात्रता शर्तों की पूर्ति होने पर, पंचायती राज मंत्रालय अगली किस्त के मूल (अनटाइड) अनुदान को जारी करने हेतु वित्त मंत्रालय को सिफारिश करता है। इसी प्रकार, पेयजल एवं स्वच्छता विभाग बंधित (टाइड) अनुदान की संबंधित किस्त को जारी करने हेतु वित्त मंत्रालय को सिफारिश करता है।
तदनुसार, अनुदान के जारी होने का समय थोड़ा भिन्न हो सकता है, जो पूर्व में जारी की गई किश्त के लिए अनुदान हस्तांतरण प्रमाण-पत्रप्राप्त होने और संबंधित राज्य द्वारा निर्धारित पात्रता शर्तों की पूर्ति पर निर्भर करता है। परिचालन दिशानिर्देशों के अनुसार, राज्य सरकारों को वित्त मंत्रालय से पंद्रहवें वित्त आयोग द्वारा अनुशंसित अनुदान प्राप्त होने के बाद उसे संबंधित स्थानीय निकायों को दस कार्य दिवसों के भीतर हस्तांतरित करना होता है। यदि हस्तांतरण में दस कार्य दिवसों से अधिक की देरी होती है, तो राज्य सरकारों को उस अवधि के लिए औसत प्रभावी ब्याज दर (जो पिछले वर्ष के बाजार उधार/राज्य विकास ऋणों पर आधारित होती है) के अनुसार ब्याज सहित अनुदान जारी करना होता है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, जहाँ भी परिचालन दिशानिर्देशों में उल्लिखित पात्रता शर्तों की पूर्ति की गई है, वहाँ अब तक अनुदानों की रिहाई में किसी प्रकार की देरी की सूचना प्राप्त नहीं हुई है।
भारत के संविधान के अनुच्छेद 243-झ के अनुसार, राज्य वित्त आयोगों का गठन, कार्यप्रणाली तथा उनकी सिफारिशों का क्रियान्वयन संबंधित राज्य सरकारों के अधिकार क्षेत्र में आता है।
पंचायतों में ई-गवर्नेंस को बढ़ावा देने के लिए, डिजिटल इंडिया पहल के तहत, पंचायती राज मंत्रालय ने देश के स्थानीय ग्रामीण शासन में पारदर्शिता, जवाबदेही और कार्यदक्षता लाने के लिए विभिन्न डिजिटल प्लेटफॉर्म और ऐप विकसित किए हैं। इस मंत्रालय ने ईग्रामस्वराज पोर्टल (https://egramswaraj.gov.in) शुरू किया है, जो एक उपयोगकर्ता के अनुकूल वेब-आधारित पोर्टल है। इसका उद्देश्य विकेंद्रीकृत योजना, प्रगति रिपोर्टिंग, वित्तीय प्रबंधन, कार्य-आधारित लेखांकन और सृजित परिसंपत्तियों के विवरण में बेहतर पारदर्शिता लाना है। इस ऐप को सार्वजनिक निधि प्रबंधन प्रणाली, सरकारी ई-मार्केटप्लेस और ऑडिटऑनलाइन ऐप के साथ एकीकृत किया गया है ताकि भुगतान में कोई समस्या न हो, खरीद में पारदर्शिता हो और पंचायतों के खातों की लेखापरीक्षा की जा सके।
सरकार ने पंचायतों की राजस्व-उत्पादक क्षमताओं को बढ़ाने के लिए महत्वपूर्ण कदम उठाए हैं, जिससे वे आत्मनिर्भर बन सकें और बाहरी धन पर कम निर्भर रहें। 73वां संविधान संशोधन अधिनियम, 1992 में पंचायतों को शक्तियां और जिम्मेदारियां सौंपना अनिवार्य किया गया है।पंचायती राज मंत्रालय राज्यों को इन प्रावधानों को पूरी तरह से लागू करने की वकालत कर रहा है, जिसमें राज्यों को पर्याप्त कार्यों, वित्त और पदाधिकारियों के साथ पंचायतों को सशक्त बनाने की आवश्यकता पर जोर दिया गया है।
पंचायती राज मंत्रालय ने आईआईएम अहमदाबाद के सहयोग से ग्राम पंचायतों की वित्तीय स्वायत्ता को मजबूत करने के लिए स्वयं के राजस्व स्रोत (ओएसआर) पर एक प्रशिक्षण मॉड्यूल भी विकसित किया है।
2025 में, पंचायती राज मंत्रालय ने पंचायतों द्वारा अपने स्वयं के राजस्व स्रोत में वृद्धि के माध्यम से आत्मनिर्भरता को बढ़ावा देने के लिए आत्मनिर्भर पंचायत विशेष पुरस्कार शुरू किया है।
पंचायती राज मंत्रालय ने पंचायत के स्वयं के राजस्व स्रोत संग्रह को डिजिटल बनाने के लिए एक महत्वपूर्ण कदम उठाया है, एक समर्पित डिजिटल प्लेटफॉर्म "समर्थ पंचायत पोर्टल" विकसित किया है जो कर और गैर-कर मांगों के सृजन और संग्रह, कर रजिस्टरों के रखरखाव और राजस्व की ऑनलाइन ट्रैकिंग की सुविधा प्रदान करता है। यह डिजिटल सशक्तिकरण स्थानीय वित्तीय प्रशासन में पारदर्शिता, दक्षता और मापनीयता लाने के लिए बनाया गया है।
यह जानकारी केंद्रीय मंत्री श्री राजीव रंजन सिंह उर्फ ललन सिंह ने 24 मार्च 2026 को लोकसभा में एक लिखित उत्तर में दी।
***
AA
(रिलीज़ आईडी: 2244376)
आगंतुक पटल : 176
इस विज्ञप्ति को इन भाषाओं में पढ़ें:
English