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मत्स्यपालन, पशुपालन और डेयरी मंत्रालय
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नीली क्रांति और मत्स्य विकास योजनाएँ

प्रविष्टि तिथि: 24 MAR 2026 12:20PM by PIB Delhi

मत्स्य पालन विभाग, मत्स्य पालन, पशुपालन और डेयरी मंत्रालय देश में मत्स्य पालन और जलीय कृषि क्षेत्र के समग्र विकास के लिए वित्त वर्ष 2020-21 से 20,050 करोड़ रुपये के अनुमानित निवेश के साथ प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना (पीएमएमएसवाई) लागू कर रहा है, जिसमें बिहार सहित सभी राज्य/संघ शासित प्रदेश शामिल हैं। पीएमएमएसवाई के तहत, सरकार के मत्स्य पालन विभाग ने विभिन्न मत्स्य विकास गतिविधियों के लिए 547.13 करोड़ रुपये की परियोजनाओं को स्वीकृति दी है, जिसमें 173.65 करोड़ रुपये की केन्‍द्रीय हिस्सेदारी शामिल है, तथा बिहार राज्य में मत्स्य विकास के लिए 126.14 करोड़ रुपये की राशि जारी की गई है। बिहार सरकार द्वारा दी गई जानकारी के अनुसार, पिछले तीन वर्षों में राज्य में पीएमएमएसवाई के अंतर्गत 4421 लाभार्थियों को शामिल किया गया है, जिनमें औरंगाबाद जिले के 107 लाभार्थी भी शामिल हैं। वहीं, मत्स्य बीज फार्म और हैचरी के संबंध में 15.29 करोड़ रुपये की परियोजना को 35 फिन फिश हैचरियों और एक ब्रूड बैंक के लिए स्वीकृति दी गई है, और राज्य में 12.84 करोड़ रुपये की राशि का उपयोग किया जा चुका है।

प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना (पीएमएमएसवाई) के 2020 में शुरू होने के बाद से भारत में मछली उत्पादन और जलीय कृषि उत्पादकता दोनों में उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई है। देश का कुल मछली उत्पादन वर्ष 2019–20 के लगभग 141.6 लाख टन से बढ़कर वर्ष 2024–25 में 197.75 लाख टन हो गया है, जो 38 प्रतिशत की वृद्धि दर्शाता है। इसी प्रकार, वर्ष 2024–25 में बिहार का मछली उत्पादन 9.59 लाख टन रहा और वर्तमान वर्ष 2025–26 के लिए अनुमानित लक्ष्य 10.20 लाख टन निर्धारित किया गया है।

सरकार के मत्स्य पालन विभाग ने अपनी प्रमुख योजना पीएमएमएसवाई के तहत कई पहल की हैं, जिनका मुख्य उद्देश्य स्‍थायी और जिम्मेदार जलीय कृषि को बढ़ावा देकर, मछली उत्पादन और उत्पादकता में वृद्धि करना, मूल्य श्रृंखलाओं को सुदृढ़ करना और फसलोत्तर अवसंरचना का निर्माण करना है।

सरकार आधुनिक जलीय कृषि पद्धतियों जैसे बायोफ्लॉक तकनीक, रीसर्कुलेटरी एक्वाकल्चर सिस्टम (आरएएस), केज कल्चर और मैरिकल्चर को भी बढ़ावा दे रही है। साथ ही, हैचरियों, ब्रूड बैंक और फीड मिल की स्थापना के माध्यम से गुणवत्तापूर्ण मछली बीज और आहार की आपूर्ति तथा उच्च मूल्य वाली प्रजातियों में विविधीकरण को प्रोत्साहित किया जा रहा है। इन पहलों ने सामूहिक रूप से मछली उत्पादन में वृद्धि, उत्पादकता में सुधार और देश के मछुआरों एवं मत्स्य पालकों की आय में बढ़ोतरी में योगदान दिया है। इसके अतिरिक्त, मछुआरों और मत्स्य पालकों की संस्थागत ऋण तक पहुंच आसान बनाने के लिए वर्ष 2018-19 से किसान क्रेडिट कार्ड सुविधा का विस्तार किया गया है, ताकि उनकी कार्यशील पूंजी की आवश्यकताओं को पूरा किया जा सके। एफआईडीएफ के तहत रियायती वित्त सुविधा भी उपलब्ध कराई गई है, जिसमें 3 प्रतिशत तक ब्याज अनुदान का प्रावधान है। यह सुविधा तालाब, केज कल्चर, हैचरी, फीड प्लांट, कोल्ड स्टोरेज, आइस प्लांट आदि जैसे मत्स्य अवसंरचना के निर्माण और सुदृढ़ीकरण के लिए दी जा रही है।

यह जानकारी मत्स्य पालन, पशुपालन और डेयरी मंत्री श्री राजीव रंजन सिंह उर्फ ललन सिंह ने लोकसभा में पूछे गए एक प्रश्न के उत्तर में दी।

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पीके/केसी/केपी


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