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मत्स्यपालन, पशुपालन और डेयरी मंत्रालय
azadi ka amrit mahotsav

गहरे समुद्र में मछली पकड़ने वाले जहाज

प्रविष्टि तिथि: 24 MAR 2026 12:15PM by PIB Delhi

भारत के विशेष आर्थिक क्षेत्र (ईईजेड) और खुले समुद्र में गहरे समुद्र वाले मत्स्यपालन संबंधी संसाधनों के दोहन की संभावनाओं और राष्ट्रीय समुद्री मत्स्यपालन नीति, 2017 की सिफारिशों को ध्यान में रखते हुए, भारत सरकार का मत्स्यपालन विभाग (डीओएफ) ‘प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना’ (पीएमएमएसवाई) के तहत पारंपरिक मछुआरों को गहरे समुद्र में मछली पकड़ने वाले जहाजों (डीएसएफवी) की खरीद के लिए वित्तीय सहायता प्रदान कर रहा है। इस योजना के तहत सामान्य वर्ग के लाभार्थियों को 40 प्रतिशत और अनुसूचित जाति/अनुसूचित जनजाति/महिला लाभार्थियों को 60 प्रतिशत की सब्सिडी दी जा रही है। यह सहायता आंध्र प्रदेश राज्य सहित पूरे देश में लागू है। पीएमएमएसवाई के तहत, भारत सरकार के मत्स्यपालन विभाग (डीओएफ) ने आंध्र प्रदेश राज्य को 50 डीएसएफवी स्वीकृत किए हैं। आंध्र प्रदेश सरकार द्वारा दी गई जानकारी के अनुसार, वर्तमान में राज्य में 6 डीएसएफवी कार्यरत हैं।

भारत सरकार के मत्स्यपालन, पशुपालन और डेयरी मंत्रालय (एमओएफएएचएंडडी) के तहत, मत्स्यपालन विभाग ने आंध्र प्रदेश सरकार द्वारा प्रस्तुत 2,416.92 करोड़ रुपये के प्रस्तावों को मंजूरी दी है, जिसमें केन्द्र सरकार की हिस्सेदारी 569.86 करोड़ रुपये की है। ये प्रस्ताव मछली पकड़ने के बंदरगाहों, मछली उतारने के केन्द्रों, शीत भंडारण की सुविधाओं और मूल्यवर्धन करने वाली इकाइयों के विकास जैसी मत्स्यपालन से जुड़ी विभिन्न गतिविधियों के कार्यान्वयन से संबंधित हैं। बुडागतलपलेम (श्रीकाकुलम जिला), पुदिमदाका (अनकापल्ली जिला) और कोथापटनम (प्रकाशम जिला) में 1,137.20 करोड़ रुपये की कुल लागत से तीन मछली पकड़ने के बंदरगाहों के निर्माण को मंजूरी दी गई है। शीत भंडारण, प्रसंस्करण इकाइयों और निर्यात उन्मुख बुनियादी ढांचे सहित अतिरिक्त गतिविधियों को भी पीएमएमएसवाई के तहत मंजूरी दी गई है; इनका विवरण अनुलग्नक में दिया गया है।

पीएमएमएसवाई की केन्द्रीय क्षेत्र योजना के प्रशिक्षण, जागरूकता, अनुभव और क्षमता विकास संबंधी घटक के तहत, राष्ट्रीय मत्स्य विकास बोर्ड (एनएफडीबी) प्रशिक्षण कार्यक्रमों के कार्यान्वयन हेतु नोडल एजेंसी के रूप में कार्य करता है। यह घटक आंध्र प्रदेश सहित सभी तटीय राज्यों और केन्द्र-शासित प्रदेशों में मछुआरों, मछली पालकों, मछली से जुड़े कामगारों/विक्रेताओं और मत्स्यपालन अधिकारियों के कौशल, जागरूकता और क्षमता को बढ़ाने पर विशेष जोर देता है।

इस पहल के तहत एनएफडीबी, केन्द्रीय मत्स्यपालन समुद्री एवं इंजीनियरिंग प्रशिक्षण संस्थान (सीएफनेट) के सहयोग से, गहरे समुद्र में मछली पकड़ने और जहाज पर मछलियों को संभालने के बारे में समुद्री मछुआरों के लिए विशेष प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित करता है। इन कार्यक्रमों के तहत कुल 8,040 मछुआरों को प्रशिक्षित किया गया है। इनमें आंध्र प्रदेश के 874 मछुआरे शामिल हैं। इससे गहरे समुद्र में मछली पकड़ने के कार्य में भारत की क्षमता को मजबूती मिली है।

इसके अलावा, भारत सरकार के मत्स्यपालन विभाग के अंतर्गत भारतीय मत्स्य सर्वेक्षण (एफएसआई) ने गहरे समुद्र में मछली पकड़ने की तकनीकों को बढ़ावा देने हेतु कौशल विकास और क्षमता निर्माण से संबंधित कार्यक्रम आयोजित किए हैं, जिनमें विशेष रूप से गहरे समुद्र में टूना मछली पकड़ने के लिए लॉन्गलाइन का उपयोग और साशिमी ग्रेड टूना मछली को संभालने पर ध्यान केन्द्रित किया गया है। इन कार्यक्रमों में एफएसआई के सर्वेक्षण पोतों पर व्यावहारिक प्रशिक्षण प्रदान किया जाता है, जिसमें मोनोफिलामेंट लॉन्गलाइन संचालन (सेट करना और खींचना), गियर कॉन्फ़िगरेशन और कुशल डेक प्रबंधन शामिल हैं। इस व्यवस्थित मॉड्यूल में गहरे समुद्र में नेविगेशन, आधुनिक नेविगेशनल एड्स (जीपीएस, इको साउंडर्स, एआईएस) का उपयोग, निगरानी से जुड़ी कार्यप्रणालियां और जीवन रक्षक एवं अग्निशमन उपकरणों सहित समुद्र में सुरक्षा भी शामिल हैं।

पीएमएमएसवाई मछली पकड़ने के बाद की प्रक्रिया से जुड़े बुनियादी ढांचे में सुधार, मछली से संबंधित मूल्यवर्धित उद्यमों को बढ़ावा देने और मछली पकड़ने के बाद होने वाले नुकसान को कम करने के जरिए मूल्यवर्धन और निर्यात में वृद्धि पर विशेष जोर देता है। भारत सरकार वैश्विक बाजार की बदलती परिस्थितियों का आकलन करने हेतु सभी हितधारकों के साथ निरंतर संपर्क में है और भारत के मत्स्य निर्यात को विस्तारित करने के लिए एक व्यापक रणनीति अपना रही है। इस रणनीति में अमेरिका जैसे प्रमुख बाजारों के साथ-साथ भारत-अमेरिका द्विपक्षीय व्यापार समझौते की दिशा में निरंतर संपर्क, भारतीय रिजर्व बैंक के व्यापार संबंधी उपाय और निर्यातकों के लिए ऋण गारंटी योजना जैसे तत्काल सहायता वाले उपाय, जीएसटी में अगली पीढ़ी के सुधारों के जरिए घरेलू मांग में वृद्धि और नवगठित निर्यात संवर्धन मिशन के तहत लक्षित निर्यात प्रोत्साहन पहल शामिल हैं।

सरकार भारतीय समुद्री खाद्य उत्पादों के लिए बाजार तक पहुंच में सुधार लाने के उद्देश्य से नए मुक्त व्यापार समझौतों (एफटीए) पर बातचीत कर रही है और मौजूदा एफटीए के उपयोग को मजबूत कर रही है। इसके समानांतर, मत्स्यपालन विभाग ने विभिन्न हितधारकों के साथ व्यापक परामर्श और रणनीतिक संपर्क से जुड़े प्रयास किए हैं। इनमें अंडमान एवं निकोबार द्वीप समूह और लक्षद्वीप में निवेशक सम्मेलन, तटीय राज्यों का मत्स्यपालन सम्मेलन, अंतर्देशीय मत्स्यपालन और जलीय कृषि सम्मेलन, समुद्री खाद्य पदार्थों के निर्यातकों का सम्मेलन और विश्व मत्स्यपालन दिवस कार्यक्रम शामिल हैं। इन प्रयासों का मुख्य उद्देश्य समुद्री खाद्य पदार्थों के निर्यात में मूल्यवर्धन को बढ़ाना है।

भारतीय समुद्री खाद्य पदार्थों के निर्यात को बढ़ावा देने, राजनयिक संबंधों को मजबूत करने, सतत मत्स्यपालन में सहयोग बढ़ाने और मत्स्यपालन एवं जलीय कृषि में तकनीकी नवाचार को आगे बढ़ाने हेतु 39 देशों के राजदूतों और उच्चायुक्तों के साथ एक गोलमेज सम्मेलन आयोजित किया गया। बाजार तक पहुंच को और मजबूत करने हेतु प्रमुख आयातक देशों के साथ द्विपक्षीय संबंध भी सक्रिय रूप से बनाए जा रहे हैं।

वैश्विक प्रतिस्पर्धात्मकता को बढ़ावा देने हेतु, सरकार नियामक संबंधी सुधारों और सरल आयात प्रक्रियाओं के जरिए व्यापार करने में आसानी को  सुनिश्चित कर रही है। इसके अलावा, वाणिज्य विभाग के अधीन समुद्री उत्पाद निर्यात विकास प्राधिकरण (एमपीईडीए) अंतरराष्ट्रीय समुद्री खाद्य व्यापार मेलों एवं प्रदर्शनियों में भागीदारी, क्रेता-विक्रेता बैठकों, भारतीय झींगा की ब्रांडिंग एवं प्रचार तथा बाजार तक पहुंच बढ़ाने और भारतीय समुद्री खाद्य पदार्थों की स्थिर वैश्विक मांग सुनिश्चित करने के उद्देश्य से निर्यात को सुगम बनाने के उपायों की एक श्रृंखला के जरिए समुद्री उत्पादों के निर्यात को बढ़ावा देना जारी रखे हुए है।

*****

 

अनुलग्नक

प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना (पीएमएमएसवाई) के तहत आंध्र प्रदेश में स्वीकृत शीत भंडारण, प्रसंस्करण इकाइयों और निर्यात संबंधी सुविधाओं का विवरण:

(लाख रुपये में)

 

क्र. सं.

गतिविधियां

स्वीकृत इकाइयां

कुल परियोजना लागत

केन्द्र की हिस्सेदारी

(i)

(ii)

(iii)

(iv)

(v)

1.

शीत भंडारण/बर्फ संयंत्रों का निर्माण (10 टन/दिन की क्षमता)

10

400.00

115.20

2.

शीत भंडारण/बर्फ संयंत्रों का निर्माण (20 टन/दिन की क्षमता)

1

80.00

19.20

3.

शीत भंडारण/बर्फ संयंत्रों का निर्माण (30 टन/दिन की क्षमता)

1

120.00

43.20

4.

शीत भंडारण/बर्फ संयंत्रों का निर्माण (50 टन/दिन की क्षमता)

4

600.00

162.00

5.

मछली के मूल्य वर्धन से जुड़े उद्यम की  इकाइयां

25

1250.00

360.00

6.

मछली और मत्स्य संबंधी उत्पादों के ई-व्यापार और ई-विपणन के लिए ई-प्लेटफॉर्म

1

100.00

24.00

7.

आधुनिक एकीकृत मछली उतारने के केन्द्र

6

12691.32

7614.79

 

कुल

 

15241.32

8338.39

 

यह जानकारी मत्स्यपालन, पशुपालन और डेयरी मंत्री श्री राजीव रंजन सिंह उर्फ ​​ललन सिंह ने लोकसभा में पूछे गए एक प्रश्न के उत्तर में दी।

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पीके/केसी/आर


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