सहकारिता मंत्रालय
उत्तर प्रदेश में सहकारी समितियों के लिए ऋण सुलभता में बाधाएं
प्रविष्टि तिथि:
24 MAR 2026 5:24PM by PIB Delhi
नाबार्ड पात्र जिला केंद्रीय सहकारी बैंकों (डीसीसीबी) द्वारा प्राथमिक कृषि क्रेडिट समितियों (पैक्स)/सदस्य किसानों को संवितरित ऋणों के लिए राज्य सहकारी बैंकों (एसटीसीबी) को पुनर्वित्त जारी करता है ।
नाबार्ड, पैक्स सहित सहकारी समितियों को सीधे पुनर्वित्त जारी नहीं करता है । राज्य सहकारी बैंक को मांग के आधार पर पुनर्वित्त प्रदान किया जाता है ।
इसके अलावा, उत्तर प्रदेश में विगत पांच वर्षों के दौरान सहकारी बैंकों को नाबार्ड के माध्यम से प्रदान की गई पुनर्वित्त सहायता नीचे दर्शायी गई है:
(करोड़ रुपये)
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वित्तीय वर्ष
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2020-21
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2021-22
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2022-23
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2023-24
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2024-25
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एजेंसी
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सहकारी बैंक (अल्पकालिक)
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2,414.60
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3,550.00
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2,980.00
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3,796.43
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2,300.00
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सहकारी बैंक (दीर्घकालिक)
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109.20
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214.36
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694.40
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729.01
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544.46
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मौजूदा दिशानिर्देशों और पात्रता मानदंडों के अनुसार नाबार्ड से पुनर्वित्त प्रदान किया जाता है । सहकारी समितियां जिला केंद्रीय सहकारी बैंकों (डीसीसीबी) की सदस्य (नियमित/सामान्य या नाममात्र) हैं और ऋण उद्देश्यों के लिए उनसे जुड़ी हुई हैं । तदनुसार, उनके ऋण/क्रेडिट प्रस्तावों पर संबंधित सहकारी बैंकों द्वारा विहित मानदंडों, प्रक्रियाओं और पात्रता शर्तों के अनुसार विचार किया जाता है ।
इसके अलावा, पैक्स और सदस्य किसानों को पर्याप्त और समय पर ऋण सुनिश्चित करने के लिए राज्य सहकारी बैंकों को पुनर्वित्त जारी करने के मानदंड और पात्रता मानदंड/प्रतिभूतियां उदार हैं । पुनर्वित्त को विभिन्न योजनाओं के अधीन तथा कृषि और ग्रामीण विकास कार्यकलापों के अंतर्गत विभिन्न प्रयोजनों के लिए परेशानी मुक्त तरीके से प्रदान किया जाता है । अत:, पुनर्वित्त मॉडल के अंतर्गत कठोर संपार्श्विक मानदंडों और प्रक्रियात्मक शर्तों तथा इसके कारण अस्वीकृति के संबंध में प्रश्न नहीं उठता है ।
नाबार्ड द्वारा राज्य सहकारी बैंकों को पुनर्वित्त प्रदान किया जाता है जो आगे डीसीसीबी को और पुन: उनके द्वारा प्राथमिक सहकारी समितियों को आगे ऋण देने के लिए जिम्मेदार होते हैं । जहां तक उत्तर प्रदेश राज्य का संबंध है, पुनर्वित्त में ऐसी किसी कमी की सूचना रिपोर्ट नहीं की गई है ।
सरकार ने सहकारी ऋण संरचना को सशक्त करने और ऋण तक पहुंच में सुधार के लिए विभिन्न उपाय किए हैं जिनमें उच्चतर वित्तीयन संस्थानों के साथ एकीकरण सक्षम करने के आलोक में प्राथमिक कृषि क्रेडिट समितियों (पैक्स) एवं कृषि और ग्रामीण विकास बैंकों (एआरडीबी) का कंप्यूटरीकरण शामिल है।
सहकारी बैंकों की प्रौद्योगिकी अवसंरचना को उन्नत करने, ऋण प्रसंस्करण समय को कम करने और सेवा प्रदाय में वृद्धि के लिए भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) के अनुमोदन से ग्रामीण सहकारी बैंकों के लिए सहकार सारथी प्राइवेट लिमिटेड (एसएसपीएल) और शहरी सहकारी बैंकों के लिए नेशनल अर्बन कोऑपरेटिव फाइनेंस एंड डेवलपमेंट कॉरपोरेशन लिमिटेड (एनयूसीएफडीसी) की स्थापना की गई है । सहकार सारथी प्राइवेट लिमिटेड (एसएसपीएल) ने डिजी केसीसी, ई-केसीसी और सहकार सेतु सहित विभिन्न डिजिटल पहलों की शुरूआत की है जो ग्रामीण संस्थागत ऋण प्रदाय को सुविधाजनक और सुव्यवस्थित करने को लक्षित है ।
इसके अलावा, नाबार्ड से राज्य सहकारी बैंकों को पुनर्वित्त सहायता विभिन्न निधियों और योजनाओं के अधीन प्रदान की जाती है । अल्पकालिक सहकारी ग्रामीण ऋण (एसटीसीआरसी) निधि के अंतर्गत अल्पकालिक पुनर्वित्त प्रदान किया जाता है, जबकि अतिरिक्त मौसमी कृषि प्रचालन (एएसएओ) ऋण के माध्यम से कृषि क्षेत्र में ऋण प्रवाह में वृद्धि के लिए अतिरिक्त सहायता प्रदान की जाती है ।
कृषि क्षेत्र में दीर्घकालिक ऋणों के लिए रियायती पुनर्वित्त को दीर्घकालिक ग्रामीण ऋण निधि (एलटीआरसीएफ) के अधीन सहायता प्रदान की जाती है । आवश्यकतानुसार, अन्य दीर्घकालिक पुनर्वित्त उत्पादों के माध्यम से अतिरिक्त सहायता भी प्रदान की जाती है । मांग के आधार पर और लागू मानदंडों के अध्यधीन पुनर्वित्त प्रदान की जाती है ।
यह जानकारी केन्द्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री श्री अमित शाह ने लोकसभा में एक प्रश्न के लिखित उत्तर में दी।
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AK/AP
(रिलीज़ आईडी: 2244578)
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