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सहकारिता मंत्रालय
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सहकारी चीनी मिलें

प्रविष्टि तिथि: 24 MAR 2026 5:26PM by PIB Delhi

किसान सहकारी चीनी मिल्स लिमिटेड, सेमीखेड़ा (जनपद बरेली) जिसकी क्षमता 2750 टीसीडी है तथा किसान सहकारी चीनी मिल्स लिमिटेड, शेखुपुर (जनपद बदायूं) जिसकी क्षमता 1250 टीसीडी है, वर्तमान में संचालित एवं कार्यशील हैं।

उत्तर प्रदेश सरकार से प्राप्त जानकारी के अनुसार, उत्तर प्रदेश के सहकारी क्षेत्र में कुल 23 सहकारी चीनी मिलें संचालित हैं। सहकारी चीनी मिलों के ऑफ-सीजन मरम्मत एवं रखरखाव हेतु उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा ऋण के रूप में वित्तीय सहायता प्रदान की जाती है। वित्तीय वर्ष 2024–25 के दौरान इस उद्देश्य हेतु कुल ₹24.00 करोड़ की राशि उपलब्ध कराई गई, जिसमें से ₹125.00 लाख एवं ₹120.00 लाख क्रमशः सेमीखेड़ा एवं बदायूं चीनी मिलों को प्रदान किए गए। ऑफ-सीजन मरम्मत एवं रखरखाव कार्यों के उपरांत, दोनों मिलों ने पेराई सत्र 2025–26 के दौरान सफलतापूर्वक संचालन किया। बदायूं चीनी मिल ने 2025–26 के पेराई सत्र में कुल 10.46 लाख क्विंटल गन्ने की पेराई की तथा 9.56 प्रतिशत की चीनी रिकवरी प्राप्त की। इसके अतिरिक्त, बरेली जनपद के सेमीखेड़ा चीनी मिल के कमांड क्षेत्र में गन्ने की उपलब्धता को ध्यान में रखते हुए, उत्तर प्रदेश सरकार वर्तमान मिल की क्षमता 2750 टीसीडी से बढ़ाकर 3500 टीसीडी करने तथा नवीनतम तकनीक आधारित रिफाइंड शुगर उत्पादन हेतु रिफाइनरी सहित एक नई चीनी मिल स्थापित करने का प्रस्ताव रखती है।

सहकारिता मंत्रालय अथवा राष्ट्रीय सहकारी विकास निगम (NCDC), जो कि सहकारिता मंत्रालय के प्रशासनिक नियंत्रण में एक सांविधिक संगठन है, को इन मिलों हेतु किसी विशेष वित्तीय पैकेज के वित्तपोषण/प्रोत्साहन के लिए कोई प्रस्ताव प्राप्त नहीं हुआ है।

भारत सरकार द्वारा सहकारी चीनी मिलों के सुदृढ़ीकरणहेतु ₹1,000 करोड़ की कुल लागत वाली एक केंद्रीय क्षेत्रक योजना लागू की गई, जिसका उद्देश्य आधुनिकीकरण, विस्तार एवं एथेनॉल संबंधित गतिविधियों को बढ़ावा देना था। इस योजना के अंतर्गत 56 सहकारी चीनी मिलों को ₹10,000 करोड़ से अधिक की वित्तीय सहायता प्रदान की गई ।

इसके अतिरिक्त, सहकारी चीनी मिलों को आधुनिकीकरण, को-जनरेशन एवं एथेनॉल परियोजनाओं हेतु शुगर डेवलपमेंट फंड (SDF) के अंतर्गत पात्रता एवं व्यवहार्य प्रस्तावों के आधार पर वित्तीय सहायता उपलब्ध है। उपर्युक्त मिलों/जिलों से संबंधित कोई विशिष्ट प्रस्ताव SDF के अंतर्गत प्राप्त नहीं हुआ है, हालांकि उत्तर प्रदेश के अन्य जिलों की 4 मिलों ने SDF का लाभ प्राप्त किया है।

राष्ट्रीय सहकारी विकास निगम (NCDC) विभिन्न अधिसूचित वस्तुओं एवं सेवाओं के अंतर्गत सहकारी विकास के लिए वित्तीय सहायता प्रदान करता है, जिसमें कृषि एवं संबद्ध अवसंरचना, वैल्यू चेन विकास तथा सहकारी संस्थाओं की क्षमता निर्माण शामिल है। 25.02.2026 तक, NCDC द्वारा देशभर में सहकारी संस्थाओं के विकास हेतु कुल ₹5,16,122.32 करोड़ संवितरित किए गए हैं, जिनमें से ₹7,749.08 करोड़ उत्तर प्रदेश में संवितरित किए गए हैं।

NCDC युवा-प्रेरित सहकारी समितियों सहित कृषि-प्रसंस्करण एवं फूड प्रोसेसिंग इकाइयों की स्थापना हेतु वित्तीय सहायता प्रदान करने वाली योजनाएं भी संचालित करता है। “10,000 एफपीओ के गठन एवं प्रोत्साहनहेतु केंद्रीय क्षेत्रक योजना के अंतर्गत, NCDC एफपीओ सहकारी समितियों को क्रेडिट गारंटी योजना (CGSFPO) के तहत बिना जमानत वित्तीय सहायता प्रदान करती है।

हालांकि, उक्त क्षेत्र के किसी भी ब्लॉक को सहकारी क्षेत्र में FPO के प्रोत्साहन हेतु NCDC को आवंटित नहीं किया गया है।

उत्तर प्रदेश सरकार से प्राप्त जानकारी के अनुसार, राज्य में डेयरी, एफपीओ एवं मत्स्य सहकारी समितियों सहित विभिन्न क्षेत्रों में सहकारी विकास का व्यापक विस्तार है। बरेली जिले में लगभग 203 इकाइयां (15 डेयरी, 182 एफपीओ एवं 6 मत्स्य सहकारी समितियां) तथा बदायूं जिले में लगभग 127 इकाइयां (10 डेयरी, 112 एफपीओ एवं 5 मत्स्य सहकारी समितियां) कार्यरत हैं, जो किसानों के लिए मूल्य संवर्धन एवं बेहतर विपणन संबंध स्थापित करने में सहायक हैं।

भारतीय किसान उर्वरक सहकारी लिमिटेड (IFFCO) सहित अन्य सहकारी संस्थाएं अपने स्वीकृत उपविधियों के अनुसार वाणिज्यिक सिद्धांतों पर कर्मचारियों की नियुक्ति करती हैं। सहकारी समितियां संबंधित राज्य अधिनियम अथवा बहु-राज्य सहकारी समिति अधिनियम, 2002 के अंतर्गत संचालित होती हैं।

वर्तमान में बदायूं के जरी-जरदोजी कारीगरों को विशेष रूप से ब्याज-मुक्त ऋण प्रदान करने हेतु कोई विशिष्ट योजना उपलब्ध नहीं है।

हालांकि, NCDC अपनी विभिन्न योजनाओं के अंतर्गत सहकारी समितियों के माध्यम से उद्यमिता को बढ़ावा देने हेतु वित्तीय सहायता प्रदान करता है, जिसमें कारीगर आधारित गतिविधियां भी शामिल हैं। जरी-जरदोजी जैसे पारंपरिक शिल्प से जुड़े कारीगर सहकारी समितियों का गठन कर कार्यशील पूंजी, अवसंरचना एवं विपणन सहायता के लिए पात्रता एवं व्यवहार्यता के आधार पर वित्तीय सहायता प्राप्त कर सकते हैं।

यह जानकारी केन्द्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री श्री अमित शाह ने लोकसभा में एक प्रश्न के लिखित उत्तर में दी।

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AK/AP


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