स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय
“स्वस्थ नारी, सशक्त परिवार” की परिकल्पना को आगे बढ़ाने के लिए उठाए गए कदम
सामुदायिक भागीदारी और निवारक देखभाल के ज़रिए स्वस्थ नारी सशक्त परिवार अभियान महिलाओं और बच्चों के स्वास्थ्य को सशक्त बनाता है
सरकार एसएनएसपीए अभियान और विस्तारित प्राथमिक स्वास्थ्य सेवाओं के ज़रिए महिलाओं के स्वास्थ्य और परिवार के कल्याण को बढ़ावा दे रही है
आयुष्मान आरोग्य मंदिर एसएनएसपीए ढांचे के तहत निवारक, प्रोत्साहक और समुदाय-आधारित स्वास्थ्य देखभाल को बढ़ावा दे रहे हैं
सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में 1.2 करोड़ किशोरियों को लक्षित करते हुए राष्ट्रव्यापी एचपीवी टीकाकरण अभियान शुरू किया गया
प्रविष्टि तिथि:
24 MAR 2026 4:38PM by PIB Delhi
“स्वस्थ नारी, सशक्त परिवार अभियान (एसएनएसपीए)” को आयोजित करने का उद्देश्य जन भागीदारी के ज़रिए स्वास्थ्य सेवाओं की पहुँच, गुणवत्तापूर्ण देखभाल और जागरूकता बढ़ाने पर ज़ोर देते हुए पूरे भारत में महिलाओं और बच्चों के लिए स्वास्थ्य सेवाओं को सुदृढ़ करना था।
राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (एनएचएम) के तहत, भारत सरकार ने अभियान के दौरान हासिल की गई सामुदायिक भागीदारी और व्यवहार परिवर्तन को बनाए रखने के लिए एक सतत्, संस्थागत ढाँचे के रूप में कई उपाय लागू किए हैं, जिससे “स्वस्थ नारी, सशक्त परिवार” की परिकल्पना को और आगे बढ़ाया जा सके।
आयुष्मान आरोग्य मंदिरों (एएएम) ने राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों को ऐसी प्रणाली विकसित करने में सक्षम बनाया है, जिससे समुदायों को सेवाओं का एक व्यापक पैकेज प्रदान किया जा सके और इनमें एएएम में नियमित स्क्रीनिंग और सामुदायिक स्तर पर आउटरीच शिविर शामिल हैं। बीमारियों के प्रबंधन के अलावा, स्वास्थ्य संवर्धन और रोकथाम व्यापक प्राथमिक स्वास्थ्य देखभाल का अभिन्न अंग है, जिसमें मैराथन, योग, ध्यान आदि जैसी शारीरिक गतिविधियाँ भी शामिल हैं। इसके अलावा, आयुष्मान आरोग्य मंदिर में हर साल 42 स्वास्थ्य कैलेंडर दिवस और प्रति माह दस स्वास्थ्य सत्र मनाए जाते हैं, जहाँ समुदाय के कल्याण के मद्देनज़र स्वास्थ्य संबंधी वार्ता, स्वस्थ आहार और जीवनशैली के लिए परामर्श, मादक द्रव्यों के सेवन पर परामर्श और निवारण गतिविधियाँ आदि जैसी विभिन्न गतिविधियाँ आयोजित की जाती हैं।
यह व्यापक नज़रिया रोकथाम पर ज्यादा बल देता है, गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाओं के ज़रिए सुरक्षा सुनिश्चित करता है और सबसे कमजोर आबादी को प्राथमिकता देकर समानता को बढ़ावा देता है, जिससे स्वस्थ महिलाओं, सशक्त परिवारों और मजबूत समुदायों के दृष्टिकोण को साकार किया जा सके।
देशव्यापी निःशुल्क एचपीवी टीकाकरण अभियान 28 फरवरी 2026 को शुरू किया गया था, जिसका लक्ष्य सभी 36 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में 14 वर्ष की आयु की लगभग 1.2 करोड़ पात्र लाभार्थी किशोरियों को शामिल करना था।
निम्नलिखित श्रेणियों की लड़कियों को एचपीवी टीकाकरण से बाहर रखा गया है:
- मध्यम या गंभीर रूप से बीमार लड़कियों को ठीक होने तक एचपीवी टीका नहीं लगाया जाना चाहिए
- जिन लड़कियों को पहले के टीकाकरण से एलर्जी की प्रतिक्रिया हुई हो या जिन्हें यीस्ट से एलर्जी हो, उन्हें टीका नहीं लगवाना चाहिए
- गर्भावस्था
- लक्षित आयु वर्ग से बाहर की लड़कियां
- जिन लड़कियों को पहले से टीका लगाया गया है: जिन लड़कियों को पहले से कोई भी एचपीवी टीका (गार्डासिल/गार्डासिल-9/सर्वरिक्स/सर्वावैक - एक या अधिक खुराक) लग चुका है, उनकी टीकाकरण स्थिति को यू-विन पोर्टल पर अपडेट किया जाना चाहिए।
अनुमोदित एचपीवी टीकों की प्रभावकारिता का विवरण उत्पाद विशेषताओं के सारांश (एसएमपीसी) में प्रकाशित किया जाता है, जो सीडीएससीओ की वेबसाइट पर सार्वजनिक रूप से उपलब्ध है।
केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण राज्य मंत्री श्रीमती अनुप्रिया पटेल ने आज राज्यसभा में एक लिखित उत्तर में यह बात कही।
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पीके/केसी/एनएस
(रिलीज़ आईडी: 2244589)
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