• Sitemap
  • Advance Search
गृह मंत्रालय
azadi ka amrit mahotsav

साइबर अपराध से प्राप्त धनराशि का मनी लॉन्ड्रिंग नेटवर्क से संबंध

प्रविष्टि तिथि: 24 MAR 2026 4:20PM by PIB Delhi

प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) के अनुसार, दिनांक 28.02.2026 तक, निदेशालय ने धन-शोधन निवारण अधिनियम, 2002 (पीएमएलए) के प्रावधानों के तहत जांच के लिए साइबर अपराध से संबंधित लगभग 257 मामले लिए हैं, जिसके परिणामस्वरूप 35,925.58 करोड़ रुपये की अपराधजनित आय (पीओसी) की पहचान हुई है। साइबर अपराधों से प्राप्त आय से संबंधित आकंडों का राज्य-वार ब्यौरा ईडी द्वारा नहीं रखा जाता है।

संबंधित नोडल अधिकारियों के माध्यम से प्रवर्तन निदेशालय और अन्य विधि प्रवर्तन एजेंसियों (एलईए) के बीच जानकारी साझा करने/प्रसारित करने के लिए एक स्थापित तंत्र मौजूद है। इस तंत्र के तहत, ईडी और एलईए साइबर अपराध से संबंधित मामलों सहित जानकारी को साझा करते हैं। इसके अलावा, जब भी, पीएमएलए के तहत जांच के दौरान संबंधित एजेंसी से जुड़ा कोई उल्लंघन देखा जाता है, तो निदेशालय पीएमएलए की धारा 66 (2) के तहत अन्य एजेंसियों के साथ जानकारी को साझा करता है।

ईडी, गृह मंत्रालय (एमएचए) के तहत भारतीय साइबर अपराध समन्वय केंद्र (आईसी) द्वारा संचालित सहयोग, समन्वय और साइबर पुलिस पोर्टल का भी उपयोग कर रहा है। इसके अलावा, निदेशालय साइबर अपराधों से संबंधित विभिन्न राज्य पुलिस द्वारा दर्ज की गई एफआईआर तक पहुंचने के लिए इंटर- ऑपरेबल क्रिमिनल जस्टिस सिस्टम (आईसीजेएस) पोर्टल का भी उपयोग करता है।

भारत के संविधान की सातवीं अनुसूची के अनुसार, 'पुलिस' और 'लोक व्यवस्था' राज्य के विषय हैं। राज्य/संघ राज्य क्षेत्र अपनी विधि प्रवर्तन एजेंसियों (एलईए) के माध्यम से साइबर धोखाधड़ी समेत अपराधों की रोकथाम करने, उनका पता लगाने, जाँच करने, शिकायत दर्ज करने, वसूली संबंधी कार्रवाई करने, पीड़ितों की सहायता प्रणालियों, अभियोजन चलाने के लिए प्राथमिक रूप से जिम्मेदार हैं। केंद्र सरकार, राज्यों/संघ राज्य क्षेत्रों की विधि प्रवर्तन एजेंसियों (एलईए) के क्षमता संवर्धन के लिए उनके द्वारा किए जा रहे प्रयासों में एडवाइजरी और विभिन्न स्कीमों के अंतर्गत वित्तीय सहायता के माध्यम से सहायता प्रदान करती है।

केंद्र सरकार ने डिजिटल और ऑनलाइन धोखाधड़ी नेटवर्क के माध्यम से गबन की गई निधि का पता लगाने और उसकी वसूली सहित साइबर अपराधों से व्यापक और समन्वित ढंग से निपटने हेतु तंत्र को सुदृढ़ बनाने के लिए उपाय किए हैं, जिनमें अन्य बातों के साथ-साथ निम्नलिखित शामिल हैं:

  1. गृह मंत्रालय ने देश में सभी प्रकार के साइबर अपराधों से समन्वित और व्यापक ढंग से निपटने के लिए एक संबद्ध कार्यालय के रूप में 'भारतीय साइबर अपराध समन्वय केंद्र' (आईसी) स्थापित किया है।
  2. महिलाओं और बच्चों के प्रति साइबर अपराधों पर विशेष बल देते हुए, सभी प्रकार के साइबर अपराधों से संबंधित घटनाओं की सूचना देने में जनता को समर्थ बनाने हेतु आई4सी के भाग के रूप में 'राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल' (एनसीआरपी) (https://cybercrime.gov.in) शुरू किया गया है।
  3. राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल पर सूचित की गई साइबर अपराध की घटनाओं, उन्हें एफआईआर में बदलने और उन पर आगे की कार्रवाई यानी आरोप पत्र दाखिल करना, गिरफ्तारी और शिकायतों के समाधान से जुड़े कार्य राज्य/संघ राज्य क्षेत्र की संबंधित विधि प्रवर्तन एजेंसियों द्वारा कानून के प्रावधानों के अनुसार किए जाते हैं।
  4. वित्तीय धोखाधड़ियों की तत्काल सूचना देने और धोखाधड़ी करने वालों के द्वारा निधियों की चोरी को रोकने के लिए वर्ष 2021 में आई4सी के तहत 'नागरिक वित्तीय साइबर धोखाधड़ी रिपोर्टिंग और प्रबंधन प्रणाली' (सीएफसीएफआरएमएस) शुरू की गई है। आई 4 सी द्वारा संचालित सीएफसीएफआरएमएस के अनुसार, दिनांक 31.01.2026 तक, 24.65 लाख से अधिक शिकायतों में 8,690 करोड़ रुपये से अधिक की राशि को बचाया गया है। साइबर शिकायतों को ऑनलाइन दर्ज करने में सहायता प्राप्त करने के लिए एक टोल-फ्री हेल्पलाइन नम्बर '1930' शुरू किया गया है।
  5. आई4सी में एक अत्याधुनिक साइबर धोखाधड़ी शमन केंद्र (सीएफएमसी) स्थापित किया गया है, जहां प्रमुख बैंकों, वित्तीय मध्यस्थों, भुगतान एग्रीगेटर्स, दूरसंचार सेवा प्रदाताओं, आईटी मध्यस्थों के प्रतिनिधि और राज्यों/संघ राज्य क्षेत्रों की विधि प्रवर्तन एजेंसियों के प्रतिनिधि साइबर अपराध से निपटने के लिए तत्काल कार्रवाई और निर्बाध सहयोग के लिए साथ मिलकर काम कर रहे हैं।
  6. बैंकों/वित्तीय संस्थाओं के सहयोग से आई4सी द्वारा दिनांक 10.09.2024 को साइबर अपराधियों की पहचान की एक संदिग्ध रजिस्ट्री शुरू की गई है। दिनांक 31.01.2026 तक, बैंकों से प्राप्त 23.05 लाख से अधिक संदिग्ध पहचानकर्ता डेटा और 27.37 लाख लेयर 1 म्युल खातों को संदिग्ध रजिस्ट्री की भाग लेने वाली संस्थाओं के साथ साझा किया गया है और 9518.91 करोड़ रुपये के लेनदेन को रोका गया।
  7. समन्वय प्लेटफॉर्म को प्रचालनात्मक बनाया गया है जो साइबर अपराध संबंधी डेटा के आदान-प्रदान और विश्लेषण के लिए विधि प्रवर्तन एजेंसियों (एलईए) हेतु प्रबंधन सूचना प्रणाली (एमआईएस) प्लेटफॉर्म, डेटा भंडार और समन्वय प्लेटफॉर्म के रूप में कार्य करता है। यह विभिन्न राज्यों/संघ राज्य क्षेत्रों में साइबर अपराध की शिकायतों में शामिल अपराधों और अपराधियों के अंतर्राज्यीय संबंधों पर आधारित विश्लेषण प्रदान करता है। मॉड्यूल 'प्रतिबिंब' अपराधियों और अपराध संबंधी अवसंरचना के स्थानों को मानचित्र पर प्रदर्शित करता है, ताकि क्षेत्राधिकारियों को इसकी जानकारी मिल सके। यह मॉड्यूल विधि प्रवर्तन एजेंसियों द्वारा आई 4 सी और अन्य एसएमई (SMEs) से तकनीकी-कानूनी सहायता मांगने तथा प्राप्त करने की सुविधा भी प्रदान करता है। इससे 21,857 से अधिक आरोपियों की गिरफ्तारी और 1,49,636 से अधिक साइबर जांच सहायता अनुरोध प्राप्त हुए हैं।
  8. केंद्र सरकार द्वारा 2 जनवरी 2026 को एक व्यापक मानक संचालन प्रक्रिया (एसओपी) जारी की गई है। यह राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल (एनसीआरपी) और नागरिक वित्तीय साइबर धोखाधड़ी रिपोर्टिंग और प्रबंधन प्रणाली (सीएफसीएफआरएमएस) के माध्यम से शिकायतों के निपटान के लिए एक समान, पीड़ित-केंद्रित ढांचा प्रदान करती है। एनसीआरपी-सीएफसीएफआरएमएस के लिए मानक संचालन प्रक्रिया (एसओपी) में विशेष रूप से राज्यों और संघ राज्य क्षेत्रों, जिनकी पुलिस एजेंसियां इस प्रणाली में अभिन्न हितधारक (स्टेकहोल्डर) हैं, के साथ सहयोग बढ़ाने के लिए एक समर्पित समन्वय तंत्र की रूपरेखा तैयार की गई है।

यह जानकारी गृह राज्य मंत्री श्री बंडी संजय कुमार ने लोकसभा में एक प्रश्न के लिखित उत्तर में दी।

******

पीके/ केसी/ केजे


(रिलीज़ आईडी: 2244708) आगंतुक पटल : 40
इस विज्ञप्ति को इन भाषाओं में पढ़ें: English , Urdu
National Portal Of India
STQC Certificate