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मत्स्यपालन, पशुपालन और डेयरी मंत्रालय
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वाणिज्य और उद्योग मंत्रालय के सहयोग से मत्स्य पालन विभाग ने आंध्र प्रदेश के विशाखापत्तनम में सीफ़ूड निर्यात पर राष्ट्रीय कार्यशाला का आयोजन किया


आंध्र प्रदेश के माननीय मुख्यमंत्री, माननीय वाणिज्य और  उद्योग मंत्री, माननीय मत्स्य पालन, पशुपालन और डेयरी मंत्री, माननीय खाद्य प्रसंस्करण उद्योग मंत्री और माननीय नागरिक उड्डयन मंत्री की गरिमामयी उपस्थिति में

भारत के सीफ़ूड निर्यात पारिस्थितिकी तंत्र सुदृढ़ करने के लिए व्यापक रूपरेखा तैयार करना

प्रविष्टि तिथि: 05 JUN 2026 7:29PM by PIB Delhi

आंध्र प्रदेश के विशाखापत्तनम में 5 और 6 जून 2026 को समुद्री खाद्य निर्यात (सीफ़ूड एक्सपोर्ट) पर एक राष्ट्रीय कार्यशाला आयोजित की गई। इसे मत्स्य पालन विभाग (मत्स्य पालन, पशुपालन और डेयरी मंत्रालय) ने वाणिज्य और उद्योग मंत्रालय के सहयोग से तथा आंध्र प्रदेश सरकार की सहायता से आयोजित किया था। इसका उद्देश्य अलग-अलग राज्यों और इस क्षेत्र से जुड़े लोगों के बीच भारत के सीफ़ूड एक्सपोर्ट परितंत्र को मज़बूत करने के लिए व्यापक रूपरेखा तैयार करना था। इस कार्यक्रम में आंध्र प्रदेश के माननीय मुख्यमंत्री श्री नारा चंद्रबाबू नायडू, वाणिज्य और उद्योग मंत्री श्री पीयूष गोयल, मत्स्य पालन, पशुपालन और डेयरी तथा पंचायती राज मंत्री श्री राजीव रंजन सिंह, नागरिक उड्डयन मंत्री श्री किंजरापु राममोहन नायडू और खाद्य प्रसंस्करण उद्योग मंत्री श्री चिराग पासवान शामिल हुए।

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इस कार्यशाला में केंद्र सरकार के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ ही राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के प्रतिनिधि भी शामिल हुए। इस कार्यशाला में समुद्री उत्पाद निर्यात विकास प्राधिकरण (एमपीडीईए), निर्यात निरीक्षण परिषद (ईआईसी), भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण (एफएसएसएआई), भारतीय मानक ब्यूरो (बीआईएस), राष्ट्रीय मत्स्य विकास बोर्ड (एनएफडीबी), नाबार्ड, एनसीडीसी, एनसीईएल, एसएफएसी, नाफेड और इन्वेस्ट इंडिया जैसे प्रमुख राष्ट्रीय संस्थानों ने भी भाग लिया। कार्यशाला में सीफ़ूड निर्यातक, उद्योग संघ, प्रोसेसर, स्टार्ट-अप और अन्य मूल्य-श्रृंखला हितधारक भी उपस्थित थें, जिससे सीफ़ूड निर्यात पारिस्थितिकी तंत्र का व्यापक प्रतिनिधित्व सुनिश्चित हुआ।

आंध्र प्रदेश के माननीय मुख्यमंत्री श्री नारा चंद्रबाबू नायडू ने इस बात पर जोर दिया कि नीली अर्थव्यवस्था (ब्लू इकोनॉमी) भविष्य की आर्थिक वृद्धि का मुख्य आधार होगी, जिसमें मत्स्य पालन क्षेत्र परिवर्तनकारी भूमिका निभाएगा। उन्होंने मत्स्य उत्पादन और निर्यात क्षेत्र में आंध्र प्रदेश की अग्रणी भूमिका के बारे में बताया और भरोसा जताया कि भारत मूल्य संवर्धन, नवाचार और मजबूत निर्यात पारिस्थितिकी तंत्र के माध्यम से वैश्विक बाजार में अपनी हिस्सेदारी को काफी हद तक बढ़ा सकता है। उन्होंने गुणवत्ता, दीर्घकालिकता, पता लगाने की क्षमता (ट्रेसिबिलिटी) और चक्रीय अर्थव्यवस्था तरीको पर बल देते हुए विश्व स्तर पर प्रतिस्पर्धी और विश्वसनीय भारतीय सीफ़ूड ब्रांड बनाने के लिए सभी हितधारकों को शामिल करते हुए एक सहयोगात्मक दृष्टिकोण अपनाने का आह्वान किया। इसके साथ ही उन्होंने निवेश, बुनियादी ढांचे और मजबूत जलकृषि (एक्वाकल्चर)  पारिस्थितिकी तंत्र को बढ़ावा देने के लिए राज्य की ओर से पूरा सहयोग देने का आश्वासन दिया।

भारत सरकार में वाणिज्य और उद्योग मंत्री श्री पीयूष गोयल ने भारत के मत्स्य एवं जलीय संसाधनों की क्षमता का पूरी तरह से उपयोग करने के लिए नवाचार करने और उन्नत प्रौद्योगिकियों को अपनाने की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने गुणवत्ता, दीर्घकालिकता, ट्रेसिबिलिटी और मूल्य संवर्धन के लिए विश्व स्तर पर विश्वसनीय सीफ़ूड ब्रांड के रूप में भारत को स्थापित करने के सरकार के दृष्टिकोण की चर्चा करते हुए कहा कि वैश्विक बाजारों में प्रतिस्पर्धात्मकता बढ़ाने के लिए सामूहिक प्रयास महत्वपूर्ण हैं। उन्होंने कहा कि निर्यात बुनियादी ढांचे को मजबूत करना प्राथमिकता होगी। इसमें विशाखापत्तनम और अन्य प्रमुख केंद्रों जैसे प्रमुख स्थानों पर क्वारंटीन और संबद्ध सुविधाओं की स्थापना पर विचार करना शामिल है, ताकि निर्बाध व्यापार हो सके और अंतर्राष्ट्रीय मानकों का अनुपालन सुनिश्चित किया जा सके।

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मत्स्य पालन, पशुपालन तथा डेयरी और पंचायती राज मंत्री, श्री राजीव रंजन सिंह ने कहा कि मत्स्य पालन क्षेत्र में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। पिछले दशक में उत्पादन और निर्यात दोगुने से भी अधिक बढ़कर क्रमशः 168 लाख टन और 73,000 करोड़ रूपए से अधिक हो गए हैं। उन्होंने कहा कि हालांकि उत्पादन में अंतर्देशीय मत्स्य पालन का बड़ा हिस्सा है, लेकिन निर्यात में इसकी कम हिस्सेदारी से एक बड़ा अवसर उपलब्ध होता है और उन्होंने निर्देश दिया कि अंतर्देशीय राज्यों से निर्यात को बढ़ावा देने के लिए एक मानकीकृत एसओपी विकसित किया जाए। मंत्री ने टीईडी, समुद्री स्तनधारियों की तुलनात्मकता और ईईजेड तथा अधिक समुद्र विनियमों सहित दीर्घकालिकता पहलों पर जोर दिया और निर्यात केंद्रीत विकास के लिए द्वीप क्षेत्रों और ईईजेड एक्सेस पास पर निरंतर ध्यान देने को कहा।

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उन्होंने घोषणा की कि प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना (पीएमएमएसवाई) के तहत, भारत सरकार ने आंध्र प्रदेश के काकीनाडा में 43.45 करोड़ रुपये की केंद्रीय सहायता के साथ, 72.42 करोड़ रुपये के परिव्यय से एक स्मार्ट और एकीकृत मछली पकड़ने का बंदरगाह विकसित करने को मंजूरी दी है, जिसमें दक्षता और सेवा आपूर्ति बढ़ाने के लिए आधुनिक बुनियादी ढांचे और स्मार्ट प्रौद्योगिकियों को शामिल किया गया है। बंदरगाह के पूरा होने पर, यह लगभग 423 जहाजों के लिए बर्थिंग सुविधाएं प्रदान करेगा, लगभग 74,448 टन के वार्षिक लैंडिंग का कार्य संभालेगा और लगभग 12,345 लोगों के लिए रोजगार सृजित करेगा, जिससे राज्य में मत्स्य पालन क्षेत्र के समग्र विकास में महत्वपूर्ण योगदान मिलेगा। उन्होंने कहा कि पीएमएमएसवाई का दूसरा चरण निर्यात-केंद्रीत विकास के अनुरूप है और निर्यात बुनियादी ढांचे को मजबूत करने की आवश्यकता पर जोर दिया।

माननीय नागरिक उड्डयन मंत्री श्री किंजरापु राममोहन नायडू ने सीफ़ूड निर्यात सुदृढ़ करने के लिए संपूर्ण-सरकार दृष्टिकोण पर जोर देते हुए कहा कि इसमें कुशल लॉजिस्टिक्स, कार्गो बुनियादी ढांचे और वैश्विक कनेक्टिविटी की महत्वपूर्ण भूमिका है। उन्होंने चुनौतियों का सामना करने के लिए हितधारकों की सराहना की तथा गुणवत्ता और सुरक्षा के उच्च मानकों को कायम रखते हुए वैश्विक बाजारों में सीफ़ूड उत्पादों की समय पर और किफायती आपूर्ति सुनिश्चित करने की आवश्यकता पर जोर दिया। मंत्री ने हवाई माल ढुलाई नेटवर्क को मजबूत करने, समर्पित कार्गो हब विकसित करने, मल्टीमॉडल लॉजिस्टिक्स में सुधार करने, ट्रांसशिपमेंट प्रक्रियाओं को सुव्यवस्थित करने और "एक हवाई अड्डा, एक उत्पाद" जैसी पहलों को बढ़ावा देने के चल रहे प्रयासों के बारे में बताया, जिसका उद्देश्य समय और लागत को कम करना तथा निर्यात प्रतिस्पर्धात्मकता को बढ़ाना है।

भारत सरकार में खाद्य प्रसंस्करण उद्योग मंत्री श्री चिराग पासवान ने चुनौतियों के बावजूद सतत् विकास करने में हितधारकों के प्रयासों की सराहना करते हुए कहा कि सीफ़ूड निर्यात भारत और संपूर्ण मत्स्य पालन मूल्य श्रृंखला के लिए महत्वपूर्ण है। उन्होंने घरेलू बाजारों के साथ ही वैश्विक बाजारों के विकास और मूल्य संवर्धन पर जोर देते हुए "मात्रा से मूल्य" और "उत्पादन से उत्पाद" की ओर बढ़ने की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने मत्स्य पालन क्षेत्र की विशाल अप्रयुक्त क्षमता को देखते हुए, रेडी-टू-ईट और रेडी-टू-कुक क्षेत्रों में अवसरों पर जोर दिया, जिनकी वैश्विक मांग बढ़ रही है। माननीय मंत्री ने खाद्य प्रसंस्करण पारिस्थितिकी तंत्र और मूल्य श्रृंखला को मजबूत करने, संसाधित खाद्य पदार्थों के बारे में गलत धारणाओं को दूर करने और भारतीय उत्पादों की वैश्विक छवि बेहतर बनाने के लिए गुणवत्ता और शुद्धता सुनिश्चित करने का आह्वान किया। उन्होंने शेल्फ लाइफ में सुधार लाने में प्रौद्योगिकी की भूमिका पर भी जोर दिया और भारत को वैश्विक खाद्य बास्केट के रूप में स्थापित करने के लिए उद्योग के हितधारकों की सक्रिय भागीदारी को प्रोत्साहित किया।

 मत्स्य पालन, पशुपालन और डेयरी मंत्रालय के मत्स्य पालन विभाग में सचिव (मत्स्य पालन) डॉ. अभिलक्ष लिखी ने कार्यशाला की रूपरेखा रखी और भारत के सीफ़ूड निर्यात पारिस्थितिकी तंत्र को मजबूत करने के लिए समन्वित संस्थागत कार्रवाई की आवश्यकता पर जोर दिया। उन्होंने बताया कि निरंतर अंतर-मंत्रालयी प्रयासों और हितधारकों की भागीदारी से भारत वैश्विक प्रतिकूल परिस्थितियों के बावजूद रिकॉर्ड निर्यात करने में सफल रहा है। उन्होंने विशेषरूप से अंतर्देशीय मत्स्य पालन के क्षेत्र में निर्यात आधारित दृष्टिकोण में संरचनात्मक कमियों की ओर ध्यान दिलाया और बुनियादी ढांचे, प्रमाणन प्रणालियों और बाजार तक पहुंचने के तरीकों में लक्षित निवेश की आवश्यकता पर जोर दिया। सचिव ने द्वीप पारिस्थितिकी तंत्र और अपतटीय (ऑफशोर) संसाधनों में उभरते अवसरों की भी चर्चा की और मूल्य प्राप्त करने और प्रतिस्पर्धात्मकता बढ़ाने के लिए पीएमएमएसवाई-II के तहत क्लस्टर-आधारित विकास, नवाचार और एमएसएमई भागीदारी की भूमिका पर जोर दिया।

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विचार-विमर्श के दौरान, हितधारकों ने मत्स्य पालन मूल्य श्रृंखला में चुनौतियों के बारे में बताया, जिसमें रोग प्रबंधन और रोग प्रतिरोधी ब्रूडस्टॉक की आवश्यकता, बढ़ती लागत, विशेष रूप से मछली के भोजन और गुणवत्ता वाले बीज और क्वारंटीन सुविधा केंद्रों तक सीमित पहुंच शामिल है। लॉजिस्टिक्स और बुनियादी ढांचे, विशेष रूप से बेहतर परिवहन, कोल्ड चेन, एयर कार्गो सहायता की कमियों और अंतर्देशीय क्षेत्रों के लिए उपग्रह प्रसंस्करण सुविधाओं की आवश्यकता पर चिंता जताई गई। निर्यात से संबंधित मुद्दों जैसे सख्त प्रमाणन आवश्यकताएं (विशेष रूप से यूरोपीय संघ के मानक), एंटीबायोटिक अनुपालन और ट्रेसिबिलिटी की आवश्यकता पर भी जोर दिया गया। हितधारकों ने नई तकनीकों को अपनाने, बाजारों के विविधीकरण, मूल्य वर्धित उत्पादों के विकास और कोल्डवाटर तथा ट्राउट जैसी अधिक-मूल्य वाली प्रजातियों के सेगमेंट को मजबूत करने के महत्व पर जोर दिया। इसके साथ ही, छोटी मछलियों (जुवेनाइल) को पकड़ने की समस्या से निपटने, टिकाऊ तरीकों को बढ़ावा देने और मजबूत घरेलू प्रसंस्करण तथा निर्यात-उन्मुख मूल्य श्रृंखलाओं का निर्माण करके कच्चे उत्पादों के निर्यात पर निर्भरता को कम करने के अनुरोध किए गए।

प्रधानमंत्री मत्स्य किसान समृद्धि सह-योजना (पीएमएमकेएसवाई), किसान क्रेडिट कार्ड (केसीसी) और अन्य पहलों के तहत भी लाभ संवितरित किए गए। श्री पारुपल्ली बसवंत चौधरी, कृष्णा, आंध्र प्रदेश, श्रीमती पुष्पलता न्यात्री, कृष्णा, आंध्र प्रदेश, श्रीमती पोलिसेट्टी देवी श्रीलक्ष्मी, पश्चिम गोदावरी, आंध्र प्रदेश, श्री इंति प्रेमानंदम, पश्चिम गोदावरी, आंध्र प्रदेश, श्री पोलिसेट्टी मुरली, पश्चिम गोदावरी, आंध्र प्रदेश को एक्वा बीमा दिया गया।

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खाद्य प्रसंस्करण उद्योग मंत्रालय के मत्स्य पालन विभाग, वाणिज्य विभाग, खाद्य प्रसंस्करण उद्योग मंत्रालय, सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम (एमएसएमई) मंत्रालय और निर्यात निरीक्षण परिषद ने सीफ़ूड निर्यात को बढ़ावा देने के लिए उठाए गए कदमों, संबंधित योजनाओं, नीतियों और भविष्य की रूपरेखा पर प्रस्तुति दी। इसमें निर्यात विकास, गुणवत्ता अनुपालन और मूल्य संवर्धन पर की गई पहलों के बारे में बताया गया। इसके बाद डीपीआईआईटी, सीफ़ूड एक्सपोर्टर्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया (एसईएआई), इंडियन फिशमील एंड फिश ऑयल एक्सपोर्टर्स एसोसिएशन (आईएफएएफईए) और इंडियन मरीन इंग्रीडिएंट्स एसोसिएशन (आईएमआईए) ने भारत के सीफ़ूड निर्यात पारिस्थितिकी तंत्र को मजबूत करने के लिए उद्योग के दृष्टिकोण, चुनौतियों और अवसरों के बारे में चर्चा की।

जैसे कि भारत ने सीफ़ूड निर्यात में 1 लाख करोड़ रूपए का लक्ष्य निर्धारित किया है, ऐसे में इस कार्यशाला से नवाचार, एकीकरण और वैश्विक नेतृत्व के नए दौर की शुरुआत हुई है। उम्मीद है कि इस कार्यशाला के परिणामों से भविष्य के लिए तैयार, प्रतिस्पर्धी और समावेशी सीफ़ूड निर्यात पारिस्थितिकी तंत्र को बढ़ावा मिलेगा, जिससे भारत वैश्विक बाजार में एक विश्वसनीय राष्ट्र के रूप में स्थापित होगा।

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पीके/केसी/एमके/डीके


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