• Sitemap
  • Advance Search
संस्‍कृति मंत्रालय
azadi ka amrit mahotsav

सांस्कृतिक सहयोग के प्रति नई प्रतिबद्धता के साथ वाराणसी में ब्रिक्स संस्कृति कार्य समूह की दूसरी बैठक संपन्न


विरासत, सहयोग और सतत विकास पर संवाद के माध्यम से ब्रिक्स देशों ने सांस्कृतिक साझेदारी को सुदृढ़ किया

प्रविष्टि तिथि: 05 JUN 2026 9:22PM by PIB Delhi

आज ब्रिक्स संस्कृति कार्य समूह की दूसरी बैठक के दूसरे दिन की कार्यवाही का शुभारंभ भारत सरकार के संस्कृति मंत्रालय के संयुक्त सचिव डॉ. अरविंद कुमार के उद्घाटन वक्तव्य के साथ हुआ। बैठक में पहले दिन आरंभ हुई सारगर्भित चर्चाओं को आगे बढ़ाते हुए विचार-विमर्श जारी रहा, जो सांस्कृतिक सहयोग को सुदृढ़ करने तथा सांस्कृतिक क्षेत्र में साझा प्राथमिकताओं को आगे बढ़ाने के प्रति ब्रिक्स सदस्य देशों की सामूहिक प्रतिबद्धता को दर्शाता है।

प्रथम परिचर्चा सत्र, सांस्कृतिक विरासत संरक्षण और सांस्कृतिक संपदा की वापसी हेतु संस्थागत रणनीतियां”, का संचालन इंदिरा गांधी राष्ट्रीय कला केंद्र (आईजीएनसीए) के डीन प्रोफेसर रमेश सी. गौर ने किया। इस सत्र ने सदस्य देशों को सांस्कृतिक संपदा के संरक्षण, परिरक्षण और प्रत्यावर्तन से संबंधित अनुभवों तथा सर्वोत्तम प्रथाओं के आदान-प्रदान का अवसर प्रदान किया। प्रतिभागियों ने सांस्कृतिक संपदा की वापसी से जुड़ी चुनौतियों के समाधान हेतु सहयोग को और सुदृढ़ करने की प्रतिबद्धता दोहराई तथा विरासत संरक्षण को साझा उत्तरदायित्व के रूप में रेखांकित किया। चर्चाओं में इस बात पर विशेष बल दिया गया कि सांस्कृतिक विरासत पहचान को सुदृढ़ करने, सामुदायिक अधिकारों की रक्षा करने तथा अंतर-सांस्कृतिक समझ को बढ़ावा देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।

इसके उपरांत आयोजित परिचर्चा सत्र, साझा विरासत के संरक्षण हेतु सहयोगात्मक दृष्टिकोण : यूनेस्को विश्व धरोहर अभिसमय, अमूर्त सांस्कृतिक विरासत तथा मेमोरी ऑफ द वर्ल्ड कार्यक्रम के अंतर्गत संयुक्त नामांकन”, का संचालन डॉ. अरविंद कुमार ने किया। इस सत्र में ब्रिक्स देशों के बीच संयुक्त नामांकन की संभावनाओं पर विचार-विमर्श किया गया। प्रतिनिधियों ने साझा मूर्त एवं अमूर्त सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण, मान्यता और पीढ़ी-दर-पीढ़ी हस्तांतरण को बढ़ावा देने के प्रभावी माध्यम के रूप में संयुक्त नामांकन की संभावनाओं पर चर्चा की। साथ ही, ब्रिक्स ढांचे के अंतर्गत अंतरराष्ट्रीय सहयोग को और सुदृढ़ करने पर भी बल दिया गया।

दिन के अंतिम परिचर्चा सत्र, सतत विकास के प्रेरक के रूप में संस्कृति : 2030 के बाद का एजेंडा”, का संचालन भारत सरकार की अतिरिक्त सचिव श्रीमती अमृता सरभाई ने किया। इस सत्र में संस्कृति को सतत विकास के सक्षमकर्ता और उत्प्रेरक के रूप में मिल रही बढ़ती मान्यता पर विचार किया गया। चर्चा के दौरान संस्कृति, सामाजिक समावेशन, पर्यावरणीय स्थिरता, आर्थिक लचीलापन तथा सामुदायिक कल्याण के बीच अंतर्संबंधों को रेखांकित किया गया। साथ ही, वर्ष 2030 के बाद उभरते वैश्विक विकास विमर्श में सांस्कृतिक आयामों को समाहित करने के संभावित मार्गों का भी अन्वेषण किया गया।

दिन के कार्यक्रम में काशी की समृद्ध सभ्यतागत एवं जीवंत सांस्कृतिक विरासत को प्रदर्शित करने वाला एक विशेष सांस्कृतिक कार्यक्रम भी आयोजित किया गया। प्रतिनिधियों ने गंगा आरती का अवलोकन किया, काशी विश्वनाथ कॉरिडोर का भ्रमण किया तथा लाइट एंड साउंड शो का आनंद लिया। इन गतिविधियों के माध्यम से उन्हें भारत की समृद्ध सांस्कृतिक परंपराओं और स्थायी विरासत का सजीव अनुभव प्राप्त हुआ। यह सांस्कृतिक कार्यक्रम विचार-विमर्श का उपयुक्त समापन सिद्ध हुआ और इसके साथ ही ब्रिक्स संस्कृति कार्य समूह की दूसरी बैठक सफलतापूर्वक संपन्न हुई। बैठक ने सांस्कृतिक सहयोग को सुदृढ़ करने तथा जन-से-जन संपर्क को और प्रगाढ़ बनाने के प्रति ब्रिक्स सदस्य देशों की साझा प्रतिबद्धता को पुनः पुष्ट किया।

******

पीके/केसी/एके


(रिलीज़ आईडी: 2269660) आगंतुक पटल : 293
इस विज्ञप्ति को इन भाषाओं में पढ़ें: English , Urdu